Ashtalakshmi Ashtottara Shatanamavali — अष्टलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री अष्टलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली ॥
ॐ श्रीमात्रे नमः ।
ॐ श्रीमहाराज्ञ्यै नमः ।
ॐ श्रीमत्सिंहासनेश्वर्यै नमः ।
ॐ श्रीमन्नारायणप्रीतायै नमः ।
ॐ स्निग्धायै नमः ।
ॐ श्रीमत्यै नमः ।
ॐ श्रीपतिप्रियायै नमः ।
ॐ क्षीरसागरसम्भूतायै नमः ।
ॐ नारायणहृदयालयायै नमः । ९
ॐ ऐरावणादिसम्पूज्यायै नमः ।
ॐ दिग्गजावां सहोदर्यै नमः ।
ॐ उच्छैश्रवः सहोद्भूतायै नमः ।
ॐ हस्तिनादप्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ साम्राज्यदायिन्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ गजलक्ष्मीस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ सुवर्णादिप्रदात्र्यै नमः ।
ॐ सुवर्णादिस्वरूपिण्यै नमः । १८
ॐ धनलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ महोदारायै नमः ।
ॐ प्रभूतैश्वर्यदायिन्यै नमः ।
ॐ नवधान्यस्वरूपायै नमः ।
ॐ लतापादपरूपिण्यै नमः ।
ॐ मूलिकादिमहारूपायै नमः ।
ॐ धान्यलक्ष्मी महाभिदायै नमः ।
ॐ पशुसम्पत्स्वरूपायै नमः ।
ॐ धनधान्यविवर्धिन्यै नमः । २७
ॐ मात्सर्यनाशिन्यै नमः ।
ॐ क्रोधभीतिविनाशिन्यै नमः ।
ॐ भेदबुद्धिहरायै नमः ।
ॐ सौम्यायै नमः ।
ॐ विनयादिकवर्धिन्यै नमः ।
ॐ विनयादिप्रदायै नमः ।
ॐ धीरायै नमः ।
ॐ विनीतार्चानुतोषिण्यै नमः ।
ॐ धैर्यप्रदायै नमः । ३६
ॐ धैर्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ धीरत्वगुणवर्धिन्यै नमः ।
ॐ पुत्रपौत्रप्रदायै नमः ।
ॐ स्निग्धायै नमः ।
ॐ भृत्यादिकविवर्धिन्यै नमः ।
ॐ दाम्पत्यदायिन्यै नमः ।
ॐ पूर्णायै नमः ।
ॐ पतिपत्नीसुताकृत्यै नमः ।
ॐ बहुबान्धव्यदायिन्यै नमः । ४५
ॐ सन्तानलक्ष्मीरूपायै नमः ।
ॐ मनोविकासदात्र्यै नमः ।
ॐ बुद्धेरैकाग्र्यदायिन्यै नमः ।
ॐ विद्याकौशलसन्धात्र्यै नमः ।
ॐ नानाविज्ञानवर्धिन्यै नमः ।
ॐ बुद्धिशुद्धिप्रदात्र्यै नमः ।
ॐ महादेव्यै नमः ।
ॐ सर्वसम्पूज्यतादात्र्यै नमः ।
ॐ विद्यामङ्गलदायिन्यै नमः । ५४
ॐ भोगविद्याप्रदात्र्यै नमः ।
ॐ योगविद्याप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ बहिरन्तः समाराध्यायै नमः ।
ॐ ज्ञानविद्यासुदायिन्यै नमः ।
ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ विद्यागौरवदायिन्यै नमः ।
ॐ विद्यानामाकृत्यै शुभायै नमः ।
ॐ सौभाग्यभाग्यदायै नमः ।
ॐ भाग्यभोगविधायिन्यै नमः । ६३
ॐ प्रसन्नायै नमः ।
ॐ परमायै नमः ।
ॐ आराध्यायै नमः ।
ॐ सौशील्यगुणवर्धिन्यै नमः ।
ॐ वरसन्तानप्रदायै नमः ।
ॐ पुण्यायै नमः ।
ॐ सन्तानवरदायिन्यै नमः ।
ॐ जगत्कुटुम्बिन्यै नमः ।
ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः । ७२
ॐ वरसौभाग्यदायिन्यै नमः ।
ॐ वरलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ भक्तरक्षणतत्परायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिस्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रादायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ सर्वपूज्यायै नमः ।
ॐ सर्वलोकप्रपूजितायै नमः ।
ॐ दाक्षिण्यपरवशायै नमः । ८१
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ कृपापूर्णायै नमः ।
ॐ दयानिधये नमः ।
ॐ सर्वलोकसमर्च्यायै नमः ।
ॐ सर्वलोकेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ सर्वौन्नत्यप्रदायै नमः ।
ॐ श्रिये नमः ।
ॐ सर्वत्रविजयङ्कर्यै नमः ।
ॐ सर्वश्रियै नमः । ९०
ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ शुभावहायै नमः ।
ॐ सर्वलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अष्टलक्ष्मीस्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वदिक्पालपूजितायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यदुःखहन्त्र्यै नमः ।
ॐ सम्पदां समृद्ध्यै नमः ।
ॐ अष्टलक्ष्मीसमाहारायै नमः ।
ॐ भक्तानुग्रहकारिण्यै नमः । ९९
ॐ पद्मालयायै नमः ।
ॐ पादपद्मायै नमः ।
ॐ करपद्मायै नमः ।
ॐ मुखाम्बुजायै नमः ।
ॐ पद्मेक्षणायै नमः ।
ॐ पद्मगन्धायै नमः ।
ॐ पद्मनाभहृदीश्वर्यै नमः ।
ॐ पद्मासनस्यजनन्यै नमः ।
ॐ हृदम्बुजविकासन्यै नमः । १०८
॥ इति श्री अष्टलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
अष्टलक्ष्मी के अष्ट स्वरूप
अष्टलक्ष्मी: सम्पूर्ण समृद्धि का आधार
अष्टलक्ष्मी (Ashtalakshmi) का अर्थ है - लक्ष्मी के आठ रूप जो मिलकर जीवन को पूर्णता देते हैं। अक्सर लोग लक्ष्मी जी को केवल 'पैसे' से जोड़ते हैं, लेकिन हमारे ऋषियों ने समझाया कि धन 8 प्रकार के होते हैं।
यदि आपके पास अपार पैसा है (धनलक्ष्मी) लेकिन खाने के लिए अच्छा स्वास्थ्य और अन्न नहीं (धान्यलक्ष्मी), तो वह पैसा किस काम का? यदि पैसा है लेकिन संतान का सुख नहीं (सन्तानलक्ष्मी), या समाज में सम्मान नहीं (गजलक्ष्मी), तो जीवन अधूरा है।
अष्टलक्ष्मी उपासना इसी संतुलन को साधने की प्रक्रिया है। यह सुनिश्चित करती है कि आपके पास भौतिक सुखों के साथ-साथ आत्मिक शक्ति और ज्ञान भी हो।
विनियोग विवरण
| देवी | श्री अष्टलक्ष्मी (Collective Form of 8 Lakshmis) |
| समूह | नारायण शक्ति (Shakti of Narayana) |
| स्वरूप | समाहार (Integrated) |
| वस्त्र रंग | विभिन्न/सुनहरा (Varied/Gold) |
| मुख्य फल | अष्ट ऐश्वर्य (Eight types of Wealth - Health, Wealth, Wisdom, etc.) |
| बीज मंत्र | ॐ श्रीं नमः (Om Shreem Namah) |
नामावली पाठ के लाभ
अष्टलक्ष्मी की सामूहिक आराधना से सर्वांगीण विकास होता है:
- आर्थिक स्थिरता (Financial Stability): कर्ज से मुक्ति और स्थायी धन लाभ।
- पारिवारिक सुख (Family Harmony): संतान सुख और दाम्पत्य जीवन में मधुरता।
- शत्रु विजय (Victory): कोर्ट-कचहरी और विरोधियों पर जीत।
- आत्मविश्वास (Confidence): भय का नाश और आत्मबल में वृद्धि।
- ज्ञान और विवेक (Wisdom): सही निर्णय लेने की क्षमता।
पूजा और पाठ विधि
- श्रेष्ठ दिन: शुक्रवार (Friday) या दीपावली।
- दीपक: 8 दीपक (अष्टलक्ष्मी के प्रतीक) जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- नैवेद्य: दूध से बनी खीर और मिश्री।
- विशेष: 'श्री यन्त्र' (Sri Yantra) के सामने पाठ करने से इसका फल 100 गुना बढ़ जाता है।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अष्टलक्ष्मी कौन-कौन सी हैं?
अष्टलक्ष्मी माँ लक्ष्मी के 8 रूप हैं: (1) आदिलक्ष्मी, (2) धनलक्ष्मी, (3) धान्यलक्ष्मी, (4) गजलक्ष्मी, (5) सन्तानलक्ष्मी, (6) वीरलक्ष्मी (धैर्यलक्ष्मी), (7) विजयलक्ष्मी, और (8) विद्यालक्ष्मी।
2. इस पाठ का विशेष लाभ क्या है?
सिर्फ धन (Money) काफी नहीं है। यह पाठ 'सम्पूर्ण समृद्धि' (Holistic Prosperity) देता है - अच्छा स्वास्थ्य, बुद्धि, परिवार, साहस और मान-सम्मान। एक भी कमी जीवन को अधूरा बना देती है, और अष्टलक्ष्मी उस कमी को पूरा करती हैं।
3. शुक्रवार को अष्टलक्ष्मी पूजा कैसे करें?
शुक्रवार की शाम को 8 दीपक जलाएं (प्रत्येक रूप के लिए)। कलश स्थापना करें और अष्टलक्ष्मी का ध्यान करते हुए इस नामावली का पाठ करें। अंत में खीर का भोग लगाएँ।
4. क्या पुरुष और महिलाएँ दोनों यह पाठ कर सकते हैं?
जी हाँ, कोई भी गृहस्थ या साधक (स्त्री/पुरुष) अपने घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए यह पाठ कर सकता है।
5. इस नामावली में 'श्री' शब्द का महत्व क्या है?
'श्री' (Shree) लक्ष्मी का, शुभता का और समृद्धि का पर्यायवाची है। इस नामावली की शुरुआत ही 'ओं श्रीमात्रे नमः' से होती है, जो माँ को जगत-जननी के रूप में नमन है।
6. क्या अष्टलक्ष्मी स्तोत्र और नामावली एक ही हैं?
नहीं। अष्टलक्ष्मी स्तोत्र में 8 छंद हैं (प्रत्येक रूप का वर्णन), जबकि अष्टोत्तरशतनामावली में उनके 108 नाम (Names) हैं जिनका जाप अर्चन के लिए किया जाता है।