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Sri Dhanyalakshmi Ashtottara Shatanamavali — श्री धान्यलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Dhanyalakshmi Ashtottara Shatanamavali — श्री धान्यलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ श्री धान्यलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ श्रीं क्लीं धान्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं आनन्दाकृत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अनिन्दितायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं आद्यायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं आचार्यायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अभयायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अशक्यायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अजयायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अजेयायै नमः । ९ ॐ श्रीं क्लीं अमलायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अमृतायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं अमरायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं इन्द्राणीवरदायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं इन्दीवरेश्वर्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं उरगेन्द्रशयनायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं उत्केल्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं काश्मीरवासिन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं कादम्बर्यै नमः । १८ ॐ श्रीं क्लीं कलरवायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं कुचमण्डलमण्डितायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं कौशिक्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं कृतमालायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं कौशाम्ब्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं कोशवर्धिन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं खड्गधरायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं खनये नमः । ॐ श्रीं क्लीं खस्थायै नमः । २७ ॐ श्रीं क्लीं गीतायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गीतप्रियायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गीत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गायत्र्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गौतम्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं चित्राभरणभूषितायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं चाणूर्मदिन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं चण्डायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं चण्डहन्त्र्यै नमः । ३६ ॐ श्रीं क्लीं चण्डिकायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गण्डक्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गोमत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं गाथायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं तमोहन्त्र्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं त्रिशक्तिधृते नमः । ॐ श्रीं क्लीं तपस्विन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं जातवत्सलायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं जगत्यै नमः । ४५ ॐ श्रीं क्लीं जङ्गमायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं ज्येष्ठायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं जन्मदायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं ज्वलितद्युत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं जगज्जीवायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं जगद्वन्द्यायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धर्मिष्ठायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धर्मफलदायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं ध्यानगम्यायै नमः । ५४ ॐ श्रीं क्लीं धारणायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धरण्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धवलायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धर्माधारायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धनायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धारायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं धनुर्धर्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं नाभसायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं नासायै नमः । ६३ ॐ श्रीं क्लीं नूतनाङ्गायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं नरकघ्न्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं नुत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं नागपाशधरायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं नित्यायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं पर्वतनन्दिन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं पतिव्रतायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं पतिमय्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं प्रियायै नमः । ७२ ॐ श्रीं क्लीं प्रीतिमञ्जर्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं पातालवासिन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं पूर्त्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं पाञ्चाल्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं प्राणिनां प्रसवे नमः । ॐ श्रीं क्लीं पराशक्त्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं बलिमात्रे नमः । ॐ श्रीं क्लीं बृहद्धाम्न्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं बादरायणसंस्तुतायै नमः । ८१ ॐ श्रीं क्लीं भयघ्न्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं भीमरूपायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं बिल्वायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं भूतस्थायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं मखायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं मातामह्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं महामात्रे नमः । ॐ श्रीं क्लीं मध्यमायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं मानस्यै नमः । ९० ॐ श्रीं क्लीं मनवे नमः । ॐ श्रीं क्लीं मेनकायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं मुदायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं यत्तत्पदनिबन्धिन्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं यशोदायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं यादवायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं यूत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं रक्तदन्तिकायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं रतिप्रियायै नमः । ९९ ॐ श्रीं क्लीं रतिकर्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं रक्तकेश्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं रणप्रियायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं लङ्कायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं लवणोदधये नमः । ॐ श्रीं क्लीं लङ्केशहन्त्र्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं लेखायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं वरप्रदायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं वामनायै नमः । १०८ ॐ श्रीं क्लीं वैदिक्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं विद्युत्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं वारह्यै नमः । ॐ श्रीं क्लीं सुप्रभायै नमः । ॐ श्रीं क्लीं समिधे नमः । ११३ ॥ इति श्री धान्यलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥

धान्यलक्ष्मी: पोषण और समृद्धि

धान्यलक्ष्मी (Dhanyalakshmi) अष्टलक्ष्मी में वह स्वरूप है जो कल्याण, पोषण और कृषि संपदा का प्रतिनिधित्व करती हैं। 'धान्य' का अर्थ है अनाज या अन्न। वे जगत की अन्नपूर्णा हैं, जिनके आशीर्वाद से कोई भी प्राणी भूखा नहीं सोता।
स्वरूप वर्णन: धान्यलक्ष्मी का वर्ण हरा (Green) है, जो हरियाली और कृषि का प्रतीक है। वे आठ भुजाॐ वाली हैं और हरे वस्त्र धारण करती हैं। उनके हाथों में धान की बालियां (Paddy sheaves), गदा, और केले का पत्ता होता है। यह स्वरूप दर्शाता है कि जीवन के निर्वाह के लिए अन्न ही सबसे बड़ा धन है।
इन्हें धरती माता (Mother Earth) का ही एक रूप माना जाता है, जो धैर्यवान हैं और सबका भरण-पोषण करती हैं।

विनियोग विवरण

देवीश्री धान्यलक्ष्मी (Sri Dhanyalakshmi)
समूहअष्टलक्ष्मी (Ashtalakshmi)
अन्य नामअन्नपूर्णा, शाकम्भरी (Annapurna, Shakambhari)
वर्ण (रंग)हरा (Green)
मुख्य फलअन्न समृद्धि, कृषि लाभ, स्वास्थ्य
बीज मंत्रश्रीं क्लीं (Shreem Kleem)

नामावली पाठ के लाभ

धान्यलक्ष्मी की उपासना कलियुग में अत्यंत महत्वपूर्ण है:
  • अन्न सुरक्षा: जिस घर में इनका पाठ होता है, वहां कभी अकाल, भुखमरी या अन्न की कमी नहीं होती।
  • कृषि सफलता: किसानों और खेती से जुड़े लोगों के लिए यह वरदान है। अच्छी फसल और प्राकृतिक आपदाॐ से रक्षा के लिए यह अचूक है।
  • शारीरिक पुष्टि: चूँकि "जैसा अन्न, वैसा मन" होता है, शुद्ध अन्न की प्राप्ति से परिवार का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
  • अतिथि सत्कार: साधक के पास इतना सामर्थ्य होता है कि वह अपने द्वार आए किसी भी अतिथि को भोजन करा सके।

पूजा और पाठ विधि

  • समय: प्रातःकाल या भोजन पकाने से पूर्व। नवरात्री और फसल कटाई के उत्सव (संक्रांति) पर विशेष फलदायी।
  • आसन: हरे या पीले आसन पर बैठें।
  • ध्यान: माँ के हरे वस्त्र वाले स्वरूप का ध्यान करें, जिनके हाथ में धान की बालियां हैं।
  • अर्पण: पूजा में चावल, नई फसल का अनाज, या हरे रंग के फल-सब्जी अर्पित करना सर्वोत्तम है।
  • प्रसाद: पके हुए भोजन (खीर या हलवा) का भोग लगाएँ और उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. धान्यलक्ष्मी और अन्नपूर्णा में क्या समानता है?

दोनों एक ही शक्ति के रूप हैं। अन्नपूर्णा काशी की अधिष्ठात्री देवी हैं और शिव की अर्धांगिनी (पार्वती) मानी जाती हैं, जबकि धान्यलक्ष्मी विष्णु की अर्धांगिनी (लक्ष्मी) के अष्ट स्वरूपों में से एक हैं। दोनों का कार्य जगत का भरण-पोषण करना है।

2. क्या केवल किसान ही इनका पाठ कर सकते हैं?

नहीं। प्रत्येक व्यक्ति भोजन करता है, अतः प्रत्येक गृहस्थ को धान्यलक्ष्मी की कृपा चाहिए। शहर में रहने वाले लोग भी अपनी आजीविका (job/business) में स्थिरता और घर में बरकत के लिए इनका पाठ करते हैं।

3. क्या डायनिंग टेबल (Dining Table) पर इनका चित्र लगा सकते हैं?

हाँ, भोजन कक्ष (Dining Room) या रसोई घर (Kitchen) में धान्यलक्ष्मी या अन्नपूर्णा का चित्र लगाना शगुन माना जाता है। भोजन से पहले "जय माँ धान्यलक्ष्मी" कहने से भोजन प्रसाद बन जाता है।

4. इस नामावली के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ है?

बुधवार (Wednesday) और शुक्रवार (Friday) श्रेष्ठ हैं। इसके अलावा जब भी घर में नया अनाज आए या फसल कटे, तब इनका पाठ अवश्य करना चाहिए।

5. "क्लीं" बीज मंत्र का क्या अर्थ है?

इस नामावली के मंत्रों में 'क्लीं' (Kleem) का प्रयोग हुआ है, जो आकर्षण और कामराज बीज है। यहाँ इसका अर्थ है प्रकृति की संपदा और पुष्टि को अपनी ओर आकर्षित करना।

6. क्या अन्न का अपमान करने से देवी क्रोधित होती हैं?

हाँ। थाली में जूठन छोड़ना या अन्न को फेंकना धान्यलक्ष्मी का अपमान माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसे घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती हैं। इसलिए अन्न का सम्मान अनिवार्य है।