Sri Vidyalakshmi Ashtottara Shatanamavali – श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली | 108 Names & Lyrics

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली ॥
ॐ ऐं ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ वाग्देव्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ परदेव्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निरवद्यायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ पुस्तकहस्तायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ श्रीविद्यायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ विद्यारूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ शास्त्रनिरूपिण्यै नमः । ९
ॐ ऐं ॐ त्रिकालज्ञानायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ वाणिश्रियै नमः ।
ॐ ऐं ॐ यशस्विन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ विजयायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ अक्षरायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ वर्णायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ पराविद्यायै नमः । १८
ॐ ऐं ॐ कवितायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ नित्यबुद्धायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निर्विकल्पायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निगमातीतायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निर्गुणरूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निष्कलरूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निर्मलायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निर्मलरूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निराकारायै नमः । २७
ॐ ऐं ॐ निर्विकारायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ नित्यशुद्धायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ बुद्ध्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मुक्त्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निरहङ्कारायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निरातङ्कायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निष्कलङ्कायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निष्कारिण्यै नमः । ३६
ॐ ऐं ॐ निखिलकारणायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निरीश्वरायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ नित्यज्ञानायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निखिलाण्डेश्वर्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ निखिलवेद्यायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ गुणदेव्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सुगुणदेव्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सच्चिदानन्दायै नमः । ४५
ॐ ऐं ॐ सज्जनपूजितायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सकलदेव्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मोहिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मोहवर्जितायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मोहनाशिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ शोकायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ शोकनाशिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ कालायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ कालातीतायै नमः । ५४
ॐ ऐं ॐ कालप्रतीतायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ अखिलायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ अखिलनिदानायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ अजरामरायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ अजहितकारिण्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ त्रिगुणायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ त्रिमूर्त्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ भेदविहीनायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ भेदकारणायै नमः । ६३
ॐ ऐं ॐ शब्दायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ शब्दभण्डारायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ शब्दकारिण्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ स्पर्शायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ स्पर्शविहीनायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ रूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ रूपविहीनायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ रूपकारणायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ रसगन्धिन्यै नमः । ७२
ॐ ऐं ॐ रसविहीनायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सर्वव्यापिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मायारूपिण्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ प्रणवलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मात्रे नमः ।
ॐ ऐं ॐ मातृस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ ह्रीङ्कार्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ ओङ्कार्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ शब्दशरीरायै नमः । ८१
ॐ ऐं ॐ भाषायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ भाषारूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ गायत्र्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ विश्वायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ विश्वरूपायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ तैजसे नमः ।
ॐ ऐं ॐ प्राज्ञायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सर्वशक्त्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ विद्याविद्यायै नमः । ९०
ॐ ऐं ॐ विदुषायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मुनिगणार्चितायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ ध्यानायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ हंसवाहिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ हसितवदनायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मन्दस्मितायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ अम्बुजवासिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मयूरायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ पद्महस्तायै नमः । ९९
ॐ ऐं ॐ गुरुजनवन्दितायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ सुहासिन्यै नमः ।
ॐ ऐं ॐ मङ्गलायै नमः ।
ॐ ऐं ॐ वीणापुस्तकधारिण्यै नमः । १०३
॥ इति श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
विद्यालक्ष्मी: ज्ञान और विवेक
विद्यालक्ष्मी (Vidyalakshmi) अष्टलक्ष्मी का वह दिव्य स्वरूप है जो मनुष्य को अज्ञान के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती हैं। वे न केवल आध्यात्मिक ज्ञान देती हैं, बल्कि, लौकिक विद्या (Education/Skills) में भी प्रवीणता प्रदान करती हैं।
प्राचीन मान्यता है कि जिस व्यक्ति पर विद्यालक्ष्मी की कृपा होती है, उसके पास धन स्वतः ही खिंचा चला आता है, क्योंकि 'ज्ञान' ही सर्वोच्च धन है।
स्वरूप वर्णन: विद्यालक्ष्मी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं जो उनकी शुद्धता का प्रतीक है। उनके हाथों में पुस्तक (वेद), ज्ञान मुद्रा, और अभय मुद्रा है। कई बार उन्हें हंस या मयूर पर आरूढ़ भी दर्शाया जाता है।
विनियोग विवरण
| देवी | श्री विद्यालक्ष्मी (Sri Vidyalakshmi) |
| समूह | अष्टलक्ष्मी (Ashtalakshmi) |
| अन्य नाम | ज्ञान लक्ष्मी, विद्या दात्री |
| वस्त्र रंग | श्वेत/सुनहरा (White/Gold) |
| मुख्य फल | ज्ञान, बुद्धि, परीक्षा में सफलता (Wisdom, Success) |
| बीज मंत्र | ॐ ऐं ॐ (Om Aim Om) |
नामावली पाठ के लाभ
विद्यालक्ष्मी की उपासना छात्रों और बुद्धिजीवियों के लिए वरदान है:
- शैक्षिक सफलता: स्कूल/कॉलेज के छात्रों के लिए स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि।
- कला में निपुणता: संगीत, नृत्य, लेखन आदि कलाओं में सिद्धि प्राप्त होती है।
- विवेक: सही और गलत का भेद करने की क्षमता (Wisdom) प्राप्त होती है।
- मानसिक शांति: तनाव और मानसिक भटकाव दूर होता है।
पूजा और पाठ विधि
- समय: बुधवार (Wednesday) या प्रातःकाल।
- आसन: सफेद या पीला आसन।
- अर्पण: सफेद फूल, चंदन और खीर का भोग।
- विशेष: अपनी पुस्तकों या वाद्य यंत्रों (Musical Instruments) के सामने बैठकर पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विद्यालक्ष्मी और सरस्वती जी में क्या अंतर है?
सरस्वती जी विशुद्ध 'ज्ञान' की देवी हैं, जबकि विद्यालक्ष्मी 'ज्ञान के माध्यम से समृद्धि' (Wealth through Knowledge) की देवी हैं। वे यह सुनिश्चित करती हैं कि आपकी शिक्षा आपको जीवन में सफलता और धन भी दिलाए।
2. क्या परीक्षाओं में सफलता के लिए यह पाठ उपयोगी है?
जी हाँ, विद्यार्थियों (Students) के लिए विद्यालक्ष्मी का पाठ एकाग्रता (Concentration) और स्मरण शक्ति (Memory Power) बढ़ाता है, जिससे परीक्षाओं में उत्तम परिणाम मिलते हैं।
3. विद्यालक्ष्मी का स्वरूप कैसा है?
विद्यालक्ष्मी श्वेत वस्त्रों में सुशोभित हैं। वे कमल पर विराजमान हैं और उनके हाथों में वेद (पुस्तक) और ज्ञान मुद्रा है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाने का प्रतीक है।
4. इस नामावली के लिए शुभ वार कौन सा है?
बुधवार (Wednesday) और शुक्रवार (Friday) विद्यालक्ष्मी की साधना के लिए श्रेष्ठ हैं। बसंत पंचमी या नवरात्रि के दिनों में इनका पाठ विशेष फलदायी होता है।
5. बीज मंत्र "ऐं" का क्या अर्थ है?
'ऐं' (Aim) वाग्बीज है, जो वाणी और बुद्धि को प्रखर करता है। इस नामावली में इसका बार-बार प्रयोग साधक की वाणी को सिद्ध और प्रभावशाली बनाता है।
6. क्या कला (Arts/Music) के क्षेत्र में सफलता के लिए यह पाठ करें?
अवश्य। संगीत, नृत्य, लेखन या किसी भी कला में निपुणता पाने के लिए विद्यालक्ष्मी की कृपा अनिवार्य है। वे प्रतिभा (Talent) को निखारती हैं।