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Sri Vijayalakshmi Ashtottara Shatanamavali — श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Vijayalakshmi Ashtottara Shatanamavali — श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ क्लीं ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ अम्बिकायै नमः । ॐ क्लीं ॐ अम्बालिकायै नमः । ॐ क्लीं ॐ अम्बुधिशयनायै नमः । ॐ क्लीं ॐ अम्बुधये नमः । ॐ क्लीं ॐ अन्तकघ्न्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ अन्तकर्त्र्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ अन्तिमायै नमः । ॐ क्लीं ॐ अन्तकरूपिण्यै नमः । ९ ॐ क्लीं ॐ ईड्यायै नमः । ॐ क्लीं ॐ इभास्यनुतायै नमः । ॐ क्लीं ॐ ईशानप्रियायै नमः । ॐ क्लीं ॐ ऊत्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ उद्यद्भानुकोटिप्रभायै नमः । ॐ क्लीं ॐ उदाराङ्गायै नमः । ॐ क्लीं ॐ केलिपरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ कलहायै नमः । ॐ क्लीं ॐ कान्तलोचनायै नमः । १८ ॐ क्लीं ॐ काञ्च्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ कनकधारायै नमः । ॐ क्लीं ॐ कल्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ कनककुण्डलायै नमः । ॐ क्लीं ॐ खड्गहस्तायै नमः । ॐ क्लीं ॐ खट्वाङ्गवरधारिण्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ खेटहस्तायै नमः । ॐ क्लीं ॐ गन्धप्रियायै नमः । ॐ क्लीं ॐ गोपसख्यै नमः । २७ ॐ क्लीं ॐ गारुड्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ गत्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ गोहितायै नमः । ॐ क्लीं ॐ गोप्यायै नमः । ॐ क्लीं ॐ चिदात्मिकायै नमः । ॐ क्लीं ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः । ॐ क्लीं ॐ चतुराकृत्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ चकोराक्ष्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ चारुहासायै नमः । ३६ ॐ क्लीं ॐ गोवर्धनधरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ गुर्व्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ गोकुलाभयदायिन्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ तपोयुक्तायै नमः । ॐ क्लीं ॐ तपस्विकुलवन्दितायै नमः । ॐ क्लीं ॐ तापहारिण्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ तार्क्षमात्रे नमः । ॐ क्लीं ॐ जयायै नमः । ॐ क्लीं ॐ जप्यायै नमः । ४५ ॐ क्लीं ॐ जरायवे नमः । ॐ क्लीं ॐ जवनायै नमः । ॐ क्लीं ॐ जनन्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ जाम्बूनदविभूषायै नमः । ॐ क्लीं ॐ दयानिध्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ ज्वालायै नमः । ॐ क्लीं ॐ जम्भवधोद्यतायै नमः । ॐ क्लीं ॐ दुःखहन्त्र्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ दान्तायै नमः । ५४ ॐ क्लीं ॐ द्रुतेष्टदायै नमः । ॐ क्लीं ॐ दात्र्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ दीनार्तिशमनायै नमः । ॐ क्लीं ॐ नीलायै नमः । ॐ क्लीं ॐ नागेन्द्रपूजितायै नमः । ॐ क्लीं ॐ नारसिंह्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ नन्दिनन्दायै नमः । ॐ क्लीं ॐ नन्द्यावर्तप्रियायै नमः । ॐ क्लीं ॐ निधये नमः । ६३ ॐ क्लीं ॐ परमानन्दायै नमः । ॐ क्लीं ॐ पद्महस्तायै नमः । ॐ क्लीं ॐ पिकस्वरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ पुरुषार्थप्रदायै नमः । ॐ क्लीं ॐ प्रौढायै नमः । ॐ क्लीं ॐ प्राप्त्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ बलिसंस्तुतायै नमः । ॐ क्लीं ॐ बालेन्दुशेखरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ बन्द्यै नमः । ७२ ॐ क्लीं ॐ बालग्रहविनाशन्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ ब्राह्म्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ बृहत्तमायै नमः । ॐ क्लीं ॐ बाणायै नमः । ॐ क्लीं ॐ ब्राह्मण्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ मधुस्रवायै नमः । ॐ क्लीं ॐ मत्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ मेधायै नमः । ॐ क्लीं ॐ मनीषायै नमः । ८१ ॐ क्लीं ॐ मृत्युमारिकायै नमः । ॐ क्लीं ॐ मृगत्वचे नमः । ॐ क्लीं ॐ योगिजनप्रियायै नमः । ॐ क्लीं ॐ योगाङ्गध्यानशीलायै नमः । ॐ क्लीं ॐ यज्ञभुवे नमः । ॐ क्लीं ॐ यज्ञवर्धिन्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ राकायै नमः । ॐ क्लीं ॐ राकेन्दुवदनायै नमः । ॐ क्लीं ॐ रम्यायै नमः । ९० ॐ क्लीं ॐ रणितनूपुरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ रक्षोघ्न्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ रतिदात्र्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ लतायै नमः । ॐ क्लीं ॐ लीलायै नमः । ॐ क्लीं ॐ लीलानरवपुषे नमः । ॐ क्लीं ॐ लोलायै नमः । ॐ क्लीं ॐ वरेण्यायै नमः । ॐ क्लीं ॐ वसुधायै नमः । ९९ ॐ क्लीं ॐ वीरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ वरिष्ठायै नमः । ॐ क्लीं ॐ शातकुम्भमय्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ शक्त्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ श्यामायै नमः । ॐ क्लीं ॐ शीलवत्यै नमः । ॐ क्लीं ॐ शिवायै नमः । ॐ क्लीं ॐ होरायै नमः । ॐ क्लीं ॐ हयगायै नमः । १०८ ॥ इति श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥

विजयलक्ष्मी: जय और सफलता

विजयलक्ष्मी (Vijayalakshmi) अष्टलक्ष्मी का वह तेजस्वी स्वरूप है जो शत्रुओं पर विजय और सर्वत्र सफलता (Total Success) प्रदान करता है। महाभारत के युद्ध से लेकर आधुनिक जीवन के संघर्षों तक, विजय की कामना हर किसी को होती है, और यही विजय माँ जयालक्ष्मी प्रदान करती हैं।
वे न केवल बाहरी शत्रुओं को हराती हैं, बल्कि आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ, मोह) पर भी विजय दिलाती हैं, जिससे साधक को आत्म-विजय प्राप्त होती है।
स्वरूप वर्णन: विजयलक्ष्मी आठ भुजाओं वाली हैं। वे लाल वस्त्र धारण करती हैं और कमल पर विराजमान हैं। उनके हाथों में शंख, चक्र, तलवार, ढाल, पाशा आदि आयुध हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए सदैव तत्पर हैं।

विनियोग विवरण

देवीश्री विजयलक्ष्मी (Sri Vijayalakshmi)
समूहअष्टलक्ष्मी (Ashtalakshmi)
अन्य नामजयालक्ष्मी (Jaya Lakshmi)
वस्त्र रंगलाल (Red)
मुख्य फलविजय, सफलता, शत्रु नाश (Victory, Success)
बीज मंत्रॐ क्लीं ॐ (Om Kleem Om)

नामावली पाठ के लाभ

विजयलक्ष्मी की आराधना से जीवन के हर क्षेत्र में जीत सुनिश्चित होती है:
  • अदालती विजय: यदि कोई झूठे मुकदमे (Court Case) में फंसा हो, तो विजयलक्ष्मी का पाठ उसे न्याय दिलाता है।
  • परीक्षा में सफलता: विद्यार्थियों के लिए यह पाठ एकाग्रता और सफलता (Success in Exams) का महामंत्र है।
  • शत्रु बाधा निवारण: यह पाठ ज्ञात और अज्ञात शत्रुओं की साजिशों को विफल कर देता है।
  • गृह क्लेश मुक्ति: यह पारिवारिक विवादों को समाप्त कर घर में सुख-शांति की 'विजय' स्थापित करता है।

पूजा और पाठ विधि

  • समय: मंगलवार (Tuesday) या विजयादशमी।
  • आसन: लाल रंग का आसन।
  • दिशा: उत्तर या पूर्व मुखी होकर।
  • अर्पण: लाल फूल (विशेषकर गुड़हल) और सिन्दूर।
  • दीपक: घी का दीपक जलाएं और उसमें एक लौंग डालें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. विजयलक्ष्मी और धैर्यलक्ष्मी में क्या अंतर है?

धैर्यलक्ष्मी (वीरलक्ष्मी) संघर्ष करने का 'साहस' (Courage) देती हैं, जबकि विजयलक्ष्मी (जयालक्ष्मी) उस संघर्ष का सुखद 'परिणाम' यानी 'जीत' (Victory) सुनिश्चित करती हैं। दोनों एक दूसरे की पूरक हैं।

2. क्या कोर्ट केस (Litigation) जीतने के लिए यह पाठ उपयोगी है?

जी हाँ, अदालती मामलों और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए विजयलक्ष्मी का पाठ रामबाण माना जाता है। यह न्याय और सत्य की जीत सुनिश्चित करता है।

3. विद्यार्थियों के लिए यह कैसे लाभकारी है?

प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में सफलता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि सही समय पर सही प्रदर्शन से मिलती है। विजयलक्ष्मी का आशीर्वाद 'सफलता' (Rank/Selection) दिलाता है।

4. विजयलक्ष्मी का स्वरूप कैसा है?

माँ विजयलक्ष्मी आठ भुजाओं वाली हैं। वे लाल वस्त्र पहनती हैं और कमल पर विराजमान हैं। उनके हाथों में शंख, चक्र, तलवार, ढाल और पाशा (रस्सी) है, जो शत्रुओं का बंधन और विनाश दर्शाते हैं।

5. इस नामावली के लिए शुभ वार कौन सा है?

मंगलवार (Tuesday) और शुक्रवार (Friday) श्रेष्ठ हैं। विजयादशमी (दशहरा) के दिन इनका पाठ करने से साल भर शत्रु बाधा नहीं रहती।

6. बीज मंत्र "क्लीं" का प्रयोग क्यों हुआ है?

इस नामावली में 'क्लीं' (Kleem) बीज का विशेष प्रयोग है। यह आकर्षण और कृष्ण शक्ति का बीज है, जो विजय और सफलता को साधक की ओर चुंबक की तरह खींचता है।