Sri Surya Chandrakala Stotram – श्री सूर्यचन्द्रकला स्तोत्रम्

स्तोत्र का महत्व (Significance)
श्री सूर्यचन्द्रकला स्तोत्रम् नवग्रहों में प्रधान सूर्य और मन के कारक चन्द्रमा को एक साथ प्रसन्न करने का साधन है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को 'आत्मा' और चन्द्रमा को 'मन' कहा गया है। जब ये दोनों अनुकूल होते हैं, तो व्यक्ति को मानसिक शांति और शारीरिक तेज दोनों प्राप्त होते हैं।
श्लोक 17 में उल्लिखित है कि यह स्तोत्र "श्रीचामुण्डाकृपापात्र श्रीकृष्णेन्द्रविनिर्मितम्" है, अर्थात चामुण्डा देवी के भक्त श्री कृष्णेन्द्र द्वारा रचित है।
पाठ के लाभ (Benefits)
संतान सुख (Progeny): "पुत्रपौत्राद्य" - इस स्तोत्र के पाठ से पुत्र और पौत्र का सुख प्राप्त होता है।
दीर्घायु और आरोग्य (Longevity & Health): सूर्य और चन्द्रमा दोनों के आशीर्वाद से व्यक्ति को लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य ("आयुरारोग्य") मिलता है।
धन-संपदा (Wealth): यह स्तोत्र घर में सुख-समृद्धि और संपदा ("सम्पदः") लाता है।
पाप नाश (Removal of Sins): इसे "पापहरं स्तोत्रं" कहा गया है, अर्थात इसके भक्तिपूर्वक पाठ से पापों का नाश करता है।
पाठ करने की विधि (Method of Chanting)
शुभ दिन: रविवार (सूर्य) और सोमवार (चन्द्र) को इसका पाठ विशेष फलदायी है।
विशेष तिथियां: अमावस्या और पूर्णिमा को किया गया पाठ अनंत गुना फल देता है।
समय: प्रातःकाल स्नान के बाद, सूर्योदय के समय पूर्वाभिमुख होकर पाठ करें।
संकल्प: जल, अक्षत और पुष्प लेकर आरोग्य और मनोकामना पूर्ति का संकल्प लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)