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Sri Shukra Nama Stotram – श्री शुक्र नाम स्तोत्रम्

Sri Shukra Nama Stotram – श्री शुक्र नाम स्तोत्रम्
॥ श्री शुक्र नाम स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीस्कन्दपुराणे ॥ ॥ षोडश नामानि ॥ शुक्रः काव्यः शुक्ररेता शुक्लाम्बरधरः सुधी । हिमाभः कुन्दधवलः शुभ्रांशुः शुक्लभूषणः ॥ १ ॥ नीतिज्ञो नीतिकृन्नीतिमार्गगामी ग्रहाधिपः । उशना वेदवेदाङ्गपारगः कविरात्मवित् ॥ २ ॥ भार्गवः करुणाः सिन्धुर्ज्ञानगम्यः सुतप्रदः । शुक्रस्यैतानि नामानि शुक्रं स्मृत्वा तु यः पठेत् ॥ ३ ॥ ॥ फलश्रुति ॥ आयुर्धनं सुखं पुत्रं लक्ष्मी वसतिमुत्तमाम् । विद्यां चैव स्वयं तस्मै शुक्रस्तुष्टो ददाति च ॥ ४ ॥ ॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे श्री शुक्र स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

शुक्र के 16+ नाम और अर्थ (16+ Names of Venus)

क्र.नामअर्थ
1शुक्रशुद्ध, उज्ज्वल
2काव्यकवि का पुत्र, भृगुपुत्र
3शुक्ररेताशुद्ध तेज वाले
4शुक्लाम्बरधरश्वेत वस्त्र धारी
5सुधीबुद्धिमान
6हिमाभहिम (बर्फ) जैसी कांति
7कुन्दधवलकुन्द पुष्प जैसे श्वेत
8शुभ्रांशुश्वेत किरणों वाले
9शुक्लभूषणश्वेत आभूषण धारी
10नीतिज्ञनीति के ज्ञाता
11नीतिकृत्नीति बनाने वाले
12ग्रहाधिपग्रहों के स्वामी
13उशनावैदिक नाम
14कविज्ञानी, कवि
15भार्गवभृगु वंश के
16करुणासिन्धुकरुणा का सागर
17सुतप्रदपुत्र देने वाले

फलश्रुति - 7 विशेष वरदान (7 Blessings)

वरदानअर्थ
आयुःदीर्घायु
धनम्धन-संपत्ति
सुखम्सुख-शांति
पुत्रम्संतान
लक्ष्मीऐश्वर्य
वसतिम् उत्तमाम्उत्तम गृह/निवास
विद्याम्ज्ञान और विद्या

पाठ विधि (Recitation Method)

  • शुभ दिन: शुक्रवार
  • शुभ समय: प्रातः या संध्या
  • जप संख्या: 1, 3, 11, 108 बार
  • वस्त्र: सफेद वस्त्र
  • विशेष: यह संक्षिप्त स्तोत्र है, नित्य पाठ के लिए उपयुक्त

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. इस स्तोत्र में कितने नाम हैं?

16+ नाम - शुक्र, काव्य, शुक्ररेता, शुक्लाम्बरधर, सुधी, हिमाभ, कुन्दधवल, शुभ्रांशु, शुक्लभूषण, नीतिज्ञ, नीतिकृत्, ग्रहाधिप, उशना, कवि, भार्गव, करुणासिन्धु, सुतप्रद।

2. 'काव्य' का क्या अर्थ है?

कवि (भृगु ऋषि) का पुत्र = काव्य। यह शुक्राचार्य का प्रसिद्ध नाम है।

3. 'शुक्ररेता' का क्या अर्थ है?

शुक्र (शुद्ध/उज्ज्वल) + रेता (वीर्य/तेज) = शुद्ध तेज वाले। शुक्र अत्यंत तेजस्वी ग्रह हैं।

4. 'कुन्दधवल' का क्या अर्थ है?

कुन्द (एक श्वेत पुष्प) + धवल (श्वेत) = कुन्द पुष्प जैसे श्वेत। शुक्र का वर्ण श्वेत है।

5. इस स्तोत्र का मुख्य फल क्या है?

7 वरदान - आयु, धन, सुख, पुत्र, लक्ष्मी, उत्तम गृह, और विद्या।

6. 'नीतिकृत्' का क्या अर्थ है?

नीति बनाने वाले। शुक्राचार्य ने "शुक्रनीति" नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा।

7. 'सुतप्रद' का क्या अर्थ है?

सुत (पुत्र) + प्रद (देने वाले) = संतान प्रदान करने वाले। शुक्र संतान के कारक हैं।

8. 'उशना' कौन है?

उशना शुक्र का वैदिक नाम है। ऋग्वेद में शुक्र को "उशना काव्य" कहा गया है।

9. यह स्तोत्र किस पुराण से है?

स्कन्द पुराण से। यह प्राचीन और प्रामाणिक स्तोत्र है।

10. यह स्तोत्र कितना संक्षिप्त है?

मात्र 4 श्लोक। नित्य पाठ के लिए अत्यंत उपयुक्त।