Sri Shukra Stavaraja Stotram – श्री शुक्र स्तवराज स्तोत्रम्

शुक्र के विशेष विशेषण (Epithets of Venus)
| संस्कृत नाम | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| भार्गवश्रेष्ठ | भृगु वंश में श्रेष्ठ | भृगु ऋषि के पुत्र |
| दैत्यदानवपूजित | दैत्य-दानवों द्वारा पूजित | असुरों के गुरु |
| वृष्टिकर्ता | वर्षा करने वाला | वर्षा के नियंत्रक |
| देवयानिपति | देवयानी के पति | देवयानी शुक्र की पुत्री |
| वेदवेदाङ्गपारग | वेद-वेदांगों में पारंगत | सर्वज्ञ विद्वान् |
| जीवनाख्य विद्याप्राप्त | संजीवनी विद्या प्राप्त | मृतकों को जीवित करने की विद्या |
| तारामण्डलमध्यस्थ | तारामंडल के मध्य में स्थित | आकाश में प्रकाशमान |
| मङ्गलरूपी | मंगल स्वरूप | उदय पर मंगल, अस्त पर अरिष्ट |
| ययातिगुरु | राजा ययाति के गुरु | ययाति को शाप और वरदान |
| बलिराज्यप्रद | बलि को राज्य देने वाला | राजा बलि के गुरु |
विनियोग और श्लोकों का अर्थ (Meaning)
विनियोग: ऋषि - प्रजापति, छंद - अनुष्टुप्, देवता - शुक्र, प्रयोजन - शुक्र को प्रसन्न करना।
श्लोक 1-3: भार्गव श्रेष्ठ को नमस्कार, दैत्य-दानवों द्वारा पूजित, वर्षा के नियंत्रक। वेद-वेदांगों में पारंगत, तपस्या से शुद्ध। संजीवनी विद्या प्राप्त, भृगुपुत्र को नमन।
श्लोक 4-5: तारामंडल के मध्य में स्थित, जिनके उदय पर जगत मंगलमय होता है, अस्त पर अरिष्ट होता है।
श्लोक 5-6: त्रिपुर के दैत्यों को शिवबाण से पीड़ित होने पर संजीवनी से जीवित किया। ययाति के गुरु को नमस्कार।
श्लोक 7-9: बलि को राज्य देने वाले, देवताओं द्वारा पहले पूजित। काव्य, भृगुपुत्र, कारणरूप को नमस्कार।
फलश्रुति (श्लोक 10-13): पढ़ने या सुनने से वांछित फल। पुत्रकामी को पुत्र, धनकामी को धन, राज्यकामी को राज्य, स्त्रीकामी को उत्तम पत्नी। शुक्रवार को या अन्य दिन शुक्र होरा में पढ़ें। रोगी रोगमुक्त, भयार्त भयमुक्त। प्रातः पूजा से सर्वपाप मुक्त होकर शिव सान्निध्य प्राप्त।
पाठ विधि (Method of Recitation)
- शुभ दिन: शुक्रवार (भृगुवार) - सबसे उत्तम
- अन्य दिन: शुक्र होरा में पूजा करें
- शुभ समय: प्रातःकाल (स्तोत्र में उल्लेख)
- वस्त्र: सफेद वस्त्र
- पुष्प: सफेद पुष्प
- विशेष फल: पुत्र, धन, राज्य, उत्तम पत्नी, रोग-भय मुक्ति
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)