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Sri Shukra Chaturvimshati Nama Stotram – श्री शुक्र चतुर्विंशतिनाम स्तोत्रम्

Sri Shukra Chaturvimshati Nama Stotram – श्री शुक्र चतुर्विंशतिनाम स्तोत्रम्
॥ श्री शुक्र चतुर्विंशतिनाम स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीस्कान्दपुराणे ॥ शृण्वन्तु मुनयः सर्वे शुक्रस्तोत्रमिदं शुभम् । रहस्यं सर्वभूतानां शुक्रप्रीतिकरं परम् ॥ १ ॥ येषां सङ्कीर्तनैर्नित्यं सर्वान् कामानवाप्नुयात् । तानि शुक्रस्य नामानि कथयामि शुभानि च ॥ २ ॥ ॥ चतुर्विंशति नामानि (24 नाम) ॥ शुक्रः शुभग्रहः श्रीमान् वर्षकृद्वर्षविघ्नकृत् । तेजोनिधिर्ज्ञानदाता योगी योगविदां वरः ॥ ३ ॥ दैत्यसञ्जीवनो धीरो दैत्यनेतोशना कविः । नीतिकर्ता ग्रहाधीशो विश्वात्मा लोकपूजितः ॥ ४ ॥ शुक्लमाल्याम्बरधरः श्रीचन्दनसमप्रभः । अक्षमालाधरः काव्यः तपोमूर्तिर्धनप्रदः ॥ ५ ॥ ॥ पाठ विधान ॥ चतुर्विंशतिनामानि अष्टोत्तरशतं यथा । देवस्याग्रे विशेषेण पूजां कृत्वा विधानतः ॥ ६ ॥ ॥ फलश्रुति ॥ य इदं पठति स्तोत्रं भार्गवस्य महात्मनः । विषमस्थोऽपि भगवान् तुष्टः स्यान्नात्र संशयः ॥ ७ ॥ स्तोत्रं भृगोरिदमनन्तगुणप्रदं यो भक्त्या पठेच्च मनुजो नियतः शुचिः सन् । प्राप्नोति नित्यमतुलां श्रियमीप्सितार्थान् राज्यं समस्तधनधान्ययुतां समृद्धिम् ॥ ८ ॥ ॥ इति श्रीस्कान्दपुराणे श्री शुक्र चतुर्विंशतिनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

शुक्र के 24 नाम और अर्थ (24 Names of Venus)

क्र.नामअर्थ
1शुक्रशुद्ध, उज्ज्वल
2शुभग्रहशुभ ग्रह
3श्रीमान्लक्ष्मीवान्, ऐश्वर्यवान्
4वर्षकृत्वर्षा करने वाला
5वर्षविघ्नकृत्वर्षा रोकने वाला
6तेजोनिधितेज का भंडार
7ज्ञानदाताज्ञान देने वाला
8योगीयोग में रत
9योगविदां वरयोगियों में श्रेष्ठ
10दैत्यसञ्जीवनदैत्यों को जीवित करने वाला
11धीरधैर्यवान
12दैत्यनेतादैत्यों का नेता/गुरु
13उशनाशुक्र का वैदिक नाम
14कविज्ञानी, कवि
15नीतिकर्तानीति बनाने वाला
16ग्रहाधीशग्रहों का स्वामी
17विश्वात्माविश्व की आत्मा
18लोकपूजितलोकों द्वारा पूजित
19शुक्लमाल्याम्बरधरसफेद माला-वस्त्र धारी
20श्रीचन्दनसमप्रभचंदन जैसी कांति वाला
21अक्षमालाधरमाला धारण करने वाला
22काव्यकवि, भृगुपुत्र
23तपोमूर्तितपस्या का मूर्तिरूप
24धनप्रदधन देने वाला

श्लोकों का संक्षिप्त अर्थ (Brief Meaning)

श्लोक 1-2: हे मुनियों! यह शुक्र स्तोत्र सुनो जो सभी प्राणियों के लिए रहस्य है और शुक्र को प्रसन्न करता है। जिन नामों के कीर्तन से सभी कामनाएँ पूर्ण होती हैं, वे शुभ नाम बताता हूँ।

श्लोक 3-5: शुक्र के 24 नाम - शुक्र, शुभग्रह, श्रीमान्, वर्षकृत्, तेजोनिधि, ज्ञानदाता, योगी, दैत्यसञ्जीवन, धीर, दैत्यनेता, उशना, कवि, नीतिकर्ता, ग्रहाधीश, विश्वात्मा, लोकपूजित, शुक्लमाल्याम्बरधर, श्रीचन्दनसमप्रभ, अक्षमालाधर, काव्य, तपोमूर्ति, धनप्रद।

श्लोक 6: इन 24 नामों को 108 बार भी पढ़ सकते हैं। देवता के समक्ष विधिपूर्वक पूजा करके पढ़ें।

श्लोक 7 (फलश्रुति): जो इस भार्गव (शुक्र) के स्तोत्र को पढ़ता है, शुक्र विषम स्थान में होने पर भी प्रसन्न हो जाते हैं।

श्लोक 8 (मुख्य फल): जो भक्ति से, नियमित और पवित्र होकर पढ़ता है, वह अतुल लक्ष्मी, इच्छित वस्तुएँ, राज्य, धन-धान्य युक्त समृद्धि प्राप्त करता है।

पाठ विधि (Method of Recitation)

  • शुभ दिन: शुक्रवार (सबसे उत्तम)
  • शुभ समय: शुक्र होरा, प्रातः या संध्या
  • वस्त्र: सफेद वस्त्र धारण करें
  • पुष्प: सफेद पुष्प (चमेली, मोगरा)
  • जप संख्या: 1, 24, 108 बार
  • विशेष अवसर: शुक्र दशा-अंतर्दशा, विवाह संबंधी बाधा, सौंदर्य-कला वृद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. 'चतुर्विंशति' का क्या अर्थ है?

चतुर्विंशति = 24। इस स्तोत्र में शुक्र के 24 पवित्र नाम हैं।

2. शुक्र को 'भार्गव' क्यों कहते हैं?

भृगु ऋषि के पुत्र = भार्गव। शुक्राचार्य भृगु वंश से हैं।

3. 'दैत्यसञ्जीवन' का क्या अर्थ है?

दैत्यों को संजीवित करने वाला। शुक्राचार्य के पास मृत्युंजय/संजीवनी विद्या थी जिससे वे मृत दैत्यों को जीवित करते थे।

4. यह स्तोत्र किस पुराण से है?

स्कन्द पुराण से। यह प्राचीन और प्रामाणिक स्तोत्र है।

5. 'उशना' कौन है?

उशना शुक्र का वैदिक नाम है। ऋग्वेद में शुक्र को 'उशना काव्य' कहा गया है।

6. 'विषमस्थोऽपि' का क्या अर्थ है?

विषम स्थान (6, 8, 12वें भाव) में होने पर भी। अर्थात् शुक्र खराब स्थिति में हो तब भी स्तोत्र से प्रसन्न होते हैं।

7. इस स्तोत्र का मुख्य फल क्या है?

राज्य, समृद्धि, धन-धान्य और सभी इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति।

8. 'धनप्रद' का क्या अर्थ है?

धन (सम्पत्ति) + प्रद (देने वाला) = धन देने वाला। शुक्र सुख-समृद्धि के कारक हैं।

9. 'नीतिकर्ता' का क्या अर्थ है?

नीति बनाने वाला। शुक्राचार्य ने "शुक्रनीति" ग्रंथ लिखा जो राजनीति का प्रसिद्ध ग्रंथ है।

10. शुक्रवार को ही क्यों पढ़ें?

शुक्रवार शुक्र ग्रह का वार है। इस दिन शुक्र की उपासना से विशेष फल मिलता है।