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Chatushashti (64) Yogini Nama Stotram 2 – चतुःषष्टि योगिनी नाम स्तोत्रम् – २

Chatushashti (64) Yogini Nama Stotram 2 – चतुःषष्टि योगिनी नाम स्तोत्रम् – २
॥ अथ श्री चतुःषष्टि योगिनी नाम स्तोत्रम् (द्वितीय) ॥ दिव्ययोगी महायोगी सिद्धयोगी गणेश्वरी । प्रेताक्षी डाकिनी काली कालरात्री निशाचरी ॥ १ ॥ हुङ्कारी रुद्रवैताली खर्परी भूतयामिनी । ऊर्ध्वकेशी विरूपाक्षी शुष्काङ्गी मांसभोजिनी ॥ २ ॥ फेत्कारी वीरभद्राक्षी धूम्राक्षी कलहप्रिया । रक्ता च घोररक्ताक्षी विरूपाक्षी भयङ्करी ॥ ३ ॥ चौरिका मारिका चण्डी वाराही मुण्डधारिणी । भैरवी चक्रिणी क्रोधा दुर्मुखी प्रेतवाहिनी ॥ ४ ॥ कण्टकी दीर्घलम्बोष्ठी मालिनी मन्त्रयोगिनी । कालाग्नि मोहिनी चक्री कङ्काली भुवनेश्वरी ॥ ५ ॥ कुण्डला तालकी लक्ष्मी यमदूती करालिनी । कौशिकी भक्षिणी यक्षी कौमारी यन्त्रवाहिनी ॥ ६ ॥ विशाला कामुकी व्याघ्री यक्षिणी प्रेतभूषणी । धूर्जटा विकटी घोरा कपाली विषलाङ्गली ॥ ७ ॥ चतुष्षष्टिः समाख्याता योगिन्यो हि वरप्रदाः । त्रैलोक्यपूजिता नित्यं देवमानुषयोगिभिः ॥ ८ ॥ ॥ इति श्री चतुःषष्टियोगिनी नाम स्तोत्रम् (२) सम्पूर्णम् ॥

64 योगिनियाँ - परिचय (Introduction)

चतुःषष्टि योगिनी स्तोत्रम् केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि तंत्र साधना का एक गुप्त कोड है। योगिनियाँ (Yoginis) माँ आदिशक्ति की वो अनुचरियां या सहचरियां हैं जो ब्रह्मांड की सृजनात्मक और विध्वंशक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

मार्कंडेय पुराण और अन्य तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार, जब माँ दुर्गा ने शुम्भ-निशुम्भ और रक्तबीज के साथ युद्ध किया, तब उनकी सहायता के लिए और रक्तबीज का रक्त पीने के लिए 64 योगिनियों का आह्वान किया गया था।

तांत्रिक वास्तुकला:
भारत में योगिनियों के मंदिर (जैसे हीरापुर, ओडिशा और मुरैना, मध्य प्रदेश) गोलाकार (Circular) होते हैं और छत-विहीन होते हैं, जो यह दर्शाता है कि योगिनियाँ आकाशचारिणी (Sky-walkers) हैं और उनकी ऊर्जा असीम है।

मुख्य नामों का अर्थ (Meaning of Names)

  • दिव्ययोगी, महायोगी, सिद्धयोगी: ये नाम योगिनियों की उच्च आध्यात्मिक अवस्था को दर्शाते हैं। वे केवल डरावनी शक्तियां नहीं, बल्कि परम ज्ञान (Supreme Wisdom) की भी दात्री हैं।

  • गणेश्वरी (Ganeshwari): गणों की स्वामिनी। यह दर्शाता है कि योगिनियाँ शिवजी के गणों का भी नेतृत्व करती हैं।

  • डाकिनी, काली, कालरात्री: ये उग्र रूप हैं। 'डाकिनी' साधक के मूलाधार चक्र से जुड़ी होती है। 'कालरात्री' समय (Time) और मृत्यु (Death) से परे ले जाने वाली शक्ति है।

  • रुद्रवैताली (Rudravetali): वह जो रुद्र (शिव) की शक्ति से वेताल (Vampire/Spirit) जैसी सिद्धियां प्रदान करती है।

64 योगिनियों के नाम और रहस्य (Names & Mysteries)

#नाम (Sanskrit Name)अर्थ / स्वरूप (Meaning/Form)
1दिव्ययोगी (Divyayogi)दिव्य शक्तियों वाली (Divine Yogini) - उच्च चेतना।
2महायोगी (Mahayogi)महान योग शक्ति (Great Yogini) - साधना सिद्धि।
3सिद्धयोगी (Siddhayogi)सिद्धियां देने वाली (Perfected Yogini)।
4गणेश्वरी (Ganeshwari)गणों की स्वामिनी (Matrix of Hosts)।
5प्रेताक्षी (Pretakshi)प्रेत जैसी आँखें/प्रेत पर दृष्टि रखने वाली (Spirit-eyed)।
6डाकिनी (Dakini)मांस/त्वचा की देवी (Guardian of Flesh/Dhatu) - मूलाधार।
7काली (Kali)काल (समय) का नाश करने वाली (Devourer of Time)।
8कालरात्री (Kalaratri)घोर अंधकार की रात्रि (Dark Night) - प्रलय।
9निशाचरी (Nishachari)रात्रि में विचरण करने वाली (Night-walker)।
10हुङ्कारी (Hunkari)‘हुं’ का नाद करने वाली (Roaring 'Hum') - भय नाश।
11रुद्रवैताली (Rudravetali)रुद्र की वेताल शक्ति (Fierce Vampire-Spirit)।
12खर्परी (Kharpari)खप्पर (कपाल) धारण करने वाली (Skull-bowl Holder)।
13भूतयामिनी (Bhutayamini)भूतों को नियंत्रित करने वाली रात्रि (Night of Spirits)।
14ऊर्ध्वकेशी (Urdhvakeshi)ऊपर की ओर उठे हुए बाल (Upward-haired) - उग्रता।
15विरूपाक्षी (Virupakshi)विचित्र/भयानक आँखों वाली (Diversely-eyed)।
16शुष्काङ्गी (Shushkangi)सूखे शरीर वाली (Dried-limb) - वैराग्य/तप।
17मांसभोजिनी (Mamsabhojini)मांस भक्षण करने वाली (Meat-eater) - संहारक।
18फेत्कारी (Phetkari)‘फेट’ (चीत्कार) करने वाली (Howling/Hissing)।
19वीरभद्राक्षी (Virabhadrakshi)वीरभद्र जैसी उग्र आँखें (Eyes of Virabhadra)।
20धूम्राक्षी (Dhumrakshi)धुएं जैसी आँखें (Smoke-eyed) - अस्पष्टता नाश।
21कलहप्रिया (Kalahapriya)कलह (युद्ध) प्रिय (Lover of Strife) - रणचंडी।
22रक्ता (Rakta)लाल वर्ण वाली (Red-colored) - राजसी शक्ति।
23घोररक्ताक्षी (Ghoraraktakshi)भयानक लाल आँखें (Terrible Red-eyed)।
24विरूपाक्षी* (Virupakshi)*पुनः उल्लेख - विविध स्वरूपों वाली।
25भयङ्करी (Bhayankari)भय उत्पन्न करने वाली (Terrifying) - शत्रुओं के लिए।
26चौरिका (Chaurika)चोरी करने वाली (Thief) - अज्ञान/पाप की चोरी।
27मारिका (Marika)मारने वाली (Killer/Pestilence) - महामारी नाशक।
28चण्डी (Chandi)अत्यंत क्रोधी (Fierce Goddess)।
29वाराही (Varahi)वाराह शक्ति (Boar-faced) - सेनापति।
30मुण्डधारिणी (Mundadharini)मुंडमाला धारण करने वाली (Skull-garland Wearer)।
31भैरवी (Bhairavi)भैरव की शक्ति (Terror) - विनाश और सृजन।
32चक्रिणी (Chakrini)चक्र धारण करने वाली (Discus-bearer) - विष्णु शक्ति।
33क्रोधा (Krodha)साक्षात क्रोध (Anger personified)।
34दुर्मुखी (Durmukhi)कठोर मुख वाली (Ugly/Fierce-faced)।
35प्रेतवाहिनी (Pretavahini)प्रेत की सवारी करने वाली (Corpse-rider)।
36कण्टकी (Kantaki)कांटों वाली (Thorny) - बाधा उत्पन्न या नष्ट करने वाली।
37दीर्घलम्बोष्ठी (Dirghalamboshthi)लंबे होठों वाली (Long-lipped)।
38मालिनी (Malini)माला धारण करने वाली (Garlanded) - मातृका शक्ति।
39मन्त्रयोगिनी (Mantrayogini)मंत्रों की अधिष्ठात्री (Yogini of Mantras)।
40कालाग्नि (Kalagni)युगांत की अग्नि (Fire of Time) - प्रलयंकारी।
41मोहिनी (Mohini)मोहित करने वाली (Enchantress) - माया।
42चक्री (Chakri)कुम्हार/षटकोण चक्र वाली (Wheel/Hexagon)।
43कङ्काली (Kankali)कंकाल रूपा (Skeleton form)।
44भुवनेश्वरी (Bhuvaneshwari)भुवन की स्वामिनी (Mistress of the World)।
45कुण्डला (Kundala)कुंडल धारण करने वाली (Earring-wearer)।
46तालकी (Talaki)ताड़/वृक्ष से संबंधित (Palm-tree dweller)।
47लक्ष्मी (Lakshmi)समृद्धि की देवी (Goddess of Wealth)।
48यमदूती (Yamaduti)मृत्यु की दूती (Messenger of Death)।
49करालिनी (Karalini)भयंकर मुख वाली (Gaping-mouthed)।
50कौशिकी (Kaushiki)कोश (मयान) से निकली (Sheath-born) - अंबिका।
51भक्षिणी (Bhakshini)भक्षण करने वाली (Devourer)।
52यक्षी (Yakshi)यक्ष शक्ति (Female Yaksha) - धन रक्षक।
53कौमारी (Kaumari)कार्तिकेय की शक्ति (Virgin Power)।
54यन्त्रवाहिनी (Yantravahini)यंत्रों (मशीन/जादू) की वाहक (Carrier of Yantras)।
55विशाला (Vishala)विशाल (Vast/Wide)।
56कामुकी (Kamuki)इच्छा-रूपा (Lustful/Desiring)।
57व्याघ्री (Vyaghri)बाघिन (Tigress) - उग्रता।
58यक्षिणी* (Yakshini)*पुनः उल्लेख - सिद्धियों की दात्री।
59प्रेतभूषणी (Pretabhushani)प्रेतों के आभूषण पहनने वाली (Adorned with spirits)।
60धूर्जटा (Dhurjata)जटाधारी शिव की शक्ति (Matted-haired)।
61विकटी (Vikati)विशाल/विकराल (Monstrous)।
62घोरा (Ghora)अघोर शक्ति (Terrific)।
63कपाली (Kapali)कपाल धारिणी (Skull-bearer)।
64विषलाङ्गली (Vishalangali)विष का हल/अंग धारण करने वाली (Poison-plough holder)।

तंत्र रहस्य: ये 64 योगिनियाँ श्मशान साधना और कुंडलिनी जागरण में विशेष महत्व रखती हैं। 'रुद्रवैताली' और 'कङ्काली' जैसी शक्तियों का ध्यान साधक को मृत्यु के भय से मुक्त करता है।

पाठ विधि (Ritual Method)

  • योगिनी चक्र (Yogini Chakra): साधना के लिए मानसिक रूप से एक गोलाकार चक्र की कल्पना करें, जिसके बीच में भैरव और चारों ओर 64 योगिनियाँ हैं।

  • दीपक (Lamp): योगिनी साधना में चौमुखा दीपक (Four-faced lamp) या 64 आटे के छोटे दीपक जलाना अत्यंत फलदायी होता है। तेल के रूप में सरसों का तेल प्रयोग करें।

  • नैवेद्य (Offering): सात्विक पूजा में उड़द की दाल के बड़े, दही, गुड़ और लाल फूल (जास्वंद/गुड़हल) अर्पित करें।

  • दिशा: दक्षिण दिशा (South) की ओर मुख करके पाठ करना शत्रु नाश और तांत्रिक बाधा निवारण के लिए श्रेष्ठ है।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 64 योगिनियाँ कौन हैं?

64 योगिनियाँ (Chausath Yogini) माँ आदिशक्ति का विस्तार हैं। ये घोर और अघोर (सौम्य और उग्र) दोनों रूपों में पूजी जाती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने रक्तबीज असुर का रक्त पीने के लिए इनका सृजन किया था ताकि उसका रक्त जमीन पर न गिरे।

2. इस स्तोत्र की क्या विशेषता है?

यह स्तोत्र एक 'नामावली' है जो योगिनियों को उनकी शक्तियों (जैसे डाकिनी, राकिनी, भयंकरी) के अनुसार याद करता है। यह तंत्र साधना में 'रक्षा कवच' और 'सिद्धि प्रदायक' मंत्र के रूप में प्रयोग होता है।

3. हीरापुर और रानीपुर झरियाल क्यों प्रसिद्ध हैं?

ओडिशा के हीरापुर और रानीपुर झरियाल में 64 योगिनियों के प्राचीन गोलाकार मंदिर (Hypaethral Temples) हैं। ये मंदिर छत-विहीन होते हैं ताकि योगिनियाँ आकाश में उड़ सकें। यह स्तोत्र इन्हीं स्थानों की साधना परंपरा से जुड़ा है।

4. 'डाकिनी' और 'शाकिनी' का क्या अर्थ है?

ये शरीर के धातुओं (Tissues) की अधिष्ठात्री देवियां हैं। 'डाकिनी' त्वचा और मांस को नियंत्रित करती हैं, जबकि 'शाकिनी' अस्थियों (Hones) से संबंधित हैं। आध्यात्मिक रूप से, ये कुंडलिनी चक्रों की रक्षा करती हैं।

5. क्या गृहस्थ लोग इनकी साधना कर सकते हैं?

हाँ, सात्विक रूप में नाम-जाप या पाठ कोई भी कर सकता है। लेकिन उग्र तांत्रिक साधना (जैसे श्मशान साधना) केवल गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।

6. भैरव का इनमें क्या स्थान है?

योगिनियाँ शक्ति स्वरूपा हैं और भैरव (शिव) उनके केंद्र में विराजमान होते हैं। शिव के बिना शक्ति अधूरी है, इसलिए योगिनी मंदिरों के बीच में सदैव भैरव की मूर्ति होती है।

7. इस पाठ से क्या फल मिलता है?

इससे 'अष्ट सिद्धि' (Eight Occult Powers) प्राप्त हो सकती हैं। यह शत्रुओं का स्तंभन (Stambhan), नकारात्मक ऊर्जा का नाश और राजकीय कार्यों में विजय (Raja Vashikaran) दिलाता है।

8. पाठ करने का सही समय क्या है?

अर्धरात्रि (Midnight) या संध्याकाल (Dusk) इनका प्रिय समय है। अमावस्या, अष्टमी और ग्रहण काल में किया गया पाठ हजारों गुना फल देता है।

9. भोग में क्या चढ़ाना चाहिए?

तामसिक साधना में मदिरा और मांस का प्रयोग होता है, लेकिन सात्विक साधना में 'उड़द की दाल के बड़े', 'गुड़', 'लाल फूल' और 'सरसों के तेल का दीपक' श्रेष्ठ माना गया है।

10. क्या स्त्रियाँ यह पाठ कर सकती हैं?

अवश्य। योगिनियाँ स्वयं स्त्री शक्ति का चरम रूप हैं। स्त्रियाँ इनकी साधना अपनी आंतरिक शक्ति और सुरक्षा को जाग्रत करने के लिए कर सकती हैं।