Sankata Nama Ashtakam – सङ्कटनामाष्टकम्

सङ्कटनामाष्टकम् - परिचय (Introduction)
सङ्कटनामाष्टकम् (Sankata Nama Ashtakam) माँ आदिशक्ति के उस उग्र और करुणामयी स्वरूप की स्तुति है, जिसे 'सङ्कटा देवी' (Sankata Devi) के नाम से जाना जाता है। उनका प्रसिद्ध मंदिर काशी (वाराणसी) के सङ्कटा घाट पर, वीरेश्वर मंदिर के पास स्थित है।
यह स्तोत्र पद्म पुराण से लिया गया है। इसमें नारद मुनि, ऋषि जैगीषव्य से मनुष्यों के संकट दूर करने का उपाय पूछते हैं, जिसके उत्तर में ऋषि यह परम गोपनीय और शक्तिशाली स्तोत्र प्रदान करते हैं।
पौराणिक महत्त्व:
द्वापर युग में जब पांडव अपना राज्य हारकर वनवास और अज्ञातवास भोग रहे थे, तो वे काशी आए। वहाँ ऋषि मार्कंडेय ने युधिष्ठिर को आदेश दिया कि वे अपने खोए हुए वैभव और सुख को पाने के लिए 'माँ सङ्कटा' की शरण में जाएं। इस अष्टकम के प्रभाव से ही पांडवों ने अंततः अपनी विजय प्राप्त की।
आठ चमत्कारी नाम (The 8 Powerful Names)
इस अष्टकम में देवी के 8 दिव्य नामों का उल्लेख है, जिनका स्मरण मात्र सभी बाधाओं को दूर करता है:
- सङ्कटा (Sankata): सभी संकटों और विपत्तियों का नाश करने वाली।
- विजया (Vijaya): जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलाने वाली।
- कामदा (Kamada): भक्तों की सभी सात्विक मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली।
- दुःखहारिणी (Dukhhaharini): शारीरिक, मानसिक और दैविक दुःखों को हरने वाली।
- शर्वाणी (Sharvani): भगवान शिव (शर्व) की शक्ति, जो सर्वव्यापी है।
- कात्यायनी (Katyayani): ऋषि कात्यायन की पुत्री, युद्ध और विजय की देवी।
- भीमनयना (Bhimanayana): विशाल और उग्र नेत्रों वाली, जो दुष्टों को भयभीत करती हैं।
- सर्वरोगहरा (Sarvarogahara): असाध्य से असाध्य रोगों को दूर करने वाली वैद्यस्वरूपा।
पाठ विधि और लाभ (Ritual & Benefits)
त्रिसंध्य पाठ (Twice/Thrice Daily): श्लोक 11 में स्पष्ट निर्देश है कि जो व्यक्ति दिन में तीन बार (प्रातः, मध्याह्न, सायं) श्रद्धापूर्वक इन 8 नामों का पाठ करता है, वह निश्चित रूप से सभी संकटों से मुक्त हो जाता है।
शुक्रवार की महिमा: काशी में सङ्कटा देवी की पूजा के लिए शुक्रवार का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। लाल फूल (गुड़हल या गुलाब) और लाल चुनरी अर्पित करने से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
वंश वृद्धि (Lineage Growth): यह स्तोत्र "पुत्र-पौत्र-विवर्धनम्" है। जिन दम्पतियों को संतान सुख की बाधा हो, उनके लिए यह 'महावन्ध्या-प्रसूतिकृत्' (बांझपन को दूर करने वाला) रामबाण उपाय है।
रोग मुक्ति: यदि कोई लंबी बीमारी से ग्रस्त हो, तो प्रतिदिन 108 बार "ॐ ह्रीं श्रीं सङ्कटायै नमः" मंत्र के साथ इस अष्टकम का पाठ करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।