Sri Tripura Bhairavi Ashtottara Shatanamavali – श्री त्रिपुरभैरवी अष्टोत्तरशतनामावली
Sri Tripura Bhairavi Ashtottara Shatanamavali: 108 Names of Bhairavi

श्री त्रिपुरभैरवी अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)
अर्चन का महत्त्व (Significance of Archana)
- कुमकुम अर्चन (Kumkum Archana): "ॐ कुङ्कुमप्रीतायै नमः" (नाम ७३) - देवी को कुमकुम अत्यंत प्रिय है। प्रत्येक नाम के साथ चुटकी भर कुमकुम देवी के चरणों में या यंत्र पर चढ़ाएं। यह सौभाग्य और आकर्षण बढ़ाता है।
- पुष्प अर्चन: लाल फूल (गुड़हल/कनेर) से अर्चन करने से शत्रु बाधाएं समाप्त होती हैं और 'सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै' (नाम ८) का आशीर्वाद मिलता है।
प्रमुख नामों की शक्ति (Power of Key Names)
- महापातकनाशिन्यै (२७): जो महान पापों का भी नाश कर देती हैं। प्रायश्चित के लिए यह नाम रामबाण है।
- क्लेशसङ्घनिवारिण्यै (९५): जो दुखों के समूह (Group of miseries) को एक साथ नष्ट करती हैं।
- महावाण्यै (१०२): जो 'महावाणी' (Great Speech) हैं। कवियों और वक्ताओं के लिए यह नाम सिद्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र में श्लोक होते हैं जिन्हें गाया या पढ़ा जाता है। नामावली में देवी के नामों की सूची होती है (जैसे 'ॐ भैरव्यै नमः'), जिसका उपयोग पूजा या हवन में एक-एक नाम पर आहुति/पुष्प चढ़ाने (Archana) के लिए किया जाता है।
2. इसमें 'भैरवी' नाम का क्या अर्थ है?
'भैरवी' का अर्थ है - 'भरण पोषण करने वाली' (Bharana) और 'भय का नाश करने वाली' (Bhaya-Nashini)। जो साधक की रक्षा भी करे और पालन भी, वह भैरवी है।
3. सिक्स्थ नाम 'महापातकनाशिन्यै' का क्या महत्त्व है?
नाम संख्या २७ 'महापातकनाशिन्यै' (Mahapataka Nashini) बताती है कि देवी ब्रह्महत्या जैसे बड़े पापों (Great Sins) को भी भस्म करने में सक्षम हैं।
4. अर्चन (Archana) किस वस्तु से करना चाहिए?
भैरवी का अर्चन कुमकुम (Vermilion) या लाल कनेर/गुड़हल (Red Oleander/Hibiscus) के फूलों से करना सर्वश्रेष्ठ है। लाल रंग उनकी ऊर्जा (Tejas) का प्रतीक है।
5. क्या इससे 'वाक सिद्धि' मिलती है?
हाँ। नाम संख्या ३६ 'प्रणतक्लेशनाशिन्यै' और १०२ 'महावाण्यै' (Mahavani - Great Speech) सिद्ध करते हैं कि वे वाणी की अधिष्ठात्री हैं और साधक को वाक-शक्ति देती हैं।
6. क्या पुरुष और स्त्रियाँ दोनों अर्चन कर सकते हैं?
हाँ, दोनों कर सकते हैं। स्त्रियाँ कुमकुम से और पुरुष पुष्प या अक्षत (लाल रंगे हुए) से अर्चन करें।
7. इसका पाठ कब करना चाहिए?
विशेष संकल्प के साथ ८, ११ या २१ दिनों तक प्रतिदिन १०८ नामों से अर्चन करें। समय रात्रिकालीन (शाम ७ बजे के बाद) उत्तम है।
8. नाम संख्या ८ 'सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै' का क्या फल है?
यह नाम (Sarva Sampat Pradayini) लक्ष्मी का स्वरूप है। इसके जप से साधक को धन, यश और भौतिक सुख-संपत्ति प्राप्त होती है।
9. क्या बिना दीक्षा के यह पाठ सुरक्षित है?
नामावली का पाठ सुरक्षित है क्योंकि यह 'नाम' जप है, 'बीज' मंत्र नहीं। भक्ति भाव से कोई भी इसे पढ़ सकता है।
10. इसका मूल मंत्र क्या है?
नाम अर्चन के साथ मूल मंत्र 'ह्स्रैं ह्सक्ल्रीं ह्स्रौं' (Hsraim HsklrIm Hsraum) का मानसिक जप भी किया जा सकता है, यदि गुरु प्रदत्त हो। अन्यथा केवल नामों का उच्चारण पर्याप्त है।