Sri Tara Ashtottara Shatanamavali – श्री ताराम्बा अष्टोत्तरशतनामावली
Sri Tara Ashtottara Shatanamavali: 108 Names for Archana & Worship

श्री ताराम्बा अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)
अर्चना और हवन का महत्व (Significance)
पाठ के लाभ (Benefits)
- वाक्सिद्धि (Power of Speech): नामावली में 'नीलसरस्वती' और 'वागीश्वरी' जैसे नाम हैं। इसकी अर्चना से वाणी दोष समाप्त होते हैं और साधक में अद्भुत कवित्व शक्ति आती है।
- शत्रु विजय: 'उग्रतारा', 'चंडी', 'दुर्गा' जैसे नाम शत्रुओं और विघ्नों का नाश करते हैं। यह कोर्ट-कचहरी और विवादों में विजय दिलाते हैं।
- धन और यश: 'पद्ममाला' और 'शोभना' जैसे नाम लक्ष्मी और सौन्दर्य के प्रतीक हैं। इससे आर्थिक संपन्नता और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
अर्चना विधि (Ritual Method)
- तैयारी: स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। सामने तारा यन्त्र या माँ का चित्र स्थापित करें।
- सामग्री: एक थाली में 108 लाल पुष्प (गुड़हल श्रेष्ठ है) या कुमकुम रखें। यदि पुष्प न मिले तो अक्षत (चावल) को लाल रंग में रंग लें।
- प्रक्रिया: दाहिने हाथ की अनामिका और अंगूठे से पुष्प/कुमकुम उठाएं। प्रत्येक नाम के साथ "ओं [नाम] नमः" बोलकर यंत्र या चित्र के चरणों में अर्पित करें।
- समय: यह प्रयोग नवरात्रि, अष्टमी, चतुर्दशी या प्रत्येक मंगलवार को करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यदि 108 फूल न मिलें तो क्या करें?
आप 108 सिक्के, 108 लौंग, या केवल कुमकुम से भी अर्चना कर सकते हैं। भाव मुख्य है, सामग्री गौण।
2. क्या नामावली का पाठ बिना अर्पण के कर सकते हैं?
हाँ, इसे नित्य पाठ के रूप में भी पढ़ा जा सकता है। यह स्तोत्र जितना ही फलदायी है।
3. 'एकजटा' का क्या अर्थ है?
एकजटा तारा का एक उग्र रूप है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ है - 'एक ही लक्ष्य' (One-pointedness)। यह एकाग्रता की देवी हैं।
4. क्या पुरुष और स्त्रियाँ दोनों कुमकुम चढ़ा सकते हैं?
हाँ, कुमकुम अर्पण (कुंकुमार्चन) का अधिकार स्त्री और पुरुष दोनों को है। यह शक्ति आराधना का अभिन्न अंग है।
5. कौन सा तेल दीपक में जलाएं?
तारा साधना में सरसों के तेल (Mustard Oil) का दीपक जलाना श्रेष्ठ माना गया है, विशेषकर शत्रु नाश के लिए। शांति के लिए घी का दीपक जलाएं।
6. क्या बच्चे यह पाठ कर सकते हैं?
विद्यार्थी 'नीलसरस्वती' के 108 नामों का पाठ स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। यह उनके लिए सुरक्षित और लाभकारी है।
7. 'शव-साधना' से इसका क्या संबंध है?
तारा श्मशान वासिनी हैं। श्लोक 17 (स्तोत्र में) में श्मशान का उल्लेख है। हालाँकि, नामावली का पाठ गृहस्थ घर में सात्विक विधि से कर सकते हैं। शव साधना केवल अघोरियों के लिए है।
8. 'ह्रीं' बीज मंत्र का उच्चारण कैसे करें?
'ह्रीं' (Hreem) माया बीज है। इसे नाभि से जोर लगाते हुए 'ह्र' और अनुस्वार 'ईं' का दीर्घ उच्चारण करना चाहिए।
9. क्या पाठ के बाद आरती करनी चाहिए?
अर्चना पूर्ण होने पर क्षमा प्रार्थना करें और फिर देवी की आरती अवश्य करनी चाहिए।
10. क्या यह मोक्ष देता है?
नामावली में 'कैवल्यदायिनी' और 'मोक्षप्रदा' जैसे भाव निहित हैं। निष्काम भाव से की गई अर्चना अंततः मोक्ष की ओर ले जाती है।