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Sri Siddhi Devi Ashtottara Shatanamavali – श्री सिद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Siddhi Devi Ashtottara Shatanamavali: 108 Names for Success & Achievements

Sri Siddhi Devi Ashtottara Shatanamavali – श्री सिद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली
ॐ स्वानन्दभवनान्तस्थहर्म्यस्थायै नमः । ॐ गणपप्रियायै नमः । ॐ सम्योगस्वानन्दब्रह्मशक्त्यै नमः । ॐ सम्योगरूपिण्यै नमः । ॐ अतिसौन्दर्यलावण्यायै नमः । ॐ महासिद्ध्यै नमः । ॐ गणेश्वर्यै नमः । ॐ वज्रमाणिक्यमकुटकटकादिविभूषितायै नमः । ॐ कस्तूरीतिलकोद्भासिनिटिलायै नमः । ९ ॥ ॐ पद्मलोचनायै नमः । ॐ शरच्चाम्पेयपुष्पाभनासिकायै नमः । ॐ मृदुभाषिण्यै नमः । ॐ लसत्काञ्चनताटङ्कयुगलायै नमः । ॐ योगिवन्दितायै नमः । ॐ मणिदर्पणसङ्काशकपोलायै नमः । ॐ काङ्क्षितार्थदायै नमः । ॐ ताम्बूलपूरितस्मेरवदनायै नमः । ॐ विघ्ननाशिन्यै नमः । १८ ॥ ॐ सुपक्वदाडिमीबीजरदनायै नमः । ॐ रत्नदायिन्यै नमः । ॐ कम्बुवृत्तसमच्छायकन्धरायै नमः । ॐ करुणायुतायै नमः । ॐ मुक्ताभायै नमः । ॐ दिव्यवसनायै नमः । ॐ रत्नकल्हारमालिकायै नमः । ॐ गणेशबद्धमाङ्गल्यायै नमः । ॐ मङ्गलायै नमः । २७ ॥ ॐ मङ्गलप्रदायै नमः । ॐ वरदाभयहस्ताब्जायै नमः । ॐ भवबन्धविमोचिन्यै नमः । ॐ सुवर्णकुम्भयुग्माभसुकुचायै नमः । ॐ सिद्धिसेवितायै नमः । ॐ बृहन्नितम्बायै नमः । ॐ विलसज्जघनायै नमः । ॐ जगदीश्वर्यै नमः । ॐ सौभाग्यजातशृङ्गारमध्यमायै नमः । ३६ ॥ ॐ मधुरस्वनायै नमः । ॐ दिव्यभूषणसन्दोहरञ्जितायै नमः । ॐ ऋणमोचिन्यै नमः । ॐ पारिजातगुणाधिक्यपदाब्जायै नमः । ॐ परमात्मिकायै नमः । ॐ सुपद्मरागसङ्काशचरणायै नमः । ॐ चिन्तितार्थदायै नमः । ॐ ब्रह्मभावमहासिद्धिपीठस्थायै नमः । ॐ पङ्कजासनायै नमः । ४५ ॥ ॐ हेरम्बनेत्रकुमुदचन्द्रिकायै नमः । ॐ चन्द्रभूषणायै नमः । ॐ सचामरशिवावाणीसव्यदक्षिणवीजितायै नमः । ॐ भक्तरक्षणदाक्षिण्यकटाक्षायै नमः । ॐ कमलासनायै नमः । ॐ गणेशालिङ्गनोद्भूतपुलकाङ्ग्यै नमः । ॐ परात्परायै नमः । ॐ लीलाकल्पितब्रह्माण्डकोटिकोटिसमन्वितायै नमः । ॐ वाणीकोटिसमायुक्तकोटिब्रह्मनिषेवितायै नमः । ५४ ॥ ॐ लक्ष्मीकोटिसमायुक्तविष्णुकोटिप्रपूजितायै नमः । ॐ गौरीकोटिसमायुक्तशम्भुकोटिसुसेवितायै नमः । ॐ प्रभाकोटिसमायुक्तकोटिभास्करवन्दितायै नमः । ॐ भानुकोटिप्रतीकाशायै नमः । ॐ चन्द्रकोटिसुशीतलायै नमः । ॐ चतुष्षष्टिकोटिसिद्धिनिषेवितपदाम्बुजायै नमः । ॐ मूलाधारसमुत्पन्नायै नमः । ॐ मूलबन्धविमोचन्यै नमः । ॐ मूलाधारैकनिलयायै नमः । ६३ ॥ ॐ योगकुण्डलिभेदिन्यै नमः । ॐ मूलाधारायै नमः । ॐ मूलभूतायै नमः । ॐ मूलप्रकृतिरूपिण्यै नमः । ॐ मूलाधारगणेशानवामभागनिवासिन्यै नमः । ॐ मूलविद्यायै नमः । ॐ मूलरूपायै नमः । ॐ मूलग्रन्थिविभेदिन्यै नमः । ॐ स्वाधिष्ठानैकनिलयायै नमः । ७२ ॥ ॐ ब्रह्मग्रन्धिविभेदिन्यै नमः । ॐ मणिपूरान्तरुदितायै नमः । ॐ विष्णुग्रन्धिविभेदिन्यै नमः । ॐ अनाहतैकनिलयायै नमः । ॐ रुद्रग्रन्धिविभेदिन्यै नमः । ॐ विशुद्धिस्थाननिलयायै नमः । ॐ जीवभावप्रणाशिन्यै नमः । ॐ आज्ञाचक्रान्तरालस्थायै नमः । ॐ ज्ञानसिद्धिप्रदायिन्यै नमः । ८१ ॥ ॐ ब्रह्मरन्ध्रैकनिलयायै नमः । ॐ ब्रह्मभावप्रदायिन्यै नमः । ॐ षट्कोणाष्टदलयुत-श्रीसिद्धियन्त्रमध्यगायै नमः । ॐ अन्तर्मुखजनानन्तफलदायै नमः । ॐ शोकनाशिन्यै नमः । ॐ अव्याजकरुणापूरपूरितायै नमः । ॐ वसुधारिण्यै नमः । ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः । ॐ लक्ष्म्यै नमः । ९० ॥ ॐ सर्वपापप्रणाशिन्यै नमः । ॐ भुक्तिसिद्ध्यै नमः । ॐ मुक्तिसिद्ध्यै नमः । ॐ सुधामण्डलमध्यगायै नमः । ॐ चिन्तामणये नमः । ॐ सर्वसिद्ध्यै नमः । ॐ कमलायै नमः । ॐ वल्लभायै नमः । ॐ शिवायै नमः । ९९ ॥ ॐ सिद्धलक्ष्म्यै नमः । ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमः । ॐ जयलक्ष्म्यै नमः । ॐ वरप्रदायै नमः । ॐ रमायै नमः । ॐ नन्दायै नमः । ॐ महालक्ष्म्यै नमः । ॐ विभूत्यै नमः । ॐ भक्तिवर्धिन्यै नमः । १०८ ॥ ॥ इति श्री सिद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥

श्री सिद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)

श्री सिद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली माँ सिद्धि (सिद्धिदात्री) के 108 पावन नामों का संग्रह है। ये देवी भगवान गणेश की शक्ति (अर्धांगिनी) और अष्ट सिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) की स्वामिनी हैं।
तंत्र शास्त्र में, वे मूलाधार चक्र में गणेश जी के साथ निवास करती हैं और कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा 'सिद्धिदात्री' के रूप में की जाती है। वे साधकों को न केवल आध्यात्मिक मोक्ष (मुक्ति) बल्कि सांसारिक भोग (भुक्ति) भी प्रदान करती हैं।
नामावली में उन्हें गणपप्रिया (गणेश की प्रिय), विघ्ननाशिनी (बाधाएं हरने वाली), और महालक्ष्मी (धन देने वाली) के रूप में स्तुति की गई है।

प्रमुख नामों का अर्थ (Key Names Explained)

  • गणपप्रिया (2): भगवान गणेश की अत्यंत प्रिय पत्नी/शक्ति।
  • महासिद्धि (6): महान सिद्धियों (Ashta Siddhis) की दात्री।
  • विघ्ननाशिनी (19): सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं का नाश करने वाली।
  • गणेशबद्धमाङ्गल्या (28): गणेश जी के साथ मंगल सूत्र (विवाह बंधन) में बंधी हुई।
  • मूलाधारनिवासिनी (86): शरीर के मूलाधार चक्र (Root Chakra) में वास करने वाली।
  • शोकनाशिनी (106): भक्तों के शोक और दुख को नष्ट करने वाली।
  • रत्नदायिनी (22): रत्न, धन और वैभव प्रदान करने वाली।
  • योगिवन्दिता (26): महान योगियों द्वारा पूजित।
  • ज्ञानसिद्धिप्रदायिनी (81): आत्मज्ञान और विद्या की सिद्धि देने वाली ('बुद्धि' स्वरूपा)।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • अष्ट सिद्धि प्राप्ति: साधक को अणिमा, महिमा आदि सिद्धियों और आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति होती है।
  • कार्य सफलता: 'विघ्ननाशिनी' और 'सर्वसिद्धि' नाम के प्रभाव से सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
  • धन-ऐश्वर्य: 'रत्नदायिनी' और 'महालक्ष्मी' कृपा से दरिद्रता दूर होती है और समृद्धि आती है।
  • ज्ञान और बुद्धि: विद्यार्थियों और साधकों को तीव्र बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  • कुंडलिनी जागरण: मूलाधार चक्र शुद्ध होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • विवाह बाधा निवारण: गणेश और सिद्धि की संयुक्त उपासना से सुखी दांपत्य जीवन मिलता है।

पाठ विधि (Ritual Method)

सिद्धि विनायक पूजा:

  1. समय: बुधवार, चतुर्थी तिथि (विशेषकर गणेश चतुर्थी), या नवरात्रि की नवमी।
  2. आसन: लाल आसन पर पूर्व या उत्तर मुख।
  3. मूर्ति: गणेश जी के साथ रिद्धि-सिद्धि (या सिद्धि देवी) की प्रतिमा/यंत्र।
  4. भोग: मोदक, लड्डू, गुड़, नारियल।
  5. पुष्प: लाल गुड़हल (हिबिस्कस) या गेंदा, दूर्वा (गणेश जी को)।
  6. पाठ: पहले 'ॐ गं गणपतये नमः' का जप करें, फिर 108 नामों का पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सिद्धि देवी कौन हैं?

गणेश जी की शक्ति और पत्नी। अष्ट सिद्धियों की स्वामिनी। सिद्धिदात्री (नवदुर्गा) रूप।

2. सिद्धि देवी और गणेश का क्या संबंध है?

सिद्धि (सफलता) और बुद्धि (विवेक) गणेश जी की पत्नियां हैं। वे उनकी शक्ति हैं।

3. अष्ट सिद्धियां क्या हैं?

अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व। ये 8 अलौकिक शक्तियां हैं।

4. 'मूलाधारनिवासिनी' (86) का क्या अर्थ है?

वे मूलाधार चक्र (Root Chakra) में वास करती हैं, जहाँ गणेश जी भी विराजमान हैं। कुंडलिनी शक्ति का आधार।

5. क्या इससे धन प्राप्ति होती है?

हाँ, उन्हें 'रत्नदायिनी' और 'महालक्ष्मी' भी कहा गया है। ऋद्धि-सिद्धि (समृद्धि और सफलता) साथ आती हैं।

6. 'शोकनाशिनी' (106) का क्या महत्व है?

भक्तों के दुखों और शोकों को नष्ट करने वाली।

7. कौन-कौन से प्रमुख नाम हैं?

गणपप्रिया, विघ्ननाशिनी, सर्वसिद्धि, योगवंदिता, महालक्ष्मी, ज्ञानसिद्धिप्रदायिनी।

8. किस दिन पाठ करना शुभ है?

बुधवार, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि (महानवमी)।