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Sri Manasa Devi Mantra – श्री मनसा देवी मूलमन्त्रम्

Sri Manasa Devi Mantra – श्री मनसा देवी मूलमन्त्रम्
॥ श्री मनसा देवी द्वादशाक्षर मूलमन्त्रम् ॥ ध्यानम् श्वेतचम्पकवर्णाभां रत्नभूषणभूषिताम् । वह्निशुद्धांशुकाधानां नागयज्ञोपवीतिनीम् ॥ १ ॥ महाज्ञानयुतां चैव प्रवरां ज्ञानिनां सताम् । सिद्धाधिष्टातृदेवीं च सिद्धां सिद्धिप्रदां भजे ॥ २ ॥ पञ्चोपचार पूजा ओं नमो मनसायै – गन्धं परिकल्पयामि । (चन्दन) ओं नमो मनसायै – पुष्पं परिकल्पयामि । (पुष्प) ओं नमो मनसायै – धूपं परिकल्पयामि । (धूप) ओं नमो मनसायै – दीपं परिकल्पयामि । (दीप) ओं नमो मनसायै – नैवेद्यं परिकल्पयामि । (दूध/केला) ॥ मूलमन्त्रम् (Mula Mantra) ॥ ओं ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मनसादेव्यै स्वाहा ॥ (Om Hreem Shreem Kleem Aim Manasa Devyai Svaha) ॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्ते महापुराणे प्रकृतिखण्डे षट्चत्वारिंशत्तमोऽध्याये द्वादशाक्षर मूलमन्त्रम् सम्पूर्णः ॥

श्री मनसा देवी मूलमन्त्र - परिचय (Introduction)

श्री मनसा देवी, जिन्हें नागों की अधिष्ठात्री देवी और 'विषहरी' (Destroyer of Poison) कहा जाता है, महर्षि कश्यप की 'मानस पुत्री' (Mind-born daughter) और नागराज वासुकि की बहन हैं। इनका विवाह जरत्कारु मुनि से हुआ और इनके पुत्र आस्तीक मुनि ने जनमेजय के सर्प-यज्ञ को रोककर नाग जाति की रक्षा की थी।
यह 12 अक्षरों (Syllables) का मूल मन्त्र ब्रह्मवैवर्त पुराण से उद्धृत है। इसमें देवी के चार प्रमुख बीजाक्षरों का समावेश है: 'ह्रीं' (माया/शक्ति), 'श्रीं' (लक्ष्मी/समृद्धि), 'क्लीं' (काम/इच्छा), और 'ऐं' (सरस्वती/ज्ञान)। इसीलिए यह मन्त्र केवल विष नाश के लिए ही नहीं, बल्कि धन, ज्ञान और संतान प्राप्ति के लिए भी अमोघ है।

महत्त्व और लाभ (Significance & Benefits)

"मनसा देवी नमस्तुभ्यं..."
भक्तिभाव से इस मन्त्र का जप करने से कालसर्प दोष, पितृ दोष और राहु-केतु की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
  • सर्प भय नाश (Protection from Snakes): यह मन्त्र सांपों के भय को दूर करता है। जंगलों या खेतों में काम करने वाले लोग अपनी सुरक्षा के लिए इसका नित्य पाठ करते हैं।
  • विष निवारण (Poison Cure): सर्पदंश, बिच्छू के काटने या भोजन में विष प्रभाव को कम करने के लिए इस मन्त्र द्वारा जल अभिमंत्रित करके पिलाया जाता है।
  • संतान सुख (Fertility): यह देवी 'उर्वरता' (Fertility) की प्रतीक हैं। निस्संतान दम्पति यदि नाग पंचमी का व्रत रखकर यह मन्त्र जपें, तो उन्हें स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है।
  • रोग मुक्ति: चेचक (Smallpox), खसरा और चर्म रोगों (Skin diseases) को ठीक करने में मनसा देवी की उपासना अत्यंत प्रभावी मानी गई है।

साधना और पूजन विधि (Ritual Method)

मनसा देवी की पूजा की विधि अन्य देवियों से थोड़ी भिन्न और विशिष्ट है, जिसमें प्रकृति पूजन का महत्त्व है।
  1. सीज का पौधा (Sij Plant): मनसा देवी की पूजा मूर्ति के अलावा 'सीज' (Euphorbia) के पौधे या कैक्टस की टहनी के रूप में की जाती है। इसे घर के आंगन में स्थापित करें।
  2. दूध का भोग: देवी को कच्चा दूध (बिना उबाला हुआ) सबसे अधिक प्रिय है। नाग पंचमी के दिन किसी भी नाग-बा बॉबी (Snake hole) या प्रतीक रूप में मिट्टी के कलश पर दूध चढ़ाएं।
  3. समय (Time): श्रावण मास की नाग पंचमी, और प्रत्येक माह की संक्रांति या पंचमी तिथि। गुरुवार (Thursday) और शनिवार (Saturday) भी इनकी पूजा के लिए विशेष हैं।
  4. नैवेद्य: दूध के अलावा केले (Banana) और सफ़ेद बताशे का भोग लगाएं। याद रखें, इनकी पूजा में लोहे के बर्तन का प्रयोग वर्जित माना जाता है (मिट्टी या तांबे का प्रयोग करें)।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. माँ मनसा देवी कौन हैं?

माँ मनसा देवी 'नागों की देवी' हैं। वे ऋषि कश्यप की मानसी कन्या (मन से उत्पन्न), भगवान शिव की शिष्या और नागराज वासुकि की बहन हैं। उन्हें 'विषहारी' भी कहा जाता है।

2. इस मन्त्र का मुख्य लाभ क्या है?

इस मन्त्र का सबसे बड़ा लाभ 'सर्प-भय नाश' (Protection from snakes) और 'विष-निवारण' (Curing poisons) है। इसके अलावा, यह संतान प्राप्ति और त्वचा रोगों (Skin diseases) को ठीक करने के लिए भी प्रसिद्ध है।

3. पूजा में कौन सा पौधा चढ़ाया जाता है?

मनसा देवी की पूजा में 'सीज' (Sij) या 'यूफोर्बिया' (Euphorbia) के पौधे की पूजा की जाती है, जिसे देवी का स्वरूप माना जाता है। बंगाल में इसे 'मनसा-गाछ' कहते हैं।

4. देवी को क्या भोग प्रिय है?

माँ मनसा को 'कच्चा दूध' (Unboiled Milk) और 'केला' (Banana) अत्यंत प्रिय है। नाग पंचमी पर सांप के बिलों या मिट्टी के कलश पर दूध चढ़ाने की परंपरा है।

5. मन्त्र में 'ह्रीं श्रीं क्लीं' का क्या अर्थ है?

'ह्रीं' माया बीज है (शक्ति), 'श्रीं' लक्ष्मी बीज है (समृद्धि), और 'क्लीं' काम बीज है (आकर्षण/इच्छा पूर्ति)। ये बीजाक्षर देवी की पूर्ण शक्ति को जाग्रत करते हैं।

6. क्या यह मन्त्र संतान प्राप्ति में सहायक है?

हाँ, मनसा देवी को 'प्रजनन और उर्वरता' (Fertility) की देवी भी माना जाता है। जो दम्पति सच्चे मन से 41 दिनों तक दूध चढ़ाकर यह मन्त्र जपते हैं, उन्हें संतान सुख प्राप्त होता है।

7. पूजा का श्रेष्ठ समय कौन सा है?

श्रावण मास (Shravan Month), विशेष रूप से 'नाग पंचमी' (Nag Panchami) का दिन देवी की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसके अलावा गुरुवार और शनिवार भी शुभ माने जाते हैं।

8. क्या स्त्रियां मासिक धर्म में यह मन्त्र जप सकती हैं?

नहीं, मासिक धर्म के दौरान देवी मन्त्रों का जप और स्पर्श वर्जित है। शुद्धि के बाद ही पुनः पाठ आरंभ करें।

9. आस्तीक ऋषि से इनका क्या संबंध है?

आस्तीक मुनि माँ मनसा और महर्षि जरत्कारु के पुत्र थे। उन्होंने ही जनमेजय के नाग-यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की थी। इसलिए 'आस्तीक' का नाम लेने से भी सर्प-भय दूर होता है।

10. क्या चेचक (Chickenpox) जैसे रोगों में इसका लाभ है?

हाँ, शीतला माता की तरह मनसा देवी की पूजा भी चेचक, खसरा और नेत्र रोगों (Eye diseases) की शांति के लिए की जाती है।