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श्री महावाराही अष्टोत्तरशतनामावलिः (बीजमन्त्र सहित)

Sri Mahavarahi Ashtottara Satanamavali — Most Secretive Beeja Mantra Edition

श्री महावाराही अष्टोत्तरशतनामावलिः (बीजमन्त्र सहित)
॥ श्री महावाराही अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ (बीजमन्त्र सहित जप-रूप) ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ महामायायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ वाराह्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ कोलस्यायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ महारौद्र्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ वज्रतुण्डधारायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ याम्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सहस्रसूर्यसङ्काश्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ तेजपुञ्जसमन्वितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रुद्ररूपमहाघोरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ घोररूपायै नमः ॥ १० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ भयङ्कर्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ बन्धूकपुष्पसङ्काशायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ दाडिमीकुसुमोपमायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ तीक्ष्णसिन्दूरसङ्काश्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ जपाकुसुमसन्निभायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ यौवनस्थायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मदोन्मत्तायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ तुङ्गपीनपयोधरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वालङ्कारभूषाङ्ग्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मुण्डमालाविलम्बिन्यै नमः ॥ २० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ नेत्रत्रयायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रक्तघोराक्ष्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ दंष्ट्राकरालभासुरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ चतुर्भुजधरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ अष्टभुजधरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ दक्षिणेहलंधृत्वायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मुसलवामकरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ वरधरादेव्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ नानालङ्कारमण्डितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रक्ताम्भोजासनायै नमः ॥ ३० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ प्रेतोपरिसंस्थितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वलक्षणसंयुक्तायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वावयवशोभितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मद्यमांसप्रियायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मदिरानन्दवन्दितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वलोकपूजितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ त्रैलोक्यचराचररूपायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ त्रिकोणमहाचक्रसंस्थितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ पञ्चकोणचक्रवासिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ अन्धिनीपूजनीयायै नमः ॥ ४० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रुन्धिनीपूजनीयायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ जम्भिनीपूजनीयायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मोहिनीपूजनीयायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ स्तम्भिनीपूजनीयायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ षट्कोणचक्रमध्यस्थायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ डाकिनीपूजितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वकर्मभक्षिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ क्षयकारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ राकिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ लाकिन्यै नमः ॥ ५० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ काकिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ साकिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ हाकिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ याकिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ निग्रहानुग्रहात्मिकायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वसिद्धिकर्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ परायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मारणोच्चाटनदेव्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ कृष्णवर्णसुतेजसायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ प्रेतासनस्थायै नमः ॥ ६० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ खड्गचक्रमुशलधरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ खेटशङ्खहलाभयकरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वशत्रुक्षयङ्कर्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ पीतवर्णायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रक्तरूपिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ वन्दन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रोदन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ कृष्णानलसमन्निभायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ जम्भके नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ धूम्रवर्णायै नमः ॥ ७० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मुक्तिदायिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रक्ताङ्ग्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सङ्ग्रामकृष्णरूपधारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ विविधाकारपूजितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ अनेककोलमूर्त्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ चामुण्डारूपिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ त्रैलोक्यायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ वमितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ उग्ररूपभयङ्कर्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ तुण्डप्रहारिण्यै नमः ॥ ८० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ घुत्कारनादिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ महाशत्रुचर्विण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ कटकरायमण्डितायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रुधिरप्रियायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ महाघूर्णितलोचनायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ नृत्यमानमहादेव्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ नित्यश्मशानवासिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वसत्त्वरक्षिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वसंकटहारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ रणभयरक्षिण्यै नमः ॥ ९० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ चौरव्याघ्रभयहारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ भूतप्रेतभयहारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ अष्टनागभयहारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ राक्षसभयहारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वदुर्निवारणकारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ शस्त्रास्त्रधरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ अङ्कुशधरायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ वन्ध्यापुत्रप्रदायिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ पाशमोक्षप्रदायिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ श्रीपञ्चमीमातायै नमः ॥ १०० ॥ ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ उग्ररूपभयापहायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ क्रोधध्यानप्रियायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ भैरव्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सप्तरात्रिप्रियायै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ शान्तिपुष्टिवशीकरणप्रदायिन्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ जम्भनकारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ मारणकारिण्यै नमः । ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ सर्वसिद्धिप्रदायिन्यै नमः ॥ १०८ ॥ ॥ इति श्री महावाराही अष्टोत्तरशतनामावलिः (बीजमन्त्र सहित) सम्पूर्णम् ॥

बीजमन्त्र सहित नामावली — विशेषता और रहस्य

यह अत्यंत गोपनीय नामावली है। सामान्य अष्टोत्तरशतनामावली में प्रत्येक नाम केवल "ॐ" से आरम्भ होता है। किन्तु इस संस्करण में प्रत्येक नाम "ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ" — चार बीजाक्षरों से प्रारम्भ होता है।
ऐँ = वाक् बीज (सरस्वती/वागीश्वरी शक्ति)। ग्लौँ = वाराही का मूल बीजाक्षर। पुनः ऐँ = शक्ति का द्विगुणीकरण। = प्रणव (सर्वव्यापक ब्रह्म)। ये चारों मिलकर प्रत्येक नाम को मन्त्र-जप का स्वरूप देते हैं।
इस नामावली के 108 नाम वाराही देवी के स्वरूप (1-20), आयुध (21-35), चक्र-स्थिति (36-54), शक्ति-कर्म (55-70), युद्ध-रूप (71-90), और रक्षा-वरदान (91-108) — छह प्रमुख विषयों को समाहित करते हैं।

सामान्य vs बीजमन्त्र नामावली — तुलना

सामान्य: "ॐ महामायायै नमः" — केवल नाम-स्मरण, बिना दीक्षा पढ़ सकते हैं, अर्चन (पुष्पार्पण) में प्रयुक्त।
बीजमन्त्र सहित: "ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ महामायायै नमः" — मन्त्र-जप स्वरूप, दीक्षा अनुशंसित, तांत्रिक साधना में प्रयुक्त। प्रत्येक नाम स्वयं एक सम्पूर्ण मन्त्र बन जाता है।
बीजमन्त्र सहित पात्र करने से शक्ति कई गुना बढ़ती है क्योंकि बीजाक्षर देवी की मूल ऊर्जा को सक्रिय करते हैं। तांत्रिक ग्रन्थों में इसे "गुप्त-नामावली" कहा गया है।

108 नामों का वर्गीकरण

स्वरूप वर्णन (1-20): महामाया, कोलस्या, महारौद्री, वज्रतुण्ड, सहस्रसूर्यसंकाश, रुद्ररूप, बन्धूकपुष्पवर्णा, यौवनस्था, मुण्डमालाविलम्बिनी आदि।
आयुध और आसन (21-35): चतुर्भुज, अष्टभुज, हलधारिणी, मुसल, वरद, रक्ताम्भोजासना, प्रेतोपरि-संस्थित।
चक्र और योगिनी (36-54): त्रिकोणमहाचक्र, पंचकोणचक्र, अन्धिनी-रुन्धिनी-जम्भिनी-मोहिनी-स्तम्भिनी (पांच अंग देवता), षट्कोणचक्र, डाकिनी-राकिनी-लाकिनी-काकिनी-साकिनी-हाकिनी-याकिनी (सप्त चक्र योगिनियां)।
शक्ति-कर्म (55-70): निग्रहानुग्रहात्मिका, सर्वसिद्धिकरी, मारणोच्चाटन, खड्गचक्रमुशलधरा, शत्रुक्षयंकरी, मुक्तिदायिनी।
युद्ध-रूप (71-90): चामुण्डारूपिणी, उग्ररूपभयंकरी, तुण्डप्रहारिणी, घुत्कारनादिनी, महाशत्रुचर्विणी, श्मशानवासिनी, नृत्यमान महादेवी।
रक्षा और वरदान (91-108): चौर-व्याघ्र-भूत-प्रेत-नाग-राक्षस भय हारिणी, वन्ध्यापुत्रप्रदायिनी, पाशमोक्षप्रदायिनी, श्रीपंचमीमाता, सर्वसिद्धिप्रदायिनी।

इस नामावली के विशेष लाभ

1. पंचकर्म सिद्धि: स्तम्भन, मोहन, उच्चाटन, मारण, जम्भन — पांचों शक्तियां इस नामावली में समाहित।
2. सप्तभय निवारण: चोर, व्याघ्र, भूत-प्रेत, अष्टनाग, राक्षस, शत्रु, रण — सात प्रकार के भय से मुक्ति।
3. सप्तचक्र जागरण: डाकिनी से याकिनी तक सातों चक्रों की योगिनियां इस नामावली में हैं — कुण्डलिनी जागरण में सहायक।
4. संतान प्राप्ति: वन्ध्यापुत्रप्रदायिनी (नाम 98) — संतानहीन दम्पत्ति हेतु विशेष कृपा।
5. बन्धन मुक्ति: पाशमोक्षप्रदायिनी (नाम 99) — कर्म बन्धन, ऋण बन्धन, पाप बन्धन से मुक्ति।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. यह नामावली सामान्य नामावली से कैसे भिन्न है?

सामान्य में 'ॐ' से, इसमें 'ऐँ ग्लौँ ऐँ ॐ' से — वाक् बीज, वाराही बीज और प्रणव तीनों जुड़े हैं। यह मन्त्र-जप का स्वरूप है।

2. ऐँ ग्लौँ ऐँ बीजमन्त्र का अर्थ?

ऐँ = वाक् बीज, ग्लौँ = वाराही बीज, पुनः ऐँ = शक्ति द्विगुणीकरण।

3. क्या बिना दीक्षा के पढ़ सकते हैं?

बीजमन्त्र सहित होने से दीक्षा अनुशंसित है। बिना दीक्षा के सामान्य नामावली पढ़ें।

4. पंचकर्म सिद्धि क्या है?

स्तम्भन, मोहन, उच्चाटन, मारण, जम्भन — ये पांच शक्तियां।

5. अन्धिनी, रुन्धिनी, जम्भिनी, मोहिनी, स्तम्भिनी कौन हैं?

वाराही की पांच अंग देवताएं — अंधा करना, रोकना, जड़ करना, मोहित करना, स्तम्भित करना।

6. डाकिनी-राकिनी-लाकिनी-काकिनी-साकिनी-हाकिनी-याकिनी कौन हैं?

सप्तचक्रों की अधिष्ठात्री योगिनियां: मूलाधार (डाकिनी) से सहस्रार (याकिनी) तक।

7. त्रिकोण और पंचकोण चक्र क्या है?

त्रिकोणमहाचक्र = श्रीयन्त्र का मूल त्रिकोण। पंचकोणचक्र = पंचभूत तत्वों का चक्र।

8. वन्ध्यापुत्रप्रदायिनी का अर्थ?

संतानहीन स्त्री को पुत्र (संतान) देने वाली।

9. श्रीपञ्चमीमाता कौन?

पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री — वाराही। पंचमी तिथि वाराही पूजन हेतु सर्वश्रेष्ठ।

10. जप विधि क्या है?

रात्रि में, लाल आसन, पश्चिम/उत्तर दिशा। रुद्राक्ष या लाल चन्दन माला से 108 बार। प्रत्येक नाम पर कुमकुम या लाल पुष्प अर्पित करें।