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चन्द्राष्टाविंशतिनामावलिः — चन्द्र देव के २८ दिव्य नाम

Sri Chandra Ashtavimsati Namavali — 28 Names of Moon

चन्द्राष्टाविंशतिनामावलिः — चन्द्र देव के २८ दिव्य नाम
॥ चन्द्राष्टाविंशतिनामावलिः ॥ ॐ सुधाकराय नमः । ॐ सोमाय नमः । ॐ ग्लावे नमः । ॐ अब्जाय नमः । ॐ कुमुदप्रियाय नमः । ॐ लोकप्रियाय नमः । ॐ शुभ्रभान्वे नमः । ॐ चन्द्रमाय नमः । ॐ रोहिणीपतये नमः ॥ ९ ॥ ॐ शशिने नमः । ॐ हिमकराय नमः । ॐ राजसे नमः । ॐ द्विजराजसे नमः । ॐ निशाकराय नमः । ॐ आत्रेयाय नमः । ॐ इन्दवे नमः । ॐ शीतांशवे नमः । ॐ ओषधीशाय नमः ॥ १८ ॥ ॐ कलानिधये नमः । ॐ जैवातृकाय नमः । ॐ रमाभ्रात्रे नमः । ॐ क्षीरोदार्णवसम्भवाय नमः । ॐ नक्षत्रनायकाय नमः । ॐ शम्भुशिराय नमः । ॐ चूडामणये नमः । ॐ विभवे नमः । ॐ तापहर्त्रे नमः । ॐ नभोदीपाय नमः ॥ २८ ॥ ॥ इति श्रीचन्द्राष्टाविंशतिनामावलिः समाप्ता ॥

चन्द्राष्टाविंशतिनामावलिः: नामों का आध्यात्मिक सामर्थ्य

सनातन धर्म में नामों का जप (Nam Japa) ही कलयुग का सबसे बड़ा सहारा माना गया है। चन्द्राष्टाविंशतिनामावलिः (Chandra Ashtavimsati Namavali) भगवान चन्द्र के उन २८ नामों का समूह है जो उनकी पूर्ण शक्ति को प्रकट करते हैं। जहाँ स्तोत्र का पाठ लयबद्ध स्तुति के लिए किया जाता है, वहीं 'नामावली' का मुख्य प्रयोजन 'अर्चन' यानी प्रत्येक नाम के साथ देवता को पुष्प, अक्षत या गंध अर्पित करना है।
ज्योतिषीय दृष्टि से, चन्द्रमा 'मन' के कारक हैं। जब हम इन २८ नामों का उच्चारण करते हैं, तो हम अपनी २८ नक्षत्रों की ऊर्जा को संतुलित कर रहे होते हैं। महर्षि गौतम द्वारा दिए गए ये नाम, जैसे 'सुधाकर' (अमृत की खान) और 'तापहर्ता' (ताप को हरने वाले), साधक के मानसिक संतापों का अंत करते हैं। सोमवार, पूर्णिमा या ग्रहण काल के बाद इन नामों का पाठ करने से चन्द्र ग्रह जनित समस्त दोषों का निवारण होता है।

नामावली पाठ के विशिष्ट लाभ

मानसिक शीतलता

नामावली का प्रत्येक 'ॐ' और 'नमः' मन की चंचलता को मिटाकर उसे भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित चन्द्रमा के समान शांत और शीतल बनाता है।

ग्रह दोष निवारण

यदि कुंडली में चन्द्रमा कमजोर है या राहु के साथ है, तो इन नामों का १०८ बार अर्चन करने से चन्द्रमा बलवान होता है और माता का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. नामावली और स्तोत्र पाठ में क्या अंतर है?

स्तोत्र छन्दबद्ध कविता की तरह होता है जिसे पढ़ा जाता है। नामावली में नामों के आगे 'ॐ' और अंत में 'नमः' जुड़ा होता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से पूजा में अर्पण (जैसे पुष्प चढ़ाना) के लिए किया जाता है।

2. क्या चन्द्र नामावली का पाठ दिन में किया जा सकता है?

हाँ, पाठ कभी भी किया जा सकता है, लेकिन चंद्रोदय के समय (रात्रि में) या सोमवार के दिन इसका प्रभाव सर्वाधिक फलदायी होता है।

3. २८ नामों का क्या रहस्य है?

हिन्दू ज्योतिष में २८ नक्षत्र होते हैं (अभिजित सहित)। ये २८ नाम उन्हीं नक्षत्रों की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनसे चन्द्रमा का गहरा संबंध है।

4. क्या इसे मानसिक शांति के लिए पढ़ सकते हैं?

चन्द्रमा मन के अधिपति हैं। इन नामों के निरंतर जाप से घबराहट, अनिद्रा और मानसिक अवसाद जैसे विकारों में चमत्कारिक लाभ मिलता है।

5. अर्चन के लिए क्या सामग्री प्रयोग करें?

चन्द्र देव को सफेद रंग प्रिय है। अतः अर्चन के लिए सफेद फूल (मोगरा), अक्षत (सफेद चावल) या सफेद चन्दन का प्रयोग करना सर्वोत्तम है।

6. गौतम ऋषि का इस नामावली से क्या संबंध है?

महर्षि गौतम इस शास्त्र के दृष्टा ऋषि हैं। उनके तप और ज्ञान से ही इन २८ नामों की शक्ति प्रकट हुई है।

7. क्या 'सोमवार व्रत' में इसे पढ़ना आवश्यक है?

सोमवार व्रत की पूजा के दौरान चन्द्र नामावली का पाठ मन्त्रों की शक्ति को बढ़ाता है और व्रत को पूर्णता प्रदान करता है।

8. क्या छात्र इसे पढ़ सकते हैं?

एकाग्रता (Focus) बढ़ाने के लिए छात्रों को 'तरुण' और 'कलानिधि' जैसे नामों का स्मरण नित्य करना चाहिए।

9. दान में क्या देना चाहिए?

नामावली पाठ के बाद दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्र का दान करना चन्द्रमा को प्रसन्न करने वाला माना गया है।

10. अर्घ्य कैसे दें?

एक तांबे या चाँदी के पात्र में दूध और जल मिलाकर, चन्द्रमा के दर्शन करते हुए इन नामों का उच्चारण कर जल की धारा छोड़ना ही अर्घ्य है।