Sri Buddhi Devi Ashtottara Shatanamavali – श्री बुद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली
Sri Buddhi Devi Ashtottara Shatanamavali: 108 Names for Wisdom & Intellect

ॐ मूलवह्निसमुद्भूतायै नमः ।
ॐ मूलाज्ञानविनाशिन्यै नमः ।
ॐ निरुपाधिमहामायायै नमः ।
ॐ शारदायै नमः ।
ॐ प्रणवात्मिकायै नमः ।
ॐ सुषुम्नामुखमध्यस्थायै नमः ।
ॐ चिन्मय्यै नमः ।
ॐ नादरूपिण्यै नमः ।
ॐ नादातीतायै नमः । ९ ॥
ॐ ब्रह्मविद्यायै नमः ।
ॐ मूलविद्यायै नमः ।
ॐ परात्परायै नमः ।
ॐ सकामदायिनीपीठमध्यस्थायै नमः ।
ॐ बोधरूपिण्यै नमः ।
ॐ मूलाधारस्थगणपदक्षिणाङ्कनिवासिन्यै नमः ।
ॐ विश्वाधारायै नमः ।
ॐ ब्रह्मरूपायै नमः ।
ॐ निराधारायै नमः । १८ ॥
ॐ निरामयायै नमः ।
ॐ सर्वाधारायै नमः ।
ॐ साक्षिभूतायै नमः ।
ॐ ब्रह्ममूलायै नमः ।
ॐ सदाश्रयायै नमः ।
ॐ विवेकलभ्यवेदान्तगोचरायै नमः ।
ॐ मननातिगायै नमः ।
ॐ स्वानन्दयोगसंलभ्यायै नमः ।
ॐ निदिध्यासस्वरूपिण्यै नमः । २७ ॥
ॐ विवेकादिभृत्ययुतायै नमः ।
ॐ शमादिकिङ्करान्वितायै नमः ।
ॐ भक्त्यादिकिङ्करीजुष्टायै नमः ।
ॐ स्वानन्देशसमन्वितायै नमः ।
ॐ महावाक्यार्थसंलभ्यायै नमः ।
ॐ गणेशप्राणवल्लभायै नमः ।
ॐ तमस्तिरोधानकर्यै नमः ।
ॐ स्वानन्देशप्रदर्शिन्यै नमः ।
ॐ स्वाधिष्ठानगतायै नमः । ३६ ॥
ॐ वाण्यै नमः ।
ॐ रजोगुणविनाशिन्यै नमः ।
ॐ रागादिदोषशमन्यै नमः ।
ॐ कर्मज्ञानप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ मणिपूराब्जनिलयायै नमः ।
ॐ तमोगुणविनाशिन्यै नमः ।
ॐ अनाहतैकनिलयायै नमः ।
ॐ गुणसत्त्वप्रकाशिन्यै नमः ।
ॐ अष्टाङ्गयोगफलदायै नमः । ४५ ॥
ॐ तपोमार्गप्रकाशिन्यै नमः ।
ॐ विशुद्धिस्थाननिलयायै नमः ।
ॐ हृदयग्रन्धिभेदिन्यै नमः ।
ॐ विवेकजनन्यै नमः ।
ॐ प्रज्ञायै नमः ।
ॐ ध्यानयोगप्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ आज्ञाचक्रसमासीनायै नमः ।
ॐ निर्गुणब्रह्मसम्युतायै नमः ।
ॐ ब्रह्मरन्ध्रपद्मगतायै नमः । ५४ ॥
ॐ जगद्भावप्रणाशिन्यै नमः ।
ॐ द्वादशान्तैकनिलयायै नमः ।
ॐ स्वस्वानन्दप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ पीयूषवर्षिण्यै नमः ।
ॐ बुद्ध्यै नमः ।
ॐ स्वानन्देशप्रकाशिन्यै नमः ।
ॐ इक्षुसागरमध्यस्थायै नमः ।
ॐ निजलोकनिवासिन्यै नमः ।
ॐ वैनायक्यै नमः । ६३ ॥
ॐ विघ्नहन्त्र्यै नमः ।
ॐ स्वानन्दब्रह्मरूपिण्यै नमः ।
ॐ सुधामूर्त्यै नमः ।
ॐ सुधावर्णायै नमः ।
ॐ केवलायै नमः ।
ॐ हृद्गुहामय्यै नमः ।
ॐ शुभ्रवस्त्रायै नमः ।
ॐ पीनकुचायै नमः ।
ॐ कल्याण्यै नमः । ७२ ॥
ॐ हेमकञ्चुकायै नमः ।
ॐ विकचाम्भोरुहदललोचनायै नमः ।
ॐ ज्ञानरूपिण्यै नमः ।
ॐ रत्नताटङ्कयुगलायै नमः ।
ॐ भद्रायै नमः ।
ॐ चम्पकनासिकायै नमः ।
ॐ रत्नदर्पणसङ्काशकपोलायै नमः ।
ॐ निर्गुणात्मिकायै नमः ।
ॐ ताम्बूलपूरितस्मेरवदनायै नमः । ८१ ॥
ॐ सत्यरूपिण्यै नमः ।
ॐ कम्बुकण्ठ्यै नमः ।
ॐ सुबिम्बोष्ठ्यै नमः ।
ॐ वीणापुस्तकधारिण्यै नमः ।
ॐ गणेशज्ञातसौभाग्य-मार्दवोरुद्वयान्वितायै नमः ।
ॐ कैवल्यज्ञानसुखदपदाब्जायै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः ।
ॐ मतिः नमः ।
ॐ वज्रमाणिक्यकटककिरीटायै नमः । ९० ॥
ॐ मञ्जुभाषिण्यै नमः ।
ॐ विघ्नेशबद्धमाङ्गल्यसूत्रशोभितकन्धरायै नमः ।
ॐ अनेककोटिकेशार्कयुग्मसेवितपादुकायै नमः ।
ॐ वागीश्वर्यै नमः ।
ॐ लोकमात्रे नमः ।
ॐ महाबुद्ध्यै नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ चतुष्षष्टिकोटिविद्याकलालक्ष्मीनिषेवितायै नमः ।
ॐ कटाक्षकिङ्करीभूतकेशबृन्दसमन्वितायै नमः । ९९ ॥
ॐ ब्रह्मविष्ण्वीशशक्तीनां दृशा शासनकारिण्यै नमः ।
ॐ पञ्चचित्तवृत्तिमय्यै नमः ।
ॐ तारमन्त्रस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ वरदायै नमः ।
ॐ भक्तिवशगायै नमः ।
ॐ भक्ताभीष्टप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मशक्त्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ जगद्ब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः । १०८ ॥
॥ इति श्री बुद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णम् ॥
श्री बुद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)
श्री बुद्धिदेवी अष्टोत्तरशतनामावली माँ बुद्धि (Wisdom/Intellect) के 108 पावन नामों का स्तोत्र है। बुद्धिदेवी, भगवान गणेश की अर्धांगिनी मानी जाती हैं। जहाँ गणेश जी 'विघ्नहर्ता' और 'मंगलमूर्ति' हैं, वहीं बुद्धिदेवी साधक को उन विघ्नों से पार पाने के लिए विवेक, ज्ञान और रणनीति प्रदान करती हैं।
वेदों में उन्हें ब्रह्मविद्या (Supreme Knowledge) कहा गया है। वे मूलाधार चक्र में गणेश जी की बायीं गोद ('मूलाधारस्थगणपदक्षिणाङ्कनिवासिनी') में विराजमान होकर कुंडलिनी शक्ति को जगाने में सहायता करती हैं। वे सरस्वती स्वरूप हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार ('मूलाज्ञानविनाशिनी') को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं।
प्रमुख नामों का अर्थ (Key Names Explained)
- शारदा (15): ज्ञान की देवी सरस्वती का ही स्वरूप।
- ब्रह्मविद्या (22): परम सत्य का ज्ञान (Self-Realization)।
- बोधरूपिणी (26): जागृति और चेतना (Awareness) का स्वरूप।
- गणेशप्राणवल्लभा (47): गणेश जी की प्रिय पत्नी।
- प्रज्ञा (66): तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक (Discriminative Intellect)।
- वीणापुस्तकधारिणी (105): वीणा और पुस्तक धारण करने वाली (कला और विद्या)।
- भारती (108): वाणी की देवी।
- महाबुद्धि (117): विशाल और सूक्ष्म बुद्धि की स्वामिनी।
पाठ के लाभ (Benefits)
- स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों के लिए यह रामवाण है। इससे याददाश्त और एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है।
- निर्णय क्षमता: दुविधा के समय सही निर्णय (Right Decision Making) लेने का विवेक प्राप्त होता है।
- वाणी सिद्धि: 'वागीश्वरी' नाम के जप से वाणी में मधुरता और प्रभाव आता है।
- परीक्षा में सफलता: कठिन से कठिन विषयों को समझने में आसानी होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह 'अज्ञान' को नष्ट कर 'आत्मज्ञान' (मोक्ष) की ओर ले जाती है।
- मानसिक शांति: तनाव, भटकाव और मानसिक क्लेश दूर होते हैं।
पाठ विधि (Ritual Method)
विद्या/बुद्धि प्राप्ति पूजा:
- समय: बुधवार का दिन, वसंत पंचमी, या प्रतिदिन पढ़ाई शुरू करने से पहले।
- आसन: सफेद या पीला आसन बिछाएं। उत्तर या पूर्व मुख बैठें।
- मूर्ति: गणेश जी के साथ बुद्धि देवी (या सरस्वती जी) का चित्र/मूर्ति रखें।
- भोग: बूंदी के लड्डू या मोदक (गणेश जी और देवी को प्रिय)।
- पुष्प: सफेद फूल, दूर्वा।
- पाठ: पहले 'ॐ गं गणपतये नमः' का 1 माला जप करें, फिर 108 नामों का पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बुद्धि देवी कौन हैं?
गणेश जी की शक्ति और पत्नी। ज्ञान, विवेक और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी।
2. बुद्धि देवी और सरस्वती में क्या अंतर है?
दोनों ज्ञान की देवी हैं। बुद्धि देवी विशेष रूप से गणेश जी (बुद्धि) के साथ जुड़ी हैं और 'विवेक' (Discrimination) का प्रतीक हैं।
3. 'मूलाज्ञानविनाशिनी' (13) का क्या अर्थ है?
अज्ञान (Ignorance/Avidya) की जड़ काटने वाली। वे सत्य का प्रकाश देती हैं।
4. विद्यार्थियों के लिए यह कैसे लाभकारी है?
इससे याददाश्त (Memory), एकाग्रता (Focus) और समझने की शक्ति (Grasping Power) बढ़ती है।
5. 'ब्रह्मविद्या' (22) क्या है?
परम ज्ञान जिससे स्वयं (Self) और परमात्मा (Brahman) का बोध होता है।
6. कुंडलिनी योग में इनका क्या रोल है?
वे मूलाधार चक्र (जहाँ गणेश वास करते हैं) को जाग्रत कर ऊर्जा को ऊपर की ओर ले जाती हैं।
7. 'नादरूपिणी' (19) का अर्थ क्या है?
'नाद' यानी ध्वनि/ॐकार। वे समस्त शब्दों और संगीत की आत्मा हैं।
8. 'गणेशप्राणवल्लभा' (47) का क्या मतलब है?
गणेश जी के प्राणों से प्यारी पत्नी। बुद्धि और गणेश एक-दूसरे के पूरक हैं।
9. क्या मंदबुद्धि बच्चे इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ, माता-पिता भी बच्चों के लिए संकल्प लेकर यह पाठ कर सकते हैं। यह बौद्धिक विकास के लिए चमत्कारी है।
10. पाठ का सर्वोत्तम समय क्या है?
बुधवार सुबह या शाम। परीक्षा के दिनों में रोज सुबह।