Sri Bhuvaneshwari Ashtottara Shatanamavali (Rudra Yamala) – श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली
Sri Bhuvaneshwari 108 Names: Divine Chants for Wealth & Peace

श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)
विशिष्ट महत्व (Significance)
पाठ के लाभ (Benefits)
- अखंड सौभाग्य (Akhand Saubhagya): स्त्रियाँ यदि कुमकुम से अर्चन करें, तो उन्हें अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का वरदान मिलता है (पतिव्रतायै नमः - नाम ४४)।
- धन-धान्य की वृद्धि: भुवनेश्वरी 'भू' (पृथ्वी/भूमि) की स्वामिनी हैं। जो किसान या व्यापारी इसका पाठ करते हैं, उनकी भूमि और व्यापार में कभी घाटा नहीं होता।
- संतान सुख: 'कुमार्यै नमः' (नाम ६/४६) और 'वत्सलायै नमः' (नाम ८०) का जप संतान प्राप्ति और बच्चों की सुरक्षा के लिए रामबाण है।
- राजकृपा और पदोन्नति: 'लोकेश्यै नमः' (नाम ५०) - लोक (संसार/समाज) में मान-सम्मान और उच्च पद की प्राप्ति के लिए यह अचूक है।
पाठ विधि (Ritual Method)
- कुमकुमार्चन प्रयोग: शुक्रवार को प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र पहनें। एक तांबे की प्लेट में 'ह्रीं' लिखें। उस पर देवी की फोटो या यंत्र रखें। १०८ नामों का उच्चारण करते हुए चुटकी भर कुमकुम यंत्र/चित्र पर चढ़ाएं। अंत में उस कुमकुम का तिलक स्वयं लगाएं।
- पुष्प: देवी को लाल गुड़हल (Japa Kusum) या कमल का फूल अत्यंत प्रिय है।
- दीप: घी का दीपक जलाएं जिसमें थोड़ी केसर या लाल बाती हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. स्तोत्र और नामावली में क्या अंतर है?
'स्तोत्र' (Stotra) छंदबद्ध कविता होती है जिसमें देवी की स्तुति की जाती है। 'नामावली' (Namavali) में केवल नाम होते हैं, जिनका प्रयोग 'स्वाहा' (हवन में) या 'नमः' (पूजा में फूल/कुमकुम चढ़ाने) के लिए होता है।
2. इस नामावली का विशेष महत्व क्या है?
यह नामावली 'रुद्र यामल तंत्र' पर आधारित है। इसमें देवी के उग्र (ज्वालिन्यै) और सौम्य (कोमलायै) दोनों रूपों का संतुलन है, जो गृहस्थ साधकों के लिए अत्यंत सुरक्षित और फलदायी है।
3. इसमें 'हिङ्गुलायै नमः' नाम क्यों है?
माँ हिंगलाज (हिंगुला) 51 शक्तिपीठों में से एक हैं और देवी का ही स्वरूप हैं। विशेष रूप से क्षत्रिय और चारण कुलों में हिंगलाज माता की पूजा इसी नाम से होती है।
4. क्या पुरुष और स्त्रियाँ दोनों इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ। शक्ति साधना में लिंग भेद नहीं है। स्त्रियाँ विशेष रूप से 'सौभाग्य' और 'संतान प्राप्ति' के लिए इसका पाठ करती हैं। पुरुष 'धन' और 'शत्रु जय' के लिए इसे जपते हैं।
5. कुमकुमार्चन (Kumkumarchana) कैसे करें?
देवी की मूर्ति या श्रीयंत्र के सामने बैठें। दाहिने हाथ की अनामिका और अंगूठे से चुटकी भर कुमकुम लें। हर नाम के बाद 'नमः' बोलते हुए कुमकुम देवी के चरणों में या यंत्र पर अर्पित करें।
6. इसमें 'मातङ्ग्यै' और 'वाराह्यै' नाम क्यों आए हैं?
भुवनेश्वरी 'सर्वरूपा' हैं। मातंगी (वचन शक्ति) और वाराही (दण्ड शक्ति) उनके मंत्री या सेनापति मानी जाती हैं (श्रीविद्या कुल में)। इसलिए उनका स्मरण भी आवश्यक है।
7. क्या इसे बिना दीक्षा के पढ़ा जा सकता है?
नामावली का पाठ भक्ति भाव से बिना दीक्षा के भी किया जा सकता है। यह 'नाम-जप' की श्रेणी में आता है जो सौम्य है।
8. पाठ के लिए श्रेष्ठ दिन कौन सा है?
शुक्रवार (देवी का दिन), सोमवार (शिव-शक्ति का दिन) और नवरात्र के 9 दिन। पूर्णिमा का पाठ विशेष धनदायक माना गया है।
9. इसमें 'योगिनीकोटिसेवितायै' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'करोड़ों योगिनियों द्वारा सेवित'। यह दर्शाता है कि भुवनेश्वरी केवल एक देवी नहीं, बल्कि संपूर्ण योगिनी चक्र की स्वामिनी (Queen of Yoginis) हैं।
10. क्या इससे ग्रह दोष शांति होती है?
हाँ। भुवनेश्वरी 'चंद्र' ग्रह की अधिष्ठात्री हैं। मानसिक तनाव, डिप्रेशन या चंद्र दोष होने पर इस नामावली का पाठ बहुत लाभ देता है।