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Sri Bhuvaneshwari Ashtottara Shatanamavali (Rudra Yamala) – श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Bhuvaneshwari 108 Names: Divine Chants for Wealth & Peace

Sri Bhuvaneshwari Ashtottara Shatanamavali (Rudra Yamala) – श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली
॥ अथ श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ महामायायै नमः । ॐ महाविद्यायै नमः । ॐ महायोगायै नमः । ॐ महोत्कटायै नमः । ॐ माहेश्वर्यै नमः । ॐ कुमार्यै नमः । ॐ ब्रह्माण्यै नमः । ॐ ब्रह्मरूपिण्यै नमः । ॐ वागीश्वर्यै नमः ॥१-९॥ ॐ योगरूपायै नमः । ॐ योगिनीकोटिसेवितायै नमः । ॐ जयायै नमः । ॐ विजयायै नमः । ॐ कौमार्यै नमः । ॐ सर्वमङ्गलायै नमः । ॐ हिङ्गुलायै नमः । ॐ विलास्यै नमः । ॐ ज्वालिन्यै नमः ॥१०-९८॥ ॐ ज्वालरूपिण्यै नमः । ॐ ईश्वर्यै नमः । ॐ क्रूरसंहार्यै नमः । ॐ कुलमार्गप्रदायिन्यै नमः । ॐ वैष्णव्यै नमः । ॐ सुभगाकारायै नमः । ॐ सुकुल्यायै नमः । ॐ कुलपूजितायै नमः । ॐ वामाङ्गायै नमः ॥१९-२७॥ ॐ वामचारायै नमः । ॐ वामदेवप्रियायै नमः । ॐ डाकिन्यै नमः । ॐ योगिनीरूपायै नमः । ॐ भूतेश्यै नमः । ॐ भूतनायिकायै नमः । ॐ पद्मावत्यै नमः । ॐ पद्मनेत्रायै नमः । ॐ प्रबुद्धायै नमः ॥२८-३६॥ ॐ सरस्वत्यै नमः । ॐ भूचर्यै नमः । ॐ खेचर्यै नमः । ॐ मायायै नमः । ॐ मातङ्ग्यै नमः । ॐ भुवनेश्वर्यै नमः । ॐ कान्तायै नमः । ॐ पतिव्रतायै नमः । ॐ साक्ष्यै नमः ॥३७-४५॥ ॐ सुचक्षुषे नमः । ॐ कुण्डवासिन्यै नमः । ॐ उमायै नमः । ॐ कुमार्यै नमः । ॐ लोकेश्यै नमः । ॐ सुकेश्यै नमः । ॐ पद्मरागिण्यै नमः । ॐ इन्द्राण्यै नमः । ॐ ब्रह्मचण्डाल्यै नमः ॥४६-५४॥ ॐ चण्डिकायै नमः । ॐ वायुवल्लभायै नमः । ॐ सर्वधातुमय्यै नमः । ॐ मूर्तये नमः । ॐ जलरूपायै नमः । ॐ जलोदर्यै नमः । ॐ आकाश्यै नमः । ॐ रणगायै नमः । ॐ नृकपालविभूषणायै नमः ॥५५-६३॥ ॐ नर्मदायै नमः । ॐ मोक्षदायै नमः । ॐ धर्मकामार्थदायिन्यै नमः । ॐ गायत्र्यै नमः । ॐ सावित्र्यै नमः । ॐ त्रिसन्ध्यायै नमः । ॐ तीर्थगामिन्यै नमः । ॐ अष्टम्यै नमः । ॐ नवम्यै नमः ॥६४-७२॥ ॐ दशम्यै नमः । ॐ एकादश्यै नमः । ॐ पौर्णमास्यै नमः । ॐ कुहूरूपायै नमः । ॐ तिथिमूर्तिस्वरूपिण्यै नमः । ॐ सुरारिनाशकार्यै नमः । ॐ उग्ररूपायै नमः । ॐ वत्सलायै नमः । ॐ अनलायै नमः ॥७३-८१॥ ॐ अर्धमात्रायै नमः । ॐ अरुणायै नमः । ॐ पीतलोचनायै नमः । ॐ लज्जायै नमः । ॐ सरस्वत्यै नमः । ॐ विद्यायै नमः । ॐ भवान्यै नमः । ॐ पापनाशिन्यै नमः । ॐ नागपाशधरायै नमः ॥८२-९०॥ ॐ मूर्तये नमः । ॐ अगाधायै नमः । ॐ धृतकुण्डलायै नमः । ॐ क्षत्ररूपायै नमः । ॐ क्षयकर्यै नमः । ॐ तेजस्विन्यै नमः । ॐ शुचिस्मितायै नमः । ॐ अव्यक्तायै नमः । ॐ व्यक्तलोकायै नमः ॥९१-९९॥ ॐ शम्भुरूपायै नमः । ॐ मनस्विन्यै नमः । ॐ मातङ्ग्यै नमः । ॐ मत्तमातङ्ग्यै नमः । ॐ सदामहादेवप्रियायै नमः । ॐ दैत्यघ्न्यै नमः । ॐ वाराह्यै नमः । ॐ सर्वशास्त्रमय्यै नमः । ॐ शुभायै नमः ॥१००-१०८॥ ॥ इति श्री रुद्रयामलतन्त्रोक्तं श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली समाप्ता ॥

श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)

श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली (Sri Bhuvaneshwari Ashtottara Shatanamavali) में महामाया भुवनेश्वरी के १०८ सिद्ध नामों का संकलन है। जहाँ स्तोत्र का पाठ 'स्तुति' और 'गान' के लिए किया जाता है, वहीं नामावली का प्रयोग 'अर्चना' (Archana) के लिए होता है।
भक्त अपनी मनोकामना (धन, संतान, विवाह, शत्रु नाश) के लिए संकल्प लेकर, प्रत्येक नाम के साथ देवी के चरणों में पुष्प (Flower), अक्षत (Rice), या कुमकुम (Vermillion) अर्पित करते हैं। यह प्रक्रिया देवी के साथ व्यक्तिगत संबंध स्थापित करती है।

विशिष्ट महत्व (Significance)

हिंगुला और कुलदेवी: इस नामावली में 'ॐ हिङ्गुलायै नमः' (नाम १७) का उल्लेख अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सिंध (अब पाकिस्तान) स्थित हिंगलाज शक्तिपीठ को दर्शाता है। क्षत्रिय, चारण और ब्रह्मभट्ट समाजों की कुलदेवी हिंगलाज ही भुवनेश्वरी का उग्र रूप मानी जाती हैं।
सर्व-देवती स्वरूप: इसमें 'मातङ्ग्यै' (नाम ३७/१०२) और 'वाराह्यै' (नाम १०७) जैसे नाम भी हैं, जो सिद्ध करते हैं कि भुवनेश्वरी ही सभी महाविद्याओं की मूल स्रोत (Origin) हैं।
चंद्र दोष निवारण: ज्योतिष में माँ भुवनेश्वरी 'चंद्रमा' का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस नामावली का पाठ मानसिक शांति, शीतलता और रचनात्मकता (Creativity) को बढ़ाता है।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • अखंड सौभाग्य (Akhand Saubhagya): स्त्रियाँ यदि कुमकुम से अर्चन करें, तो उन्हें अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का वरदान मिलता है (पतिव्रतायै नमः - नाम ४४)।
  • धन-धान्य की वृद्धि: भुवनेश्वरी 'भू' (पृथ्वी/भूमि) की स्वामिनी हैं। जो किसान या व्यापारी इसका पाठ करते हैं, उनकी भूमि और व्यापार में कभी घाटा नहीं होता।
  • संतान सुख: 'कुमार्यै नमः' (नाम ६/४६) और 'वत्सलायै नमः' (नाम ८०) का जप संतान प्राप्ति और बच्चों की सुरक्षा के लिए रामबाण है।
  • राजकृपा और पदोन्नति: 'लोकेश्यै नमः' (नाम ५०) - लोक (संसार/समाज) में मान-सम्मान और उच्च पद की प्राप्ति के लिए यह अचूक है।

पाठ विधि (Ritual Method)

  • कुमकुमार्चन प्रयोग: शुक्रवार को प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र पहनें। एक तांबे की प्लेट में 'ह्रीं' लिखें। उस पर देवी की फोटो या यंत्र रखें। १०८ नामों का उच्चारण करते हुए चुटकी भर कुमकुम यंत्र/चित्र पर चढ़ाएं। अंत में उस कुमकुम का तिलक स्वयं लगाएं।
  • पुष्प: देवी को लाल गुड़हल (Japa Kusum) या कमल का फूल अत्यंत प्रिय है।
  • दीप: घी का दीपक जलाएं जिसमें थोड़ी केसर या लाल बाती हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्तोत्र और नामावली में क्या अंतर है?

'स्तोत्र' (Stotra) छंदबद्ध कविता होती है जिसमें देवी की स्तुति की जाती है। 'नामावली' (Namavali) में केवल नाम होते हैं, जिनका प्रयोग 'स्वाहा' (हवन में) या 'नमः' (पूजा में फूल/कुमकुम चढ़ाने) के लिए होता है।

2. इस नामावली का विशेष महत्व क्या है?

यह नामावली 'रुद्र यामल तंत्र' पर आधारित है। इसमें देवी के उग्र (ज्वालिन्यै) और सौम्य (कोमलायै) दोनों रूपों का संतुलन है, जो गृहस्थ साधकों के लिए अत्यंत सुरक्षित और फलदायी है।

3. इसमें 'हिङ्गुलायै नमः' नाम क्यों है?

माँ हिंगलाज (हिंगुला) 51 शक्तिपीठों में से एक हैं और देवी का ही स्वरूप हैं। विशेष रूप से क्षत्रिय और चारण कुलों में हिंगलाज माता की पूजा इसी नाम से होती है।

4. क्या पुरुष और स्त्रियाँ दोनों इसका पाठ कर सकते हैं?

हाँ। शक्ति साधना में लिंग भेद नहीं है। स्त्रियाँ विशेष रूप से 'सौभाग्य' और 'संतान प्राप्ति' के लिए इसका पाठ करती हैं। पुरुष 'धन' और 'शत्रु जय' के लिए इसे जपते हैं।

5. कुमकुमार्चन (Kumkumarchana) कैसे करें?

देवी की मूर्ति या श्रीयंत्र के सामने बैठें। दाहिने हाथ की अनामिका और अंगूठे से चुटकी भर कुमकुम लें। हर नाम के बाद 'नमः' बोलते हुए कुमकुम देवी के चरणों में या यंत्र पर अर्पित करें।

6. इसमें 'मातङ्ग्यै' और 'वाराह्यै' नाम क्यों आए हैं?

भुवनेश्वरी 'सर्वरूपा' हैं। मातंगी (वचन शक्ति) और वाराही (दण्ड शक्ति) उनके मंत्री या सेनापति मानी जाती हैं (श्रीविद्या कुल में)। इसलिए उनका स्मरण भी आवश्यक है।

7. क्या इसे बिना दीक्षा के पढ़ा जा सकता है?

नामावली का पाठ भक्ति भाव से बिना दीक्षा के भी किया जा सकता है। यह 'नाम-जप' की श्रेणी में आता है जो सौम्य है।

8. पाठ के लिए श्रेष्ठ दिन कौन सा है?

शुक्रवार (देवी का दिन), सोमवार (शिव-शक्ति का दिन) और नवरात्र के 9 दिन। पूर्णिमा का पाठ विशेष धनदायक माना गया है।

9. इसमें 'योगिनीकोटिसेवितायै' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'करोड़ों योगिनियों द्वारा सेवित'। यह दर्शाता है कि भुवनेश्वरी केवल एक देवी नहीं, बल्कि संपूर्ण योगिनी चक्र की स्वामिनी (Queen of Yoginis) हैं।

10. क्या इससे ग्रह दोष शांति होती है?

हाँ। भुवनेश्वरी 'चंद्र' ग्रह की अधिष्ठात्री हैं। मानसिक तनाव, डिप्रेशन या चंद्र दोष होने पर इस नामावली का पाठ बहुत लाभ देता है।