Navagraha Mangalashtakam – नवग्रह मङ्गलाष्टकम्

नवग्रह ज्योतिषीय सारणी (Navagraha Astrological Chart)
| ग्रह | गोत्र | दिशा | रंग | राशि | मित्र ग्रह | शत्रु ग्रह | अधिदेवता |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | काश्यप | पूर्व | अरुण (लाल) | सिंह | गुरु, चन्द्र, मंगल | शुक्र, शनि | अग्नि, ईश्वर |
| चन्द्र | आत्रेय | वायव्य | सित (सफेद) | कर्क | बुध, सूर्य | - | उमा, ईश्वर |
| मंगल | भारद्वाज | दक्षिण | अरुण (लाल) | मेष, वृश्चिक | सूर्य, चन्द्र, गुरु | बुध | वसुधा, स्कन्द |
| बुध | आत्रेय | उत्तर | पीत (पीला) | मिथुन, कन्या | शनि | - | विष्णु, देवी |
| बृहस्पति | आङ्गिरस | ईशान | पीत (पीला) | धनु, मीन | सूर्य, चन्द्र, मंगल | बुध, शुक्र | इन्द्र, ब्रह्मा |
| शुक्र | भार्गव | पूर्व | सित (सफेद) | वृष, तुला | बुध, शनि | सूर्य, चन्द्र | इन्द्राणी, इन्द्र |
| शनि | काश्यप | पश्चिम | कृष्ण (काला) | मकर, कुम्भ | बुध, शुक्र | मंगल, चन्द्र | प्रजापति, यम |
| राहु | पैठीनस | दक्षिण | कृष्ण (काला) | - | - | - | सर्प, पशु |
| केतु | जैमिनि | वायव्य | चित्र (बहुरंगी) | - | - | - | ब्रह्मा, चित्रगुप्त |
प्रत्येक श्लोक का विस्तृत अर्थ (Detailed Meaning of Each Verse)
श्लोक १ - सूर्य (Surya)
मुख्य विशेषताएं: भास्वान् (प्रकाशमान), काश्यप गोत्र, अरुण (लाल) रंग, सिंह राशि के स्वामी। गुरु-चन्द्र-मंगल मित्र हैं, शुक्र-शनि शत्रु। कलिंग देश के अधिपति। अग्नि और ईश्वर अधिदेवता। 3, 6, 10वें भाव में शुभ। पूर्व दिशा के स्वामी।
श्लोक २ - चन्द्र (Chandra)
मुख्य विशेषताएं: कर्क राशि के स्वामी, सित (सफेद) रंग, आत्रेय गोत्र। चतुरश्र (चौकोर) आकार, अरुण मुख। उमा और ईश्वर अधिदेवता। 6, 7, 3, 10, 1वें भाव में शुभ। कोई शत्रु नहीं। बुध और सूर्य मित्र। यमुना नदी के स्वामी।
श्लोक ३ - मंगल (Mars)
मुख्य विशेषताएं: दक्षिण दिशा, त्रिकोण यम दिशा, विन्ध्याचल के ईश्वर। खदिर (खैर) वृक्ष की समिधा। मेष-वृश्चिक राशि के स्वामी। सूर्य-चन्द्र-गुरु मित्र, बुध शत्रु। भारद्वाज गोत्र, अरुण रंग। वसुधा (पृथ्वी) और स्कन्द अधिदेवता। 3, 6वें भाव में शुभ।
श्लोक ४ - बुध (Mercury)
मुख्य विशेषताएं: सौम्य (शांत), पीला रंग, उत्तर मुख। अपामार्ग की समिधा, आत्रेय गोत्र। ईशान दिशा, शनि मित्र, चन्द्र पुत्र। कन्या-मिथुन राशि के स्वामी। 10, 8, 4, 6वें भाव में शुभ। विष्णु और देवी अधिदेवता। मगध देश के अधिपति।
श्लोक ५ - बृहस्पति (Jupiter)
मुख्य विशेषताएं: जीव (प्राणदाता), आङ्गिरस गोत्र, उत्तर मुख। दीर्घ उत्तर दिशा में स्थित, पीला रंग। अश्वत्थ (पीपल) की समिधा, सिन्धु प्रदेश। धनु-मीन राशि स्वामी। सूर्य-चन्द्र-मंगल मित्र, बुध-शुक्र शत्रु। 7, 2, 9, 5वें भाव में शुभ।
श्लोक ६ - शुक्र (Venus)
मुख्य विशेषताएं: भार्गव (भृगु) गोत्र, सित (सफेद) रंग, पूर्व मुख और दिशा। पांचाल प्रदेश, वृष-तुला राशि स्वामी, महाराष्ट्र अधिपति। औदुम्बर (गूलर) वृक्ष। इन्द्राणी और इन्द्र अधिदेवता। बुध-शनि मित्र, सूर्य-चन्द्र शत्रु। 6, 3, 10 को छोड़कर सभी भावों में शुभ।
श्लोक ७ - शनि (Saturn)
मुख्य विशेषताएं: मन्द (धीमी गति), कृष्ण (काला) रंग, पश्चिम मुख और दिशा। सौराष्ट्र के अधिपति, काश्यप गोत्र। मकर-कुम्भ राशि स्वामी। बुध-शुक्र मित्र, मंगल-चन्द्र शत्रु। प्रजापति-यम अधिदेवता। धनुर्धारक। सूर्य पुत्र। 3, 6वें भाव में शुभ।
श्लोक ८ - राहु (Rahu)
मुख्य विशेषताएं: सिंहल (श्रीलंका) देश के अधिपति, 7वें भाव से सम्बंधित। कृष्ण (काला) अंग, शूर्प (सूप) आसन। पैठीनस गोत्र, दूर्वा (दूब) समिधा। दक्षिण मुख। सर्प स्वरूप, पशु अधिदेवता। सूर्य ग्रहण के समय सूर्य को ढकने वाला। सिंहिका का पुत्र। 3, 6वें भाव में शुभ।
श्लोक ९ - केतु (Ketu)
मुख्य विशेषताएं: जैमिनि गोत्र, कुश समिधा। वायव्य कोण में स्थित। चित्र (बहुरंगी) अंक और ध्वज चिह्न। दक्षिण मुख। ब्रह्मा और चित्रगुप्त अधिदेवता। बर्बर (विदेशी/म्लेच्छ) देश के अधिपति। 3, 6वें भाव में शुभ।
पाठ विधि और लाभ (Method and Benefits)
- प्रातःकाल: सूर्योदय के समय, स्नान के बाद
- संध्या काल: सूर्यास्त के समय
- विशेष अवसर: ग्रहण, अमावस्या, पूर्णिमा, नवग्रह जयंती
इस स्तोत्र के लाभ:
- समस्त ग्रह दोष शांति: सभी 9 ग्रहों का एक साथ आशीर्वाद
- ज्योतिष ज्ञान: प्रत्येक ग्रह की विशेषताओं का ज्ञान
- मंगल कामना: 'कुर्यात् सदा मंगलम्' से निरंतर कल्याण
- कुंडली दोष निवारण: जन्म कुंडली के ग्रह दोषों में राहत
- ग्रह गोचर: ग्रह गोचर (Transit) के समय शांति
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)