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Sri Sharada Prarthana – श्री शारदा प्रार्थना (अर्थ सहित)

Sri Sharada Prarthana – श्री शारदा प्रार्थना (अर्थ सहित)
॥ श्री शारदा प्रार्थना ॥ नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि । त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे ॥ १ ॥ (हे काश्मीरपुर में निवास करने वाली देवी शारदे! आपको नमस्कार है। मैं नित्य आपसे प्रार्थना करता हूँ—मुझे विद्या का दान दीजिए।) या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा । भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी ॥ २ ॥ (जो श्रद्धा, धारणा (स्मरण शक्ति), मेधा (बुद्धि), वाग्देवी (वाणी की देवी) और ब्रह्मा की प्रिया हैं; जो भक्तों की जिह्वा के अग्रभाग पर विराजती हैं और शम (शांति) आदि गुण प्रदान करती हैं।) नमामि यामिनीं नाथलेखालङ्कृतकुन्तलाम् । भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम् ॥ ३ ॥ (मैं उन्हें नमन करता हूँ जिनके केश चन्द्रमा की कलाओं से अलंकृत हैं; जो भवानी (पार्वती) हैं और भव (संसार) के संतापों को शांत करने के लिए अमृत की नदी के समान हैं।) भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः । वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च ॥ ४ ॥ (भद्रकाली को नित्य नमस्कार है, सरस्वती को बारंबार नमस्कार है। वेद, वेदांग, वेदान्त और समस्त विद्या के स्थानों को भी नमस्कार है।) ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी । सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः ॥ ५ ॥ (जो ब्रह्मस्वरूपा हैं, परम हैं, ज्योतिस्वरूपा हैं और सनातनी हैं; जो समस्त विद्याओं की अधिष्ठात्री देवी हैं—उन वाणी देवी को बारंबार नमस्कार है।) यया विना जगत् सर्वं शश्वज्जीवन्मृतं भवेत् । ज्ञानाधिदेवी या तस्यै सरस्वत्यै नमो नमः ॥ ६ ॥ (जिनके बिना यह सारा संसार सदा के लिए जीवित होते हुए भी मृत के समान हो जाए; जो ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं—उन सरस्वती को बारंबार नमस्कार है।) यया विना जगत् सर्वं मूकमुन्मत्तवत् सदा । या देवी वागधिष्ठात्री तस्यै वाण्यै नमो नमः ॥ ७ ॥ (जिनके बिना यह सारा संसार सदा गूँगे और पागल के समान हो जाए; जो वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं—उन वाणी देवी को बारंबार नमस्कार है।) ॥ इति श्री शारदा प्रार्थना ॥

परिचय: श्री शारदा प्रार्थना

श्री शारदा प्रार्थना (Sri Sharada Prarthana) संस्कृत भाषा में रचित 7 श्लोकों की एक सुंदर और सरल प्रार्थना है। इसमें माँ शारदा (सरस्वती) को काश्मीरपुरवासिनी (काश्मीर में निवास करने वाली) कहकर संबोधित किया गया है।

काश्मीर में प्राचीन शारदा पीठ स्थित है, जो भारत के चार प्रमुख पीठों में से एक है और माँ सरस्वती का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह प्रार्थना उसी परंपरा से जुड़ी हुई है और विद्या, बुद्धि तथा वाक-शक्ति की याचना करती है।

इस प्रार्थना की विशेषताएँ

इस प्रार्थना में माँ के विभिन्न गुणों और स्वरूपों का सुंदर वर्णन है:

  • विद्या दान की प्रार्थना: पहले ही श्लोक में "विद्यादानं च देहि मे" (मुझे विद्या का दान दो) की सीधी प्रार्थना है।
  • मेधा और धारणा: दूसरे श्लोक में मेधा (बुद्धि) और धारणा (स्मरण शक्ति) का उल्लेख है, जो विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • वाणी की अधिष्ठात्री: छठे और सातवें श्लोक में स्पष्ट कहा गया है कि माँ के बिना संसार गूँगा और पागल हो जाए।
  • शम आदि गुण: माँ शांति (शम), दम, तितिक्षा आदि गुणों की दायिनी हैं।

पाठ के लाभ

1. विद्या और स्मरण शक्ति

नियमित पाठ से मेधा (बुद्धि) और धारणा (स्मरण शक्ति) में वृद्धि होती है।

2. वाणी की शुद्धि

माँ भक्तों की जिह्वा के अग्रभाग पर विराजती हैं—पाठ से वाणी में मधुरता और प्रभाव आता है।

3. मानसिक शांति

माँ "भवसन्तापनिर्वापणसुधानदी" (संसार के संतापों को शांत करने वाली अमृत नदी) हैं—पाठ से मानसिक शांति मिलती है।

पाठ विधि

  • प्रातःकाल स्नान के बाद और अध्ययन से पहले पाठ करना सर्वोत्तम है।
  • वसंत पंचमी और नवरात्रि पर विशेष फल मिलता है।
  • छोटी और सरल होने के कारण यह बच्चों को भी सिखाई जा सकती है।
  • माँ सरस्वती के चित्र के सामने दीपक जलाकर पाठ करने से शीघ्र फल मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. 'काश्मीरपुरवासिनी' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'काश्मीर नगर में निवास करने वाली'। काश्मीर में प्राचीन शारदा पीठ स्थित है जो माँ सरस्वती का प्रमुख तीर्थ है।

2. 'शश्वज्जीवन्मृतं' का क्या अर्थ है?

'शश्वत् + जीवन् + मृतम्' अर्थात् "सदैव जीवित होते हुए भी मृत के समान"। माँ के बिना मनुष्य में ज्ञान और वाणी न होने के कारण वह जीवित होते हुए भी निष्प्राण है।

3. क्या यह प्रार्थना बच्चों के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह छोटी और सरल है। बच्चों को वसंत पंचमी पर यह प्रार्थना सिखाना शुभ माना जाता है।

4. इसका पाठ कब करना चाहिए?

प्रातःकाल स्नान के बाद और अध्ययन से पहले इसका पाठ करना सर्वोत्तम है।