Sri Sharada Bhujanga Prayata Ashtakam – श्री शारदा भुजङ्ग प्रयाताष्टकम् (अर्थ सहित)

संलिखित ग्रंथ पढ़ें
परिचय: श्री शारदा भुजङ्ग प्रयाताष्टकम्
श्री शारदा भुजङ्ग प्रयाताष्टकम् (Sri Sharada Bhujanga Prayata Ashtakam) संस्कृत भाषा में रचित 8 श्लोकों का एक अत्यंत मधुर स्तोत्र है। इसके रचयिता स्वयं आदि जगद्गुरु श्री शंकराचार्य हैं।
'भुजङ्ग प्रयात' एक विशेष संस्कृत छंद है जिसकी लय सर्प की चाल की तरह लहराती हुई और तीव्र होती है। प्रसिद्ध शिव तांडव स्तोत्र भी इसी छंद में रचित है। इस अष्टकम् का प्रत्येक श्लोक "भजे शारदाम्बामजस्रं मदम्बाम्" से समाप्त होता है, जो माँ के प्रति निरंतर भक्ति का भाव व्यक्त करता है।
यह 'भुजङ्ग प्रयात स्तुति' से किस प्रकार भिन्न है?
यह अष्टकम् 8 श्लोकों का है और आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है। जबकि 'श्री शारदा भुजङ्ग प्रयात स्तुति' 17 श्लोकों की है और शृंगेरी के 33वें जगद्गुरु श्री नरसिंह भारती द्वारा रचित है। दोनों ही 'भुजंग प्रयात' छंद में हैं और माँ शारदा को समर्पित हैं, परंतु रचयिता और श्लोक संख्या भिन्न है।
इस अष्टकम् की विशेषताएँ
इस स्तोत्र में माँ शारदा के सौंदर्य और महिमा का अद्भुत वर्णन है:
- नवदुर्गा का संकेत: छठे श्लोक में माँ के विभिन्न वाहनों (हिरण, अश्व, सिंह, गरुड़, हंस, हाथी, बैल) का उल्लेख है, जो नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का संकेत देता है।
- त्रिदेवों द्वारा पूजित: अंतिम श्लोक में स्पष्ट है कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी माँ शारदा की पूजा करते हैं।
- ज्ञान मुद्रा का वर्णन: दूसरे श्लोक में माँ के हाथ में ज्ञान मुद्रा का सुंदर वर्णन है।
पाठ के लाभ
1. विद्या और बुद्धि प्राप्ति
2. ध्यान में एकाग्रता
3. परीक्षा और प्रतियोगिता में सफलता
पाठ विधि
- प्रातःकाल पूजा के समय, विशेषकर अध्ययन से पहले पढ़ना शुभ है।
- वसंत पंचमी और नवरात्रि (विशेषकर महानवमी) पर इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
- परीक्षाओं, साक्षात्कार या किसी भी बौद्धिक कार्य से पहले इसका पाठ करें।
- माँ सरस्वती के चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर पाठ करने से शीघ्र फल मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)