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Sri Shani Shodasa Nama Stotram – श्री शनैश्चर षोडशनाम स्तोत्रम्

Sri Shani Shodasa Nama Stotram – श्री शनैश्चर षोडशनाम स्तोत्रम्
॥ श्री शनैश्चर षोडशनाम स्तोत्रम् ॥ कोणः शनैश्चरो मन्दः छायाहृदयनन्दनः । मार्ताण्डजस्तथा सौरिः पातङ्गी गृहनायकः ॥ १ ॥ अब्राह्मणः क्रूरकर्मा नीलवस्त्राञ्जनद्युतिः । कृष्णो धर्मानुजः शान्तः शुष्कोदर वरप्रदः ॥ २ ॥ ॥ फलश्रुति ॥ षोडशैतानि नामानि यः पठेच्च दिने दिने । विषमस्थोऽपि भगवान् सुप्रीतस्तस्य जायते ॥ ३ ॥ ॥ इति श्री शनैश्चर षोडशनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

16 नामों का अर्थ (Meaning of 16 Names)

ये 16 नाम शनि देव के संपूर्ण व्यक्तित्व का परिचय देते हैं:

1. कोण (Konah):
वक्र गति वाले (Who moves at an angle/retrograde).
2. शनैश्चर (Shanaishcharah):
धीरे चलने वाले (Slow mover).
3. मन्द (Mandah):
धीमी गति वाले (Slow).
4. छायाहृदयनन्दन (Chaya-hridaya-nandanah):
माता छाया के प्रिय पुत्र।
5. मार्ताण्डज (Martandajah):
मार्तण्ड (सूर्य) के पुत्र।
6. सौरि (Saurih):
सूर्य वंशी/पुत्र।
7. पातङ्गी (Patangi):
पतंग (सूर्य) के वंशज।
8. गृहनायक (Graha-nayakah):
ग्रहों के स्वामी/नायक।
9. अब्राह्मण (Abrahmanah):
कर्म प्रधान (जो जाति से परे हैं)।
10. क्रूरकर्मा (Krura-karma):
कठोर कर्म (दंड) देने वाले।
11. नीलवस्त्र (Nila-vastrah):
नीले वस्त्र धारण करने वाले।
12. अञ्जनद्युति (Anjana-dyutih):
काजल (अंजन) जैसी काली कांति वाले।
13. कृष्ण (Krishnah):
काले वर्ण वाले।
14. धर्मानुज (Dharmanujah):
धर्मराज (यम) के छोटे भाई।
15. शान्त (Shantah):
भीषण होते हुए भी अंदर से शांत।
16. शुष्कोदर (Shushkodarah):
सूखे/पतले उदर (पेट) वाले (तपस्वी रूप)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. शनि के 16 नामों का पाठ कब करना चाहिए?

श्लोक 3 में स्पष्ट लिखा है 'दिने दिने' (प्रतिदिन)। इसे रोज सुबह स्नान के बाद या शाम को सूर्य अस्त के बाद पढ़ना सर्वोत्तम है।

2. 'कोण' नाम का क्या अर्थ है?

'कोण' का अर्थ है 'कोना' (Angle) या 'वक्र'। शनि कभी सीधे नहीं चलते, वे हमेशा वक्र (Retrograde) गति से या तिरछी चाल चलते हैं, इसलिए उन्हें 'कोण' कहा गया है।

3. क्या यह पाठ साढ़े साती में लाभकारी है?

हाँ, फलश्रुति कहती है 'विषमस्थोऽपि भगवान् सुप्रीतस्तस्य जायते' - अर्थात विषम (खराब) स्थिति या साढ़े साती में भी भगवान शनि प्रसन्न होकर शुभ फल देते हैं।

4. 'अब्राह्मण' नाम का क्या महत्व है?

यह एक रहस्यमयी नाम है। इसका अर्थ है जो पारंपरिक कर्मकांडों (ब्राह्मणोचित) से परे होकर 'न्याय' करते हैं। वे जाति-पाति नहीं, केवल 'कर्म' देखते हैं।

5. 'शुष्कोदर' किसे कहते हैं?

जिनका उदर (पेट) सूखा हुआ है। यह शनि देव की घोर तपस्या और भूख-प्यास से परे होने की स्थिति को दर्शाता है।

6. 'छायाहृदयनन्दन' का क्या अर्थ है?

माता 'छाया' के हृदय को आनंद देने वाले (नन्दन)। यह दर्शाता है कि शनि अपनी माता के कितने प्रिय हैं।

7. 'गृहनयक' का क्या मतलब है?

ग्रहों + नायक = ग्रहों के नेता। यद्यपि सूर्य राजा हैं, पर दंड देने का अधिकार (Magistrate) शनि के पास है, इसलिए वे 'नायक' हैं।

8. 'पातङ्गी' नाम क्यों है?

'पतंग' सूर्य का एक नाम है। 'पातङ्गी' का अर्थ है सूर्य (पतंग) के कुल से संबंधित या सूर्य पुत्र।

9. क्या इस स्तोत्र को याद करना आसान है?

जी हाँ, इसमें केवल 2 मुख्य श्लोक हैं। इसे याद करना और प्रतिदिन बोलना बहुत आसान है।

10. 'धर्मानुज' का क्या अर्थ है?

'धर्म' (यमराज) + 'अनुज' (छोटा भाई)। यमराज सूर्य के बड़े पुत्र हैं और शनि छोटे, इसलिए वे यमराज के छोटे भाई हैं।