Sri Pratyangira Suktam (Atharva Vedoktam) – श्री प्रत्यंगिरा सूक्तम् (अथर्ववेदोक्तम्) | Kritya Pariharan

अथर्ववेदीय प्रत्यंगिरा सूक्त: परिचय एवं रहस्य
श्री प्रत्यंगिरा सूक्तम् (Atharva Vedoktam) अथर्ववेद के १०वें काण्ड का प्रथम सूक्त है। इसे 'कृत्या परिहरण सूक्त' (Kritya Pariharan Sukta) भी कहा जाता है। वैदिक परंपरा में, जब भी किसी व्यक्ति, परिवार या राष्ट्र पर अदृश्य शत्रुओं का आक्रमण होता था, तो ऋषि अंगिरा द्वारा दृष्ट इस सूक्त का प्रयोग किया जाता था।
क्या है 'कृत्या'? 'कृत्या' वह नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति है जिसे तांत्रिक विधियों से सिद्ध करके किसी के विनाश के लिए भेजा जाता है। यह एक 'गाइडेड मिसाइल' (Guided Missile) की तरह कार्य करती है। यह सूक्त एक 'एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल' (Anti-Ballistic Missile) है जो उस कृत्या को बीच में ही रोककर, उसे वापस भेजने वाले के पास लौटा देती है।
इस सूक्त में देवी प्रत्यंगिरा से प्रार्थना है कि वे हमारे शत्रुओं द्वारा किए गए षड्यंत्रों, विष-प्रयोग और मारण-प्रयोगों को विफल करें और हमें पूर्ण सुरक्षा प्रदान करें।
सूक्त की मुख्य विशेषताएं
शत्रु का पराभव (Defeat of Enemy)
यह सूक्त स्पष्ट रूप से कहता है - "प्रतीचीः कृत्या आकृत्यामून्कृत्याकृतो जहि" - "हे देवी! तू वापस लौट जा और जिसने तुझे भेजा है, उसी का नाश कर।" यह शत्रु को उसी के जाल में फंसाने की विद्या है।
सर्व-दोष निवारण
चाहे वह श्मशान में किया गया प्रयोग हो, घर में गाड़ा गया 'वलग' हो, या अग्नि में दी गई आहुति हो - यह सूक्त हर तरह के अभिचार कर्म को जड़ से नष्ट कर देता है (श्लोक १८-१९)।
पूर्ण सुरक्षा (Ultimate Protection)
अंत में, ऋषि प्रार्थना करते हैं कि जैसे सूर्य अंधकार को मिटा देता है और हाथी धूल को झाड़ देता है, वैसे ही मैं अपने सभी पापों और दुर्भाग्य को झाड़कर फेंक देता हूँ (श्लोक ३२)।
पाठ के लाभ (Phala Shruti)
- काला जादू (Black Magic) से मुक्ति: यह सूक्त काले जादू के प्रभाव को तत्काल समाप्त करने के लिए रामबाण है।
- अकाल मृत्यु से रक्षा: यह साधक के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाता है।
- मानसिक शांति: भय, चिंता और बुरे स्वप्नों का नाश होता है।
- ग्रह बाधा निवारण: राहु-केतु और शनि जैसे क्रूर ग्रहों की पीड़ा शांत होती है।