श्री मयूरेश स्तुतिः (Sri Mayuresha Stuthi)
Sri Mayuresha Stuthi

श्री मयूरेश स्तुति का परिचय (Introduction)
मयूरेश्वर (मयूरेश) भगवान गणेश का सबसे प्रमुख और पूर्ण अवतार माना जाता है, जिनका प्रसिद्ध मंदिर पुणे के पास मोरगांव में स्थित है। यह अष्टविनायक में से प्रथम स्थान है।
यह स्तुति मुद्गल पुराण (खण्ड ६) से ली गई है। इसमें देवर्षियों (नारद आदि) ने मयूर वाहन पर आरूढ़ भगवान गणेश की महिमा गाई है, जिन्होंने 'सिंधु' नामक भयंकर दैत्य का वध किया था। यह विजय उत्सव का गान है।
महत्व (Significance)
- मयूरध्वज धारी: श्लोक १ में गणेश जी को "मयूरध्वजधारिणे" कहा गया है। मोर 'अनंत' और 'विजय' का प्रतीक है।
- अनाथों के नाथ: वे "अनाथानां प्रणाथाय" हैं, अर्थात जिनका कोई सहारा नहीं, उनके वे एकमात्र आश्रय हैं।
- सगुण-निर्गुण समन्वय: वे शिव-पार्वती के पुत्र (सगुण) भी हैं और अनादि-परेश (निर्गुण ब्रह्म) भी हैं।
लाभ (Benefits)
सर्व सिद्धि: स्वयं गणेश जी कहते हैं - "भवत्कृतमिदं स्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम्" अर्थात यह सभी सिद्धियां प्रदान करने वाला है।
मोक्ष प्राप्ति: इसके पाठ से "भुक्तिं मुक्तिं" (भोग और मोक्ष) दोनों की प्राप्ति होती है।
धर्म रक्षा: यह "स्वस्वधर्मरतानां च पालकाय" है, जो अपने धर्म और कर्तव्यों का पालन करने वालों की रक्षा करता है।
प्रश्नोत्तरी (FAQ)