श्री गणपति गकार अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् (108 Names starting with 'Ga')
Sri Ganapati Gakara Ashtottara Shatanama Stotram

स्तोत्र परिचय (Introduction)
स्तोत्र का महत्व (Significance)
- ➤गकार रूप: पहला ही नाम "गकाररूपो" है, जिसका अर्थ है "वह जिनका स्वरूप 'ग' अक्षर है।" यह दर्शाता है कि भगवान शब्द-ब्रह्म के रूप में 'ग' में निहित हैं।
- ➤सर्वव्यापकता: नाम "गगनव्यापको" (श्लोक 5) बताता है कि वे आकाश (Gagan) की तरह अनंत और सर्वव्यापी हैं। "गर्भार्भरक्षक" (श्लोक 8) बताता है कि वे गर्भ में पल रहे शिशु की भी रक्षा करते हैं।
- ➤शत्रु और भय नाशक: नाम "गजारिविक्रमो" (श्लोक 13) उनकी वीरता को सिंह (गजारि) के समान बताता है, और "गतभी" (श्लोक 19) का अर्थ है "भय से मुक्त"। वे अपने भक्तों को निडर बनाते हैं।
- ➤काव्य और कला: "गद्यपद्यात्मककवित्वद" (श्लोक 3) - वे गद्य और पद्य दोनों प्रकार की कवित्व शक्ति देने वाले हैं। कला और साहित्य के साधकों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लाभ एवं फलश्रुति (Benefits)
1. असीमित विद्या और धन
यह "गणनातीत विद्या श्री" (Verses 20) प्रदान करता है, अर्थात ऐसी विद्या और धन जिसे गिना न जा सके (असीमित)।
2. बल और आयु
यह साधक को शारीरिक बल (Bala) और लंबी आयु (Ayushya) प्रदान करता है, जिससे वह स्वस्थ जीवन जी सके।
3. शीघ्र फल प्राप्ति
श्लोक 22 में कहा गया है "यं यं कामयते कामं तं तं शीघ्रं प्रयच्छति" - जो भी कामना की जाती है, वह "शीघ्र" (जल्दी) पूरी होती है, विलंब नहीं होता।
4. सभी मनोकामनाएं
अंततः, विघ्नेश प्रसन्न होकर "सर्वान् कामान्" (सभी इच्छाओं) को पूर्ण करते हैं (श्लोक 23)।
पाठ की विधि (Vidhi for Chanting)
प्रश्नोत्तरी (FAQ)
श्री गणपति गकार अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र की क्या विशेषता है?
इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके सभी 108 नाम 'ग' (ग्) अक्षर से शुरू होते हैं। 'ग' गणेश जी का बीज अक्षर है, इसलिए यह स्तोत्र बहुत शक्तिशाली है।
"गकार" का क्या अर्थ है?
'गकार' का अर्थ है 'ग' अक्षर। शास्त्रों में 'ग' को बुद्धि, विवेक और मोक्ष का प्रतीक माना गया है।
भगवान के लिए 'ग' अक्षर क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह उनके मूल मंत्र "गम्" का आधार है। उनका पहला नाम ही 'गकाररूप' है, यानी वे साक्षात् 'ग' अक्षर का स्वरूप हैं।
इसके पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं?
श्लोक 20 के अनुसार, यह विद्या (ज्ञान), श्री (धन), बल (ताकत) और आयुष्य (लंबी उम्र) प्रदान करता है।
सिद्धि के लिए कितनी बार पाठ करना चाहिए?
विशेष कामना पूर्ति के लिए प्रतिदिन 21 बार पाठ करने का विधान श्लोक 23 में बताया गया है।
अनुष्ठान कितने दिनों का होना चाहिए?
ग्रंथ के अनुसार, शीघ्र फल प्राप्ति के लिए 21 दिनों (एकविंशति वासरान्) तक लगातार पाठ करना चाहिए।
पाठ में कौन सी वस्तु चढ़ाना अनिवार्य है?
दूर्वा (हरी घास)। श्लोक 22 में दूर्वा से अर्चन (पूजा) करने का विशेष निर्देश दिया गया है।
क्या विद्यार्थी शिक्षा के लिए इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। इसे 'गणनातीत विद्या' (असीमित ज्ञान) देने वाला कहा गया है, जो छात्रों के लिए सर्वोत्तम है।
क्या यह भय (Fear) को दूर करता है?
हाँ। श्लोक 19 में उनका एक नाम "गतभी" है, जिसका अर्थ है "जिन्होंने भय को दूर कर दिया है" या "जो निडर हैं"।
क्या यह नामावली है?
यह मूल रूप से एक स्तोत्र है, लेकिन इसके 108 नामों का प्रयोग करके "ॐ गकाररूपाय नमः", "ॐ गम्बीजाय नमः" इत्यादि बोलकर अर्चन (नामावली) भी किया जा सकता है।