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दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रम् (Daridrya Dahana Stotram) - आदि शंकराचार्य कृत

Sri Ganesha Daridrya Dahana Stotram

दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रम् (Daridrya Dahana Stotram) - आदि शंकराचार्य कृत
॥ श्री गणपति स्तोत्रम् – ३ (दारिद्र्यदहनम्) ॥ सुवर्णवर्णसुन्दरं सितैकदन्तबन्धुरं गृहीतपाशकाङ्कुशं वरप्रदाऽभयप्रदम् । चतुर्भुजं त्रिलोचनं भुजङ्गमोपवीतिनं प्रफुल्लवारिजासनं भजामि सिन्धुराननम् ॥ १ ॥ किरीटहारकुण्डलं प्रदीप्तबाहुभूषणं प्रचण्डरत्नकङ्कणं प्रशोभिताङ्घ्रियष्टिकम् । प्रभातसूर्यसुन्दराम्बरद्वयप्रधारिणं सरलहेमनूपुरं प्रशोभिताङ्घ्रिपङ्कजम् ॥ २ ॥ सुवर्णदण्डमण्डितप्रचण्डचारुचामरं गृहप्रतीर्णसुन्दरं युगक्षणं प्रमोदितम् । कवीन्द्रचित्तरञ्जकं महाविपत्तिभञ्जकं षडक्षरस्वरूपिणं भजेद्गजेन्द्ररूपिणम् ॥ ३ ॥ विरिञ्चिविष्णुवन्दितं विरूपलोचनस्तुतिं गिरीशदर्शनेच्छया समर्पितं पराशया । निरन्तरं सुरासुरैः सपुत्रवामलोचनैः महामखेष्टमिष्टकर्मसु भजामि तुन्दिलम् ॥ ४ ॥ मदौघलुब्धचञ्चलार्कमञ्जुगुञ्जितारवं प्रबुद्धचित्तरञ्जकं प्रमोदकर्णचालकम् । अनन्यभक्तिमानवं प्रचण्डमुक्तिदायकं नमामि नित्यमादरेण वक्रतुण्डनायकम् ॥ ५ ॥ दारिद्र्यविद्रावणमाशु कामदं स्तोत्रं पठेदेतदजस्रमादरात् । पुत्रीकलत्रस्वजनेषु मैत्री पुमान्मवेदेकवरप्रसादात् ॥ ६ ॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री गणपति स्तोत्रम् ।

स्तोत्र परिचय: दारिद्र्य दहन

दारिद्र्यदहन शिवस्तोत्रम् (Daridrya Dahana Stotram) जगतगुरु आदि शंकराचार्य की एक अद्भुत रचना है। जैसा कि नाम से सिद्ध है - "दारिद्र्य" (गरीबी) + "दहन" (जलाना), यह स्तोत्र दरिद्रता को जड़ से जला देने वाला है।

इसमें भगवान गणेश के उस दिव्य स्वरूप का वर्णन है जो स्वर्ण-आभा (Golden Lustre) से युक्त है और अपने भक्तों को अभय तथा वरदान देने के लिए सदैव तत्पर है।

स्तोत्र का महत्व (Significance)

यह स्तोत्र केवल धन प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि जीवन की पूर्णता का मंत्र है:
  • सुवर्ण वर्ण सुंदरम्: गणेश जी का ध्यान "स्वर्ण" (Gold) के समान कांति वाला किया गया है। यह ध्यान साधक के जीवन में भी स्वर्ण जैसी चमक और समृद्धि (Opulence) को आकर्षित करता है।

  • महाविपत्ति भंजकम्: श्लोक 3 में उन्हें "बड़ी से बड़ी विपत्ति को तोड़ने वाला" कहा गया है। आर्थिक तंगी एक विपत्ति ही है, जिसे वे क्षण भर में दूर कर देते हैं।

स्तोत्र के लाभ (Benefits)

शंकराचार्य जी ने अंतिम श्लोक (फलश्रुति) में इसके लाभों की स्पष्ट घोषणा की है:

1. गरीबी का नाश (Destroyer of Poverty)

यह स्तोत्र "दारिद्र्य विद्रावणम्" है, अर्थात गरीबी को खदेड़ देने वाला। यह ऋण (Debt) और अभावों को समाप्त कर धन-धान्य की वर्षा करता है।

2. पारिवारिक प्रेम (Family Harmony)

सबसे अनोखा लाभ - "पुत्री कलत्र स्वजनेषु मैत्री"। इसके पाठ से पुत्र, पत्नी और रिश्तेदारों के बीच झगड़े खत्म होते हैं और प्रेम (Maitri) बढ़ता है।

3. शीघ्र फलदायी (Instant Results)

इसे "आशु कामदं" कहा गया है। 'आशु' मतलब 'तुरंत'। यह बहुत जल्दी मनोकामना पूरी करने वाला स्तोत्र है।

4. मोक्ष की प्राप्ति

केवल भोग नहीं, यह "प्रचंड मुक्ति दायकम्" (श्लोक 5) भी है। यह अंततः जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है।

पाठ विधि (Recitation Method)

• संकल्प: आर्थिक समस्याओं के निवारण के लिए संकल्प लेकर पाठ करें।
• समय: प्रातः काल पूजा के समय।
• ध्यान: आँखें बंद कर गणेश जी को 'स्वर्ण आभूषणों' से लदा हुआ और प्रकाशमान (Radiant) देखें।
• निरंतरता: श्लोक 6 में "अजस्रम्" (निरंतर/Always) शब्द आया है। इसे नित्य नियम (Daily Routine) बना लेना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. दारिद्र्य दहन स्तोत्र का क्या महत्व है?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, 'दारिद्र्य दहन' का अर्थ है - 'गरीबी को जला देने वाला'। यह आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है जो आर्थिक संकटों और कर्ज़ को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है।

2. इसमें गणेश जी के किस स्वरूप का ध्यान है?

इसमें गणेश जी के 'सुवर्ण वर्ण' (सोने जैसे रंग), 'चतुर्भुज', 'त्रिनेत्र' और 'गजेंद्र रूप' का ध्यान किया गया है। वे कीमती रत्नों और आभूषणों से सजे हुए (Prachanda Ratna Kankan) हैं, जो ऐश्वर्य का प्रतीक है।

3. श्लोक 6 में वर्णित 'पुत्रीकलत्र... मैत्री' का क्या लाभ है?

यह स्तोत्र केवल धन नहीं देता, बल्कि पारिवारिक कलह भी मिटाता है। इसके पाठ से पुत्र, पत्नी और स्वजनों (Relatives) के बीच प्रेम और मैत्री (Harmony) बढ़ती है।

4. पाठ करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

इसे प्रतिदिन प्रातः काल (Sunrise) पढ़ना श्रेष्ठ है। यदि आप कर्ज़ (Debt) से परेशान हैं, तो 'चतुर्थी' या 'बुधवार' से शुरू करके 40 दिनों तक नियमित पाठ करें।

5. 'जगत्त्रयं प्रमोदितम्' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि गणेश जी अपनी कृपा से तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) को आनंदित (Promoditam) करते हैं। वे केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे जगत का कल्याण करते हैं।

6. क्या यह शंकराचार्य की रचना है?

हाँ, अंतिम श्लोक में स्पष्ट लिखा है - "श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं", जो इसकी प्रमाणिकता और शक्ति को सिद्ध करता है।

7. क्या महिलाएं इसका पाठ कर सकती हैं?

बिल्कुल. यह एक सात्विक स्तोत्र है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग कोई भी श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकता है।

8. 'आशु कामदं' (Ashu Kamadam) का क्या मतलब है?

'आशु' का अर्थ है 'शीघ्र' और 'कामदं' का अर्थ है 'इच्छा पूर्ती'। यह स्तोत्र बहुत जल्दी परिणाम देने वाला माना गया है।