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श्री गणेशाक्षरमालिका स्तोत्रम् (Sri Ganesha Aksharamalika Stotram)

Sri Ganesha Aksharamalika Stotram

श्री गणेशाक्षरमालिका स्तोत्रम् (Sri Ganesha Aksharamalika Stotram)
॥ श्री गणेशाक्षरमालिका स्तोत्रम् ॥ अगजाप्रियसुत वारणपतिमुख षण्मुखसोदर भुवनपते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ आगमशतनुत मारितदितिसुत मारारिप्रिय मन्दगते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ इज्याध्ययन मुखाखिलसत्कृति परिशुद्धान्तःकरणगते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ईर्ष्यारोषकषायितमानस दुर्जनदूर पदाम्बुरुह शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ उत्तमतर सत्फलदानोद्यत बलरिपुपूजित शूलिसुत शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ऊहापोह विशारद सम्यमिवर्गकृताभय ढुण्डिविभो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ऋद्धिसुखाभय विश्राणनजनितातुलकीर्तिचयैकनिधे शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ॠक्षाक्षरततिभर्त्सित दुर्गतवित्तविनाशन विघ्नपते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ऌप्तजगद्भय दिव्यगदायुध पोषितदीनजनामित भो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ॡतातन्तु सरूपजगच्चयनिर्मितदक्षदृगन्त विभो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ एणाङ्कार्धविभूषितमस्तक लम्बोदर गजदैत्यरिपो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ऐश्वर्याष्टकनियतनिकेतन पुण्ड्रेक्षूज्ज्वल दिव्यकर शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ओतं प्रोतमिदं हि जगत्त्वयि सृज्यहिवत्परिपूर्णसुखे शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ औदास्यं मयि विघ्नतमः कुलमार्ताण्ड प्रभ मा रचय शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ अङ्घ्रियुगे तव सन्ततसद्रतिमाशु विधत्स्व गणेश मम शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ अश्वस्तनगृहदार सुहृद्भव बन्धं विगलय मे त्वरया शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ कमनीयामितशोणिमदीधिति सन्ध्या भीकृतदिग्वलय शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ खण्डितभण्ड सहोदरनिर्मित विघ्नशिलामलशील गुरो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ गन्धर्वामरकिन्नरनरगण पूजितसज्जन दिव्यनिधे शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ घुपघुमिताखिलविष्टपदिव्य मदस्रुतिराजितगण्डयुग शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ङरतत्वात्मिक वेददलाम्बुज मध्यगतारुणशोभतनो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ चञ्चलघोणसमुद्धृत पीतोज्झित जलपूरितवारिनिधे शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ छायासहचर कोटिसुभास्वर निखिलगुणाकर सन्मतिद शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ जम्भारिप्रमुखामर पुष्कर दिवसकराङ्कुशकर वरद शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ झञ्झानिलमददूरीकृतिचण कर्णानिलधूताभ्रचय शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ज्ञप्तिसदानन्दात्मक निज वररदभान्यक्कृतशीतकर शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ टङ्कायुधवर मस्तकखण्डन यत्नविचित्रितभीतसुर शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ठान्ताब्जालयवदनालोकाविस्तरकामेश्या दयित शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ डोलायितरवि शशधरमण्डलतालातोषित सान्ध्यनट शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ ढक्कावादनतुष्टामरगण बृंहित शिक्षितलोकतते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ णान्ततदर्थ पदार्थ महार्थद पालय मां करुणालय भो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ तूलोपमविभ्रामितभूधर निश्वासानिल लोकपते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ थार्णवजलतति फूत्कृति विशदितमणिवर भास्वरिताण्डचय शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ दरवर्णात्ममनूत्तमशीलिवितीर्ण दुरापपुमर्थतते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ धर्मैकप्रिय धार्मिकतारक मोदकभक्षण नित्यरत शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ नानालोकनिवासि मनोरथलतिकामाधवदृक्प्रसर शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ परमाश्चर्यानुपम मनोहरविहरण पोषितलोकतते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ फालविलोचन फणिवरभूषण फलतति तर्पितकामचय शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ बालेन्दूज्ज्वल फाललसच्छवि तिर्यक्पुण्ड्रावलिललित शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ भगणाभामित मणिवर भूषित भस्मोद्धूलितचारुतनो शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ मूषिकवाहन मुनिजनपोषण मूर्तामूर्तोपाध्यगत शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ यामुनवारिविहारिसमर्चित यातायातक्लेशहर शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ रतिपतिपूजित लावण्याकर राकेन्दूज्ज्वल नखराले शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ लवणरसानन्तर जलनिधिवर सुमणिद्वीपान्तरसदन शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ वाराणस्यावासकुतूहल चिन्तामणिसाक्ष्याद्यभिध शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ शङ्करतोषित दमयन्त्यर्चित राघवपूजित रतिवरद शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ षड्गुणरत्नाकर लम्बोदर बीजापूर प्रिय सुमुख शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ सर्वकृति प्रथमार्चित गौतमपत्नीसेवित यमिकुलप शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ हेरम्बाश्रितपालन चामरकर्ण सुजम्बूफलभक्ष शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ लक्ष्मीपतिमहितातुल विक्रम रोहितताताखिल वरद शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ क्षेमं कुरु जगतामखिलार्थद वेङ्कटसुब्रह्मण्यनुत शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ फलश्रुति इत्थमियं पणवर्णमणिस्रक् सिद्धिगणाधिप पदकमले शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ निहिता ये ह्यनया स्तोष्यन्त्याप्स्यन्त्यखिलार्थांस्त्वरया ते शुभ । सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक सिद्धिविनायक पालय मां शुभ ॥ इति श्रीगणेशाक्षरमालिकास्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

परिचय (Introduction)

श्री गणेशाक्षरमालिका स्तोत्रम् (Sri Ganesha Aksharamalika Stotram) भगवान गणेश की एक अत्यंत विशिष्ट और दुर्लभ स्तुति है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह एक "अक्षर-माला" (Alphabet Garland) है।

इस स्तोत्र की रचना संस्कृत वर्णमाला के क्रम में की गई है। इसका प्रत्येक श्लोक "अ" (A) से लेकर "क्ष" (Ksha) तक के अक्षरों से प्रारम्भ होता है। यह सिद्धिविनायक (Siddhi Vinayaka) स्वरूप को समर्पित है, जो सभी सिद्धियों के दाता हैं।

स्तोत्र का महत्व (Significance)

भारतीय परंपरा में अक्षरों को मातृका शक्ति माना जाता है। गणेश जी को 'विद्यापति' और 'बुद्धिप्रदाता' कहा जाता है।

  • अक्षराभ्यास: बच्चों के विद्या आरम्भ संस्कार (Aksharabhyasam) के समय इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • वाक सिद्धि: यह वाणी के दोषों को दूर करने और उच्चारण को शुद्ध करने में सहायक है।
  • स्मृति वर्धन: वर्णमाला के क्रम में होने के कारण यह याद्दाश्त (Memory) बढ़ाने में मदद करता है।

पाठ के लाभ (Benefits - Phala Shruti)

इस स्तोत्र में बार-बार आने वाला पद "पालय मां शुभ" (मेरा पालन करें, शुभ करें) भक्त की पूर्ण शरणागति को दर्शाता है।

  • विद्या और ज्ञान: यह छात्रों के लिए वरदान है, जो उन्हें कुशाग्र बुद्धि प्रदान करता है।

  • रक्षा और सुरक्षा: "पालय मां" मंत्र का जाप भक्त को सभी संकटों और विघ्नों से सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

  • मनोकामना पूर्ति: सिद्धिविनायक की कृपा से भक्त की सभी मनोकामनाएं (Siddhis) पूर्ण होती हैं।

पाठ विधि (Method of Recitation)

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातःकाल स्नान के बाद, सूर्योदय के समय इसका पाठ विशेष फलदायी है।
  • बुधवार व्रत: बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करके इस स्तोत्र का पाठ करें।
  • अध्ययन से पूर्व: विद्यार्थी अपनी पढ़ाई शुरू करने से पहले इसे प्रार्थना के रूप में पढ़ सकते हैं।

प्रश्नोत्तरी (FAQ)

श्री गणेशाक्षरमालिका स्तोत्रम् (Ganesha Aksharamalika Stotram) क्या है?

यह भगवान गणेश की एक अद्वितीय स्तुति है, जिसमें प्रत्येक श्लोक संस्कृत वर्णमाला के एक अक्षर (अ से क्ष तक) से शुरू होता है। इसे 'अक्षर-माला' या वर्णमाला स्तोत्र भी कहा जाता है।

इस स्तोत्र में किस स्वरूप की आराधना की गई है?

इसमें मुख्य रूप से 'सिद्धिविनायक' (Siddhi Vinayaka) स्वरूप की आराधना की गई है। हर श्लोक के अंत में 'सिद्धिविनायक पालय मां शुभ' (हे सिद्धिविनायक! मेरा पालन करें) का उच्चार आता है।

इस स्तोत्र का पाठ छात्रों (Students) के लिए क्यों लाभकारी है?

चूँकि यह अक्षरों (व़र्णों) पर आधारित है, इसका पाठ वाणी, स्मृति और बुद्धि को तीव्र करता है। यह 'विद्यारम्भ' या 'अक्षराभ्यास' संस्कार के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

"सिद्धिविनायक पालय मां" का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है - "हे सिद्धियों के स्वामी विनायक! आप मेरा पालन (रक्षा) करें और मेरा कल्याण (शुभ) करें।"

क्या इसे प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है?

हाँ, इसे नित्य प्रातःकाल पढ़ने से मानसिक शांति और कार्यों में सफलता मिलती है। विशेष रूप से बुधवार (Wednesday) को इसका पाठ बहुत शुभ होता है.

इस स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?

संस्कृत वर्णमाला के 50/51 अक्षरों (स्वर और व्यंजन) के आधार पर इसमें लगभग 50+ श्लोक होते हैं, जो 'अ' (A) से शुरू होकर 'क्ष' (Ksha) पर समाप्त होते हैं।

क्या छोटे बच्चे इसका पाठ कर सकते हैं?

बिल्कुल। बच्चों को यह स्तोत्र सिखाने से उनका उच्चारण (Pronunciation) शुद्ध होता है और भाषा पर पकड़ मजबूत होती है।

"षड्गुणरत्नाकर" (श्लोक में) का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि गणेश जी "छह गुणों" (ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान, वैराग्य) के रत्नाकर (सागर) हैं।

क्या यह स्तोत्र किसी पुराण से लिया गया है?

यह एक स्वतंत्र स्तोत्र परंपरा का हिस्सा है, जो भक्तों और संतों द्वारा गणेश जी की अक्षर-ब्रह्म के रूप में उपासना के लिए रचा गया है।

विद्या प्राप्ति के लिए इसे कैसे पढ़ें?

पढ़ाई शुरू करने से पहले पूर्व दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करें। यह एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है।