Sri Budha Stotram 3 – श्री बुध स्तोत्रम् ३ (प्रभात स्तोत्रनिधि)

इस स्तोत्र का विशिष्ट महत्व
श्री बुध स्तोत्रम् (Sri Budha Stotram) प्रभात स्तोत्रनिधि ग्रंथ से लिया गया एक विशेष प्रातःकालीन स्तोत्र (Morning Prayer) है। इसमें 12 श्लोक हैं जो बुध ग्रह के विभिन्न दिव्य नामों और गुणों का वर्णन करते हैं। इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें बुध को 'विष्णुभक्तिमते' और 'विष्णुप्रियो' कहा गया है, जो दर्शाता है कि बुध भगवान विष्णु के परम भक्त हैं।
यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो प्रातःकाल जागकर अपने दिन की शुरुआत पूजा-पाठ से करना चाहते हैं। फलश्रुति में स्पष्ट है कि प्रातः उठकर इसका पाठ करने से कार्य सिद्धि होती है, भय दूर होता है और व्यक्ति बुद्धिमान बनता है।
स्तोत्र के प्रमुख लाभ (Benefits)
इस स्तोत्र की फलश्रुति (श्लोक 10-12) में इसके अद्भुत लाभों का वर्णन है:
भय से मुक्ति: "न भयं विद्यते तस्य" - प्रातः उठकर इन नामों का पाठ करने वाले को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता।
कार्य सिद्धि: "कार्यसिद्धिर्भविष्यति" - सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
पीड़ा निवारण और बुद्धि वृद्धि: "न तस्य पीडा बाधन्ते बुद्धिभाक्च भवेत्सुधीः" - कोई भी पीड़ा नहीं सताती और व्यक्ति बुद्धिमान (सुधी) बन जाता है।
पापों से मुक्ति और विष्णुलोक प्राप्ति: "सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति" - समस्त पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक (वैकुंठ) की प्राप्ति होती है।
ग्रह पीड़ा निवारण: श्लोक 9 में बुध को "ग्रहपीडानिवारकः" कहा गया है - वे सभी ग्रहों की पीड़ा दूर करने में सक्षम हैं।
पाठ करने की विधि (Method of Chanting)
समय: यह प्रभात स्तोत्र है। इसे प्रातःकाल (Morning) में, स्नान के बाद, सूर्योदय के समय पढ़ना चाहिए।
दिन: बुधवार (Wednesday) को विशेष फलदायी।
आसन और दिशा: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। हरे या पीले आसन का प्रयोग करें।
पूजन: बुध यंत्र या भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने पाठ करें, क्योंकि इस स्तोत्र में बुध को विष्णु भक्त बताया गया है।
अर्पण: हरी मूंग, तुलसी दल, या पीले पुष्प अर्पित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यह बुध स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?
यह प्रभात स्तोत्र है, अर्थात इसे प्रातःकाल उठकर पढ़ना चाहिए। फलश्रुति में कहा गया है: "प्रातरुत्थाय यः पठेत्" और "प्रभाते पठते नरः"।
2. इस स्तोत्र में कुल कितने श्लोक हैं?
इस स्तोत्र में कुल 12 श्लोक हैं। पहले 9 श्लोकों में बुध के नामों और गुणों का वर्णन है, जबकि अंतिम 3 श्लोक फलश्रुति हैं।
3. बुध को 'विष्णुभक्त' क्यों कहा गया है?
इस स्तोत्र में बुध को "विष्णुभक्तिमते" और "विष्णुप्रियो" कहा गया है। यह दर्शाता है कि बुध भगवान विष्णु के परम भक्त और प्रिय हैं। इसीलिए इसके पाठ से विष्णुलोक की प्राप्ति भी होती है।
4. बुध का वर्ण (रंग) क्या है?
"कुङ्कुमच्छविभूषित" और "हेमाङ्गः" - बुध का वर्ण केसर (कुंकुम) जैसा और स्वर्ण (सुनहरा) बताया गया है।
5. बुध के हाथों में क्या है?
"खड्गचर्मगदापाणिः" - बुध के हाथों में खड्ग (तलवार), चर्म (ढाल) और गदा है।
6. बुध को कौन सा दान प्रिय है?
"स्वर्णदानकरप्रिय" - बुध को स्वर्ण (सोना) का दान प्रिय है। यदि सोना संभव न हो तो पीली वस्तुएं या हरी मूंग का दान करें।
7. बुध सूर्य रथ में कहाँ स्थित हैं?
"आदित्यस्य रथे तिष्ठन्" - बुध सूर्य देव के रथ में स्थित रहते हैं। यह उनकी खगोलीय स्थिति (सूर्य के निकट) को दर्शाता है।
8. क्या इस स्तोत्र से ग्रह पीड़ा दूर होती है?
हाँ, बुध को "ग्रहपीडानिवारकः" कहा गया है। वे सभी ग्रहों की पीड़ा दूर करने में सक्षम हैं।
9. इस स्तोत्र से विष्णुलोक कैसे प्राप्त होता है?
फलश्रुति में कहा गया है: "सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति"। चूँकि बुध विष्णु भक्त हैं, उनकी कृपा से भक्त भी विष्णुलोक प्राप्त करता है।
10. यह स्तोत्र किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह स्तोत्र प्रभात स्तोत्रनिधि नामक पारायण ग्रंथ से लिया गया है, जो प्रातःकाल के लिए विशेष स्तोत्रों का संकलन है।