Sri Budha Panchavimsati Nama Stotram – श्री बुध पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम्

॥ श्री बुध पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम् ॥
बुधो बुद्धिमतां श्रेष्ठो बुद्धिदाता धनप्रदः । प्रियङ्गुकलिकाश्यामः कञ्जनेत्रो मनोहरः ॥ १ ॥अर्थ: जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, बुद्धि देने वाले हैं, धन प्रदान करने वाले हैं, प्रियंगु (एक प्रकार की लता) की कली के समान (हरे/श्याम) वर्ण वाले हैं, कमल जैसे नेत्रों वाले हैं और मनोहर (सुंदर) हैं, उन बुध को प्रणाम है।
ग्रहोपमो रौहिणेयो नक्षत्रेशो दयाकरः । विरुद्धकार्यहन्ता च सौम्यो बुद्धिविवर्धनः ॥ २ ॥अर्थ: जो ग्रहों में उपमा रहित हैं, रोहिणी के पुत्र (रौहिणेय) हैं, नक्षत्रों के स्वामी हैं, दया करने वाले हैं, विरुद्ध कार्यों (बाधाओं) का नाश करने वाले हैं, सौम्य स्वभाव के हैं और बुद्धि को बढ़ाने वाले हैं।
चन्द्रात्मजो विष्णुरूपी ज्ञानी ज्ञो ज्ञानिनायकः । ग्रहपीडाहरो दारपुत्रधान्यपशुप्रदः ॥ ३ ॥अर्थ: जो चन्द्रमा के आत्मज (पुत्र) हैं, साक्षात् विष्णु के रूप हैं, ज्ञानी हैं, स्वयं ज्ञान स्वरूप (ज्ञ) हैं और ज्ञानियों के नायक हैं। जो ग्रहों की पीड़ा हरने वाले हैं तथा स्त्री, पुत्र, धन-धान्य और पशुधन प्रदान करने वाले हैं।
लोकप्रियः सौम्यमूर्तिर्गुणदो गुणिवत्सलः । पञ्चविंशतिनामानि बुधस्यैतानि यः पठेत् ॥ ४ ॥अर्थ: जो लोक में प्रिय हैं, सौम्य मूर्ति हैं, गुणों को देने वाले हैं और गुणवानों से स्नेह रखने वाले (गुणिवत्सल) हैं। जो कोई भी बुध के इन पच्चीस नामों का पाठ करता है...
स्मृत्वा बुधं सदा तस्य पीडा सर्वा विनश्यति । तद्दिने वा पठेद्यस्तु लभते स मनोगतम् ॥ ५ ॥अर्थ: ...और सदा बुध का स्मरण करता है, उसकी सभी पीड़ाएं नष्ट हो जाती हैं। जो व्यक्ति (विशेषकर बुधवार के) दिन इन नामों का पाठ करता है, वह अपनी मनचाही वस्तुओं और इच्छाओं को प्राप्त कर लेता है।
॥ इति श्रीपद्मपुराणे श्री बुध पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
परिचय (Introduction)
वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) में बुध (Mercury) को 'ग्रहों का राजकुमार' कहा जाता है। यह बुद्धि, वाणी, तर्क, गणित, संचार (Communication) और व्यापार का कारक ग्रह है। जन्म कुंडली में बुध की स्थिति यह निर्धारित करती है कि व्यक्ति कितना बुद्धिमान, वाकपटु और व्यवहारकुशल होगा। 'पद्म पुराण' में वर्णित श्री बुध पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम् 25 दिव्य नामों का एक शक्तिशाली समूह है, जो बुध ग्रह को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का अचूक साधन है।
यह स्तोत्र विशेष रूप से छात्रों, लेखकों, वक्ताओं और व्यापारियों के लिए लाभकारी है। यदि किसी की कुंडली में बुध अस्त, नीच या पीड़ित हो, तो उन्हें मानसिक अस्थिरता, त्वचा रोग और व्यापार में हानि का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस स्तोत्र का नियमित पाठ रक्षा कवच का कार्य करता है।
स्तोत्र के प्रमुख लाभ (Benefits & Phala Shruti)
इस स्तोत्र की फलश्रुति (Phala Shruti) में स्वयं इसके लाभों का वर्णन है: "स्मृत्वा बुधं सदा तस्य पीडा सर्वा विनश्यति"। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
बुद्धि और विद्या में वृद्धि: "बुद्धिदाता" - यह छात्रों की स्मरण शक्ति (Memory Power) बढ़ाता है और कठिन विषयों को समझने की क्षमता प्रदान करता है।
वाणी दोष निवारण: जिन बच्चों को बोलने में देर होती है या जो हकलाते हैं, उनके लिए यह रामबाण है। यह वाणी को मधुर और प्रभावशाली बनाता है।
धन और व्यापार में सफलता: "धनप्रदः" - व्यापारियों के लिए बुध की कृपा अत्यंत आवश्यक है। यह सही निर्णय लेने की क्षमता देकर व्यापार में लाभ सुनिश्चित करता है।
त्वचा और तंत्रिका तंत्र स्वास्थ्य: बुध त्वचा (Skin) और नसों (Nerves) का कारक है। इसके पाठ से चर्म रोगों और नर्वस सिस्टम की समस्याओं में राहत मिलती है।
पाठ करने की विधि और नियम (Vidhi for Chanting)
सर्वोत्तम फल प्राप्ति हेतु इस विधि का पालन करें:
दिन और समय: पाठ का आरंभ बुधवार (Wednesday) के दिन, शुक्ल पक्ष में करें। प्रातः काल सूर्योदय के बाद बुध की होरा में पाठ करना श्रेष्ठ है।
आसन और दिशा: उत्तर दिशा (North - जो कुबेर और बुध की दिशा है) की ओर मुख करके बैठें। हरे रंग के आसान का प्रयोग करें।
पूजन सामग्री: बुध यंत्र या भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं। तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करें, क्योंकि बुध विष्णु रूपी माने गए हैं। हरी इलायची या मूंग की दाल का भोग लगाएं।
विशेष मंत्र: स्तोत्र पाठ के बाद बुध का बीज मंत्र 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' की 1 माला (108 बार) जपें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. बुध पञ्चविंशतिनाम स्तोत्र का पाठ क्यों महत्वपूर्ण है?
बुध पञ्चविंशतिनाम स्तोत्र का पाठ वाणी की मधुरता, तार्किक शक्ति में वृद्धि, और व्यापार में सफलता के लिए किया जाता है। यह विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता बढा़ने में विशेष लाभकारी है।
2. बुध के 25 नाम (Budha 25 Names) कौन से हैं?
इसमें बुध के 25 दिव्य नाम हैं जैसे: बुध, बुद्धिमतां श्रेष्ठ, बुद्धिदाता, धनप्रद, प्रियंगुकलिकाश्याम, कञ्जनेत्र, मनोहर, ग्रहोपम, रौहिणेय, नक्षत्रेश, दयाकर, विरुद्धकार्यहन्ता, सौम्य, बुद्धिविवर्धन, चन्द्रात्मज, विष्णुरूपी, ज्ञानी, ज्ञ, ज्ञानिनायक, ग्रहपीडाहर, दारपुत्रधान्यपशुप्रद, लोकप्रिय, सौम्यमूर्ति, गुणद, और गुणिवत्सल।
3. क्या यह स्तोत्र वाणी दोष (Speech Defects) दूर करता है?
हाँ, ज्योतिष शास्त्र में बुध को वाणी (Speech) का कारक माना गया है। जो बच्चे देर से बोलते हैं या हकलाते हैं, उन्हें यह स्तोत्र सुनाने या उनके द्वारा पाठ कराने से वाणी दोष समाप्त होता है।
4. इस स्तोत्र का पाठ किस दिन करना चाहिए?
इसका पाठ विशेष रूप से बुधवार (Wednesday) को करना चाहिए। यदि प्रतिदिन 'होरा' के अनुसार बुध की होरा में पाठ किया जाए तो वह सर्वोत्तम है।
5. बुध की शांति के लिए क्या दान करना चाहिए?
बुध की शांति के लिए हरी मूंग दाल, हरे वस्त्र, कांसे के बर्तन, या पन्ना (Emerald) रत्न का दान करना शुभ होता है। किन्नरों को दान/भोजन कराने से भी बुध अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
6. क्या व्यापार वृद्धि के लिए यह स्तोत्र लाभकारी है?
जी हाँ, बुध व्यापार (Commerce and Trade) के भी देवता हैं। 'धनप्रद' और 'दारपुत्रधान्यपशुप्रद' जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि यह स्तोत्र धन-धान्य और व्यावसायिक सफलता प्रदान करने वाला है।
7. बुध देव का प्रिय रंग और रत्न कौन सा है?
बुध का प्रिय रंग हरा (Green) है। उनका मुख्य रत्न पन्ना (Emerald) है। पाठ करते समय हरे रंग के आसन या वस्त्र का प्रयोग लाभकारी होता है।
8. क्या छात्र परीक्षाओं में सफलता के लिए इसका पाठ कर सकते हैं?
अवश्य, यह स्तोत्र छात्रों के लिए एक वरदान है। 'बुद्धिविवर्धनः' नाम का अर्थ ही है 'बुद्धि को बढ़ाने वाला'। परीक्षा के दिनों में इसका नित्य पाठ स्मरण शक्ति को बढ़ाता है।
9. इस स्तोत्र की जप संख्या कितनी होनी चाहिए?
नित्य कम से कम एक बार पाठ अवश्य करें। विशेष कार्य सिद्धि के लिए इसे लगातार 45 दिनों तक या प्रतिदिन 21 बार पठन करना चाहिए।
10. यह स्तोत्र किस पुराण से लिया गया है?
यह सिद्ध स्तोत्र 'पद्म पुराण' (Padma Purana) से उद्धृत है, जो 18 महापुराणों में से एक अत्यंत पवित्र ग्रंथ माना जाता है।