बुध स्तोत्रम् – Budha Stotram in Sanskrit & Hindi

बुधस्तोत्रम्
पीताम्बरः पीतवपुः पीतध्वजरथस्थितः । पीयूषरश्मितनयः पातु मां सर्वदा बुधः ॥ १॥ सिंहवाहं सिद्धनुतं सौम्यं सौम्यगुणान्वितम् । सोमसूनुं सुराराध्यं सर्वदं सौम्यमाश्रये ॥ २॥ बुधं बुद्धिप्रदातारं बाणबाणासनोज्ज्वलम् । भद्रप्रदं भीतिहरं भक्तपालनमाश्रये ॥ ३॥ आत्रेयगोत्रसञ्जातमाश्रितार्तिनिवारणम् । आदितेयकुलाराध्यमाशुसिद्धिदमाश्रये ॥ ४॥ कलानिधितनूजातं करुणारसवारिधिम् । कल्याणदायिनं नित्यं कन्याराश्यधिपं भजे ॥ ५॥ मन्दस्मितमुखाम्भोजं मन्मथायुतसुन्दरम् । मिथुनाधीशमनघं मृगाङ्कतनयं भजे ॥ ६॥ चतुर्भुजं चारुरूपं चराचरजगत्प्रभुम् । चर्मखड्गधरं वन्दे चन्द्रग्रहतनूभवम् ॥ ७॥ पञ्चास्यवाहनगतं पञ्चपातकनाशनम् । पीतगन्धं पीतमाल्यं बुधं बुधनुतं भजे ॥ ८॥ बुधस्तोत्रमिदं गुह्यं वसिष्ठेनोदितं पुरा । यः पठेच्छृणूयाद्वापि सर्वाभीष्टमवाप्नुयात् ॥ ९॥ ॥ इति बुधस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥स्तोत्र का विशिष्ट महत्व और बुध ग्रह
बुध स्तोत्रम् (Budha Stotram) नवग्रहों में राजकुमार माने जाने वाले बुध ग्रह (Mercury Planet) की स्तुति है। इसे प्राचीन काल में महर्षि वशिष्ठ (Sage Vashishtha) ने रचा था, जैसा कि नौवें श्लोक में स्पष्ट है: "बुधस्तोत्रमिदं गुह्यं वसिष्ठेनोदितं पुरा"। यह एक 'गुह्य' (Secret) स्तोत्र है जिसके पाठ या श्रवण मात्र से सभी अभीष्ट (मनोकामनाएं) पूर्ण होती हैं।
ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि (Intellect), वाणी (Speech), व्यापार (Commerce), गणित (Mathematics), और संचार (Communication) का कारक माना जाता है। बुध चंद्रमा (Soma/Moon) और तारा के पुत्र हैं। इनका वर्ण (complexion) पीला या हरा (Yellowish-Green) माना जाता है और ये सौम्य ग्रहों में गिने जाते हैं।
स्तोत्र का गूढ़ भावार्थ (Deep Meaning of Verses)
- पीताम्बर और सिंहवाहन (Verses 1-2): उन्हें "पीताम्बरः" (पीले वस्त्र धारण करने वाले) और "सिंहवाहं" (सिंह की सवारी करने वाले) के रूप में वर्णित किया गया है। पीला रंग ज्ञान और विद्या का प्रतीक है।
- बुद्धि प्रदाता (Verse 3): उन्हें "बुधं बुद्धिप्रदातारं" कहा गया है। वे न केवल तीक्ष्ण बुद्धि देते हैं, बल्कि "भीतिहरं" (भय का नाश करने वाले) भी हैं।
- आत्रेय गोत्र (Verse 4): "आत्रेयगोत्रसञ्जातम्" - बुध आत्रेय गोत्र से उत्पन्न माने जाते हैं और शीघ्र सिद्धि (आशुसिद्धि) देने वाले हैं।
- राशियों के स्वामी (Verses 5-6): "कन्याराश्यधिपं" (कन्या राशि के स्वामी) और "मिथुनाधीशं" (मिथुन राशि के स्वामी)। इन राशियों के जातकों के लिए यह स्तोत्र विशेष फलदायी है।
- चतुर्भुज स्वरूप (Verse 7): "चतुर्भुजं चारुरूपं" - चार भुजाओं वाले, चर्म और खड्ग धारण करने वाले।
- पाप नाशक (Verse 8): "पञ्चपातकनाशनम्" - पंच महापापों (ब्रह्महत्या आदि) का नाश करने में सक्षम।
- फलश्रुति (Verse 9): "यः पठेच्छृणूयाद्वापि सर्वाभीष्टमवाप्नुयात्" - जो इसे पढ़ता या सुनता है, वह सभी मनोकामनाएं प्राप्त करता है।
फलश्रुति आधारित लाभ (Benefits of Chanting)
- शिक्षा और प्रतियोगिता (Education & Exams): विद्यार्थियों के लिए यह रामबाण है। इससे स्मरण शक्ति (Memory Power) बढ़ती है और गणित व तर्क (Logic) में दक्षता आती है।
- व्यापार वृद्धि (Business Success): बुध व्यापार के देवता हैं। व्यवसायी वर्ग यदि इसका नित्य पाठ करे, तो व्यापार में सही निर्णय लेने की क्षमता और लाभ बढ़ता है।
- वाणी दोष निवारण (Speech Delay Remedy): जो लोग हकलाते हैं, देर से बोलते हैं, या अपनी बात स्पष्ट नहीं कह पाते, उनके लिए यह स्तोत्र वाक-सिद्धि (Eloquence) प्रदान करता है।
- स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits): बुध त्वचा (Skin) और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) का कारक है। इसके पाठ से त्वचा संबंधी रोग और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
- सभी मनोकामना पूर्ति: नौवें श्लोक की फलश्रुति के अनुसार, पाठ या श्रवण मात्र से "सर्वाभीष्टमवाप्नुयात्" - सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
पाठ करने की विधि और शुभ समय (Chanting Method)
- बुधवार (Wednesday) का दिन बुध ग्रह की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन पाठ करना सर्वोत्तम है।
- प्रातःकाल स्नान के बाद हरे या पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा में हरी मूंग (Green Gram), हरे फल या दूर्वा अर्पित करें।
- इस स्तोत्र का कम से कम 5 या 11 बार पाठ करें।
- साथ ही बुध बीज मंत्र "ॐ बुं बुधाय नमः" का 108 बार जाप भी लाभकारी होता है।
- उत्तर दिशा (North) की ओर मुख करके बैठें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. बुध स्तोत्र का पाठ किस दिन करना चाहिए?
बुधवार (Wednesday) को प्रातःकाल या बुध की होरा में पाठ करना सर्वोत्तम है। हालांकि, इसे प्रतिदिन भी पढ़ा जा सकता है।
2. यह स्तोत्र किसने लिखा है?
यह स्तोत्र महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित है, जैसा कि नौवें श्लोक में कहा गया है: "वसिष्ठेनोदितं पुरा"।
3. बुध स्तोत्र में कुल कितने श्लोक हैं?
इस स्तोत्र में कुल 9 श्लोक हैं। आठवें श्लोक तक बुध की स्तुति है और नौवां श्लोक फलश्रुति है।
4. क्या इसे केवल पढ़ने से लाभ होता है या सुनने से भी?
हाँ, फलश्रुति में स्पष्ट है: "यः पठेच्छृणूयाद्वापि" - जो पढ़े या सुने, दोनों को समान लाभ मिलता है।
5. बुध ग्रह का वाहन क्या है?
इस स्तोत्र में बुध को "सिंहवाहं" और "पञ्चास्यवाहनगतं" (पंचमुख सिंह पर आरूढ़) बताया गया है।
6. बुध की राशियाँ कौन सी हैं?
बुध कन्या (Virgo) और मिथुन (Gemini) दोनों राशियों के स्वामी हैं।
7. बुध का गोत्र क्या है?
स्तोत्र के अनुसार, बुध "आत्रेय गोत्र" से उत्पन्न माने जाते हैं।
8. बुध को प्रसन्न करने के लिए क्या चढ़ाएं?
हरी मूंग, हरे वस्त्र, पन्ना (Emerald), दूर्वा, और तुलसी के पत्ते बुध को प्रिय हैं।
9. क्या बच्चों के वाणी दोष (Late Speech) में यह स्तोत्र लाभकारी है?
हाँ, बुध वाणी के कारक हैं। जो बच्चे देर से बोलते हैं या हकलाते हैं, उनके माता-पिता यदि यह स्तोत्र उन्हें सुनाएं, तो लाभ होता है।
10. बुध बीज मंत्र क्या है?
बुध का बीज मंत्र है: "ॐ बुं बुधाय नमः"। इसे 108 बार जपने से बुध की कृपा प्राप्त होती है।