Sri Bala Karpura Stotram – श्री बाला कर्पूर स्तोत्रम् (परातन्त्र)

॥ श्री बाला कर्पूर स्तोत्रम् ॥
(श्रीपरातन्त्रे)
॥ कविराट् सिद्धि — पलाश होम ॥
कर्पूराभेन्दुगौरां शशिशकलधरां रक्तपद्मासनस्थां
विद्यापात्राक्षमुद्राधृतकरकमलां त्वां स्मरन् सन् त्रिलक्षम् ।
जप्त्वा चन्द्रार्धभूषं सुरुचिरमधरं बीजमाद्यं तवेदं
हुत्वा पश्चात्पलाशैः स भवति कविराड्देवि बाले महेशि ॥ १ ॥
॥ वश्यता सिद्धि — चन्द्र होम ॥
हस्ताब्जैः पात्रपाशाङ्कुशकुसुमधनुर्बीजपूरान् दधानां
रक्तां त्वां संस्मरन् सन् प्रजपति मनुजो यस्त्रिलक्षं भवानि ।
वामाक्षी चन्द्रसंस्थं क्षितिसहितविधिं कामबीजं तवेदं
चन्द्रैर्हुत्वा दशांशं स नयति सकलान् वश्यतां सर्वदैव ॥ २ ॥
॥ श्री और भोग — मालती होम ॥
विद्याक्षज्ञानमुद्राऽमृतकलशधरां त्वां मनोज्ञां किशोरीं
स्मेरां ध्यायंस्त्रिनेत्रां शशधरधवलां यो जपेद्वै त्रिलक्षम् ।
जीवं सङ्कर्षणाढ्यं तव सुरनमिते सर्गयुक्तं सुबीजं
हुत्वाऽन्ते मालतीभिर्भवति स ललिते श्रीयुतो भोगवांश्च ॥ ३ ॥
॥ अष्टसिद्धि — कुलविधौ षट्सहस्र ॥
ध्यायंस्त्वां पुस्तकाक्षाभयवरदकरां लोहिताभां कुमारीं
कश्चिद्यः साधकेन्द्रो जपति कुलविधौ प्रत्यहं षट्सहस्रम् ।
मातर्वाङ्मारशक्तिप्रयुतमनुमिमं त्र्यक्षरं त्रैपुरं ते
भुक्त्वा भोगाननेकान् जननि स लभतेऽवश्यमेवाष्टसिद्धीः ॥ ४ ॥
॥ योगीश तत्त्ववेत्ता — पायसान्न होम ॥
आरक्तां कान्तदोर्भ्यां मणिचषकमथो रत्नपद्मं दधानां
वाङ्मायाश्रीयुतान्यं मनुमयि ललिते तत्त्वलक्षं जपेद्यः ।
ध्यायन् रूपं त्वदीयं तदनु च हवनं पायसान्नैः प्रकुर्या-
-द्योगीशस्तत्त्ववेत्ता परशिवमहिले भूतले जायते सः ॥ ५ ॥
॥ षडर्ण मन्त्रराज — सायुज्यमुक्ति ॥
वाणी चेटी रमा वाग्भवमथ मदनः शक्तिबीजं च षड्भिः
एतैश्चन्द्रार्धचूडे भवति तव महामन्त्रराजः षडर्णः ।
जप्त्वैनं साधको यः स्मरहरदयिते भक्तितस्त्वामुपास्ते
विद्यैश्वर्याणि भुक्त्वा तदनु स लभते दिव्यसायुज्यमुक्तिम् ॥ ६ ॥
॥ बाला यन्त्र ॥
महाबिन्दुः शुद्धो जननि नवयोन्यन्तरगतो
भवेदेतद्बाह्ये वसुछदनपद्मं सुरुचिरम् ।
ततो वेदद्वारं भवति तव यन्त्रं गिरिसुते
तदस्मिन् त्वां ध्यायेत्कहरिहररुद्रेश्वरपदाम् ॥ ७ ॥
॥ मोक्ष प्राप्ति — किंशुक होम ॥
नवीनादित्याभां त्रिनयनयुतां स्मेरवदनां
महाक्षस्रग्विद्याऽभयवरकरां रक्तवसनाम् ।
किशोरीं त्वां ध्यायन्निजहृदयपद्मे परशिवे
जपेन्मोक्षाप्त्यर्थं तदनु जुहुयात् किंशुकसुमैः ॥ ८ ॥
॥ अतुल धन — मालूर फल होम ॥
हृदम्भोजे ध्यायन् कनकसदृशामिन्दुमुकुटां
त्रिनेत्रां स्मेरास्यां कमलमधुलुङ्गाङ्कितकराम् ।
जपेद्दिग्लक्षं यस्तव मनुमयो देवि जुहुयात्
सुपक्वैर्मालूरैरतुलधनवान् स प्रभवति ॥ ९ ॥
॥ सुविद्या प्राप्ति — कर्पूर-अगरु होम ॥
स्मरेद्धस्तैर्वेदाभयवरसुधाकुम्भधरिणीं
स्रवन्तीं पीयूषं धवलवसनामिन्दुशकलाम् ।
सुविद्याप्त्यै मन्त्रं तव हरनुते लक्षनवकं
जपेत्त्वां कर्पूरैरगरु सहितैरेव जुहुयात् ॥ १० ॥
॥ आरोग्य प्राप्ति — गुडूची होम ॥
सहस्रारे ध्यायन् शशधरनिभां शुभ्रवसनां
अकारादिक्षान्तावयवयुतरूपां शशिधराम् ।
जपेद्भक्त्या मन्त्रं तव रससहस्रं प्रतिदिनं
तथारोग्याप्त्यर्थं भगवति गुडूच्यैः प्रजुहुयात् ॥ ११ ॥
॥ जीवन्मुक्ति — कुलविधि ॥
कुलज्ञः कश्चिद्यो यजति कुलपुष्पैः कुलविधौ
कुलागारे ध्यायन् कुलजननि ते मन्मथकलाम् ।
षडर्णं पूर्वोक्तं जपति कुलमन्त्रं तव शिवे
स जीवन्मुक्तः स्यादकुलकुलपङ्केरुहगते ॥ १२ ॥
॥ त्रिकालज्ञ महाभैरव — चक्रार्चा ॥
शिवे मद्यैर्मांसेश्चणकवटकैर्मीनसहितैः
प्रकुर्वंश्चक्रार्चां सुकुलभगलिङ्गामृतरसैः ।
बलिं शङ्कामोहादिकपशुगणान्यो विदधति
त्रिकालज्ञो ज्ञानी स भवति महाभैरवसमः ॥ १३ ॥
॥ क्षमायाचना ॥
मनोवाचागम्यामकुलकुलगम्यां परशिवां
स्तवीमि त्वां मातः कथमहमहो देवि जडधीः ।
तथापि त्वद्भक्तिर्मुखरयति मां तद्विरचितं
स्तवं क्षन्तव्यं मे त्रिपुरललिते दोषमधुना ॥ १४ ॥
॥ फलश्रुतिः ॥
अनुष्ठानध्यानार्चामनु समुद्धारणयुतं
शिवे ते कर्पूरस्तवमिति पठेदर्चनपरः ।
स योगी भोगी स्यात् स हि निखिलशास्त्रेषु निपुणः
यमोऽन्यो वैरीणां विलसति सदा कल्पतरुवत् ॥ १५ ॥
॥ पञ्चप्रेतासन ध्यानम् ॥
बालां बालदिवाकरद्युतिनिभां पद्मासने संस्थितां
पञ्चप्रेतमयाम्बुजासनगतां वाग्वादिनीरूपिणीम् ।
चन्द्रार्कानलभूषितत्रिनयनां चन्द्रावतंसान्वितां
विद्याक्षाभयधारिणीं वरकरां वन्दे परामम्बिकाम् ॥ १६ ॥
॥ इति श्रीपरातन्त्रे श्री बाला कर्पूर स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
श्री बाला कर्पूर स्तोत्रम् का परिचय
श्री बाला कर्पूर स्तोत्रम् (Sri Bala Karpura Stotram) परातन्त्र ग्रंथ से लिया गया एक अत्यंत गूढ़ और साधना-प्रधान स्तोत्र है। 'कर्पूर' नाम इसलिए है क्योंकि प्रथम श्लोक में देवी को 'कर्पूराभेन्दुगौराम्' कहा गया है — कर्पूर और चन्द्रमा जैसी श्वेत-गौर कान्ति वाली।
"स भवति कविराट् देवि बाले महेशि" — श्लोक 1: त्रिलक्ष (3 लाख) जप और पलाश पुष्प से होम करने वाला कविराट् (कवियों का राजा) बनता है।
विशिष्ट संरचना: यह केवल स्तुति नहीं है, बल्कि यह एक साधना मैनुअल है। प्रत्येक श्लोक में विशिष्ट साधना विधि है — जप संख्या (त्रिलक्ष, षट्सहस्र, दशलक्ष), होम द्रव्य (पलाश, मालती, किंशुक, मालूर, कर्पूर, गुडूची), और प्राप्त सिद्धि।
षडर्ण मन्त्रराज: श्लोक 6 में बाला के 6-अक्षर महामन्त्र का वर्णन: 'वाणी चेटी रमा वाग्भवमथ मदनः शक्तिबीजं च षड्भिः' — इसके जप से विद्यैश्वर्य और दिव्यसायुज्यमुक्ति प्राप्त होती है।
बाला यन्त्र: श्लोक 7 में बाला यन्त्र का वर्णन: महाबिन्दु, नवयोनि, अष्टदल पद्म, चार द्वार। इसमें देवी का ध्यान करना चाहिए।
फलश्रुति: श्लोक 15: 'स योगी भोगी स्यात् स हि निखिलशास्त्रेषु निपुणः' — पाठक योगी भी होता है, भोगी भी, सर्व शास्त्रों में निपुण, शत्रुओं के लिए यम के समान।
विशिष्ट महत्व — 16 श्लोक और उनकी सिद्धियाँ
- श्लोक 1 — कविराट्: त्रिलक्ष जप + पलाश होम। कवियों का राजा।
- श्लोक 2 — वश्यता: त्रिलक्ष जप + चन्द्र होम। सर्व वशीकरण।
- श्लोक 3 — श्री-भोग: त्रिलक्ष जप + मालती होम। सम्पत्ति और भोग।
- श्लोक 4 — अष्टसिद्धि: प्रतिदिन 6000 जप। 8 योग सिद्धियाँ।
- श्लोक 5 — योगीश: तत्त्वलक्ष जप + पायसान्न होम। तत्व ज्ञान।
- श्लोक 6 — सायुज्यमुक्ति: षडर्ण मन्त्रराज। विद्या-ऐश्वर्य और मोक्ष।
- श्लोक 7 — यन्त्र: बाला यन्त्र का वर्णन।
- श्लोक 8 — मोक्ष: हृदय ध्यान + किंशुक होम।
- श्लोक 9 — अतुल धन: दशलक्ष जप + मालूर होम। असीम धन।
- श्लोक 10 — सुविद्या: नवलक्ष जप + कर्पूर-अगरु होम।
- श्लोक 11 — आरोग्य: सहस्रार ध्यान + गुडूची होम।
- श्लोक 12 — जीवन्मुक्ति: कुलविधि में षडर्ण जप।
- श्लोक 13 — त्रिकालज्ञ: महाभैरव समता।
- श्लोक 14 — क्षमायाचना: जड़बुद्धि होते हुए भी भक्ति से स्तुति।
- श्लोक 15 — फलश्रुति: योगी-भोगी, शास्त्र-निपुण, कल्पतरु।
- श्लोक 16 — ध्यान: पञ्चप्रेतासन, वाग्वादिनी, परामम्बिका।
पाठ विधि
- सामान्य पाठ: 16 श्लोकों का नियमित पाठ — सर्व मंगल।
- साधना पाठ: श्लोक में वर्णित विधि अनुसार जप और होम।
- कविता सिद्धि: श्लोक 1 — पलाश पुष्प होम।
- वशीकरण: श्लोक 2 — चन्द्र समस्थ होम।
- अष्टसिद्धि: श्लोक 4 — कुलविधि में 6000 दैनिक।
- धन: श्लोक 9 — मालूर फल होम।
- आरोग्य: श्लोक 11 — गुडूची होम।
FAQ
1. यह स्तोत्र किस ग्रंथ से है?
परातन्त्र। कोलोफोन: 'इति श्रीपरातन्त्रे'।
2. 'कर्पूर' नाम क्यों है?
श्लोक 1: 'कर्पूराभेन्दुगौराम्' — कर्पूर-चन्द्र कान्ति।
3. 'त्रिलक्षं' का अर्थ?
3 लाख (3,00,000) जप — विशिष्ट सिद्धि के लिए।
4. 'षडर्ण मन्त्रराज' क्या है?
श्लोक 6: बाला का 6-अक्षर महामन्त्र।
5. 'अष्टसिद्धि' किस श्लोक में?
श्लोक 4: अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।
6. बाला यन्त्र का वर्णन कहाँ?
श्लोक 7: महाबिन्दु, नवयोनि, अष्टदल, वेदद्वार।
7. 'पञ्चप्रेतासन' क्या है?
श्लोक 16: ब्रह्मा-विष्णु-रुद्र-ईश्वर-सदाशिव का आसन।
8. 'कविराट्' कैसे बनें?
श्लोक 1: त्रिलक्ष जप + पलाश पुष्प होम।
9. धन प्राप्ति के लिए कौन सा श्लोक?
श्लोक 9: 'अतुलधनवान् स प्रभवति' — मालूर फल होम।
10. आरोग्य के लिए कौन सा श्लोक?
श्लोक 11: सहस्रार ध्यान + गुडूची होम।
11. फलश्रुति में क्या कहा गया?
श्लोक 15: योगी-भोगी, शास्त्र-निपुण, शत्रुओं के लिए यम।
12. क्या बिना दीक्षा के पाठ कर सकते हैं?
स्तोत्र पाठ सभी कर सकते हैं। विशेष साधना (होम) गुरु मार्गदर्शन से करें।