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Sri Bala Mantrakshara Stotram – श्री बाला मन्त्राक्षर स्तोत्रम्

Sri Bala Mantrakshara Stotram – श्री बाला मन्त्राक्षर स्तोत्रम्
॥ श्री बाला मन्त्राक्षर स्तोत्रम् ॥ ॥ ऐं — वाग्भव कूट (विद्या और ऐश्वर्य) ॥ ऐंकारैकसमस्तशत्रुरचनामावेद्य मूर्तिप्रदां ऐश्वर्यादिकमष्टभोगफलदां ऐश्वर्यदां पुष्पिणीम् । ऐन्द्रव्याकरणादिशास्त्रवरदां ऐरावताराधितां ऐशानीं भुवनत्रयस्य जननीं ऐङ्कारिणीमाश्रये ॥ १ ॥ ॥ क्लीं — कामराज कूट (वशीकरण और आकर्षण) ॥ क्लींकारैकसमस्तवश्यकरिणीं क्लीं पञ्चबाणात्मिकां क्लीं विद्रावणकारिणीं वरशिवां क्लिन्नां शिवालिङ्गिताम् । क्लीबोऽपि प्रणमन्भवानि भवतीं ध्यात्वा हृदम्भोरुहे क्लिन्नाशेषवशीकरो भवति यत्क्लीङ्कारिणीं नौम्यहम् ॥ २ ॥ ॥ सौः — शक्ति कूट (सौभाग्य और मोक्ष) ॥ सौः शब्दप्रथितामरादि विनुतां सूक्तिप्रकाशप्रदां सौभाग्याम्बुधिमन्थनामृतरसां सौन्दर्यसम्पत्करीम् । सान्निध्यं दधतीं सदा प्रणमतां साम्राज्यलक्ष्मीप्रदां सौः काराङ्कितपादपङ्कजयुगां सौषुम्नगां नौम्यहम् ॥ ३ ॥ ॥ इति श्री बाला मन्त्राक्षर स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

मन्त्राक्षर स्तोत्र क्या है?

श्री बाला त्रिपुरसुन्दरी का मूल मन्त्र तीन अक्षरों (बीजों) का है: ऐं - क्लीं - सौः
यह मन्त्राक्षर स्तोत्र इन्हीं तीन बीजों की व्याख्या है। इसमें केवल 3 श्लोक हैं, लेकिन हर श्लोक एक बीज की पूरी शक्ति को खोलकर रख देता है।
  • पहला श्लोक 'ऐं' (वाग्भव बीज) से शुरू होता है।
  • दूसरा श्लोक 'क्लीं' (कामराज बीज) से शुरू होता है।
  • तीसरा श्लोक 'सौः' (शक्ति बीज) से शुरू होता है।
यह स्तोत्र दरअसल 'त्र्यक्षरी मन्त्र' का ही विस्तृत रूप है। अगर आप मन्त्र जाप नहीं कर पा रहे, तो इन 3 श्लोकों का पाठ करें — फल वही मिलेगा।

तीनों बीजों का महत्व

१. ऐं (Aim) — ज्ञान और ऐश्वर्य:
पहला श्लोक कहता है कि 'ऐं' बीज शत्रुओं का नाश करता है ("शत्रुरचनामावेद्य"), अष्ट-भोग देता है, और व्याकरण आदि शास्त्रों का प्रकांड ज्ञान ("व्याकरणादिशास्त्रवरदां") देता है। यह सरस्वती का बीज है।
२. क्लीं (Kleem) — आकर्षण और वशीकरण:
दूसरा श्लोक कहता है कि 'क्लीं' बीज समस्त जगत् को वश में करने वाला ("समस्तवश्यकरिणीं") है। यहाँ तक कि अगर कोई नपुंसक ("क्लीबोऽपि") भी इसका ध्यान करे, तो वह भी कामदेव जैसा आकर्षक हो जाता है और सबको वश में कर लेता है।
३. सौः (Sauh) — सौभाग्य और मोक्ष:
तीसरा श्लोक कहता है कि 'सौः' बीज सौभाग्य का समुद्र है ("सौभाग्याम्बुधि")। यह सौंदर्य देता है और अंत में "साम्राज्य लक्ष्मी" (मोक्ष और राजपद दोनों) प्रदान करता है।

पाठ विधि

बहुत सरल विधि: यह बहुत छोटा स्तोत्र है। इसे पूजा के अंत में 3 बार, 11 बार या 21 बार पढ़ें।
कामना भेद से:
- परीक्षा/ज्ञान के लिए: पहले श्लोक पर जोर दें।
- रिश्तों/आकर्षण के लिए: दूसरे श्लोक पर जोर दें।
- धन/सौभाग्य के लिए: तीसरे श्लोक पर जोर दें।
सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या वंदन के समय।

आम सवाल

1. 'मन्त्राक्षर' का मतलब क्या है?

मन्त्र + अक्षर। यानी मन्त्र के अक्षरों (बीजों) पर बना हुआ स्तोत्र। ये बाला के 3 बीजों की व्याख्या है।

2. क्या इसे बिना दीक्षा के पढ़ सकते हैं?

हाँ। बीज मन्त्र (ऐं क्लीं सौः) के लिए दीक्षा चाहिए होती है, लेकिन यह 'स्तोत्र' है। स्तोत्र पढ़ने के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं है।

3. 'क्लीबोऽपि' का मतलब क्या है?

श्लोक 2 में आता है। इसका अर्थ है — "कायर या शक्तिहीन पुरुष भी"। यानी यह बीज इतना शक्तिशाली है कि कमजोर व्यक्ति को भी तेजस्वी बना देता है।

4. 'साम्राज्य लक्ष्मी' क्या है?

सिर्फ धन नहीं, बल्कि राज-सुख और अधिकार। जीवन में उच्च पद और अंत में मोक्ष — इसी को साम्राज्य लक्ष्मी कहते हैं।