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Sri Bala Dalam – श्री बाला दलम् (रक्षा मंत्र)

Sri Bala Dalam – श्री बाला दलम् (रक्षा मंत्र)
॥ श्री बाला दलम् ॥ ओं नमो भगवति बालापरमेश्वरि रविशशिवह्निविद्युत्कोटिनिभाकारे, हारनूपुरकिरीटकुण्डल हेमसूत्र मुक्तादामभूषित सर्वगात्रे, पीयूषवरप्रिये, ऋग्यजुस्सामादि निगमकोटिभिः संस्तूयमान चरणारविन्दद्वयशोभिते, किन्नर चारण यक्ष विद्याधर साध्य किम्पुरुषादि परिवृत महेन्द्रमुख त्रिदशसङ्घैः संसेव्यमाने, षट्कोट्यप्सरसां नृत्तसन्तोषिते, अणिमाद्यष्टसिद्धिभिः पूजितपादाम्बुजद्वये, खड्ग कपाल त्रिशूल भिण्डिपाल शक्तिचक्र कुन्त गदा परिघ चाप बाण पाश वह्नि क्षेपणिकादि दिव्यायुधैः शोभिते, दुष्टदानव गर्वशोषिणि, एकाहिक द्व्याहिक चातुर्थिक सांवत्सरिकादि सर्वज्वरभयविच्छेदिनि, राज चोराग्नि जल विष भूत कृत्य नानाविध ज्वर स्फोटकादि नानारूपेभ्यो नानाभिचारेभ्यो नानापवादेभ्यः परकर्म मन्त्र तन्त्र शल्य शून्य क्षुद्रादिभ्यः संरक्षिणि, सकल दुरित संहारकारिणि, सर्व मङ्गल दया संवर्षिणि, ललितोत्सङ्गनिवासिनि, महामाये, श्रीपरमेश्वरि ममाभयं देहि देहि दापय स्वाहा ॥ ॥ इति श्री बाला दलम् सम्पूर्णम् ॥

श्री बाला दलम् का परिचय (Introduction)

श्री बाला दलम् (Sri Bala Dalam) एक अत्यंत शक्तिशाली रक्षा मंत्र है। 'दल' का अर्थ है 'पंखुड़ी' या 'ढाल/कवच'। जैसे कमल की पंखुड़ियाँ उसके केंद्र की रक्षा करती हैं, वैसे ही यह मंत्र साधक को सभी दिशाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।

यह एक एकल दीर्घ मंत्र है जिसमें बाला त्रिपुरसुन्दरी का विस्तृत वर्णन, उनकी दिव्य शक्तियाँ, और साधक को सुरक्षा प्रदान करने की प्रार्थना संकलित है। यह मंत्र 'ओं नमो भगवति बालापरमेश्वरि' से प्रारंभ होता है और 'ममाभयं देहि देहि दापय स्वाहा' पर समाप्त होता है।

"ममाभयं देहि देहि दापय स्वाहा"


भावार्थ: हे माँ! मुझे अभय (निर्भयता) दो, दो, और दिलवाओ! स्वाहा!

इस मंत्र की विशेषता यह है कि इसमें देवी को ललितोत्सङ्गनिवासिनी (ललिता की गोद में निवास करने वाली) कहा गया है, जो बाला के बाल स्वरूप और माँ ललिता से उनके संबंध को दर्शाता है।

देवी का दिव्य स्वरूप (Divine Form)

तेज: 'रविशशिवह्निविद्युत्कोटिनिभाकारे' — देवी का स्वरूप करोड़ों सूर्य, चंद्र, अग्नि, और बिजलियों के समान तेजस्वी है।

आभूषण: मंत्र में देवी के छः प्रमुख आभूषणों का वर्णन है:

हार
गले का हार
नूपुर
पायल
किरीट
मुकुट
कुण्डल
कर्णाभूषण
हेमसूत्र
स्वर्ण धागा
मुक्तादाम
मोती की माला

सेवक: देवी की सेवा करने वाले दिव्य जीवों का उल्लेख है — किन्नर, चारण, यक्ष, विद्याधर, साध्य, किम्पुरुष, इंद्रादि देवगण, और षट्कोटि (60 लाख) अप्सराएं जो नृत्य से देवी को प्रसन्न करती हैं।

अष्ट सिद्धियाँ: 'अणिमाद्यष्टसिद्धिभिः पूजितपादाम्बुजद्वये' — अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व — ये आठों सिद्धियाँ देवी के चरणों की पूजा करती हैं।

दिव्य आयुध (Divine Weapons)

मंत्र में देवी के 12+ दिव्य आयुधों का विस्तृत वर्णन है:
खड्ग
तलवार
कपाल
खोपड़ी
त्रिशूल
त्रिशूल
भिण्डिपाल
भाला
शक्ति
शक्ति अस्त्र
चक्र
सुदर्शन
कुन्त
भाला/बर्छी
गदा
गदा
परिघ
गदा प्रकार
चाप
धनुष
बाण
तीर
पाश
पाश

इसके अतिरिक्त वह्नि क्षेपणिका (अग्नि फेंकने वाला यंत्र) — यह दर्शाता है कि देवी सभी प्रकार के शस्त्रों से सुसज्जित हैं।

सर्वांगीण रक्षा (Complete Protection)

इस मंत्र में व्यापक रक्षा का उल्लेख है। देवी इन सभी भयों से साधक की रक्षा करती हैं:
ज्वर भय
एकाहिक (1 दिन), द्व्याहिक (2 दिन), चातुर्थिक (4 दिन), सांवत्सरिक (वर्षभर) — सभी प्रकार के ज्वर।
प्राकृतिक भय
राज (राजा/सरकार), चोर, अग्नि, जल, विष — प्राकृतिक और सामाजिक भय।
तांत्रिक भय
भूत, कृत्या, अभिचार, पर कर्म, मंत्र-तंत्र प्रयोग।
अन्य भय
शल्य, शून्य, क्षुद्र, नाना अपवाद, नाना रूप, स्फोटक (फोड़े) आदि।

पाठ के अद्भुत लाभ (Benefits)

इस रक्षा मंत्र के नियमित पाठ से साधक को निम्नलिखित दिव्य लाभ प्राप्त होते हैं:

  • सर्व ज्वर भय नाश: 'सर्वज्वरभयविच्छेदिनि' — सभी प्रकार के बुखार से मुक्ति।
  • दुष्ट दानव नाश: 'दुष्टदानव गर्वशोषिणि' — दुष्ट शक्तियों का गर्व सुखाने वाली।
  • सकल दुरित नाश: 'सकल दुरित संहारकारिणि' — सभी पापों और दोषों का नाश।
  • सर्व मंगल: 'सर्व मङ्गल दया संवर्षिणि' — सम्पूर्ण मंगल और दया की वर्षा।
  • अभय प्राप्ति: 'ममाभयं देहि' — सभी भयों से मुक्ति और निर्भयता।
  • तांत्रिक प्रयोग से रक्षा: भूत, कृत्या, अभिचार, मंत्र-तंत्र प्रयोगों से सुरक्षा।
  • प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा: अग्नि, जल, विष आदि से सुरक्षा।
  • सामाजिक भय से रक्षा: राजभय, चोरभय, अपवाद आदि से मुक्ति।

साधना और पाठ विधि (Recitation Method)

इस रक्षा मंत्र की सिद्धि के लिए निम्न विधि से पाठ करें:
1. नियमित पाठ
प्रातःकाल या संध्या में 3, 11, या 21 बार पाठ करें। यह स्थायी सुरक्षा प्रदान करता है।
2. संकट काल में
किसी भी संकट या भय के समय तुरंत इस मंत्र का पाठ करें। 108 बार जप विशेष रूप से प्रभावी है।
3. रोगी के लिए
ज्वर या रोग से पीड़ित व्यक्ति के शीर्ष पर हाथ रखकर इस मंत्र का पाठ करें।
4. जल अभिमंत्रण
जल पर 21 बार मंत्र पढ़कर पीने या छिड़कने से रक्षा होती है।

विशेष: यह एकल मंत्र होने से कहीं भी, कभी भी पाठ किया जा सकता है। यात्रा, भय, या संकट के समय मन में भी इसका स्मरण करना लाभदायी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. 'दलम्' का अर्थ क्या है?

'दल' का अर्थ है 'पंखुड़ी' या 'ढाल/कवच'। यह बाला का एक पंखुड़ी रूपी रक्षा मंत्र है जो साधक को सभी दिशाओं से सुरक्षा प्रदान करता है। जैसे कमल की पंखुड़ी सुंदर और सुरक्षित होती है, वैसे ही यह मंत्र साधक को सुंदरता और सुरक्षा देता है।

2. इस मंत्र की संरचना क्या है?

यह एक एकल लंबा मंत्र है जो 'ओं नमो भगवति बालापरमेश्वरि' से प्रारंभ होता है और 'ममाभयं देहि देहि दापय स्वाहा' पर समाप्त होता है। इसमें देवी का वर्णन, उनकी शक्तियाँ, और सुरक्षा की प्रार्थना एक ही मंत्र में संकलित है।

3. 'रविशशिवह्निविद्युत्कोटिनिभाकारे' का क्या अर्थ है?

रवि (सूर्य) + शशि (चंद्र) + वह्नि (अग्नि) + विद्युत् (बिजली) के करोड़ों कांति के समान प्रकाशमान। देवी का स्वरूप करोड़ों सूर्य, चंद्र, अग्नि और बिजलियों के समान तेजस्वी है।

4. देवी के आभूषणों का वर्णन क्या है?

मंत्र में देवी के आभूषणों का सुंदर वर्णन है: हार (गले का हार), नूपुर (पायल), किरीट (मुकुट), कुण्डल (कर्णाभूषण), हेमसूत्र (स्वर्ण धागा), और मुक्तादाम (मोती की माला) — इन सबसे सम्पूर्ण अंग भूषित हैं।

5. किन-किन ज्वरों से रक्षा का उल्लेख है?

मंत्र में विभिन्न ज्वरों का उल्लेख है: एकाहिक (एक दिन), द्व्याहिक (दो दिन), चातुर्थिक (चार दिन), सांवत्सरिक (वर्षभर का)। देवी इन सभी प्रकार के ज्वर भय का विच्छेद करती हैं।

6. किन-किन भयों से रक्षा का उल्लेख है?

मंत्र में व्यापक रक्षा का उल्लेख है: राज (राजा), चोर, अग्नि, जल, विष, भूत, कृत्या (तांत्रिक प्रयोग), नाना विध ज्वर, स्फोटक (फोड़े), नाना रूप, नाना अभिचार, नाना अपवाद, पर कर्म, मंत्र, तंत्र, शल्य, शून्य, क्षुद्र आदि।

7. 'अणिमाद्यष्टसिद्धिभिः पूजितपादाम्बुजद्वये' का क्या अर्थ है?

अणिमा आदि अष्ट सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) देवी के चरण कमलों की पूजा करती हैं। अर्थात सिद्धियाँ स्वयं देवी की सेविका हैं।

8. देवी के दिव्य आयुधों का वर्णन क्या है?

मंत्र में 12 दिव्य आयुधों का उल्लेख है: खड्ग (तलवार), कपाल (खोपड़ी), त्रिशूल, भिण्डिपाल (भाला), शक्ति, चक्र, कुन्त (भाला), गदा, परिघ (गदा प्रकार), चाप (धनुष), बाण, पाश, और वह्नि क्षेपणिका (अग्नि फेंकने वाला)।

9. 'ललितोत्सङ्गनिवासिनि' का क्या अर्थ है?

ललिता (महात्रिपुरसुन्दरी) की गोद (उत्सङ्ग) में निवास करने वाली। बाला माँ ललिता की गोद में बैठी पुत्री हैं। यह उनके बाल स्वरूप और ललिता से संबंध को दर्शाता है।

10. इस मंत्र का पाठ कैसे करें?

यह एक एकल मंत्र है जिसे 3, 11, 21, या 108 बार जप किया जा सकता है। संकट काल में इसका पाठ तुरंत रक्षा प्रदान करता है। प्रातःकाल या संध्या में नियमित पाठ से स्थायी सुरक्षा मिलती है।