Logoपवित्र ग्रंथ

Navagraha Prarthana 2 – नवग्रह प्रार्थना – २

Navagraha Prarthana 2 – नवग्रह प्रार्थना – २
॥ नवग्रह प्रार्थना – २ ॥ सूर्यः शौर्यमथेन्दुरुच्चपदवीं सन्मङ्गलं मङ्गलः सद्बुद्धिं च बुधो गुरुश्च गुरुतां शुक्रः सुखं शं शनिः । राहुर्बाहुबलं करोतु विपुलं केतुः कुलस्योन्नतिं नित्यं प्रीतिकरा भवन्तु भवतां सर्वे प्रसन्ना ग्रहाः॥ इति नवग्रह प्रार्थना – २ सम्पूर्णा ॥

प्रत्येक ग्रह का विशिष्ट वरदान (Specific Blessing from Each Planet)

ग्रहसंस्कृत पदवरदानअर्थ
सूर्यशौर्यम्Courageवीरता, पराक्रम
चन्द्रउच्चपदवीHigh Positionउच्च पद, प्रतिष्ठा
मंगलसन्मङ्गलम्Auspiciousnessशुभ, मंगलकारी
बुधसद्बुद्धिGood Intellectसत् (सच्ची) बुद्धि
बृहस्पतिगुरुताGravity/Respectगंभीरता, सम्मान
शुक्रसुखम्Happinessसुख, आनंद
शनिशम् (शान्ति)Peaceशांति, कल्याण
राहुबाहुबलम्Arm Strengthशारीरिक बल
केतुकुलस्योन्नतिFamily Progressवंश की उन्नति

श्लोक का विस्तृत अर्थ (Detailed Meaning)

पंक्ति १: सूर्यः शौर्यमथेन्दुरुच्चपदवीं सन्मङ्गलं मङ्गलः
सूर्य शौर्य (वीरता) दें, चन्द्र (इन्दु) उच्च पद दें, मंगल शुभ-मंगल करें।



पंक्ति २: सद्बुद्धिं च बुधो गुरुश्च गुरुतां शुक्रः सुखं शं शनिः
बुध सद्बुद्धि दें, गुरु गुरुता (गंभीरता/सम्मान) दें, शुक्र सुख दें, शनि शान्ति (शम्) दें।



पंक्ति ३: राहुर्बाहुबलं करोतु विपुलं केतुः कुलस्योन्नतिं
राहु विपुल (बहुत) बाहुबल दें, केतु कुल (वंश) की उन्नति करें।



पंक्ति ४ (फलश्रुति): नित्यं प्रीतिकरा भवन्तु भवतां सर्वे प्रसन्ना ग्रहाः
सभी ग्रह सदैव प्रसन्न रहकर आपका प्रेम (कल्याण) करते रहें।

विशेष बातें (Special Features)

  • शब्द-खेल: 'मंगल' ग्रह से 'मंगल' (शुभ) माँगा - ग्रह नाम और वरदान एक ही।
  • गुरु से गुरुता: समान शब्द-मूल से व्युत्पन्न वरदान।
  • शनि से शम्: 'शनि' और 'शम्' (शांति) ध्वनि-साम्य।
  • अंतिम पंक्ति: "सर्वे प्रसन्ना ग्रहाः" - सभी ग्रह प्रसन्न हों।
  • सबसे संक्षिप्त: मात्र 1 श्लोक में सभी 9 ग्रहों का आह्वान।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. इस प्रार्थना में कितने श्लोक हैं?

केवल 1 श्लोक - यह सबसे संक्षिप्त नवग्रह प्रार्थना है। 30 सेकंड में पाठ पूर्ण।

2. प्रार्थना 1 और 2 में क्या अंतर है?

प्रार्थना 1 में 3 श्लोक हैं और अलग वरदान (आरोग्य, सम्पत्ति आदि)। प्रार्थना 2 में 1 श्लोक और भिन्न वरदान (शौर्य, उच्च पद आदि)।

3. 'उच्चपदवी' का क्या अर्थ है?

उच्च (ऊँचा) + पदवी (पद/स्थान) = उच्च पद प्राप्ति। चन्द्र से उच्च पद/प्रतिष्ठा माँगी गई है।

4. 'गुरुता' का क्या अर्थ है?

गुरुता = गंभीरता, महत्व, प्रतिष्ठा। बृहस्पति से समाज में गुरुता (सम्मान) माँगी गई है।

5. 'शं' का क्या अर्थ है?

'शं' (शम्) = शान्ति, कल्याण। शनि से शांति और कल्याण माँगा गया है।

6. 'बाहुबल' का क्या अर्थ है?

बाहु (भुजा) + बल = भुजाओं का बल। राहु से शारीरिक शक्ति और पराक्रम माँगा गया है।

7. 'कुलस्योन्नति' का क्या अर्थ है?

कुलस्य (वंश का) + उन्नति (प्रगति) = वंश की प्रगति। केतु से परिवार की उन्नति माँगी गई है।

8. यह प्रार्थना कब पढ़ें?

प्रातःकाल या किसी भी शुभ समय। इसकी संक्षिप्तता के कारण यह नित्य पाठ के लिए आदर्श है।

9. 'प्रीतिकरा' का क्या अर्थ है?

प्रीति (प्रेम/कल्याण) + करा (करने वाले) = कल्याण करने वाले। ग्रह सदा कल्याण करते रहें।

10. 'सन्मङ्गलम्' का क्या अर्थ है?

सत् (सच्चा/शुभ) + मङ्गल = शुभ मंगल। मंगल ग्रह से शुभता माँगी गई है।