Logoपवित्र ग्रंथ

Navagraha Prarthana – नवग्रह प्रार्थना

Navagraha Prarthana – नवग्रह प्रार्थना
॥ नवग्रह प्रार्थना ॥ ॥ श्लोक १ ॥ आरोग्यं पद्मबन्धुर्वितरतु नितरां सम्पदं शीतरश्मिः । भूलाभं भूमिपुत्रः सकलगुणयुतां वाग्विभूतिं च सौम्यः ॥ १ ॥ ॥ श्लोक २ ॥ सौभाग्यं देवमन्त्री रिपुभयशमनं भार्गवः शौर्यमार्किः । दीर्घायुः सैंहिकेयः विपुलतरयशः केतुराचन्द्रतारम् ॥ २ ॥ ॥ श्लोक ३ ॥ अरिष्टानि प्रणश्यन्तु दुरितानि भयानि च । शान्तिरस्तु शुभं मेऽस्तु ग्रहाः कुर्वन्तु मङ्गलम् ॥ ३ ॥ ॥ इति नवग्रह प्रार्थना सम्पूर्णा ॥

प्रत्येक ग्रह का विशिष्ट वरदान (Specific Blessing from Each Planet)

ग्रहसंस्कृत नामवरदानअर्थ
सूर्यपद्मबन्धुआरोग्यम्स्वास्थ्य और निरोगता
चन्द्रशीतरश्मिसम्पदम्धन-सम्पत्ति
मंगलभूमिपुत्रभूलाभम्भूमि/संपत्ति लाभ
बुधसौम्यवाग्विभूतिम्वाणी की समृद्धि
बृहस्पतिदेवमन्त्रीसौभाग्यम्सौभाग्य
शुक्रभार्गवरिपुभयशमनम्शत्रु-भय शमन
शनिआर्कि (सूर्यपुत्र)शौर्यम्वीरता और पराक्रम
राहुसैंहिकेयदीर्घायुःदीर्घ आयु
केतुकेतुविपुलतरयशःअनंत यश

श्लोकों का विस्तृत अर्थ (Detailed Meaning of Verses)

श्लोक १ का अर्थ

आरोग्यं पद्मबन्धुर्वितरतु - कमल के मित्र (सूर्य) आरोग्य प्रदान करें।
नितरां सम्पदं शीतरश्मिः - ठंडी किरणों वाले (चन्द्र) अत्यधिक संपदा दें।
भूलाभं भूमिपुत्रः - भूमि पुत्र (मंगल) भूमि का लाभ दें।
सकलगुणयुतां वाग्विभूतिं च सौम्यः - सौम्य (बुध) सभी गुणों से युक्त वाणी की विभूति दें।

श्लोक २ का अर्थ

सौभाग्यं देवमन्त्री - देवताओं के मंत्री (बृहस्पति) सौभाग्य दें।
रिपुभयशमनं भार्गवः - भृगु पुत्र (शुक्र) शत्रुओं से भय का शमन करें।
शौर्यमार्किः - सूर्य पुत्र (शनि) शौर्य (वीरता) प्रदान करें।
दीर्घायुः सैंहिकेयः - सिंहिका पुत्र (राहु) दीर्घ आयु दें।
विपुलतरयशः केतुराचन्द्रतारम् - केतु चन्द्र-तारों के रहने तक अनंत यश दें।

श्लोक ३ का अर्थ (मंगल श्लोक)

अरिष्टानि प्रणश्यन्तु - सभी अरिष्ट (विपत्तियाँ/दुर्घटनाएँ) नष्ट हों।
दुरितानि भयानि च - पाप और भय भी नष्ट हों।
शान्तिरस्तु शुभं मेऽस्तु - मुझे शांति और शुभ मिले।
ग्रहाः कुर्वन्तु मङ्गलम् - सभी ग्रह मेरा मंगल करें।

ग्रहों के संस्कृत नामों का अर्थ (Meaning of Sanskrit Names)

पद्मबन्धु (सूर्य): पद्म (कमल) + बन्धु (मित्र) = कमल का मित्र। कमल सूर्योदय पर खिलता है।

शीतरश्मि (चन्द्र): शीत (ठंडी) + रश्मि (किरण) = ठंडी किरणों वाला।

भूमिपुत्र (मंगल): भूमि (पृथ्वी) + पुत्र = पृथ्वी का पुत्र। मंगल भूमि के देवता हैं।

सौम्य (बुध): सौम्य = शांत, सुंदर। बुध शांत और सौम्य स्वभाव के हैं।

देवमन्त्री (बृहस्पति): देव + मन्त्री = देवताओं के मंत्री/पुरोहित।

भार्गव (शुक्र): भृगु ऋषि का पुत्र। शुक्राचार्य भृगु कुल से हैं।

आर्कि (शनि): अर्क (सूर्य) + इ = सूर्य का पुत्र। शनि सूर्य के पुत्र हैं।

सैंहिकेय (राहु): सिंहिका का पुत्र। राहु की माता सिंहिका थीं।

पाठ विधि और लाभ (Method and Benefits)

पाठ का शुभ समय:
  • प्रातःकाल: सूर्योदय के समय (सबसे उत्तम) - यह प्रभात स्तोत्रनिधि का भाग है
  • संध्या समय: सूर्यास्त के समय
  • विशेष अवसर: ग्रह गोचर, जन्मदिन, नवग्रह पूजा

इस प्रार्थना के लाभ:
  • सर्वग्रह अनुग्रह: एक साथ सभी 9 ग्रहों का आशीर्वाद
  • विशिष्ट फल: प्रत्येक ग्रह से उनका मुख्य वरदान
  • संक्षिप्त: केवल 3 श्लोक - 2-3 मिनट में पाठ
  • सरल: प्रातःकाल नित्य पाठ के लिए उपयुक्त
  • समग्र शांति: अरिष्ट, दुरित और भय का नाश

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. इस प्रार्थना में कितने श्लोक हैं?

केवल 3 श्लोक - पहले दो में 9 ग्रहों के विशिष्ट वरदान और तीसरे में समग्र मंगल कामना। यह सबसे संक्षिप्त नवग्रह स्तोत्र है।

2. सूर्य से क्या वरदान माँगा गया है?

'आरोग्यं पद्मबन्धुः' - पद्मबन्धु (सूर्य) से आरोग्य (स्वास्थ्य) प्राप्ति की प्रार्थना है। सूर्य आत्मा, शरीर और स्वास्थ्य के कारक हैं।

3. 'पद्मबन्धु' किसे कहते हैं?

पद्म (कमल) + बन्धु (मित्र) = कमल का मित्र अर्थात् सूर्य। कमल सूर्योदय पर खिलता है इसलिए सूर्य को पद्मबन्धु कहते हैं।

4. 'शीतरश्मि' का क्या अर्थ है?

शीत (ठंडी) + रश्मि (किरण) = ठंडी किरणों वाला अर्थात् चन्द्रमा। चन्द्र की किरणें शीतल होती हैं, इसलिए उन्हें शीतरश्मि कहते हैं।

5. 'सैंहिकेय' कौन है?

सिंहिका का पुत्र = राहु। राहु की माता का नाम सिंहिका था, इसलिए राहु को सैंहिकेय कहते हैं।

6. 'आचन्द्रतारम्' का क्या अर्थ है?

'आ' (तक) + 'चन्द्रतारम्' (चन्द्र-तारे) = जब तक चन्द्रमा और तारे रहें। अर्थात् अनंत काल तक यश बना रहे।

7. तीसरे श्लोक में क्या प्रार्थना है?

अरिष्ट (दुर्घटना), दुरित (पाप), भय सब नष्ट हों। शांति हो, शुभ हो और सभी ग्रह मंगल करें। यह समग्र मंगल कामना का श्लोक है।

8. इस प्रार्थना का पाठ कब करना चाहिए?

प्रातःकाल स्नान के बाद। यह प्रभात स्तोत्रनिधि का भाग है, इसलिए सुबह का पाठ सबसे उत्तम है।

9. 'भूलाभ' का क्या अर्थ है?

भू (भूमि/पृथ्वी) + लाभ (प्राप्ति) = भूमि/संपत्ति की प्राप्ति। मंगल भूमि के कारक हैं इसलिए उनसे भूमि लाभ माँगा गया है।

10. 'देवमन्त्री' किसे कहते हैं?

देव (देवताओं) के मन्त्री = बृहस्पति। गुरु देवताओं के मंत्री/पुरोहित हैं, इसलिए उन्हें देवमन्त्री कहते हैं।