Garbha Rakshambika Stotram – श्री गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्रम् (Anantarama Dikshitar Kritam)
Sri Garbharakshambika Stotram: Hymn for Protection of Pregnancy

श्री गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्रम् - परिचय (Introduction)
श्री गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्रम् श्री अनन्तराम दीक्षितार द्वारा रचित 6 श्लोकों का अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। गर्भरक्षाम्बिका देवी माँ पार्वती का वह अवतार हैं जो गर्भ की रक्षा करती हैं। 'गर्भ' का अर्थ गर्भावस्था, 'रक्षा' का अर्थ सुरक्षा, और 'अम्बिका' देवी पार्वती का एक नाम है।
देवी तमिलनाडु के तिरुक्करुगावूर (थिरुकरुगवूर) मंदिर में विराजमान हैं। यह मंदिर तंजावुर जिले में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। यहाँ के भगवान मुल्लैवननाथार (शिव) हैं जो माधवी वन (मुल्लै वन = चमेली का वन) में विराजते हैं। देवी उनके वाम भाग में वापी (कुण्ड) के तट पर स्थित हैं।
इस मंदिर की विशेष मान्यता है कि इस क्षेत्र में कभी किसी माँ या बच्चे की प्रसव के दौरान मृत्यु नहीं हुई और न ही गर्भपात या प्रसव संबंधी जटिलताएँ हुई हैं। इसीलिए संपूर्ण भारत से गर्भवती महिलाएं और संतान इच्छुक दंपति यहाँ आते हैं।
श्लोकों का भावार्थ (Significance)
प्रत्येक श्लोक के साथ 'श्रीमाधवी काननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तां स्तुवन्तीम्' (हे माधवी वन में रहने वाली गर्भरक्षाम्बिके, स्तुति करती हुई भक्त की रक्षा करो) पल्लवी है:
श्लोक 1 (स्थिति): 'वापीतटे वामभागे वामदेवस्य'—वापी (कुण्ड) के तट पर वामदेव (शिव) के वाम भाग में आप स्थित हैं। 'पाहि गर्भस्थजन्तून्'—गर्भस्थ प्राणियों की रक्षा करो।
श्लोक 2 (सौंदर्य): 'दिव्यसौन्दर्ययुक्ता सुमाङ्गल्यगात्री'—दिव्य सौंदर्य से युक्त, सुमंगल शरीर वाली। 'धात्री जनित्री जनानां'—जनों की धात्री और जननी।
श्लोक 3 (उत्सव): 'आषाढमासे सुपुण्ये शुक्रवारे'—आषाढ़ मास के शुक्रवार को विशेष पूजा। 'वाजपेयादियागस्थभक्तैः'—वाजपेय जैसे महायज्ञ करने वाले भक्तों द्वारा दृष्ट।
श्लोक 4 (रक्षा): 'बालैस्सदा सेविताङ्घ्रिं'—बालकों द्वारा सदा सेवित चरण वाली। 'गर्भरक्षार्थमारादुपेतैः'—गर्भ रक्षा के लिए आए भक्तों से युक्त।
श्लोक 5 (रथयात्रा): 'ब्रह्मोत्सवे विप्रवीथ्यां रथे सन्निविष्टाम्'—ब्रह्मोत्सव में ब्राह्मण गलियों में रथ पर आरूढ़। 'जगन्मातरं त्वाम्'—आप जगत की माता हैं।
श्लोक 6 (फलश्रुति): दीक्षित अनन्तराम ने देवी की प्रसन्नता के लिए यह स्तोत्ररत्न रचा। 'पुत्रपौत्रादि भाग्यं'—पुत्र-पौत्रादि का सौभाग्य प्राप्त होता है।
पाठ के लाभ (Benefits)
गर्भरक्षाम्बिका देवी की उपासना के विशेष लाभ:
गर्भ रक्षा: गर्भवती महिलाओं के गर्भ की पूर्ण सुरक्षा। गर्भपात, समय पूर्व प्रसव आदि समस्याओं से रक्षा।
सुरक्षित प्रसव: 'गर्भस्थजन्तून् पाहि'—प्रसव के समय माँ और शिशु दोनों की सुरक्षा।
संतान प्राप्ति: संतान इच्छुक दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति।
स्वस्थ संतान: स्वस्थ, सुंदर और गुणवान संतान का जन्म।
पुत्र-पौत्रादि भाग्य: फलश्रुति में स्पष्ट—'पुत्रपौत्रादि भाग्यं भवेत्तस्य'।
महिला स्वास्थ्य: स्त्री रोगों में लाभ, मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में राहत।
पाठ विधि (Ritual Method)
गर्भवती महिलाओं के लिए:
- समय: प्रातः स्नान के बाद या संध्या। शुक्रवार विशेष शुभ है।
- पाठ: गर्भावस्था के पूरे समय में प्रतिदिन 1, 3, 9 या 108 बार पाठ करें।
- क्रम: प्रथम मास में 1 बार, फिर प्रतिमास संख्या बढ़ाएं।
- पूजा: देवी के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। कुमकुम, सिंदूर, लाल पुष्प अर्पित करें।
संतान प्राप्ति के लिए:
- पति-पत्नी दोनों मिलकर 40 दिनों तक प्रतिदिन 11 बार पाठ करें।
- यदि संभव हो तो तिरुक्करुगावूर मंदिर जाएं और देवी को घी अर्पित करें—यह संतान प्राप्ति का विशेष अनुष्ठान है।
- शुक्रवार व्रत रखें और देवी की पूजा करें।
सुगम प्रसव के लिए:
प्रसव के समय परिवार का कोई सदस्य यह स्तोत्र पढ़े। तिरुक्करुगावूर मंदिर में अरंडी का तेल (castor oil) अर्पित करने से सुगम प्रसव होता है।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. गर्भरक्षाम्बिका देवी कौन हैं?
गर्भरक्षाम्बिका देवी माँ पार्वती का अवतार हैं जो गर्भ की रक्षा करती हैं। 'गर्भ' का अर्थ गर्भावस्था, 'रक्षा' का अर्थ सुरक्षा, और 'अम्बिका' देवी पार्वती का नाम है। वे तमिलनाडु के तिरुक्करुगावूर मंदिर में विराजमान हैं।
2. तिरुक्करुगावूर मंदिर की क्या विशेषता है?
तिरुक्करुगावूर (थिरुकरुगवूर) तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित है। यहाँ के भगवान मुल्लैवननाथार (शिव) और देवी गर्भरक्षाम्बिका हैं। मान्यता है कि इस क्षेत्र में कभी किसी माँ या बच्चे की प्रसव के दौरान मृत्यु नहीं हुई और न ही गर्भपात हुआ।
3. इस स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?
यह स्तोत्र श्री अनन्तराम दीक्षितार द्वारा रचित है जैसा कि अंतिम श्लोक 'दीक्षितानन्तरामेण देव्याश्च तुष्ट्यै' में स्पष्ट है। वे एक प्रसिद्ध विद्वान और देवी भक्त थे।
4. 'माधवी काननस्थे' का क्या अर्थ है?
'माधवी' एक सुगंधित पुष्प (मुल्लै/चमेली) है और 'कानन' का अर्थ वन है। देवी माधवी वन (मुल्लै वन) में निवास करती हैं। इसीलिए भगवान शिव को यहाँ 'मुल्लैवननाथार' (माधवी वन के स्वामी) कहते हैं।
5. श्लोक 3 में 'आषाढमासे शुक्रवारे' का क्या महत्व है?
आषाढ़ मास (जून-जुलाई) में शुक्रवार को देवी की विशेष पूजा होती है। इस समय देवी दिव्य वस्त्राभूषणों से सुशोभित होती हैं और वाजपेय यज्ञ जैसे महायज्ञ करने वाले भक्त उनके दर्शन करते हैं।
6. फलश्रुति (श्लोक 6) में क्या कहा गया है?
'नित्यं पठेद्यस्तु भक्त्या पुत्रपौत्रादि भाग्यं भवेत्तस्य नित्यम्'—जो प्रतिदिन भक्तिपूर्वक इसका पाठ करता है, उसे पुत्र-पौत्रादि का सौभाग्य नित्य प्राप्त होता है।
7. गर्भवती महिलाओं को कैसे पाठ करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के पूरे समय में प्रतिदिन 1, 3, 9 या 108 बार पाठ करना चाहिए। प्रतिमास पाठ संख्या बढ़ाई जा सकती है। शुक्रवार और आषाढ़ मास विशेष शुभ है।
8. संतान प्राप्ति के लिए क्या करें?
संतान इच्छुक दंपति को 40 दिनों तक युगल रूप में प्रतिदिन 11 बार पाठ करना चाहिए। यदि संभव हो तो तिरुक्करुगावूर मंदिर जाकर देवी को घी अर्पित करें—यह संतान प्राप्ति का विशेष अनुष्ठान है।
9. सुरक्षित प्रसव के लिए क्या करें?
प्रसव के समय परिवार का कोई सदस्य यह स्तोत्र पढ़े। तिरुक्करुगावूर मंदिर में अरंडी का तेल (castor oil) अर्पित करने से सुगम प्रसव होता है। मंदिर का प्रसाद लेकर आने से भी लाभ होता है।
10. क्या पुरुष भी इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ, पति, पिता या कोई भी परिजन गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की रक्षा के लिए इसका पाठ कर सकता है। श्लोक 1 में 'पाहि गर्भस्थजन्तून् तथा भक्तलोकान्' कहा है—गर्भस्थ प्राणियों और भक्तों दोनों की रक्षा होती है।