Sri Vasavi Ashtottara Shatanamavali – श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली
Sri Vasavi Kanyaka Parameswari Ashtottara Shatanamavali: 108 Names

ॐ श्रीवासवाम्बायै नमः ।
ॐ श्रीकन्यकायै नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ आदिशक्त्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ करुणायै नमः ।
ॐ प्रकृतिस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ शुभायै नमः । ९ ॥
ॐ धर्मस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ वैश्यकुलोद्भवायै नमः ।
ॐ सर्वस्यै नमः ।
ॐ सर्वज्ञायै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ त्यागस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ भद्रायै नमः ।
ॐ वेदवेद्यायै नमः ।
ॐ सर्वपूजितायै नमः । १८ ॥
ॐ कुसुमपुत्रिकायै नमः ।
ॐ कुसुमदन्तीवत्सलायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ गम्भीरायै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ सौन्दर्यनिलयायै नमः ।
ॐ सर्वहितायै नमः ।
ॐ शुभप्रदायै नमः ।
ॐ नित्यमुक्तायै नमः । २७ ॥
ॐ सर्वसौख्यप्रदायै नमः ।
ॐ सकलधर्मोपदेशकारिण्यै नमः ।
ॐ पापहरिण्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ उदारायै नमः ।
ॐ अग्निप्रविष्टायै नमः ।
ॐ आदर्शवीरमात्रे नमः ।
ॐ अहिंसास्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ आर्यवैश्यपूजितायै नमः । ३६ ॥
ॐ भक्तरक्षणतत्परायै नमः ।
ॐ दुष्टनिग्रहायै नमः ।
ॐ निष्कलायै नमः ।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ।
ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ।
ॐ लीलामानुषविग्रहायै नमः ।
ॐ विष्णुवर्धनसंहारिकायै नमः ।
ॐ सुगुणरत्नायै नमः । ४५ ॥
ॐ साहसौन्दर्यसम्पन्नायै नमः ।
ॐ सच्चिदानन्दस्वरूपायै नमः ।
ॐ विश्वरूपप्रदर्शिन्यै नमः ।
ॐ निगमवेद्यायै नमः ।
ॐ निष्कामायै नमः ।
ॐ सर्वसौभाग्यदायिन्यै नमः ।
ॐ धर्मसंस्थापनायै नमः ।
ॐ नित्यसेवितायै नमः ।
ॐ नित्यमङ्गलायै नमः । ५४ ॥
ॐ नित्यवैभवायै नमः ।
ॐ सर्वोपाधिविनिर्मुक्तायै नमः ।
ॐ राजराजेश्वर्यै नमः ।
ॐ उमायै नमः ।
ॐ शिवपूजातत्परायै नमः ।
ॐ पराशक्त्यै नमः ।
ॐ भक्तकल्पकायै नमः ।
ॐ ज्ञाननिलयायै नमः ।
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः । ६३ ॥
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ भक्तिगम्यायै नमः ।
ॐ भक्तिवश्यायै नमः ।
ॐ नादबिन्दुकलातीतायै नमः ।
ॐ सर्वोपद्रववारिण्यै नमः ।
ॐ सर्वस्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिमय्यै नमः ।
ॐ महाबुद्ध्यै नमः ।
ॐ महासिद्ध्यै नमः । ७२ ॥
ॐ सद्गतिदायिन्यै नमः ।
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ अनुग्रहप्रदायै नमः ।
ॐ आर्यायै नमः ।
ॐ वसुप्रदायै नमः ।
ॐ कलावत्यै नमः ।
ॐ कीर्तिवर्धिन्यै नमः ।
ॐ कीर्तितगुणायै नमः ।
ॐ चिदानन्दायै नमः । ८१ ॥
ॐ चिदाधारायै नमः ।
ॐ चिदाकारायै नमः ।
ॐ चिदालयायै नमः ।
ॐ चैतन्यरूपिण्यै नमः ।
ॐ चैतन्यवर्धिन्यै नमः ।
ॐ यज्ञरूपायै नमः ।
ॐ यज्ञफलदायै नमः ।
ॐ तापत्रयविनाशिन्यै नमः ।
ॐ गुणातीतायै नमः । ९० ॥
ॐ विष्णुवर्धनमर्दिन्यै नमः ।
ॐ तीर्थरूपायै नमः ।
ॐ दीनवत्सलायै नमः ।
ॐ दयापूर्णायै नमः ।
ॐ तपोनिष्ठायै नमः ।
ॐ श्रेष्ठायै नमः ।
ॐ श्रीयुतायै नमः ।
ॐ प्रमोददायिन्यै नमः ।
ॐ भवबन्धविनाशिन्यै नमः । ९९ ॥
ॐ भगवत्यै नमः ।
ॐ इहपरसौख्यदायै नमः ।
ॐ आश्रितवत्सलायै नमः ।
ॐ महाव्रतायै नमः ।
ॐ मनोरमायै नमः ।
ॐ सकलाभीष्टप्रदायै नमः ।
ॐ नित्यमङ्गलरूपिण्यै नमः ।
ॐ नित्योत्सवायै नमः ।
ॐ श्रीकन्यकापरमेश्वर्यै नमः । १०८ ॥
॥ इति श्रीवासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली - परिचय (Introduction)
श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी (Vasavi Kanyaka Parameswari) दक्षिण भारत की एक प्रमुख देवी हैं, जिन्हें आर्य वैश्य समुदाय अपनी कुलदेवी के रूप में पूजता है। उनका जन्म पेनगोंडा (आंध्र प्रदेश) में राजा कुसुम श्रेष्ठी और रानी कुसुमाम्बा के यहाँ हुआ था।
वासवी माता का जीवन अहिंसा, धर्म और आत्म-सम्मान की रक्षा की मिसाल है। जब चालुक्य राजा विष्णुवर्धन ने बलपूर्वक उनसे विवाह करना चाहा, तो उन्होंने युद्ध में निर्दोषों का रक्त बहाने के बजाय अग्नि समाधि (Agni Pravesham) लेने का निर्णय लिया। उनके इस त्याग ने उन्हें पूजनीय बना दिया।
प्रमुख नामों का अर्थ (Key Names Explained)
- वासवाम्बा (1): वासवी माता। 'वासव' इंद्र को भी कहते हैं, अर्थात इंद्र के समान वैभव वाली।
- कन्यका (2): कुमारी रूप। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर धर्म का पालन किया।
- कुसुमपुत्रिका (32): कुसुम श्रेष्ठी की पुत्री।
- अग्निप्रविष्टा (47): धर्म रक्षा के लिए अग्नि में प्रवेश करने वाली।
- अहिंसास्वरूपिणी (49): अहिंसा की साक्षात मूर्ति। उन्होंने युद्ध को नकारा।
- वैश्यकुलोद्भवा (23): वैश्य कुल में अवतरित।
- आर्यवैश्यपूजिता (50): आर्य वैश्य समाज द्वारा विशेष रूप से पूजित।
- दारिद्र्यध्वंसिनी (56): दरिद्रता और अभावों को नष्ट करने वाली।
पाठ के लाभ (Benefits)
- व्यापार वृद्धि: वैश्य समुदाय इन्हें व्यापार की संरक्षिका मानता है। इनके पाठ से व्यापार में बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि आती है।
- आत्म-बल: जीवन में कठिन परिस्थितियों और दबावों के बीच अपने सिद्धांतों पर अटल रहने की शक्ति मिलती है।
- शांति और अहिंसा: घर में कलह-क्लेश दूर होकर शांति का वातावरण बनता है।
- पाप नाश: 'पापहरिणी' (44) नाम का स्मरण पापों को नष्ट करता है।
- बुद्धि और विद्या: 'विद्या' (19) और 'महाबुद्धि' (89) के रूप में वे ज्ञान प्रदान करती हैं।
पाठ विधि (Ritual Method)
नित्य पूजा:
- समय: प्रातः काल या संध्या समय। शुक्रवार का दिन विशेष शुभ है।
- स्थान: पूजा घर में देवी की प्रतिमा के सामने।
- दीप: घी का दीपक जलाएं।
- नैवेद्य: मीठा (खीर या हलवा) अर्पित करें।
- मंत्र: "ॐ श्री वासवी कन्यका परमेश्वर्यै नमः"।
- पाठ: 108 नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें और अंत में आरती करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. वासवी माता किसकी अवतार हैं?
वे आदिशक्ति (पार्वती) का अवतार मानी जाती हैं, जो धर्म की पुनः स्थापना के लिए पृथ्वी पर आईं।
2. 'अग्नि प्रवेश' की घटना क्या है?
यह एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना है जहाँ वासवी माता ने 102 गोत्रों के दंपतियों के साथ अग्नि को साक्षी मानकर अपने प्राण त्यागे, ताकि हिंसा और अधर्म से बचा जा सके।
3. पेनगोंडा (Penugonda) कहाँ है?
यह आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में स्थित एक पवित्र तीर्थस्थल है। यहाँ वासवी माता का भव्य मंदिर है।
4. 102 गोत्रों का क्या महत्व है?
वैश्य समाज के 714 गोत्रों में से 102 गोत्रों के प्रमुखों ने वासवी के साथ बलिदान दिया। उन्हें 'गोत्रज' कहा जाता है और उनका विशेष सम्मान है।
5. क्या केवल वैश्य ही इनकी पूजा कर सकते हैं?
नहीं, वे जगन्माता ('जगन्मात्रे' - 14) हैं। कोई भी भक्त श्रद्धा से उनकी पूजा कर सकता है।
6. 'विष्णुवर्धन' कौन था?
वह चालुक्य वंश का राजा था, जो अपनी शक्ति के मद में वासवी से विवाह करना चाहता था, जिसके कारण यह त्रासद घटना हुई।
7. 'शांता' (34) और 'अहिंसास्वरूपिणी' (49) क्यों कहा गया?
क्योंकि उन्होंने राजा की हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि आत्म-त्याग और शांति से दिया। गांधीजी भी उन्हें अहिंसा की देवी मानते थे।
8. वासवी माता का प्रमुख मंत्र क्या है?
"ॐ श्री कन्यका परमेश्वर्यै नमः" सबसे लोकप्रिय मंत्र है।
9. क्या इनका संबंध माँ दुर्गा से है?
हाँ, वे दुर्गा (शक्ति) का ही सौम्य लेकिन तेजस्वी रूप हैं। नवरात्रि में उनकी विशेष पूजा होती है।
10. 'दारिद्र्यध्वंसिनी' (56) का क्या लाभ है?
इसका अर्थ है गरीबी का नाश करने वाली। व्यापारी वर्ग धन-धान्य की स्थिरता के लिए इनका पाठ करता है।