चन्द्रमङ्गलस्तोत्रम्
Chandra Mangala Stotram — अर्थ सहित

॥ चन्द्र मङ्गल स्तोत्रम् ॥
चन्द्रः कर्कटकप्रभुः सितनिभश्चात्रेयगोत्रोद्भवम् ।
आग्नेयश्चतुरस्रवा षण्मुखश्चापोऽप्युमाधीश्वरः ।
षट्सप्तानि दशैक शोभनफलः शौरिप्रियोऽर्को गुरुः ।
स्वामी यामुनदेशजो हिमकरः कुर्यात्सदा मङ्गलम् ॥ १ ॥
(चन्द्रमा, जो कर्क राशि के स्वामी हैं, श्वेत वर्ण वाले हैं, अत्रि गोत्र में उत्पन्न हुए हैं, आग्नेय दिशा के स्वामी हैं, चौकोर मंडल वाले हैं, छः मुख वाले, धनुष धारण करने वाले और भगवान शिव (उमापति) के अधीन हैं; जो छठे, सातवें, दसवें और पहले स्थान में शुभ फल देते हैं; जो शनि, सूर्य और गुरु के प्रिय हैं; जो यमुना देश के स्वामी हैं—वे शीतल किरणों वाले चन्द्र देव सदैव मेरा मङ्गल करें।)
॥ प्रार्थना ॥
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजाविधिं न हि जानामि क्षमस्व परमेश्वर ॥ २ ॥
(हे परमेश्वर! मैं आपको बुलाना (आवाहन) नहीं जानता, न ही विदा करना (विसर्जन) जानता हूँ। मुझे पूजा की विधि का भी ज्ञान नहीं है, अतः मुझे क्षमा करें।)
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर ।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ ३ ॥
(हे देवों के स्वामी! मेरे पास न मंत्र की शक्ति है, न क्रिया का ज्ञान और न ही पूर्ण भक्ति है। फिर भी मैंने जो भी पूजा की है, उसे दयापूर्वक पूर्ण स्वीकार करें।)
रोहणीश सुधामूर्ते सुधारूप सुधाशन ।
सोम सौम्यो भवास्माकं सर्वारिष्टं निवारय ॥ ४ ॥
(हे रोहिणी के स्वामी, अमृत की मूर्ति, अमृत रूप और अमृत का भोजन करने वाले! हे सोम! आप हमारे लिए सौम्य (शांत) बनें और हमारे सभी अरिष्टों (कष्टों) का निवारण करें।)
ॐ अनया पूजया चन्द्रदेवः प्रीयताम् ॥ ५ ॥
(इस पूजा के माध्यम से चन्द्र देव प्रसन्न हों।)
॥ मन्त्र ॥
॥ ॐ चन्द्राय नमः ॐ शशाङ्काय नमः ॐ सोमाय नमः ॥
(ॐ चन्द्रमा को नमस्कार, ॐ शशाङ्क को नमस्कार, ॐ सोम को नमस्कार।)
॥ ॐ शान्तिः ॐ शान्तिः ॐ शान्तिः ॐ ॥
इति श्रीचन्द्रमङ्गलस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
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परिचय: चन्द्र मङ्गल स्तोत्रम्
चन्द्र मङ्गल स्तोत्रम् (Chandra Mangala Stotram) नवग्रह पूजा पद्धति में चन्द्रमा की शांति और स्तुति के लिए प्रयुक्त होने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा 'मनसो जातः' अर्थात चंद्रमा मन का कारक है। जब किसी कुंडली में चन्द्रमा निर्बल या पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, घबराहट और एकाग्रता की कमी का सामना करना पड़ता है।
यह स्तोत्र चन्द्र देव के दिव्य गुणों का वर्णन करता है। इसमें उन्हें 'रोहिणीश' (रोहिणी के स्वामी) और 'सुधामूर्ति' (अमृत की साक्षात् मूर्ति) कहकर संबोधित किया गया है। इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें अंत में की गई क्षमा प्रार्थना साधक की श्रद्धा को प्रदर्शित करती है, जो किसी भी साधना की पूर्णता के लिए आवश्यक है।
भगवान शिव चन्द्रमा को अपने मस्तक पर धारण करते हैं, इसलिए 'उमाधीश्वर' के रूप में उनकी आराधना चन्द्र देव को शीघ्र प्रसन्न करने वाली मानी जाती है। यह स्तोत्र न केवल चन्द्र दोष की शांति करता है, बल्कि साधक के जीवन में शांति और शीतलता का संचार भी करता है।
चन्द्र मङ्गल स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व
1. मानसिक संतुलन और शांति
चन्द्रमा हमारी भावनाओं और संवेदनाओं को नियंत्रित करता है। Chandra Mangala Stotram का पाठ करने से बिखरा हुआ मन स्थिर होता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने में सक्षम होता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो अत्यधिक भावुक या अस्थिर स्वभाव के होते हैं।
2. चन्द्र दोष (Chandra Dosha) शांति
यदि जन्मकुंडली में चन्द्रमा प्रतिकूल भावों में बैठा हो या क्रूर ग्रहों से युक्त हो, तो उसे 'चन्द्र दोष' कहा जाता है। इस स्तोत्र के कंपन चन्द्रमा की किरणों की नकारात्मकता को शुभता में बदलने की शक्ति रखते हैं।
3. स्वास्थ्य लाभ (ओषधिपति)
चन्द्रमा को ओषधियों का स्वामी (औषधिपति) माना गया है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार चन्द्र देव की आराधना से शरीर में रसों का संतुलन बना रहता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन शक्ति बढ़ती है।
पाठ के प्रमुख लाभ (फलश्रुति)
1. अरिष्ट निवारण
स्तोत्र में कहा गया है—"सर्वारिष्टं निवारय"। इसका अर्थ है कि चन्द्र देव की कृपा से जीवन में आने वाले सभी अज्ञात कष्टों और आकस्मिक संकटों का नाश होता है।
2. सौभाग्य की प्राप्ति
चन्द्रमा की 'सौम्य' दृष्टि जिस व्यक्ति पर होती है, उसका भाग्य चमक उठता है। यह स्तोत्र साधक के जीवन में 'मङ्गल' (शुभता) और समृद्धि लेकर आता है।
3. माता का शुभ आशीर्वाद
ज्योतिष में चन्द्रमा माता का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्तोत्र के पाठ से माता के साथ संबंधों में सुधार होता है और उन्हें उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
अनुष्ठान विधि और विशेष अवसर
पाठ विधि
- स्नान और शुद्धि: सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें।
- दीप प्रज्वलन: चन्द्र देव के समक्ष घी का दीपक जलाएं और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- श्वेत पुष्प अर्पित करें: चन्द्र देव को सफेद फूल, अक्षत और कच्चा दूध संभव हो तो अर्पित करें।
- पाठ संख्या: एकाग्र मन से इस स्तोत्र का कम से कम 11 बार पाठ करें।
विशेष अवसर
- पूर्णिमा (Purnima): पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा की किरणों की उपस्थिति में पाठ करना सबसे शक्तिशाली होता है।
- श्रावण मास: भगवान शिव का प्रिय महीना चन्द्र आराधना के लिए अत्यंत शुभ है।
- सोमवार: नियमित रूप से प्रत्येक सोमवार को पाठ करने से चन्द्रमा की शुभता बनी रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. चन्द्र मङ्गल स्तोत्र क्या है?
यह चन्द्र देव की स्तुति में लिखा गया एक मंत्रमयी संग्रह है, जिसका मुख्य उद्देश्य मानसिक सुख और सौभाग्य प्राप्त करना है।
2. क्या महिलाएं चन्द्र मङ्गल स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, चन्द्रमा स्त्रीत्व और मातृत्व का प्रतीक है। महिलाएं अपनी मानसिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इसका पाठ कर सकती हैं।
3. चन्द्र दोष दूर करने के लिए कितनी बार पाठ करना चाहिए?
पूर्ण लाभ के लिए कम से कम 41 दिनों तक 11 बार प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है।
4. चन्द्रमा का प्रिय रंग और रत्न क्या है?
चन्द्रमा का प्रिय रंग सफेद (White) है और उनका रत्न मोती (Pearl) है। पाठ के समय सफेद वस्त्र पहनना अत्यंत प्रभावी होता है।
5. इस स्तोत्र का पाठ करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
सूर्यास्त के बाद जब चन्द्रमा आकाश में उदित होते हैं, वह समय पाठ के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
6. 'रोहणीश' शब्द का क्या अर्थ है?
रोहणीश का अर्थ है रोहिणी नक्षत्र के स्वामी। चन्द्रमा का रोहिणी नक्षत्र के प्रति विशेष प्रेम शास्त्रों में वर्णित है।
7. क्या इस पाठ के लिए किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता है?
नहीं, यह एक भक्तिपरक स्तोत्र है। इसे कोई भी श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक कर सकता है। हालांकि, तांत्रिक मन्त्रों के लिए मार्गदर्शन की सलाह दी जाती है।
8. 'सुधामूर्ति' का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है वह जो अमृत (Nectar) से बना हो। चन्द्रमा को अमृत का स्रोत माना गया है जो शीतलता प्रदान करता है।
9. क्या यह स्तोत्र अनिद्रा (Insomnia) में मदद करता है?
जी हाँ, चन्द्रमा मस्तिष्क को नियंत्रित करता है। सोने से पहले इसका पाठ करने से मन शांत होता है और अच्छी नींद आती है।
10. पूजन के बाद क्षमा प्रार्थना क्यों आवश्यक है?
पूजा के दौरान होने वाली अनजानी भूलों के लिए भगवान से क्षमा मांगना अहंकार को मिटाता है और साधना को पूर्ण बनाता है।