Sri Chandra Ashtottara Satanamavali - श्री चन्द्र अष्टोत्तरशतनामावली

॥ श्री चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली ॥
ॐ श्रीमते नमः ।
ॐ शशधराय नमः ।
ॐ चन्द्राय नमः ।
ॐ ताराधीशाय नमः ।
ॐ निशाकराय नमः ।
ॐ सुधानिधये नमः ।
ॐ सदाराध्याय नमः ।
ॐ सत्पतये नमः ।
ॐ साधुपूजिताय नमः । ९
ॐ जितेन्द्रियाय नमः ।
ॐ जगद्योनये नमः ।
ॐ ज्योतिश्चक्रप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ विकर्तनानुजाय नमः ।
ॐ वीराय नमः ।
ॐ विश्वेशाय नमः ।
ॐ विदुषां पतये नमः ।
ॐ दोषाकराय नमः ।
ॐ दुष्टदूराय नमः । १८
ॐ पुष्टिमते नमः ।
ॐ शिष्टपालकाय नमः ।
ॐ अष्टमूर्तिप्रियाय नमः ।
ॐ अनन्तकष्टदारुकुठारकाय नमः ।
ॐ स्वप्रकाशाय नमः ।
ॐ प्रकाशात्मने नमः ।
ॐ द्युचराय नमः ।
ॐ देवभोजनाय नमः ।
ॐ कलाधराय नमः । २७
ॐ कालहेतवे नमः ।
ॐ कामकृते नमः ।
ॐ कामदायकाय नमः ।
ॐ मृत्युसंहारकाय नमः ।
ॐ अमर्त्याय नमः ।
ॐ नित्यानुष्ठानदायकाय नमः ।
ॐ क्षपाकराय नमः ।
ॐ क्षीणपापाय नमः ।
ॐ क्षयवृद्धिसमन्विताय नमः । ३६
ॐ जैवातृकाय नमः ।
ॐ शुचये नमः ।
ॐ शुभ्राय नमः ।
ॐ जयिने नमः ।
ॐ जयफलप्रदाय नमः ।
ॐ सुधामयाय नमः ।
ॐ सुरस्वामिने नमः ।
ॐ भक्तानामिष्टदायकाय नमः ।
ॐ भुक्तिदाय नमः । ४५
ॐ मुक्तिदाय नमः ।
ॐ भद्राय नमः ।
ॐ भक्तदारिद्र्यभञ्जकाय नमः ।
ॐ सामगानप्रियाय नमः ।
ॐ सर्वरक्षकाय नमः ।
ॐ सागरोद्भवाय नमः ।
ॐ भयान्तकृते नमः ।
ॐ भक्तिगम्याय नमः ।
ॐ भवबन्धविमोचकाय नमः । ५४
ॐ जगत्प्रकाशकिरणाय नमः ।
ॐ जगदानन्दकारणाय नमः ।
ॐ निस्सपत्नाय नमः ।
ॐ निराहाराय नमः ।
ॐ निर्विकाराय नमः ।
ॐ निरामयाय नमः ।
ॐ भूच्छायाऽऽच्छादिताय नमः ।
ॐ भव्याय नमः ।
ॐ भुवनप्रतिपालकाय नमः । ६३
ॐ सकलार्तिहराय नमः ।
ॐ सौम्यजनकाय नमः ।
ॐ साधुवन्दिताय नमः ।
ॐ सर्वागमज्ञाय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः ।
ॐ सनकादिमुनिस्तुताय नमः ।
ॐ सितच्छत्रध्वजोपेताय नमः ।
ॐ सिताङ्गाय नमः ।
ॐ सितभूषणाय नमः । ७२
ॐ श्वेतमाल्याम्बरधराय नमः ।
ॐ श्वेतगन्धानुलेपनाय नमः ।
ॐ दशाश्वरथसंरूढाय नमः ।
ॐ दण्डपाणये नमः ।
ॐ धनुर्धराय नमः ।
ॐ कुन्दपुष्पोज्ज्वलाकाराय नमः ।
ॐ नयनाब्जसमुद्भवाय नमः ।
ॐ आत्रेयगोत्रजाय नमः ।
ॐ अत्यन्तविनयाय नमः । ८१
ॐ प्रियदायकाय नमः ।
ॐ करुणारससम्पूर्णाय नमः ।
ॐ कर्कटप्रभवे नमः ।
ॐ अव्ययाय नमः ।
ॐ चतुरश्रासनारूढाय नमः ।
ॐ चतुराय नमः ।
ॐ दिव्यवाहनाय नमः ।
ॐ विवस्वन्मण्डलाग्नेयवाससे नमः ।
ॐ वसुसमृद्धिदाय नमः । ९०
ॐ महेश्वरप्रियाय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ मेरुगोत्रप्रदक्षिणाय नमः ।
ॐ ग्रहमण्डलमध्यस्थाय नमः ।
ॐ ग्रसितार्काय नमः ।
ॐ ग्रहाधिपाय नमः ।
ॐ द्विजराजाय नमः ।
ॐ द्युतिलकाय नमः ।
ॐ द्विभुजाय नमः । ९९
ॐ द्विजपूजिताय नमः ।
ॐ औदुम्बरनगावासाय नमः ।
ॐ उदाराय नमः ।
ॐ रोहिणीपतये नमः ।
ॐ नित्योदयाय नमः ।
ॐ मुनिस्तुत्याय नमः ।
ॐ नित्यानन्दफलप्रदाय नमः ।
ॐ सकलाह्लादनकराय नमः ।
ॐ पलाशसमिधप्रियाय नमः । १०८
॥ इति श्री चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णा ॥
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परिचय: भगवान चन्द्र और मानसिक चेतना का विज्ञान (Introduction)
सनातन वैदिक ज्योतिष और खगोल विज्ञान में भगवान चन्द्र (Lord Moon) को नवग्रहों में 'मन' का अधिष्ठाता माना गया है। वेदों के पुरुष सूक्त में स्पष्ट उल्लेख है—"चन्द्रमा मनसो जातः", अर्थात् चन्द्रमा की उत्पत्ति विराट पुरुष (परमात्मा) के मन से हुई है। यही कारण है कि मानवीय भावनाओं, स्मृतियों, चंचलता और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर चन्द्रमा का सीधा नियंत्रण होता है। श्री चन्द्र अष्टोत्तरशतनामावली भगवान सोम (चन्द्र) के १०८ सिद्ध नामों का वह दिव्य कोष है, जो साधक के भीतर सात्विकता और मानसिक शीतलता का संचार करता है।
पौराणिक पृष्ठभूमि: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, चन्द्रमा महर्षि अत्रि और देवी अनसूया के पुत्र हैं। समुद्र मंथन के समय उत्पन्न हुए चौदह रत्नों में चन्द्रमा भी एक थे, जिन्हें स्वयं भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण कर 'चंद्रशेखर' रूप लिया। यह क्रिया संकेत देती है कि मनरूपी चन्द्रमा जब शिवत्व (योग और अनुशासन) से जुड़ता है, तभी वह शांत और कल्याणकारी बनता है। चन्द्रमा का विवाह प्रजापति दक्ष की २७ कन्याओं (नक्षत्रों) से हुआ है, जो खगोलीय रूप से उनके भ्रमण पथ को दर्शाते हैं।
खगोलीय एवं जैविक प्रभाव: चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकटतम आकाशीय पिंड हैं, जिसका प्रभाव समुद्र के ज्वार-भाटा से लेकर पृथ्वी के समस्त जल स्रोतों पर पड़ता है। चूँकि मानव शरीर का लगभग ७० प्रतिशत हिस्सा जल है, इसलिए चन्द्रमा की कलाओं का घटना-बढ़ना हमारी मनोदशा (Mood) और हार्मोन्स को गहराई से प्रभावित करता है। श्लोक २७ में उन्हें 'कलाधर' कहा गया है, जो उनके १६ कलाओं के निरंतर परिवर्तनशील स्वरूप को प्रकट करता है।
दार्शनिक गहराई: चन्द्र देव को 'सोम' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है अमृत। वे देवताओं के भोजन (देवभोजनाय) और वनस्पतियों के राजा (औषधिपति) माने जाते हैं। चन्द्रमा का श्वेत वर्ण शांति, पवित्रता और वैराग्य का प्रतीक है। उनकी शीतलता सूर्य की प्रचंडता को संतुलित करती है। आध्यात्मिक साधकों के लिए चन्द्रमा 'सहस्रार चक्र' के सोम-मंडल का प्रतीक हैं, जहाँ से अमृत की वर्षा होती है। इस नामावली का पाठ उस आंतरिक अमृत रस को जाग्रत करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
आज के समय में जब तनाव, अनिद्रा (Insomnia) और अवसाद (Depression) जैसी व्याधियां बढ़ रही हैं, चन्द्र देव की उपासना एक प्राकृतिक उपचार की तरह कार्य करती है। 'जगदानन्दकारणाय' (जगत को आनंद देने वाले) और 'सकलार्तिहराय' (समस्त दुखों को हरने वाले) के रूप में चन्द्रमा साधक को वह मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं, जिससे वह विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता। १०८ नामों का यह निरंतर जाप साधक की एकाग्रता (Focus) बढ़ाकर उसे जीवन के उच्च लक्ष्यों की प्राप्ति के योग्य बनाता है।
विशिष्ट आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व (Significance)
वैदिक ज्योतिष में चंद्र दोष (Chandra Dosha) को अत्यंत गंभीर माना गया है। यदि किसी की कुंडली में चन्द्रमा नीच राशि (वृश्चिक) में हो, राहु-केतु के साथ ग्रहण योग बना रहा हो, या 'केमद्रुम योग' में हो, तो व्यक्ति मानसिक भटकाव, असुरक्षा और अत्यधिक भावुकता से पीड़ित रहता है। श्री चन्द्र अष्टोत्तरशतनामावली का सोमवार को पाठ करना इन दोषों का एकमात्र और अचूक वैदिक उपाय है।
चन्द्रमा माता का कारक भी है, अतः माता के स्वास्थ्य और उनके साथ संबंधों को मधुर बनाने के लिए चन्द्र उपासना अनिवार्य है। श्लोक ८३ में उन्हें 'ग्रहमण्डलमध्यस्थाय' कहा गया है, जो नवग्रहों के बीच उनके केंद्रीय और संतुलित महत्व को दर्शाता है। वे 'द्विजराज' (ब्राह्मणों के राजा) भी हैं, जो ज्ञान और शुचिता के अधिपति होने का प्रमाण है।
फलश्रुति: नामावली पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits)
शास्त्रों और ज्योतिषीय अनुभवों के अनुसार, इस नामावली के पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- मानसिक शांति और स्थिरता: यह पाठ मन के अकारण डर, घबराहट (Anxiety) और नकारात्मक विचारों को शांत कर उसे अमृत जैसा शीतल बनाता है।
- स्मृति और एकाग्रता: 'विदुषां पतये' होने के नाते चन्द्र देव विद्यार्थियों को प्रखर बुद्धि और उच्च स्मरण शक्ति (Memory) प्रदान करते हैं।
- आरोग्य लाभ: शरीर में जल तत्व और कफ दोष को संतुलित करता है। यह नेत्रों की ज्योति बढ़ाने और अनिद्रा जैसी समस्याओं में भी लाभकारी है।
- पारिवारिक सुख: माता के स्वास्थ्य में सुधार होता है और परिवार में कलह की स्थिति समाप्त होकर सौहार्द बढ़ता है।
- रचनात्मकता का विकास: चन्द्रमा कल्पना शक्ति के स्वामी हैं। लेखक, कवि, कलाकार और संगीतकारों के लिए यह नामावली विशेष प्रेरणा का स्रोत है।
पाठ विधि एवं विशेष अवसर (Ritual Method & Guidelines)
चन्द्र देव की उपासना सात्विकता और सौम्यता की मांग करती है। इसके पूर्ण फल हेतु निम्न विधि अपनाएं:
साधना के नियम
- समय: सोमवार (Monday) की शाम या रात्रि का समय सर्वोत्तम है। पूर्णिमा की चांदनी रात में पाठ करना महाफलदायी है।
- शुद्धि: स्नान के पश्चात श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करें, जो चन्द्रमा को अत्यंत प्रिय हैं।
- अर्पण: चन्द्र देव को सफेद फूल (मोगरा, चमेली), अक्षत (साबुत चावल), चन्दन और मिश्री अर्पित करें।
- भोग: दूध से बनी खीर, सफेद मिठाई या नारियल का भोग लगाएं।
- अर्घ्य दान: पाठ के पश्चात पात्र में जल और थोड़ा दूध मिलाकर चन्द्रमा को देखते हुए अर्घ्य दें।
- दिशा: उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा की ओर मुख करके बैठना ज्योतिषीय दृष्टि से उत्तम है।
विशेष अवसर
- पूर्णिमा (Full Moon): इस दिन चन्द्रमा अपनी पूर्ण शक्ति में होते हैं, अतः १०८ नामों का पाठ और दान महापुण्य प्रदान करता है।
- शरद पूर्णिमा: वर्ष की सबसे तेजस्वी रात्रि को इस नामावली का पाठ आरोग्य की वर्षा करता है।
- सोमवार व्रत: जो लोग सोमवार का व्रत रखते हैं, उनके लिए यह पाठ अनिवार्य अंग है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. चन्द्र अष्टोत्तरशतनामावली का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य मन की चंचलता को शांत करना, मानसिक रोगों से मुक्ति पाना और कुंडली में स्थित चंद्र दोष को दूर कर जीवन में सुख-शांति प्राप्त करना है।
2. क्या इस पाठ से अनिद्रा (Insomnia) दूर हो सकती है?
जी हाँ, चन्द्रमा रात्रि के शासक हैं। सोने से पहले श्रद्धापूर्वक इन नामों का जप करने से मन रिलैक्स होता है और गहरी व सुकून भरी नींद आती है।
3. 'चन्द्रमा मनसो जातः' का क्या अर्थ है?
यह ऋग्वेद का मंत्र है जिसका अर्थ है कि चन्द्रमा की उत्पत्ति परमात्मा के 'मन' से हुई है। इसीलिए मानव मन पर चन्द्रमा का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।
4. चंद्र दोष निवारण के लिए दान में क्या देना चाहिए?
नामावली पाठ के बाद सफेद वस्तुओं जैसे—चावल, दूध, चीनी, सफेद वस्त्र या चाँदी का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
5. क्या यह पाठ घर में नकारात्मकता दूर करता है?
हाँ, चन्द्र देव 'निर्मलाय' और 'शुभ्राय' हैं। उनके नामों की गूँज घर के वातावरण से क्लेश और तनाव को मिटाकर सकारात्मक ऊर्जा (Vibes) लाती है।
6. क्या स्त्रियाँ मासिक धर्म के दौरान यह नामावली पढ़ सकती हैं?
वैदिक परंपरा के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान बाहरी पूजा वर्जित है, लेकिन मानसिक रूप से भगवान का स्मरण और नामों का जप कभी भी किया जा सकता है।
7. 'रोहिणीपति' नाम का क्या महत्व है?
चन्द्रमा की २७ पत्नियों में रोहिणी उन्हें सर्वाधिक प्रिय है। यह नाम प्रेम, सुंदरता और कलात्मक आकर्षण का प्रतीक है।
8. पाठ के लिए कौन सी माला सर्वोत्तम है?
चन्द्र देव की साधना में सफेद चन्दन की माला या मोतियों की माला (Pearl Rosary) का प्रयोग सर्वोत्तम माना जाता है। स्फटिक की माला भी प्रयोग की जा सकती है।
9. क्या इस पाठ को रात्रिकाल में खुले आकाश के नीचे करना चाहिए?
यदि संभव हो, तो चांदनी रात में खुले आकाश के नीचे बैठकर पाठ करना विशेष ऊर्जा प्रदान करता है क्योंकि चन्द्रमा की किरणें सीधे साधक के शरीर पर पड़ती हैं।
10. 'अमृतोद्भव' नाम का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'अमृत से उत्पन्न' या 'अमृत देने वाले'। चन्द्रमा को औषधियों का राजा कहा गया है क्योंकि उनकी किरणों से वनस्पतियों में रस (Life energy) भरता है।