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Sri Budha Stotram 2 – श्री बुध स्तोत्रम् २ (स्कान्दपुराण)

Sri Budha Stotram 2 – श्री बुध स्तोत्रम् २ (स्कान्दपुराण)
॥ श्री बुध स्तोत्रम् २ ॥ ध्यानम् भुजैश्चतुर्भिर्वरदाभयासि- गदा वहन्तं सुमुखं प्रशान्तम् । पीतप्रभं चन्द्रसुतं सुरेढ्यं सिंहेनिषण्णं बुधमाश्रयामि ॥ अथ स्तोत्रम् पीताम्बरः पीतवपुः किरीटी च चतुर्भुजः । पीतध्वजपताकी च रोहिणीगर्भसम्भवः ॥ १ ॥ ईशान्यादिषुदेशेषु बाणासन उदङ्मुखः । नाथो मगधदेशस्य मन्त्रो मन्त्रार्थतत्त्ववित् ॥ २ ॥ सुखासनः कर्णिकारो जैत्रश्चात्रेयगोत्रवान् । भरद्वाज ऋषिप्रख्यैर्ज्योतिर्मण्डलमण्डितः ॥ ३ ॥ अधिप्रत्यधिदेवाभ्यामन्यतो ग्रहमण्डले । प्रविष्टः सूक्ष्मरूपेण समस्तवरदः सुखी ॥ ४ ॥ सदा प्रदक्षिणं मेरोः कुर्वाणः कामरूपवान् । असिदण्डौ च बिभ्राणः सम्प्राप्तसुफलप्रदः ॥ ५ ॥ कन्याया मिथुनस्यापि राशेरधिपतिर्द्वयोः । मुद्गधान्यप्रदो नित्यं मर्त्यामर्त्यसुरार्चितः ॥ ६ ॥ यस्तु सौम्येन मनसा स्वमात्मानं प्रपूजयेत् । तस्य वश्यो भवेन्नित्यं सौम्यनामधरो बुधः ॥ ७ ॥ बुधस्तोत्रमिदं गुह्यं वसिष्ठेनोदितं पुरा । दिलीपाय च भक्ताय याचमानाय भूभृते ॥ ८ ॥ यः पठेदेकवारं वा सर्वाभीष्टमवाप्नुयात् । स्तोत्रराजमिदं पुण्यं गुह्याद्गुह्यतमं महत् ॥ ९ ॥ एकवारं द्विवारं वा त्रिवारं यः पठेन्नरः । तस्यापस्मारकुष्ठादिव्याधिबाधा न विद्यते ॥ १० ॥ सर्वग्रहकृतापीडा पठितेऽस्मिन्न विद्यते । कृत्रिमौषधदुर्मन्त्रं कृत्रिमादिनिशाचरैः ॥ ११ ॥ यद्यद्भयं भवेत्तत्र पठितेऽस्मिन्न विद्यते । प्रतिमा या सुवर्णेन लिखिता तु भुजाष्टका ॥ १२ ॥ मुद्गधान्योपरिन्यस्त पीतवस्त्रान्विते घटे । विन्यस्य विधिना सम्यक् मासमेकं निरन्तरम् ॥ १३ ॥ ये पूजयन्ति ते यान्ति दीर्घमायुः प्रजाधनम् । आरोग्यं भस्मगुल्मादि सर्वव्याधिविनाशनम् । यं यं कामयते सम्यक् तत्तदाप्नोत्यसंशयः ॥ १४ ॥ ॥ इति श्रीस्कान्दपुराणे श्री बुध स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

इस स्तोत्र का विशिष्ट महत्व

श्री बुध स्तोत्रम् (Sri Budha Stotram) स्कान्द पुराण के अनुसार एक अत्यंत गुह्य (secret) और पुण्यदायी स्तोत्र है। इसे प्राचीन काल में महर्षि वशिष्ठ (Sage Vashishtha) ने इक्ष्वाकु वंश के महान राजा दिलीप को प्रदान किया था। यह स्तोत्र बुध ग्रह के विभिन्न स्वरूपों, उनके वाहन (सिंह), उनकी दिशा (ईशान्य), और उनके राशि स्वामित्व (कन्या और मिथुन) का वर्णन करता है। इसमें बुध को 'मन्त्रार्थतत्त्ववित्' अर्थात मंत्रों के अर्थ और तत्त्व के ज्ञाता कहा गया है, जो उनकी बौद्धिक श्रेष्ठता को दर्शाता है। यह स्तोत्र सामान्य ग्रह शांति से परे है; यह एक 'स्तोत्रराज' (राजा जैसा स्तोत्र) है जिसके पाठ से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।

स्तोत्र के प्रमुख लाभ (Benefits)

इस स्तोत्र की फलश्रुति (Phala Shruti) में इसके अद्भुत लाभों का स्पष्ट वर्णन है:

  • अपस्मार (Epilepsy) और कुष्ठ रोग निवारण: "तस्यापस्मारकुष्ठादिव्याधिबाधा न विद्यते" - नियमित पाठ से मिर्गी (Epilepsy) और त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है।

  • सभी ग्रह पीड़ा का शमन: "सर्वग्रहकृतापीडा पठितेऽस्मिन्न विद्यते" - केवल बुध ही नहीं, बल्कि सभी नवग्रहों की पीड़ा इस स्तोत्र से शांत होती है।

  • तंत्र-मंत्र और भय से रक्षा: "कृत्रिमौषधदुर्मन्त्रं... यद्यद्भयं भवेत्तत्र पठितेऽस्मिन्न विद्यते" - दुष्ट शक्तियों द्वारा किए गए अभिचार (Black Magic) और हर प्रकार के भय से यह स्तोत्र रक्षा करता है।

  • दीर्घायु और संतान-धन प्राप्ति: "दीर्घमायुः प्रजाधनम्" - एक मास तक विधिवत पूजा करने से आयु, संतान और धन की प्राप्ति होती है।

पाठ करने की विधि (Method of Chanting)

  • दिन और समय: बुधवार (Wednesday) को, विशेषकर बुध की होरा में पाठ आरंभ करें।

  • पाठ संख्या: इस स्तोत्र को एक बार, दो बार या तीन बार पढ़ना पर्याप्त है। "एकवारं द्विवारं वा त्रिवारं यः पठेन्नरः"

  • विशेष पूजा विधि (Advanced Puja): स्तोत्र के अनुसार, यदि आप सोने की अष्टभुजी बुध प्रतिमा को, मूंग दाल से भरे पीले वस्त्र ढके कलश पर स्थापित कर, एक मास तक पूजन करें, तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • ध्यान: पाठ से पूर्व दिए गए ध्यान श्लोक का जाप करें। चार भुजाओं वाले, वरद और अभय मुद्रा धारण करने वाले, पीत (पीले) रंग के, चंद्रपुत्र बुध का ध्यान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. यह बुध स्तोत्र किस पुराण से है?

यह स्तोत्र 'स्कान्द पुराण' (Skanda Purana) से उद्धृत है। इसे महर्षि वशिष्ठ ने राजा दिलीप को सुनाया था।

2. इस स्तोत्र के पाठ से कौन से रोग दूर होते हैं?

स्तोत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इसके पाठ से अपस्मार (Epilepsy), कुष्ठ (Leprosy) और अन्य सभी प्रकार की व्याधियां दूर होती हैं।

3. इस स्तोत्र को 'स्तोत्रराज' क्यों कहा गया है?

इसे 'स्तोत्रराज' (King of Hymns) इसलिए कहा गया है क्योंकि यह 'गुह्याद्गुह्यतमं महत्' अर्थात सबसे गोपनीय रहस्यों में से एक और अत्यंत महान है।

4. बुध का वाहन क्या है?

इस स्तोत्र में बुध को 'सिंहेनिषण्णं' (सिंह पर विराजमान) बताया गया है, जो उनकी शक्ति और वीरता का प्रतीक है।

5. बुध की राशि कौन सी है?

स्तोत्र के अनुसार, बुध कन्या (Virgo) और मिथुन (Gemini) दोनों राशियों के स्वामी हैं।

6. बुध को प्रसन्न करने के लिए कौन सा धान्य चढ़ाना चाहिए?

इस स्तोत्र में 'मुद्गधान्य' (मूंग की दाल) का उल्लेख है। बुध पूजा में हरी मूंग चढ़ाना शुभ माना जाता है।

7. क्या यह स्तोत्र तांत्रिक बाधाओं से बचाता है?

हाँ, स्तोत्र में स्पष्ट है: 'कृत्रिमौषधदुर्मन्त्रं कृत्रिमादिनिशाचरैः' - कृत्रिम (तांत्रिक) प्रयोगों और दुष्ट शक्तियों से यह स्तोत्र रक्षा करता है।

8. एक मास की पूजा विधि क्या है?

सोने की अष्टभुजी बुध प्रतिमा को, पीले वस्त्र से ढके मूंग भरे कलश पर स्थापित कर, एक मास तक विधिवत पूजन करने से दीर्घायु, संतान, धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

9. बुध का ध्यान कैसे करें?

ध्यान श्लोक के अनुसार, चार भुजाओं वाले, वरद और अभय मुद्रा धारण करने वाले, गदा धारी, शांत मुख वाले, पीले प्रभा वाले, सिंह पर विराजमान चंद्रपुत्र बुध का ध्यान करें।

10. क्या इसे प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?

हाँ, इसे प्रतिदिन पढ़ना लाभकारी है। विशेष रूप से बुधवार को इसका पाठ अधिक फलदायी होता है।