श्रीसूक्त विधान पूर्वक षोडशोपचार पूजा
Sri Sukta Vidhana Purvaka Shodasopachara Puja
श्रीसूक्त विधान पूर्वक षोडशोपचार पूजा
यह माँ महालक्ष्मी (Goddess Mahalakshmi) की सबसे प्रभावशाली और वैदिक पूजा विधि है। इसमें श्रीसूक्तम् (Rigvediya Sri Suktam) के सोलह मन्त्रों (ऋचाओं) का प्रयोग किया जाता है।
श्रीसूक्त क्या है?
श्रीसूक्त ऋग्वेद का एक 'खिल सूक्त' है, जिसे 'लक्ष्मी सूक्त' भी कहा जाता है। यह वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी को प्रसन्न करने वाला सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र है।
पूजा का विशेष विधान
सामान्य पूजा में साधारण श्लोकों या नामों से उपचार समर्पित किए जाते हैं, परन्तु इस 'श्रीसूक्त विधान' में प्रत्येक उपचार के लिए श्रीसूक्त का एक-एक विशिष्ट मन्त्र बोला जाता है। यह अनुष्ठान अक्षय धन, कीर्ति, आरोग्य और वंश वृद्धि के लिए अमोघ माना गया है। दीपावली और शुक्रवार को यह पूजा विशेष फलदायी है।
श्रीसूक्त विधान का महत्त्व
- ऋग्वेदीय परम्परा: यह पूजा ऋग्वेद के प्राचीन मन्त्रों पर आधारित है।
- षोडश मन्त्र - षोडश उपचार: श्रीसूक्त में 16 मन्त्र हैं (15 मुख्य + 1 फलश्रुति), जो पूजा के 16 उपचारों (Shodasopachara) के साथ पूर्णतः मेल खाते हैं।
- स्थिर लक्ष्मी: इस विधि से पूजा करने से घर में लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करती हैं (अनपगामिनी - कभी न जाने वाली)।
