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Sri Vasavi Ashttotara Shatanamavali – श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Vasavi Ashttotara Shatanamavali – श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली
ओं श्रीवासवाम्बायै नमः । ओं श्रीकन्यकायै नमः । ओं जगन्मात्रे नमः । ओं आदिशक्त्यै नमः । ओं देव्यै नमः । ओं करुणायै नमः । ओं प्रकृतिस्वरूपिण्यै नमः । ओं विद्यायै नमः । ओं शुभायै नमः । ९ ओं धर्मस्वरूपिण्यै नमः । ओं वैश्यकुलोद्भवायै नमः । ओं सर्वस्यै नमः । ओं सर्वज्ञायै नमः । ओं नित्यायै नमः । ओं त्यागस्वरूपिण्यै नमः । ओं भद्रायै नमः । ओं वेदवेद्यायै नमः । ओं सर्वपूजितायै नमः । १८ ओं कुसुमपुत्रिकायै नमः । ओं कुसुमदन्तीवत्सलायै नमः । ओं शान्तायै नमः । ओं गम्भीरायै नमः । ओं शुभायै नमः । ओं सौन्दर्यनिलयायै नमः । ओं सर्वहितायै नमः । ओं शुभप्रदायै नमः । ओं नित्यमुक्तायै नमः । २७ ओं सर्वसौख्यप्रदायै नमः । ओं सकलधर्मोपदेशकारिण्यै नमः । ओं पापहरिण्यै नमः । ओं विमलायै नमः । ओं उदारायै नमः । ओं अग्निप्रविष्टायै नमः । ओं आदर्शवीरमात्रे नमः । ओं अहिंसास्वरूपिण्यै नमः । ओं आर्यवैश्यपूजितायै नमः । ३६ ओं भक्तरक्षणतत्परायै नमः । ओं दुष्टनिग्रहायै नमः । ओं निष्कलायै नमः । ओं सर्वसम्पत्प्रदायै नमः । ओं दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः । ओं त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः । ओं लीलामानुषविग्रहायै नमः । ओं विष्णुवर्धनसंहारिकायै नमः । ओं सुगुणरत्नायै नमः । ४५ ओं साहसौन्दर्यसम्पन्नायै नमः । ओं सच्चिदानन्दस्वरूपायै नमः । ओं विश्वरूपप्रदर्शिन्यै नमः । ओं निगमवेद्यायै नमः । ओं निष्कामायै नमः । ओं सर्वसौभाग्यदायिन्यै नमः । ओं धर्मसंस्थापनायै नमः । ओं नित्यसेवितायै नमः । ओं नित्यमङ्गलायै नमः । ५४ ओं नित्यवैभवायै नमः । ओं सर्वोपाधिविनिर्मुक्तायै नमः । ओं राजराजेश्वर्यै नमः । ओं उमायै नमः । ओं शिवपूजातत्परायै नमः । ओं पराशक्त्यै नमः । ओं भक्तकल्पकायै नमः । ओं ज्ञाननिलयायै नमः । ओं ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः । ६३ ओं शिवायै नमः । ओं भक्तिगम्यायै नमः । ओं भक्तिवश्यायै नमः । ओं नादबिन्दुकलातीतायै नमः । ओं सर्वोपद्रववारिण्यै नमः । ओं सर्वस्वरूपायै नमः । ओं सर्वशक्तिमय्यै नमः । ओं महाबुद्ध्यै नमः । ओं महासिद्ध्यै नमः । ७२ ओं सद्गतिदायिन्यै नमः । ओं अमृतायै नमः । ओं अनुग्रहप्रदायै नमः । ओं आर्यायै नमः । ओं वसुप्रदायै नमः । ओं कलावत्यै नमः । ओं कीर्तिवर्धिन्यै नमः । ओं कीर्तितगुणायै नमः । ओं चिदानन्दायै नमः । ८१ ओं चिदाधारायै नमः । ओं चिदाकारायै नमः । ओं चिदालयायै नमः । ओं चैतन्यरूपिण्यै नमः । ओं चैतन्यवर्धिन्यै नमः । ओं यज्ञरूपायै नमः । ओं यज्ञफलदायै नमः । ओं तापत्रयविनाशिन्यै नमः । ओं गुणातीतायै नमः । ९० ओं विष्णुवर्धनमर्दिन्यै नमः । ओं तीर्थरूपायै नमः । ओं दीनवत्सलायै नमः । ओं दयापूर्णायै नमः । ओं तपोनिष्ठायै नमः । ओं श्रेष्ठायै नमः । ओं श्रीयुतायै नमः । ओं प्रमोददायिन्यै नमः । ओं भवबन्धविनाशिन्यै नमः । ९९ ओं भगवत्यै नमः । ओं इहपरसौख्यदायै नमः । ओं आश्रितवत्सलायै नमः । ओं महाव्रतायै नमः । ओं मनोरमायै नमः । ओं सकलाभीष्टप्रदायै नमः । ओं नित्यमङ्गलरूपिण्यै नमः । ओं नित्योत्सवायै नमः । ओं श्रीकन्यकापरमेश्वर्यै नमः । १०८ इति श्रीवासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली ।

परिचय - श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली

श्री वासवीकन्यकापरमेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावली में माँ वासवी के 108 पावन नामों का संकलन है। माँ वासवी, जिन्हें वासवाम्बा और कन्यका परमेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है, आर्य वैश्य समुदाय की कुलदेवी हैं।
माँ वासवी ने धर्म की रक्षा, आत्म-सम्मान और अहिंसा के उच्चतम आदर्शों को स्थापित करने के लिए अग्नि समाधि (अग्नि प्रवेश) ली थी। वे त्याग, प्रेम और शांति की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। यह नामवली उनके दिव्य गुणों का स्मरण कराती है।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • व्यापार में वृद्धि: माँ वासवी वैश्य कुल की देवी हैं, उनकी कृपा से व्यापार और व्यवसाय में अपार सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • शांति और अहिंसा: यह पाठ मन में शांति, करुणा और अहिंसा के भाव जागृत करता है।
  • धर्म रक्षा: साधक में धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति और साहस का संचार होता है।
  • संकट निवारण: जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं से माँ वासवी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
  • सुख-समृद्धि: परिवार में सुख, शांति और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: शुक्रवार, पूर्णिमा और विशेष रूप से 'अमावस्या' या वासवी जयंती के दिन पाठ करना श्रेष्ठ है।
  • स्थान: स्वच्छ और पवित्र स्थान पर, माँ वासवी के चित्र या मूर्ति के समक्ष बैठें।
  • पूजन: लाल पुष्प, कुमकुम और नैवेध (विशेष रूप से खीर या पोंगल) अर्पित करें।
  • भाव: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ, माँ के त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए नाम जाप करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी कौन हैं?

श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी माँ आदिशक्ति (पार्वती) का अवतार हैं, जिन्होंने धर्म की रक्षा और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए आत्म-बलिदान (अग्नि प्रवेश) दिया था।

2. वासवी माता किस समुदाय की कुलदेवी हैं?

वे मुख्य रूप से आर्य वैश्य (कोमटी) समुदाय की कुलदेवी मानी जाती हैं, परन्तु सभी भक्त उनकी उपासना समान श्रद्धा से करते हैं।

3. अग्नि प्रवेश का क्या महत्व है?

विष्णुवर्धन राजा द्वारा विवाह के दबाव और हिंसा से बचने के लिए, माता वासवी ने 102 गोत्रों के दम्पतियों के साथ अग्नि में प्रवेश कर आत्म-बलिदान दिया, जो धर्म और स्वाभिमान की रक्षा का प्रतीक है।

4. पेनुगोंडा का क्या महत्व है?

पेनुगोंडा (आंध्र प्रदेश) माता वासवी का जन्म स्थान और उनके अग्नि प्रवेश की पावन भूमि है। यह वासवी भक्तों का मुख्य तीर्थ स्थल है।

5. इस अष्टोत्तर का पाठ कब करना चाहिए?

शुक्रवार, वासवी जयंती, और आत्मलिंगार्चना (अग्नि प्रवेश दिवस) के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

6. क्या केवल वैश्य ही इनकी पूजा कर सकते हैं?

नहीं, माँ वासवी जगत जननी हैं। कोई भी श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा कर सकता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

7. व्यापार में सफलता के लिए यह पाठ कैसे लाभकारी है?

माँ वासवी वैश्य कुल की देवी हैं, जो व्यापार और वाणिज्य के अधिष्ठाता हैं। उनकी कृपा से व्यापार में ईमानदारी, समृद्धि और बरकत आती है।

8. माता का प्रिय भोग क्या है?

माता को मीठे व्यंजन, विशेष रूप से खीर या पोंगल का भोग प्रिय है।

9. कुसुम श्रेष्ठी कौन थे?

कुसुम श्रेष्ठी माता वासवी के पिता थे, जो पेनुगोंडा के राजा और वैश्य समाज के प्रमुख थे।

10. अहिंसा परमोधर्म का माँ वासवी से क्या संबंध है?

माँ वासवी ने युद्ध और रक्तपात को रोकने के लिए स्वयं अग्नि समाधि ली। उनका जीवन 'अहिंसा परमोधर्म' का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।