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Sri Manasa Devi Stotram (Dhanvantari Krutam) – श्री मनसा देवी स्तोत्रम्

Sri Manasa Devi Stotram (Dhanvantari Krutam) – श्री मनसा देवी स्तोत्रम्
॥ श्री मनसा देवि स्तोत्रम् (धन्वन्तरि कृतम्) ॥ ॥ ध्यानम् ॥ चारुचम्पकवर्णाभां सर्वाङ्गसुमनोहराम् । ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां शोभितां सूक्ष्मवाससा ॥ १ ॥ सुचारुकबरीशोभां रत्नाभरणभूषिताम् । सर्वाभयप्रदां देवीं भक्तानुग्रहकारकाम् ॥ २ ॥ सर्वविद्याप्रदां शान्तां सर्वविद्याविशारदाम् । नागेन्द्रवाहिनीं देवीं भजे नागेश्वरीं पराम् ॥ ३ ॥ ॥ धन्वन्तरिरुवाच ॥ नमः सिद्धिस्वरूपायै सिद्धिदायै नमो नमः । नमः कश्यपकन्यायै वरदायै नमो नमः ॥ ४ ॥ नमः शङ्करकन्यायै शङ्करायै नमो नमः । नमस्ते नागवाहिन्यै नागेश्वर्यै नमो नमः ॥ ५ ॥ नम आस्तीकजनन्यै जनन्यै जगतां मम । नमो जगत्कारणायै जरत्कारुस्त्रियै नमः ॥ ६ ॥ नमो नागभगिन्यै च योगिन्यै च नमो नमः । नमश्चिरं तपस्विन्यै सुखदायै नमो नमः ॥ ७ ॥ नमस्तपस्यारूपायै फलदायै नमो नमः । सुशीलायै च साध्व्यै च शान्तायै च नमो नमः ॥ ८ ॥ ॥ फलश्रुतिः ॥ इदं स्तोत्रं महापुण्यं भक्तियुक्तश्च यः पठेत् । वंशजानां नागभयं नास्ति तस्य न संशयः ॥ ९ ॥ ॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्ते महापुराणे श्रीकृष्णजन्मखण्डे एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः धन्वन्तरिकृत श्री मनसादेवि स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

श्री मनसा देवि स्तोत्रम् - परिचय (Introduction)

श्री मनसा देवी नागों और सर्पों की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे भगवान शिव की मानस पुत्री (तपस्या के दौरान उनके मन से उत्पन्न) मानी जाती हैं, और ऋषि कश्यप उनके पिता हैं। उन्हें 'विषहरी' (विष का नाश करने वाली) और 'नित्या' (सनातन) भी कहा जाता है।

धन्वन्तरि और मनसा देवी: यह स्तोत्र ब्रह्मवैवर्त पुराण (श्रीकृष्णजन्मखंड, अध्याय 51) से लिया गया है। देवताओं के वैद्य भगवान धन्वन्तरि ने चिकित्सा विज्ञान में विष-निवारण (Toxicology) के लिए मनसा देवी की आराधना की थी। वे जानते थे कि केवल औषधियों से कालकूट जैसे हलाहल विष का उपचार संभव नहीं है, इसके लिए दैवीय शक्ति (मंत्र शक्ति) की आवश्यकता होती है। इसलिए उन्होंने देवी को "सिद्धिस्वरूपायै" (सिद्धि की साक्षात मूर्ति) कहकर नमन किया।

पौराणिक कथा: जब जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की तक्षक नाग द्वारा मृत्यु का बदला लेने के लिए 'सर्प-सत्र' यज्ञ किया, तो समस्त नाग जाति नष्ट होने लगी। तब मनसा देवी के पुत्र 'आस्तीक' (Astika) ने अपनी बुद्धिमत्ता से उस यज्ञ को रुकवाया और नागों के प्राण बचाए। इसलिए मनसा देवी को 'आस्तीक-जननी' (आस्तीक की माता) और 'नाग-भगिनी' (नागराज वासुकी की बहन) कहा जाता है। बंगाल, असम और झारखंड में मनसा पूजा एक विशाल उत्सव के रूप में मनाई जाती है।

इस स्तोत्र में देवी को "कश्यप-कन्या", "शंकर-कन्या", "जरत्कारु-प्रिया" और "नागेश्वरी" जैसे नामों से संबोधित किया गया है। यह स्तोत्र भय और विष के विरुद्ध एक अचूक रक्षा कवच है।

विशिष्ट महत्व (Significance)

  • सर्प भय मुक्ति: यह इस स्तोत्र का मुख्य उद्देश्य है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है या जिन्हें अक्सर सांपों के बुरे सपने आते हैं, उनके लिए यह पाठ परम शांतिदायक है।

  • आरोग्य और विष-मुक्ति: यह केवल सांप के जहर के लिए नहीं, बल्कि शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों (Toxins), फूड पॉइजनिंग, और जीर्ण चर्म रोगों (Chronic Skin Diseases) के निवारण के लिए भी प्रभावी है।

  • सिद्धि प्राप्ति: मनसा देवी योग और तंत्र की भी देवी हैं। उन्होंने भगवान शंकर से 'मृतसंजीवनी' विद्या सीखी थी। साधक उन्हें सिद्धि और मोक्ष के लिए भी पूजते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

इस महापुण्य स्तोत्र के पाठ से निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:

  • नाग भय का नाश: श्लोक 9 में धन्वन्तरि जी ने कहा है—"वंशजानां नागभयं नास्ति तस्य न संशयः"। इसका पाठ करने वाले के कुल में भी किसी की सर्पदंश से मृत्यु नहीं होती।

  • संतान रक्षा: चूंकि उन्होंने आस्तीक जैसे पुत्र को जन्म दिया और नागों की रक्षा की, वे बच्चों की रक्षक मानी जाती हैं। माताएं अपने बच्चों के स्वास्थ्य के लिए मनसा व्रत रखती हैं।

  • वरदान प्राप्ति: श्लोक 4 में उन्हें "वरदायै" (वरदान देने वाली) कहा गया है। वे भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करती हैं और "सुखदा" (सुख देने वाली) हैं।

  • शत्रु दमन: विषहरी होने के कारण, वे शत्रुओं के 'विष' (ईर्ष्या और षड्यंत्र) को भी निष्प्रभावी कर देती हैं।

पूजा विधि (Ritual Method)

मनसा देवी की पूजा सात्विक और तांत्रिक दोनों विधियों से होती है। सामान्य गृहस्थ के लिए विधि इस प्रकार है:

  • दिन: नाग पंचमी (Naga Panchami), गुरुवार, और आषाढ़ माह की संक्रांति पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

  • सामग्री: दूध (कच्चा), लावा (खेई/पॉपकॉर्न जैसा), केला, और सिंदूर।

  • विशेष अर्पण: मनसा पूजा में 'सिज' (Sij) या कैक्टस (Manasa Gach) के पौधे की पूजा का विधान है, जिसे देवी का प्रतीक माना जाता है। यदि यह उपलब्ध न हो, तो नागफनी या नीम की पत्तियों का प्रयोग करें।

  • बलिदान त्याग: मनसा देवी को "वैष्णवी" रूप में पूजते समय किसी भी जीव की बलि नहीं दी जाती, वे दूध और फलों से प्रसन्न होती हैं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मनसा देवी कौन हैं?

मनसा देवी कश्यप ऋषि की मानस पुत्री (Mind-born daughter) और नागराज वासुकी की बहन हैं। उन्हें 'नाग-माता' और 'विषहरी' (Poison Remover) कहा जाता है। वे शिवजी की शिष्या और जरत्कारु मुनि की पत्नी हैं।

2. धन्वन्तरि ने यह स्तोत्र क्यों रचा?

भगवान धन्वन्तरि (चिकित्सा के देवता) जानते थे कि सर्प विष और असाध्य रोगों का इलाज केवल औषधियों से पूर्ण नहीं होता, दैवीय कृपा भी चाहिए। इसलिए उन्होंने विष की अधिष्ठात्री देवी मनसा की स्तुति की, ताकि वे विष प्रभाव को हर लें।

3. क्या त्वचा रोगों (Skin Diseases) में यह लाभकारी है?

हाँ, चूंकि सर्प अपनी त्वचा बदलता है (Kenchuli), इसलिए मनसा देवी की पूजा नई त्वचा और कांति प्रदान करती है। पुराने और जिद्दी त्वचा रोग, एलर्जी और विष-जनित विकार ठीक होते हैं।

4. इन्हें 'जरत्कारु' क्यों कहा जाता है?

इनका विवाह जरत्कारु मुनि से हुआ था, इसलिए इन्हें 'जरत्कारु-प्रिया' या स्वयं 'जरत्कारु' भी कहा जाता है।

5. सर्प भय (Snake Fear) के लिए यह कैसे उपयोगी है?

श्लोक 9 में स्पष्ट फलश्रुति है: 'वंशजानां नागभयं नास्ति तस्य न संशयः'। जो यह पाठ करता है, उसके वंश में भी सर्प का भय नहीं रहता। यह नाग दोष और कालसर्प दोष को शांत करता है।

6. नाग पंचमी पर पूजा कैसे करें?

नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) को देवी मनसा और अष्टनागों की पूजा करें। दूध, लावा (Parched rice) और कोमल नीम की पत्तियां अर्पित करें। हल्दी-कुमकुम से नागों का चित्र बनाकर पूजन करें।

7. 'सिद्धि-स्वरूपा' का क्या अर्थ है?

श्लोक 4 में उन्हें 'सिद्धिस्वरूपायै' कहा गया है। इसका अर्थ है कि वे केवल विष ही नहीं हरतीं, बल्कि अष्ट-सिद्धियाँ और आध्यात्मिक पूर्णता भी प्रदान करती हैं। उन्होंने शिवजी से 'मृतसंजीवनी विद्या' प्राप्त की थी।

8. क्या घर में सर्प निकलने पर क्या करें?

यदि घर के आसपास बार-बार सांप दिखाई दें, तो उन्हें हानि न पहुँचाएं। इस स्तोत्र का पाठ करें और दूध-शक्कर किसी बांबी (Snake pit) के पास रख दें। सर्प को मारना वर्जित माना गया है।

9. क्या ग्रहण काल में इसका पाठ विशेष है?

हाँ, मनसा देवी की साधना के लिए ग्रहण काल (Solar/Lunar Eclipse) अत्यंत सिद्धदायक माना जाता है। तंत्र शास्त्र में इस समय किया गया मनसा मंत्र का जप कई गुना फल देता है।

10. किस दिन पूजा श्रेष्ठ है?

नाग पंचमी के अलावा, आषाढ़ संक्रांति (मनसा पूजा का मुख्य दिन, विशेषकर बंगाल में) और किसी भी महीने की पंचमी तिथि पूजा के लिए उत्तम है। गुरुवार भी इनका प्रिय दिन है।