Logoपवित्र ग्रंथ

Sri Skanda Ashtottara Shatanamavali - श्री स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Skanda Ashtottara Shatanamavali - श्री स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावली
॥ श्री स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॥ नामावलिः ॥ ॐ स्कन्दाय नमः । ॐ गुहाय नमः । ॐ षण्मुखाय नमः । ॐ फालनेत्रसुताय नमः । ॐ प्रभवे नमः । ॐ पिङ्गलाय नमः । ॐ कृत्तिकासूनवे नमः । ॐ शिखिवाहाय नमः । ॐ द्विषड्भुजाय नमः । ॐ द्विषण्णेत्राय नमः । ॐ शक्तिधराय नमः । ॐ पिशिताशप्रभञ्जनाय नमः । ॐ तारकासुरसंहारिणे नमः । ॐ रक्षोबलविमर्दनाय नमः । ॐ मत्ताय नमः । ॐ प्रमत्ताय नमः । ॐ उन्मत्ताय नमः । ॐ सुरसैन्यसुरक्षकाय नमः । ॐ देवसेनापतये नमः । ॐ प्राज्ञाय नमः । ॐ कृपालवे नमः । ॐ भक्तवत्सलाय नमः । ॐ उमासुताय नमः । ॐ शक्तिधराय नमः । ॐ कुमाराय नमः । ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः । ॐ सेनान्ये नमः । ॐ अग्निजन्मने नमः । ॐ विशाखाय नमः । ॐ शङ्करात्मजाय नमः । ॐ शिवस्वामिने नमः । ॐ गणस्वामिने नमः । ॐ सर्वस्वामिने नमः । ॐ सनातनाय नमः । ॐ अनन्तशक्तये नमः । ॐ अक्षोभ्याय नमः । ॐ पार्वतीप्रियनन्दनाय नमः । ॐ गङ्गासुताय नमः । ॐ शरोद्भूताय नमः । ॐ आहूताय नमः । ॐ पावकात्मजाय नमः । ॐ जृम्भाय नमः । ॐ प्रजृम्भाय नमः । ॐ उज्जृम्भाय नमः । ॐ कमलासनसंस्तुताय नमः । ॐ एकवर्णाय नमः । ॐ द्विवर्णाय नमः । ॐ त्रिवर्णाय नमः । ॐ सुमनोहराय नमः । ॐ चतुर्वर्णाय नमः । ॐ पञ्चवर्णाय नमः । ॐ प्रजापतये नमः । ॐ अहर्पतये नमः । ॐ अग्निगर्भाय नमः । ॐ शमीगर्भाय नमः । ॐ विश्वरेतसे नमः । ॐ सुरारिघ्ने नमः । ॐ हरिद्वर्णाय नमः । ॐ शुभकराय नमः । ॐ वटवे नमः । ॐ वटुवेषभृते नमः । ॐ पूष्णे नमः । ॐ गभस्तये नमः । ॐ गहनाय नमः । ॐ चन्द्रवर्णाय नमः । ॐ कलाधराय नमः । ॐ मायाधराय नमः । ॐ महामायिने नमः । ॐ कैवल्याय नमः । ॐ शङ्करात्मजाय नमः । ॐ विश्वयोनये नमः । ॐ अमेयात्मने नमः । ॐ तेजोनिधये नमः । ॐ अनामयाय नमः । ॐ परमेष्ठिने नमः । ॐ परब्रह्मणे नमः । ॐ वेदगर्भाय नमः । ॐ विराट्सुताय नमः । ॐ पुलिन्दकन्याभर्त्रे नमः । ॐ महासारस्वतावृताय नमः । ॐ आश्रिताखिलदात्रे नमः । ॐ चोरघ्नाय नमः । ॐ रोगनाशनाय नमः । ॐ अनन्तमूर्तये नमः । ॐ आनन्दाय नमः । ॐ शिखण्डिकृतकेतनाय नमः । ॐ डम्भाय नमः । ॐ परमडम्भाय नमः । ॐ महाडम्भाय नमः । ॐ वृषाकपये नमः । ॐ कारणोपात्तदेहाय नमः । ॐ कारणातीतविग्रहाय नमः । ॐ अनीश्वराय नमः । ॐ अमृताय नमः । ॐ प्राणाय नमः । ॐ प्राणायामपरायणाय नमः । ॐ विरुद्धहन्त्रे नमः । ॐ वीरघ्नाय नमः । ॐ रक्तास्याय नमः । ॐ श्यामकन्धराय नमः । ॐ सुब्रह्मण्याय नमः । ॐ गुहाय नमः । ॐ प्रीताय नमः । ॐ ब्रह्मण्याय नमः । ॐ ब्राह्मणप्रियाय नमः । ॐ वंशवृद्धिकराय नमः । ॐ वेदवेद्याय नमः । ॐ अक्षयफलप्रदाय नमः । ॥ इति श्री स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

परिचय: श्री स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावली (Detailed Introduction)

भगवान स्कन्द, जिन्हें सुब्रह्मण्य, कार्तिकेय, मुरुगन और महासेन जैसे नामों से जाना जाता है, सनातन धर्म में साहस, शौर्य और ज्ञान के अधिष्ठाता देवता हैं। श्री स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावली भगवान कार्तिकेय की स्तुति का एक दिव्य संकलन है, जिसमें उनके १०८ नामों के माध्यम से उनके विराट स्वरूप का वर्णन किया गया है। वे भगवान शिव और माता पार्वती के द्वितीय पुत्र हैं और देवताओं की सेना के सेनापति (देवसेनापति) माने जाते हैं। स्कन्द का जन्म ही अधर्म और अहंकार के प्रतीक तारकासुर के विनाश के लिए हुआ था।
पौराणिक पृष्ठभूमि: स्कन्द पुराण और कुमार तंत्र के अनुसार, कार्तिकेय का जन्म महादेव के तृतीय नेत्र से उत्पन्न छह ज्योतिपुंजों से हुआ था। इन पुंजों को गंगा ने 'शरवण' (सरकंडों के वन) में पहुँचाया, जहाँ छह बालकों के रूप में उनका पालन हुआ। अंततः माता पार्वती के आलिंगन से वे छह बालक एक दिव्य विग्रह में परिवर्तित हुए, जिन्हें षण्मुख (छह मुख वाले) कहा गया। नामावली में 'अग्निजन्मने', 'गङ्गासुताय' और 'शरोद्भूताय' जैसे नाम इसी अलौकिक जन्म कथा की पुष्टि करते हैं।
दार्शनिक और योगिक अर्थ: भगवान स्कन्द के नाम केवल संबोधन नहीं हैं, बल्कि वे योग साधना के रहस्यों को भी प्रकट करते हैं। उनका 'गुहा' नाम हृदय की उस सूक्ष्म गुफा की ओर संकेत करता है जहाँ परमात्मा का वास है। उनके छह मुख छह चक्रों (षड्चक्र) और पांच इंद्रियों व मन के नियंत्रण के प्रतीक हैं। 'शक्तिधारिणे' नाम उनके मुख्य आयुध 'वेल' (भाला) का सूचक है, जो प्रखर बुद्धि और आध्यात्मिक विवेक का प्रतीक है। यह वेल अज्ञान के अंधकार को चीरकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
भगवान स्कन्द को 'ज्ञान का अधिपति' माना गया है। दक्षिण भारत की मुरुगन परंपरा में उन्हें "तमिल भगवान" कहा जाता है और उन्हें ज्ञान का साक्षात् विग्रह माना जाता है। उन्होंने स्वयं अपने पिता भगवान शिव को प्रणव मंत्र (ॐ) का रहस्य समझाया था, इसलिए उन्हें 'शिवगुरु' भी कहा जाता है। नामावली में 'प्राज्ञाय' और 'वेदवेद्याय' जैसे नाम उनकी इसी विद्वत्ता को प्रदर्शित करते हैं। यह नामावली साधक को अनुशासन, निर्भयता और मानसिक स्पष्टता प्रदान करती है।
कलियुग में, जहाँ मनुष्य मानसिक द्वंद्वों और बाह्य शत्रुओं से घिरा हुआ है, स्कन्द की आराधना एक सुरक्षा कवच का कार्य करती है। उनकी शक्ति अजेय है और वे अपने भक्तों के प्रति अत्यंत दयालु (भक्तवत्सलाय) हैं। इस नामावली का पाठ करने से साधक को यह बोध होता है कि जिस प्रकार स्कन्द ने तारकासुर का दमन किया, उसी प्रकार वे साधक के भीतर के काम, क्रोध और लोभ रूपी असुरों का भी संहार कर सकते हैं। १०८ नामों का यह दिव्य गुच्छ वास्तव में आत्मा की विजय यात्रा का मार्ग है।

विशिष्ट आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व (Significance)

भगवान स्कन्द को मंगल ग्रह (Planet Mars) का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में यदि किसी की कुंडली में 'मंगल दोष' (Kuja Dosha) हो या मंगल नीच का हो, तो श्री स्कन्द की आराधना परम कल्याणकारी बताई गई है। यह नामावली मंगल की उग्रता को शांत कर उसे 'साहस' और 'नेतृत्व' की सकारात्मक ऊर्जा में बदल देती है।
इसके अतिरिक्त, यह नामावली शत्रु विजय और मुकदमों में सफलता के लिए अमोघ मानी जाती है। देवसेनापति होने के कारण, स्कन्द रक्षा के देवता हैं। 'क्रौञ्चदारणाय' नाम उनके उस पराक्रम को दर्शाता है जिससे उन्होंने अजेय क्रौञ्च पर्वत को भी भेद दिया था। आध्यात्मिक साधकों के लिए, यह नामावली आज्ञा चक्र की जागृति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है।

फलश्रुति: नामावली पाठ के लाभ (Benefits from Recitation)

स्कन्द अष्टोत्तरशतनामावली के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
  • निर्भयता और साहस: यह पाठ साधक के मन से अज्ञात भयों और हीनभावना को दूर कर आत्मविश्वास भरता है।
  • शत्रु और बाधा विनाश: जीवन में आने वाले ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और षड्यंत्रों को विफल करने के लिए यह अमोघ है।
  • प्रखर बुद्धि और शैक्षणिक सफलता: विद्यार्थियों के लिए कार्तिकेय की स्तुति एकाग्रता और मेधा शक्ति बढ़ाती है।
  • रोगों से मुक्ति: 'रोगनाशनाय' नाम का जप शारीरिक और मानसिक रोगों के शमन में सहायक है।
  • मंगल दोष शांति: मंगलवार के दिन इस पाठ से वैवाहिक बाधाएं और रक्त संबंधी विकार दूर होते हैं।

पाठ विधि एवं विशेष अवसर (Ritual Method)

भगवान स्कन्द की साधना में शुचिता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है। सर्वोत्तम फल हेतु निम्न विधि अपनाएं:

साधना के नियम

  • समय: प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (४-६ बजे) पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ है। 'स्कन्द षष्ठी' के समय पाठ महाफलदायी होता है।
  • वस्त्र: पीले या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनकर पाठ करें।
  • अर्पण: भगवान को चमेली के फूल, सुगंधित चन्दन और विशेष रूप से 'कन्द' (कंदमूल) का भोग लगाना अत्यंत शुभ है।
  • दीपक: शुद्ध घी का दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो पांच मुखी दीपक का प्रयोग करें।
  • दिशा: पूर्व (East) या उत्तर (North) की ओर मुख करके बैठें।

विशेष अवसर

  • स्कन्द षष्ठी (Skanda Sashti): यह कार्तिकेय का मुख्य पर्व है, इस दिन १०८ नामों का पाठ और अभिषेक विशेष सिद्धि प्रदान करता है।
  • मंगलवार (Tuesday): प्रत्येक मंगलवार को पाठ करना ऋण मुक्ति और मंगल शांति के लिए अनिवार्य है।
  • कृत्तिका नक्षत्र: भगवान स्कन्द का जन्म नक्षत्र कृत्तिका है, इस दिन पाठ करना अनंत पुण्य प्रदायक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्कन्द और कार्तिकेय में क्या अंतर है?

दोनों एक ही ईश्वर के नाम हैं। 'स्कन्द' का अर्थ है 'तेज पुंज' और 'कार्तिकेय' नाम उन्हें कृत्तिकाओं द्वारा पालित होने के कारण मिला। दक्षिण भारत में इन्हें मुख्य रूप से मुरुगन या सुब्रह्मण्य कहा जाता है।

2. 'गुहा' नाम का क्या आध्यात्मिक रहस्य है?

'गुहा' का अर्थ है गुफा। यह साधक के हृदय की सूक्ष्म गुफा का प्रतीक है जहाँ भगवान स्कन्द ज्ञान की ज्योति के रूप में निवास करते हैं और अज्ञान को मिटाते हैं।

3. क्या यह नामावली मंगल दोष (Kuja Dosha) को कम करती है?

जी हाँ, भगवान स्कन्द मंगल ग्रह के अधिष्ठाता हैं। प्रत्येक मंगलवार को इस नामावली का पाठ करने से वैवाहिक बाधाएं और मंगल जनित क्रोध शांत होता है।

4. 'षण्मुख' का क्या प्रतीक है?

षण्मुख का अर्थ है छह मुख। ये पांच इंद्रियों और मन के नियंत्रण को दर्शाते हैं। वे ज्ञान के छह अंगों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, शिक्षा और कल्प—के भी प्रतीक हैं।

5. पाठ के लिए कौन सा दिन सबसे शुभ माना जाता है?

मंगलवार और शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (विशेषकर स्कन्द षष्ठी) इस नामावली के पाठ के लिए सर्वोत्तम मानी गई है।

6. क्या स्त्रियाँ भगवान स्कन्द की नामावली का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, भगवान स्कन्द की भक्ति और उनकी नामावली का पाठ कोई भी श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और शुद्धि के साथ कर सकता है।

7. 'शक्तिधारिणे' नाम का क्या अर्थ है?

स्कन्द का मुख्य अस्त्र 'वेल' (भाला) है, जिसे 'शक्ति' भी कहा जाता है। 'शक्तिधारिणे' का अर्थ है वह जो ब्रह्मांड की समस्त क्रिया-शक्ति और ज्ञान-शक्ति को धारण करता है।

8. पाठ के लिए कौन सी माला सर्वोत्तम है?

भगवान शिव और स्कन्द की पूजा में रुद्राक्ष की माला या लाल चन्दन की माला का प्रयोग सबसे उत्तम माना गया है।

9. क्या इस पाठ से बच्चों की एकाग्रता बढ़ सकती है?

बिल्कुल। भगवान स्कन्द प्रज्ञा और मेधा के स्वामी हैं। छात्रों के लिए इस नामावली का पाठ स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने का श्रेष्ठ मार्ग है।

10. 'क्रौञ्चदारणाय' नाम का क्या महत्व है?

इसका अर्थ है 'क्रौञ्च पर्वत को भेदने वाला'। यह असुरों के घमण्ड को तोड़ने और असंभव लगने वाली बाधाओं को पार करने की शक्ति का प्रतीक है।