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Sri Shyamala Ashtottara Shatanamavali – श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली

Sri Shyamala Ashtottara Shatanamavali – श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली
ओं मातङ्ग्यै नमः । ओं विजयायै नमः । ओं श्यामायै नमः । ओं सचिवेश्यै नमः । ओं शुकप्रियायै नमः । ओं नीपप्रियायै नमः । ओं कदम्बेश्यै नमः । ओं मदघूर्णितलोचनायै नमः । ओं भक्तानुरक्तायै नमः । ९ ओं मन्त्रेश्यै नमः । ओं पुष्पिण्यै नमः । ओं मन्त्रिण्यै नमः । ओं शिवायै नमः । ओं कलावत्यै नमः । ओं रक्तवस्त्रायै नमः । ओं अभिरामायै नमः । ओं सुमध्यमायै नमः । ओं त्रिकोणमध्यनिलयायै नमः । १८ ओं चारुचन्द्रावतंसिन्यै नमः । ओं रहः पूज्यायै नमः । ओं रहः केलये नमः । ओं योनिरूपायै नमः । ओं महेश्वर्यै नमः । ओं भगप्रियायै नमः । ओं भगाराध्यायै नमः । ओं सुभगायै नमः । ओं भगमालिन्यै नमः । २७ ओं रतिप्रियायै नमः । ओं चतुर्बाहवे नमः । ओं सुवेण्यै नमः । ओं चारुहासिन्यै नमः । ओं मधुप्रियायै नमः । ओं श्रीजनन्यै नमः । ओं शर्वाण्यै नमः । ओं शिवात्मिकायै नमः । ओं राज्यलक्ष्मीप्रदायै नमः । ३६ ओं नित्यायै नमः । ओं नीपोद्याननिवासिन्यै नमः । ओं वीणावत्यै नमः । ओं कम्बुकण्ठ्यै नमः । ओं कामेश्यै नमः । ओं यज्ञरूपिण्यै नमः । ओं सङ्गीतरसिकायै नमः । ओं नादप्रियायै नमः । ओं नीलोत्पलद्युतये नमः । ४५ ओं मतङ्गतनयायै नमः । ओं लक्ष्म्यै नमः । ओं व्यापिन्यै नमः । ओं सर्वरञ्जिन्यै नमः । ओं दिव्यचन्दनदिग्धाङ्ग्यै नमः । ओं यावकार्द्रपदाम्बुजायै नमः । ओं कस्तूरीतिलकायै नमः । ओं सुभ्रुवे नमः । ओं बिम्बोष्ठ्यै नमः । ५४ ओं मदालसायै नमः । ओं विद्याराज्ञ्यै नमः । ओं भगवत्यै नमः । ओं सुधापानानुमोदिन्यै नमः । ओं शङ्खताटङ्किन्यै नमः । ओं गुह्यायै नमः । ओं योषित्पुरुषमोहिन्यै नमः । ओं किङ्करीभूतगीर्वाण्यै नमः । ओं कौलिन्यै नमः । ६३ ओं अक्षररूपिण्यै नमः । ओं विद्युत्कपोलफलिकायै नमः । ओं मुक्तारत्नविभूषितायै नमः । ओं सुनासायै नमः । ओं तनुमध्यायै नमः । ओं श्रीविद्यायै नमः । ओं भुवनेश्वर्यै नमः । ओं पृथुस्तन्यै नमः । ओं ब्रह्मविद्यायै नमः । ७२ ओं सुधासागरवासिन्यै नमः । ओं गुह्यविद्यायै नमः । ओं अनवद्याङ्ग्यै नमः । ओं यन्त्रिण्यै नमः । ओं रतिलोलुपायै नमः । ओं त्रैलोक्यसुन्दर्यै नमः । ओं रम्यायै नमः । ओं स्रग्विण्यै नमः । ओं कीरधारिण्यै नमः । ८१ ओं आत्मैक्यसुमुखीभूतजगदाह्लादकारिण्यै नमः । ओं कल्पातीतायै नमः । ओं कुण्डलिन्यै नमः । ओं कलाधारायै नमः । ओं मनस्विन्यै नमः । ओं अचिन्त्यानन्तविभवायै नमः । ओं रत्नसिंहासनेश्वर्यै नमः । ओं पद्मासनायै नमः । ओं कामकलायै नमः । ९० ओं स्वयम्भूकुसुमप्रियायै नमः । ओं कल्याण्यै नमः । ओं नित्यपुष्पायै नमः । ओं शाम्भवीवरदायिन्यै नमः । ओं सर्वविद्याप्रदायै नमः । ओं वाच्यायै नमः । ओं गुह्योपनिषदुत्तमायै नमः । ओं नृपवश्यकर्यै नमः । ओं भोक्त्र्यै नमः । ९९ ओं जगत्प्रत्यक्षसाक्षिण्यै नमः । ओं ब्रह्मविष्ण्वीशजनन्यै नमः । ओं सर्वसौभाग्यदायिन्यै नमः । ओं गुह्यातिगुह्यगोप्त्र्यै नमः । ओं नित्यक्लिन्नायै नमः । ओं अमृतोद्भवायै नमः । ओं कैवल्यदात्र्यै नमः । ओं वशिन्यै नमः । ओं सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः । १०८ ॥ इति श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥

श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली — विस्तृत परिचय

श्री श्यामलाष्टोत्तरशतनामावली (Sri Shyamala Ashtottara Shatanamavali) माँ श्यामला देवी के 108 दिव्य नामों का पवित्र संकलन है। माँ श्यामला को राजश्यामला, मातङ्गी और मन्त्रिणी देवी के नामों से भी जाना जाता है। ये दश महाविद्याओं में नवम शक्ति हैं और श्रीविद्या उपासना पद्धति में ललिता त्रिपुरसुन्दरी की प्रधान सचिव (मन्त्रिणी) के रूप में पूजित हैं।

'श्यामला' शब्द का अर्थ है — श्याम (गहरे हरे-नीले) वर्ण वाली। नामावली का प्रथम नाम ही 'मातङ्ग्यै' है जो स्पष्ट करता है कि श्यामला और मातङ्गी एक ही देवी हैं। तीसरा नाम 'श्यामायै' उनके श्याम वर्ण को प्रकट करता है। चौथा नाम 'सचिवेश्यै' — सचिवों की ईश्वरी — श्रीविद्या परम्परा में उनके मन्त्रिणी पद को दर्शाता है।

श्रीविद्या उपासना में तीन प्रमुख देवियाँ हैं — ललिता त्रिपुरसुन्दरी (सर्वोच्च शक्ति), वाराही (दण्डनाथा/सेनापति) और श्यामला (मन्त्रिणी/सचिव)। जहाँ वाराही शत्रु संहार और रक्षा करती हैं, वहीं श्यामला वाणी, संगीत, मन्त्रणा और राजनीति की शक्ति प्रदान करती हैं। ललितासहस्रनाम में उन्हें 'मन्त्रिणीन्यस्तराज्यधूः' कहा गया है — अर्थात् जिन पर ललिता ने राज्य का समस्त भार सौंपा है।

इस नामावली की विशिष्टता यह है कि इसमें श्यामला के सौम्य और उग्र दोनों स्वरूपों का वर्णन है। 'अभिरामायै' (अत्यंत सुन्दर), 'चारुहासिन्यै' (मनोहर मुस्कान वाली), 'सुमध्यमायै' (सुन्दर कटि वाली) जैसे नाम उनके सौम्य रूप को प्रकट करते हैं, जबकि 'महेश्वर्यै' (महान ईश्वरी), 'नृपवश्यकर्यै' (राजाओं को वश में करने वाली) उनकी सत्ता को दर्शाते हैं।

108 नामों का विशिष्ट महत्व

श्यामला के 108 नामों का विश्लेषण करने पर देवी के बहुआयामी स्वरूप का बोध होता है:

संगीत और कला सम्बन्धी नाम: 'वीणावत्यै' (वीणा धारण करने वाली), 'सङ्गीतरसिकायै' (संगीत में रसिक), 'नादप्रियायै' (नाद को प्रिय मानने वाली), 'कलावत्यै' (कलाओं से सम्पन्न) — ये नाम श्यामला के संगीत और कला स्वरूप को प्रकट करते हैं। इसीलिए संगीतकार, गायक और कलाकार श्यामला की विशेष आराधना करते हैं।

श्रीविद्या और तंत्र सम्बन्धी नाम: 'मन्त्रिण्यै' (मन्त्रिणी देवी), 'मन्त्रेश्यै' (मन्त्रों की ईश्वरी), 'श्रीविद्यायै' (श्रीविद्या स्वरूपा), 'ब्रह्मविद्यायै' (ब्रह्म विद्या), 'गुह्यविद्यायै' (गोपनीय विद्या), 'त्रिकोणमध्यनिलयायै' (त्रिकोण के मध्य में निवास करने वाली — यंत्र में स्थान), 'कुण्डलिन्यै' (कुण्डलिनी शक्ति) — ये नाम श्यामला के तांत्रिक और श्रीविद्या स्वरूप को दर्शाते हैं।

ऐश्वर्य और राज्य सम्बन्धी नाम: 'राज्यलक्ष्मीप्रदायै' (राज्य की लक्ष्मी प्रदान करने वाली), 'नृपवश्यकर्यै' (राजाओं को वश में करने वाली), 'सर्वसौभाग्यदायिन्यै' (सर्व सौभाग्य देने वाली), 'सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै' (सर्व सम्पत्ति प्रदान करने वाली) — ये नाम दर्शाते हैं कि श्यामला उपासना राजनीति, प्रशासन और नेतृत्व में सफलता प्रदान करती है।

मोक्ष सम्बन्धी नाम: अंतिम नामों में 'कैवल्यदात्र्यै' (कैवल्य/मोक्ष देने वाली) विशेष है — यह दर्शाता है कि श्यामला केवल भोग ही नहीं, अपितु परम मुक्ति भी प्रदान करती हैं। 'ब्रह्मविष्ण्वीशजनन्यै' (ब्रह्मा, विष्णु और महेश की जननी) नाम उनकी परब्रह्म स्वरूपता को सिद्ध करता है।

नामावली पाठ के लाभ

  • वाक् सिद्धि: श्यामला वाणी की देवी हैं। 'किङ्करीभूतगीर्वाण्यै' नाम का अर्थ है — जिनकी सरस्वती भी दासी हैं। नामावली पाठ से वाणी में अपूर्व प्रभाव और मधुरता आती है।
  • संगीत और कला: 'वीणावत्यै', 'सङ्गीतरसिकायै', 'नादप्रियायै' — ये नाम संगीत, नृत्य और ललित कलाओं में प्रवीणता प्रदान करते हैं।
  • राज्य लक्ष्मी: 'राज्यलक्ष्मीप्रदायै' और 'नृपवश्यकर्यै' — ये नाम राजनीति, प्रशासन और नेतृत्व में सफलता प्रदान करते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं के लिए विशेष।
  • सर्व विद्या: 'सर्वविद्याप्रदायै' (सब विद्याएं प्रदान करने वाली) — विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए अत्यंत लाभकारी।
  • सर्व सौभाग्य: 'सर्वसौभाग्यदायिन्यै' — सभी प्रकार के सौभाग्य, समृद्धि और मांगलिक फल प्रदान करने वाली। विवाह और गृहस्थ जीवन में सुख।
  • वशीकरण: 'योषित्पुरुषमोहिन्यै' और 'सर्वरञ्जिन्यै' — व्यक्तित्व में आकर्षण और प्रभाव बढ़ाने वाले नाम।
  • सर्व सम्पत्ति: 'सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै' — अंतिम नाम ही सर्वोत्कृष्ट वरदान है — सब सम्पत्तियाँ प्रदान करने वाली।
  • कैवल्य (मोक्ष): 'कैवल्यदात्र्यै' — भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली, जो श्यामला की सर्वोच्च कृपा है।

पाठ विधि और पुष्पार्चना विधान

  • पुष्पार्चना: माँ श्यामला की प्रतिमा या चित्र के समक्ष 108 पुष्प तैयार रखें। प्रत्येक नाम बोलते हुए एक-एक पुष्प देवी के चरणों में अर्पित करें।
  • उत्तम पुष्प: नील कमल सर्वोत्तम हैं ('नीलोत्पलद्युतये' — नीलकमल की कान्ति वाली)। कदम्ब पुष्प भी प्रिय हैं ('कदम्बेश्यै' — कदम्ब की ईश्वरी)। लाल गुलाब भी उत्तम है ('रक्तवस्त्रायै')।
  • समय: प्रातःकाल स्नान के बाद या सायंकाल संध्या पूजा के समय। शुक्रवार विशेष फलदायी है (श्यामला शुक्र ग्रह से सम्बन्धित हैं)।
  • आसन और दिशा: हरे या लाल रंग के आसन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें।
  • विशेष अवसर: वसन्त पंचमी (सरस्वती पूजा), नवरात्रि का नवमा दिन, गुप्त नवरात्रि और पूर्णिमा पर पाठ अत्यंत शुभ है।
  • माला जप: पुष्प न हों तो स्फटिक या हरे रंग की माला से जप करें।
  • अनुष्ठान: विशेष कामना पूर्ति हेतु 21 या 41 दिन प्रतिदिन नामावली पाठ करें। संगीत सिद्धि हेतु वीणा या तम्बूरा के समक्ष पाठ विशेष फलदायी है।
  • दीक्षा: नामावली पाठ के लिए विशेष दीक्षा आवश्यक नहीं। भक्ति भाव से कोई भी पाठ कर सकता है। श्रीविद्या दीक्षित साधकों के लिए सम्पुटित पाठ और भी अधिक फलदायी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. श्यामला देवी कौन हैं?

श्यामला देवी मातङ्गी का श्रीविद्या स्वरूप हैं। दश महाविद्या परम्परा में इन्हें 'मातङ्गी' और श्रीविद्या परम्परा में 'श्यामला', 'राजश्यामला' या 'मन्त्रिणी' कहा जाता है। ये ललिता त्रिपुरसुन्दरी की प्रधान सचिव हैं और वाणी, संगीत, कला और मन्त्रणा की देवी हैं। ललितोपाख्यान में उन्हें श्यामल वर्ण, वीणा धारण करने वाली और शुक (तोता) प्रिय देवी के रूप में वर्णित किया गया है।

2. श्यामला और मातङ्गी में क्या अंतर है?

दोनों एक ही देवी के भिन्न नाम और उपासना पद्धतियाँ हैं। दश महाविद्या क्रम में इन्हें 'मातङ्गी' कहते हैं — यहाँ ये उच्छिष्ट मार्ग की तांत्रिक देवी हैं। श्रीविद्या क्रम में इन्हें 'श्यामला' या 'राजश्यामला' कहते हैं — यहाँ ये ललिता की मन्त्रिणी हैं। नामावली का प्रथम नाम 'मातङ्ग्यै' इसी एकता को सिद्ध करता है।

3. 'मन्त्रिणी' का क्या अर्थ है?

श्रीविद्या परम्परा में ललिता त्रिपुरसुन्दरी के दरबार में दो प्रमुख पदाधिकारी हैं — दण्डनाथा वाराही (सेनापति) और मन्त्रिणी श्यामला (प्रधान सचिव)। 'मन्त्रिणी' का अर्थ है — जो मन्त्रणा (परामर्श) देती हैं। श्यामला राज्य-व्यवस्था, नीति और बुद्धि की शक्ति प्रदान करती हैं।

4. क्या बिना दीक्षा के श्यामला नामावली का पाठ कर सकते हैं?

हाँ, नामावली पाठ और पुष्पार्चना के लिए विशेष दीक्षा आवश्यक नहीं है। नामों से अर्चना भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है। केवल श्यामला बीज मन्त्र जप और तांत्रिक साधना हेतु श्रीविद्या या महाविद्या गुरु दीक्षा आवश्यक है।

5. नामावली में 'वीणावत्यै' नाम क्यों विशेष है?

श्यामला देवी वीणा धारण करती हैं — यह उनका सबसे प्रसिद्ध आयुध/वाद्य है। 'वीणावत्यै' का अर्थ है — वीणा रखने वाली। वीणा नाद-ब्रह्म (ध्वनि के माध्यम से परब्रह्म) का प्रतीक है। यही कारण है कि संगीतकार और वीणा वादक श्यामला को अपनी आराध्य देवी मानते हैं।

6. 'किङ्करीभूतगीर्वाण्यै' का क्या अर्थ है?

यह अत्यंत प्रभावशाली नाम है। 'गीर्वाणी' = सरस्वती, 'किङ्करीभूत' = दासी बन गई हैं। अर्थात् जिनकी स्वयं सरस्वती भी दासी बनकर सेवा करती हैं। यह श्यामला की वाक् शक्ति की सर्वोच्चता को दर्शाता है — वे सरस्वती से भी ऊपर वाणी की देवी हैं।

7. पुष्पार्चना में कौन से पुष्प उत्तम हैं?

नामावली में ही संकेत मिलते हैं: नीलकमल ('नीलोत्पलद्युतये' — नील कमल की आभा वाली), कदम्ब ('कदम्बेश्यै' — कदम्ब की ईश्वरी), और नीप ('नीपप्रियायै' — नीप वृक्ष के पुष्प प्रिय)। लाल गुलाब और हरे पुष्प भी उपयुक्त हैं।

8. 'सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै' — अंतिम नाम का क्या महत्व है?

नामावली का अंतिम (108वाँ) नाम 'सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै' अत्यंत महत्वपूर्ण है — इसका अर्थ है सर्व सम्पत्तियाँ प्रदान करने वाली। अंतिम नाम में सम्पूर्ण नामावली का सार समाहित है — देवी भक्त को धन, विद्या, कला, राज्य, सौभाग्य और मोक्ष सहित सभी सम्पत्तियाँ प्रदान करती हैं।

9. श्यामला नामावली का पाठ कब करना सबसे उत्तम है?

प्रातःकाल स्नान-पूजा के समय या सायंकाल संध्या के बाद। शुक्रवार विशेष फलदायी है। वसन्त पंचमी (विद्या की देवी का उत्सव), नवरात्रि का नवमा दिन, गुप्त नवरात्रि, अमावस्या और पूर्णिमा पर पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

10. क्या यह नामावली श्रीविद्या दीक्षितों के लिए ही है?

नहीं, यह नामावली सभी भक्तों के लिए है। श्रीविद्या दीक्षा के बिना भी भक्ति भाव से पुष्पार्चना और नाम पाठ किया जा सकता है। हाँ, श्रीविद्या दीक्षित साधकों के लिए इसका विशेष महत्व है क्योंकि श्यामला ललिता की मन्त्रिणी हैं और श्रीचक्र पूजा में उनका अर्चन अनिवार्य है।