Sri Shyamala Ashtottara Shatanama Stotram – श्री श्यामला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

श्री श्यामला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् — परिचय (Introduction)
श्री श्यामला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् (Sri Shyamala Ashtottara Shatanama Stotram) दश महाविद्याओं में नवम स्थान रखने वाली माँ मातंगी के 'श्यामला' (The Dark Complexioned One) स्वरूप को समर्पित है। यह स्तोत्र 'रुद्रयामल तंत्र' से उद्धृत माना जाता है।
संगीत और कला की देवी: माँ श्यामला के हाथ में 'माणिक्य वीणा' (Gem-studded Veena) है और वे सदा 'मद' (Divine Intoxication) में रहती हैं। वे संगीत, नृत्य, चित्रकला और वाणी (Oratory) की अधिष्ठात्री हैं। कालिदास जैसे महाकवि इन्हीं की कृपा से 'आशु-कवि' (Instant Poet) बने थे।
मंत्रीणी शक्तयः: श्री विद्या साधना में श्यामला देवी ललिता त्रिपुर सुन्दरी की 'प्रधान मंत्री' हैं। इसलिए इनकी साधना से व्यक्ति में 'नेतृत्व' (Leadership) और 'कूटनीति' (Diplomacy) के गुण स्वतः आ जाते हैं।
पाठ के लाभ — फलश्रुति (Benefits)
इस स्तोत्र के नियमित पाठ से साधक को निम्नलिखित सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं:
- ✦वाक-सिद्धि (Power of Speech): जो व्यक्ति वाणी दोष से ग्रस्त हो या अच्छा वक्ता बनना चाहता हो, उसे यह पाठ अवश्य करना चाहिए। 'वशीकरण' शक्ति वाणी में आ जाती है।
- ✦कलावंत (Artistic Mastery): संगीत, गायन, वादन या किसी भी ललित कला (Fine Arts) में पारंगत होने के लिए यह सर्वोत्तम स्तोत्र है।
- ✦राज-सम्मान (Royal Honor): 'मंत्रीणी' होने के कारण माँ श्यामला साधक को समाज और सरकार में उच्च पद और सम्मान दिलाती हैं।
- ✦आकर्षण (Attraction): साधक के व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण उत्पन्न होता है कि शत्रु भी मित्र बन जाते हैं (Sarva-Jana-Vashya)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)