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Sri Mahishasura Mardini Ashtottara Shatanamavali – श्री महिषासुरमर्दिनी अष्टोत्तरशतनामावली | 108 Names

Sri Mahishasura Mardini Ashtottara Shatanamavali – श्री महिषासुरमर्दिनी अष्टोत्तरशतनामावली | 108 Names
॥ श्री महिषासुरमर्दिनी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ओं महत्यै नमः । ओं चेतनायै नमः । ओं मायायै नमः । ओं महागौर्यै नमः । ओं महेश्वर्यै नमः । ओं महोदरायै नमः । ओं महाबुद्ध्यै नमः । ओं महाकाल्यै नमः । ओं महाबलायै नमः । ९ ओं महासुधायै नमः । ओं महानिद्रायै नमः । ओं महामुद्रायै नमः । ओं महादयायै नमः । ओं महालक्ष्मै नमः । ओं महाभोगायै नमः । ओं महामोहायै नमः । ओं महाजयायै नमः । ओं महातुष्ट्यै नमः । १८ ओं महालज्जायै नमः । ओं महाधृत्यै नमः । ओं महाघोरायै नमः । ओं महादम्ष्ट्रायै नमः । ओं महाकान्त्यै नमः । ओं महास्मृत्यै नमः । ओं महापद्मायै नमः । ओं महामेधायै नमः । ओं महाबोधायै नमः । २७ ओं महातपसे नमः । ओं महासंस्थानायै नमः । ओं महारवायै नमः । ओं महारोषायै नमः । ओं महायुधायै नमः । ओं महाबन्धनसंहार्यै नमः । ओं महाभयविनाशिन्यै नमः । ओं महानेत्रायै नमः । ओं महावक्त्रायै नमः । ३६ ओं महावक्षसे नमः । ओं महाभुजायै नमः । ओं महामहीरुहायै नमः । ओं पूर्णायै नमः । ओं महाछायायै नमः । ओं महानघायै नमः । ओं महाशान्त्यै नमः । ओं महाश्वासायै नमः । ओं महापर्वतनन्दिन्यै नमः । ४५ ओं महाब्रह्ममय्यै नमः । ओं मात्रे नमः । ओं महासारायै नमः । ओं महासुरघ्न्यै नमः । ओं महत्यै नमः । ओं पार्वत्यै नमः । ओं चर्चितायै नमः । ओं शिवायै नमः । ओं महाक्षान्त्यै नमः । ५४ ओं महाभ्रान्त्यै नमः । ओं महामन्त्रायै नमः । ओं महामय्यै नमः । ओं महाकुलायै नमः । ओं महालोलायै नमः । ओं महामायायै नमः । ओं महाफलायै नमः । ओं महानीलायै नमः । ओं महाशीलायै नमः । ६३ ओं महाबलायै नमः । ओं महाकलायै नमः । ओं महाचित्रायै नमः । ओं महासेतवे नमः । ओं महाहेतवे नमः । ओं यशस्विन्यै नमः । ओं महाविद्यायै नमः । ओं महासाध्यायै नमः । ओं महासत्यायै नमः । ७२ ओं महागत्यै नमः । ओं महासुखिन्यै नमः । ओं महादुःस्वप्ननाशिन्यै नमः । ओं महामोक्षप्रदायै नमः । ओं महापक्षायै नमः । ओं महायशस्विन्यै नमः । ओं महाभद्रायै नमः । ओं महावाण्यै नमः । ओं महारोगविनाशिन्यै नमः । ८१ ओं महाधारायै नमः । ओं महाकारायै नमः । ओं महामार्यै नमः । ओं खेचर्यै नमः । ओं महाक्षेमङ्कर्यै नमः । ओं महाक्षमायै नमः । ओं महैश्वर्यप्रदायिन्यै नमः । ओं महाविषघ्न्यै नमः । ओं विशदायै नमः । ९० ओं महादुर्गविनाशिन्यै नमः । ओं महावर्षायै नमः । ओं महातत्त्वायै नमः । ओं महाकैलासवासिन्यै नमः । ओं महासुभद्रायै नमः । ओं सुभगायै नमः । ओं महाविद्यायै नमः । ओं महासत्यै नमः । ओं महाप्रत्यङ्गिरायै नमः । ९९ ओं महानित्यायै नमः । ओं महाप्रलयकारिण्यै नमः । ओं महाशक्त्यै नमः । ओं महामत्यै नमः । ओं महामङ्गलकारिण्यै नमः । ओं महादेव्यै नमः । ओं महालक्ष्म्यै नमः । ओं महामात्रे नमः । ओं महापुत्रायै नमः । १०८ ॥ इति श्री महिषासुरमर्दिनी अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णम् ॥

महिषासुरमर्दिनी स्वरूप का महत्व

महिषासुरमर्दिनी देवी दुर्गा का सबसे प्रसिद्ध और पूज्य स्वरूप है। जब महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं को पराजित कर दिया था और स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था, तब सभी देवताओं के तेज से माँ दुर्गा की उत्पत्ति हुई।
यह नामावली उसी विजय का प्रतीक है। इसमें देवी के उन गुणों का वर्णन है जो 'महा' (महान) हैं। इसमें अधिकांश नाम 'महा' उपसर्ग (Prefix) के साथ हैं, जो उनकी विराटता को दर्शाते हैं।

प्रमुख नामों का अर्थ (Meaning of Key Names)

1. महाबला (Mahabala)

वह जिसके पास असीम बल है। महिषासुर जैसा शक्तिशाली असुर भी जिसके सामने टिक न सका।

2. महाभयविनाशिन्यै (Mahabhaya Vinashini)

वह जो सबसे बड़े भय (मृत्यु, असफलता, शत्रु) का नाश करने वाली हैं।

3. महाप्रत्यङ्गिरा (Mahapratyangira)

तंत्र शास्त्र में प्रत्यंगिरा देवी शत्रुओं के कृत्या (Black Magic) को उल्टा करने वाली मानी जाती हैं। इस नामावली में उन्हें महा-प्रत्यंगिरा कहा गया है।

4. महारोगविनाशिन्यै (Maharoga Vinashini)

वह जो असाध्य रोगों का नाश करती हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

शत्रु विजय

जो व्यक्ति शत्रुओं से घिरा हो, उसे इस नामावली से देवी को कुमकुम या लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए। विजय निश्चित होती है।

भय मुक्ति

यह मन के अज्ञात भय और डिप्रेशन को दूर कर आत्मविश्वास (Self-confidence) भर देती है।

सर्व कार्य सिद्धि

देवी के ये 108 नाम सिद्ध मंत्र हैं। श्रद्धा से इनका जप करने पर बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं।

ग्रह शांति

विशेषकर मंगल और राहू की दशा में यह पाठ अत्यंत लाभकारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. महिषासुरमर्दिनी नामावली का पाठ क्यों किया जाता है?

इसका पाठ मुख्य रूप से 'विजय' (Victory) प्राप्ति के लिए किया जाता है। चाहे वह बाहरी शत्रु हों, कानूनी विवाद हों, या आंतरिक शत्रु (काम, क्रोध, लोभ), महिषासुरमर्दिनी उन सबका नाश करती हैं।

2. क्या इसे प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है?

हाँ, इसे नित्य पूजा में शामिल किया जा सकता है। विशेष रूप से मंगलवार, शुक्रवार, और नवरात्र के दिनों में इसका पाठ अत्यधिक शुभ फल देता है।

3. इस नामावली में 'महा' शब्द का बार-बार प्रयोग क्यों है?

इसमें 'महाबल', 'महातेजा', 'महाबुद्धि' जैसे नामों की प्रधानता है। यह दर्शाता है कि देवी केवल एक शक्ति नहीं, बल्कि 'महाशक्ति' (Supreme Power) हैं जो सभी सीमाओं से परे हैं।

4. क्या इसके लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता है?

सामान्य पवित्रता (स्नान और स्वच्छ वस्त्र) पर्याप्त है। इसे लाल फूल (गुड़हल/Hibiscus) अर्पित करते हुए पढ़ना (अर्चन्स) विशेष लाभकारी होता है।

5. महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र और नामावली में क्या अंतर है?

स्तोत्र (Stotram) श्लोकबद्ध स्तुति है (जैसे 'अयि गिरिनन्दिनि'), जबकि नामावली (Namavali) में देवी के 108 अलग-अलग नामों का उच्चारण 'नमः' के साथ किया जाता है, जो अर्चना (Archana) के लिए उपयोगी है।

6. पाठ का सर्वोत्तम समय क्या है?

संध्या काल (Pradosh Kaal) या राहु काल (शत्रु नाश के लिए) में इसका पाठ बहुत प्रभावी माना जाता है।