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Sri Durga Ashtottara Shatanama Stotram 2 – श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् २

Sri Durga Ashtottara Shatanama Stotram 2 – श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् २
॥ श्री दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् ॥ दुर्गा शिवा महालक्ष्मीर्महागौरी च चण्डिका । सर्वज्ञा सर्वलोकेशी सर्वकर्मफलप्रदा ॥ १ ॥ सर्वतीर्थमयी पुण्या देवयोनिरयोनिजा । भूमिजा निर्गुणाऽऽधारशक्तिश्चानीश्वरी तथा ॥ २ ॥ निर्गुणा निरहङ्कारा सर्वगर्वविमर्दिनी । सर्वलोकप्रिया वाणी सर्वविद्याधिदेवता ॥ ३ ॥ पार्वती देवमाता च वनीशा विन्ध्यवासिनी । तेजोवती महामाता कोटिसूर्यसमप्रभा ॥ ४ ॥ देवता वह्निरूपा च सदौजा वर्णरूपिणी । [सरोजा] गुणाश्रया गुणमयी गुणत्रयविवर्जिता ॥ ५ ॥ कर्मज्ञानप्रदा कान्ता सर्वसंहारकारिणी । धर्मज्ञाना धर्मनिष्ठा सर्वकर्मविवर्जिता ॥ ६ ॥ कामाक्षी कामसंहर्त्री कामक्रोधविवर्जिता । शाङ्करी शाम्भवी शान्ता चन्द्रसूर्याग्निलोचना ॥ ७ ॥ सुजया जयभूमिष्ठा जाह्नवी जनपूजिता । शास्त्रा शास्त्रमया नित्या शुभा चन्द्रार्धमस्तका ॥ ८ ॥ भारती भ्रामरी कल्पा कराली कृष्णपिङ्गला । ब्राह्मी नारायणी रौद्री चन्द्रामृतपरिश्रुता ॥ ९ ॥ ज्येष्ठेन्दिरा महामाया जगत्सृष्ट्यादिकारिणी । ब्रह्माण्डकोटिसंस्थाना कामिनी कमलालया ॥ १० ॥ कात्यायनी कलातीता कालसंहारकारिणी । योगनिष्ठा योगिगम्या योगिध्येया तपस्विनी ॥ ११ ॥ ज्ञानरूपा निराकारा भक्ताभीष्टफलप्रदा । भूतात्मिका भूतमाता भूतेशा भूतधारिणी ॥ १२ ॥ स्वधानारीमध्यगता षडाधारादिवर्तिनी । मोहदांशुभवा शुभ्रा सूक्ष्मा मात्रा निरालसा ॥ १३ ॥ निम्नगा नीलसङ्काशा नित्यानन्दा हरा परा । सर्वज्ञानप्रदाऽनन्ता सत्या दुर्लभरूपिणी । सरस्वती सर्वगता सर्वाभीष्टप्रदायिनी ॥ १४ ॥ ॥ इति श्रीदुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

स्तोत्र का महत्त्व (Significance)

श्री दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र में माँ दुर्गा के 108 दिव्य नामों का संगृहीकरण है। 'अष्टोत्तरशत' का अर्थ है '108'। हिंदू धर्म में 108 की संख्या अत्यंत पवित्र मानी जाती है, जो माला के मनकों और ब्रह्मांडीय अखंडता का प्रतीक है।

इस स्तोत्र में माँ को 'सर्वज्ञा' (सब कुछ जानने वाली), 'सर्वलोकेशी' (समस्त लोकों की ईश्वरी), और 'सर्वकर्मफलप्रदा' (कर्मों का फल देने वाली) कहकर पुकारा गया है। यह स्तोत्र साधक को यह स्मरण कराता है कि जीवन की हर परिस्थिति—सुख हो या दुःख—माँ की इच्छा और न्याय के अधीन है।

विशेष रूप से इस स्तोत्र में माँ के सौम्य और रौद्र, दोनों रूपों का संतुलन है। जहाँ उन्हें 'शान्ता', 'महागौरी' और 'कमलालया' कहा गया है, वहीं उन्हें 'कराली', 'महिषार्दिनि' और 'कालसंहारकारिणी' भी कहा गया है। यह द्वैत ही शक्ति का पूर्ण स्वरूप है।

प्रमुख नामों की व्याख्या (Decoding the Names)

  • शिवा (Shivaa): वह जो परम कल्याण स्वरूप हैं। भगवान शिव की शक्ति।

  • नारायणी (Narayani): भगवान विष्णु की शक्ति, जो जगत का पालन करती है।

  • ब्रह्माण्डकोटिसंस्थाना: वह जिनके भीतर करोड़ों ब्रह्मांड स्थित हैं। यह माँ के विराट स्वरूप का दर्शन है।

  • षडाधारादिवर्तिनी: वह जो शरीर के छहों चक्रों (मूलाधार से आज्ञा चक्र तक) में कुंडलिनी शक्ति के रूप में विद्यमान हैं।

  • चन्द्रसूर्याग्निलोचना: जिनके तीन नेत्र सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि हैं। यह ज्ञान, प्रकाश और तेज का प्रतीक है।

पाठ के लाभ (Benefits)

1. सर्व भय निवारण

'सर्वगर्वविमर्दिनी' - माँ अहंकार और भय का नाश करती हैं। इस स्तोत्र का नित्य पाठ साधक को निडर बनाता है।

2. विद्या और बुद्धि

'सर्वविद्याधिदेवता' और 'भारती' जैसे नाम माँ सरस्वती का ही रूप हैं। छात्रों के लिए इसका पाठ स्मरण शक्ति और बुद्धि को तीव्र करने वाला है।

3. धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष

यह स्तोत्र 'सर्वाभीष्टप्रदायिनी' है, यानी सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला। यह धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और अंत में मोक्ष की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का क्या महत्त्व है?

यह स्तोत्र माँ दुर्गा के 108 गुणों और शक्तियों का स्मरण कराता है। इसके पाठ से साधक को मानसिक शांति, शक्ति और संकटों से सुरक्षा मिलती है।

2. क्या इसे प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है?

हाँ, इसे नित्य पूजा में शामिल किया जा सकता है। विशेष रूप से नवरात्रि में या शुक्रवार/मंगलवार को इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

3. 'महिषार्दिनि' नाम का क्या अर्थ है?

'महिषार्दिनि' का अर्थ है महिषासुर का वध करने वाली। यह माँ दुर्गा की बुराई पर अच्छाई की जीत की शक्ति का प्रतीक है।

4. क्या इसके लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता है?

सामान्यतः शुद्धि (स्नान, स्वच्छ वस्त्र) के साथ भक्ति भाव से पाठ करना पर्याप्त है। किसी विशेष संकल्प के लिए लाल आसन और लाल पुष्प का प्रयोग उत्तम है।

5. यह 'स्तोत्र 2' क्यों कहलाता है?

दुर्गा जी के 108 नामों के कई संस्करण विभिन्न पुराणों और तंत्रों में उपलब्ध हैं। यह उनमें से एक विशिष्ट संस्करण है जिसमें नामों का एक अलग क्रम और चयन है।

6. शत्रु बाधा में यह कैसे लाभकारी है?

इसमें 'सर्वसंहारकारिणी' और 'शत्रुविमर्दिनी' जैसे नाम हैं जो शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करने वाली शक्ति का आह्वान करते हैं।

7. क्या स्त्रियाँ मासिक धर्म में इसका पाठ कर सकती हैं?

मानसिक रूप से (बिना उच्चारण किए) स्मरण किया जा सकता है, लेकिन सामान्यतः पूजा-पाठ की शुद्धि बनाए रखने की परंपरा है।

8. 'विन्ध्यवासिनी' नाम का क्या महत्व है?

यह नाम उस देवी स्वरूप को दर्शाता है जो विन्ध्याचल पर्वत पर निवास करती हैं। यह शक्ति पीठों में से एक अत्यंत जाग्रत स्थान है।

9. पाठ करने का सर्वोत्तम समय क्या है?

प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) या सायं सन्ध्या काल में पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है। नवरात्रि में रात्रि पाठ भी विशेष फलदायी होता है।

10. क्या इसका पाठ बिना गुरु दीक्षा के कर सकते हैं?

हाँ, यह एक स्तोत्र है, मंत्र नहीं। इसे भक्ति भाव से कोई भी पढ़ सकता है।

11. धन प्राप्ति के लिए इसमें कौन सा नाम है?

'महालक्ष्मी' और 'कमलालया' जैसे नाम धन और समृद्धि की देवी के रूप में माँ का स्मरण कराते हैं।

12. क्या यह रोग निवारण में सहायक है?

हाँ, 'सर्वतीर्थमयी' और 'हर' (दुखों को हरने वाली) जैसे नाम शारीरिक और मानसिक संतापों को दूर करने में सहायक माने जाते हैं।