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Sri Mahalakshmi Aksharamalika Namavali — श्री महालक्ष्मी अक्षरामालिका नामावली

Sri Mahalakshmi Aksharamalika Namavali — श्री महालक्ष्मी अक्षरामालिका नामावली
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली ॥ ॐ अकारलक्ष्म्यै नमः । ॐ अच्युतलक्ष्म्यै नमः । ॐ अन्नलक्ष्म्यै नमः । ॐ अनन्तलक्ष्म्यै नमः । ॐ अनुग्रहलक्ष्म्यै नमः । ॐ अमरलक्ष्म्यै नमः । ॐ अमृतलक्ष्म्यै नमः । ॐ अमोघलक्ष्म्यै नमः । ॐ अष्टलक्ष्म्यै नमः । ९ ॐ अक्षरलक्ष्म्यै नमः । ॐ आत्मलक्ष्म्यै नमः । ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः । ॐ आनन्दलक्ष्म्यै नमः । ॐ आर्द्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ आरोग्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ इच्छालक्ष्म्यै नमः । ॐ इभलक्ष्म्यै नमः । ॐ इन्दुलक्ष्म्यै नमः । १८ ॐ इष्टलक्ष्म्यै नमः । ॐ ईडितलक्ष्म्यै नमः । ॐ उकारलक्ष्म्यै नमः । ॐ उत्तमलक्ष्म्यै नमः । ॐ उद्यानलक्ष्म्यै नमः । ॐ उद्योगलक्ष्म्यै नमः । ॐ उमालक्ष्म्यै नमः । ॐ ऊर्जालक्ष्म्यै नमः । ॐ ऋद्धिलक्ष्म्यै नमः । २७ ॐ एकान्तलक्ष्म्यै नमः । ॐ ऐश्वर्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ ओङ्कारलक्ष्म्यै नमः । ॐ औदार्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ औषधिलक्ष्म्यै नमः । ॐ कनकलक्ष्म्यै नमः । ॐ कलालक्ष्म्यै नमः । ॐ कान्तालक्ष्म्यै नमः । ॐ कान्तिलक्ष्म्यै नमः । ३६ ॐ कीर्तिलक्ष्म्यै नमः । ॐ कुटुम्बलक्ष्म्यै नमः । ॐ कोशलक्ष्म्यै नमः । ॐ कौतुकलक्ष्म्यै नमः । ॐ ख्यातिलक्ष्म्यै नमः । ॐ गजलक्ष्म्यै नमः । ॐ गानलक्ष्म्यै नमः । ॐ गुणलक्ष्म्यै नमः । ॐ गृहलक्ष्म्यै नमः । ४५ ॐ गोलक्ष्म्यै नमः । ॐ गोत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ गोदालक्ष्म्यै नमः । ॐ गोपलक्ष्म्यै नमः । ॐ गोविन्दलक्ष्म्यै नमः । ॐ चम्पकलक्ष्म्यै नमः । ॐ छन्दोलक्ष्म्यै नमः । ॐ जनकलक्ष्म्यै नमः । ॐ जयलक्ष्म्यै नमः । ५४ ॐ जीवलक्ष्म्यै नमः । ॐ तारकलक्ष्म्यै नमः । ॐ तीर्थलक्ष्म्यै नमः । ॐ तेजोलक्ष्म्यै नमः । ॐ दयालक्ष्म्यै नमः । ॐ दिव्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ दीपलक्ष्म्यै नमः । ॐ दुर्गालक्ष्म्यै नमः । ॐ द्वारलक्ष्म्यै नमः । ६३ ॐ धनलक्ष्म्यै नमः । ॐ धर्मलक्ष्म्यै नमः । ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ धीरलक्ष्म्यै नमः । ॐ धृतिलक्ष्म्यै नमः । ॐ धैर्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ ध्वजलक्ष्म्यै नमः । ॐ नागलक्ष्म्यै नमः । ॐ नादलक्ष्म्यै नमः । ७२ ॐ नाट्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ नित्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ पद्मलक्ष्म्यै नमः । ॐ पूर्णलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रजालक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रणवलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रसन्नलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रसादलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रीतिलक्ष्म्यै नमः । ८१ ॐ भद्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ भवनलक्ष्म्यै नमः । ॐ भव्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ भाग्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ भुवनलक्ष्म्यै नमः । ॐ भूतिलक्ष्म्यै नमः । ॐ भूरिलक्ष्म्यै नमः । ॐ भूषणलक्ष्म्यै नमः । ॐ भोग्यलक्ष्म्यै नमः । ९० ॐ मकारलक्ष्म्यै नमः । ॐ मन्त्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ महालक्ष्म्यै नमः । ॐ मान्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ मेधालक्ष्म्यै नमः । ॐ मोहनलक्ष्म्यै नमः । ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमः । ॐ यन्त्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ यज्ञलक्ष्म्यै नमः । ९९ ॐ यागलक्ष्म्यै नमः । ॐ योगलक्ष्म्यै नमः । ॐ योगक्षेमलक्ष्म्यै नमः । ॐ रङ्गलक्ष्म्यै नमः । ॐ रक्षालक्ष्म्यै नमः । ॐ राजलक्ष्म्यै नमः । ॐ लावण्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ लीलालक्ष्म्यै नमः । ॐ वरलक्ष्म्यै नमः । १०८ ॐ वरदलक्ष्म्यै नमः । ॐ वराहलक्ष्म्यै नमः । ॐ वसन्तलक्ष्म्यै नमः । ॐ वसुलक्ष्म्यै नमः । ॐ वारलक्ष्म्यै नमः । ॐ वाहनलक्ष्म्यै नमः । ॐ वित्तलक्ष्म्यै नमः । ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः । ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः । ११७ ॐ वेदलक्ष्म्यै नमः । ॐ वेत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ व्योमलक्ष्म्यै नमः । ॐ शान्तलक्ष्म्यै नमः । ॐ शुभलक्ष्म्यै नमः । ॐ शुभ्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ सत्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः । ॐ सिद्धलक्ष्म्यै नमः । १२६ ॐ सिद्धिलक्ष्म्यै नमः । ॐ सूत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ सौम्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ हेमाब्जलक्ष्म्यै नमः । ॐ हृदयलक्ष्म्यै नमः । ॐ क्षेत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ ज्ञानलक्ष्म्यै नमः । ॐ अकिञ्चिनाश्रयायै नमः । ॐ दृष्टादृष्टफलप्रदायै नमः । ॐ सर्वाभीष्टफलप्रदायै नमः । १३६ ॥ इति श्रीमहालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली सम्पूर्णा ॥

अक्षरमालिका: ज्ञान और धन का संगम

अक्षरमालिका नामावली (Aksharamalika Namavali) एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र स्तुति है। इसमें माँ लक्ष्मी की उपासना संस्कृत वर्णमाला के अक्षरों के माध्यम से की गई है। प्राचीन ऋषियों का मानना था कि 'शब्द ब्रह्म' है।
अक्षर और लक्ष्मी का रहस्य
जब हम अक्षरों ('अ' से 'क्ष' तक) को लक्ष्मी के नामों के रूप में उच्चारित करते हैं, तो हमारे शरीर के मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक के सभी वर्ण जागृत हो जाते हैं। इसमें हर नाम एक शक्ति है -
  • अकार-लक्ष्मी: सृष्टि की आदि, 'अ' वर्ण की शक्ति।
  • ओङ्कार-लक्ष्मी: प्रणव (ॐ) की मूल ध्वनि।
  • वेद-लक्ष्मी: समस्त ज्ञान की अधिष्ठात्री।

विनियोग विवरण

देवीश्री महालक्ष्मी (Sri Mahalakshmi)
स्वरूपमातृका शक्ति (Power of Alphabets)
वस्त्र रंगस्वर्ण/श्वेत (Golden/White)
मुख्य फलवाक सिद्धि, ज्ञान और धन (Speech, Knowledge & Wealth)
बीज मंत्रॐ (Om)

नामावली पाठ के लाभ

अक्षरमालिका का पाठ जीवन को दिव्य बनाता है:
  • वाक सिद्धि (Power of Speech): वाणी में प्रभाव और शुद्धता आती है। जो बोलते हैं, वह सत्य और सिद्ध होता है। यह वक्ताओं, लेखकों और छात्रों के लिए वरदान है।
  • सर्वांगीण उन्नति: इसमें धनलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, मोक्षलक्ष्मी—सभी रूपों का आह्वान है, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
  • शत्रु नाश: 'वीरलक्ष्मी' और 'जयलक्ष्मी' के नाम शत्रुओं और बाधाओं का नाश करते हैं।
  • आत्मज्ञान: यह पाठ केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि 'मोक्षलक्ष्मी' के रूप में आध्यात्मिक ज्ञान भी प्रदान करता है।

पूजा और पाठ विधि

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या समय। सरस्वती पूजा और नवरात्रि में इसका विशेष महत्व है।
  • अर्पण: श्वेत कमल या गेंदे के फूल। अक्षत (चावल) का प्रयोग विशेष शुभ है।
  • विशेष विधि (अक्षरार्चन): एक थाली में चावल (अक्षत) फैलाएं और अपनी तर्जनी उंगली से उस पर 'श्री' लिखें। फिर इस नामावली का पाठ करते हुए उस 'श्री' पर पुष्प अर्पित करें। इसे 'अक्षरार्चन' कहते हैं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अक्षरमालिका का क्या अर्थ है और यह क्यों खास है?
'अक्षरमालिका' (Garland of Alphabets) का अर्थ है वर्णमाला के अक्षरों (अ से क्ष तक) की माला। यह पाठ खास इसलिए है क्योंकि यह लक्ष्मी (धन) और सरस्वती (ज्ञान) का संगम है। यहाँ लक्ष्मी जी को 'शब्द-ब्रह्म' के रूप में पूजा जाता है।
2. क्या यह पाठ वाणी दोष (Speech Defects) दूर कर सकता है?
जी हाँ। चूंकि यह स्तोत्र हर संस्कृत अक्षर को जाग्रत करता है, इसका नियमित पाठ हकलाना, तुतलाना या वाणी की अस्पष्टता को ठीक कर 'वाक सिद्धि' (Power of Perfect Speech) प्रदान करता है।
3. इस नामावली में '-लक्ष्मी' शब्द बार-बार क्यों आता है?
आप देखेंगे कि 'अकार-लक्ष्मी', 'हृदय-लक्ष्मी', 'वेद-लक्ष्मी' जैसे नाम हैं। यह दर्शन कराता है कि संसार का हर कण (Atom) और हर गुण (Quality) अपने आप में एक 'लक्ष्मी' (Wealth/Asset) है। चाहे वह ज्ञान हो, धैर्य हो या अन्न हो।
4. क्या प्रतियोगी परीक्षाओं (Exams) के लिए यह लाभकारी है?
अत्यंत लाभकारी। 'विद्यालक्ष्मी', 'धीरलक्ष्मी' (धैर्य) और 'मेधालक्ष्मी' (बुद्धि) के नाम इसमें शामिल हैं, जो छात्रों को एकाग्रता (Concentration) और स्मरण शक्ति (Memory) देते हैं।
5. इसकी साधना विधि क्या है?
किसी भी शुक्रवार को श्वेत या लाल वस्त्र धारण करें। सामने अक्षतों (Rice Grains) की ढेरी पर 'श्री' लिखें और एक-एक नाम के साथ उस पर पुष्प या अक्षत चढ़ाएं। इसे 'अक्षरार्चन' कहते हैं।