श्री महावाराही श्रीपादुकार्चना नामावली
Sri Maha Varahi Padukarchana — 108 पादुका अर्चन नाम

॥ श्री महावाराही श्रीपादुकार्चना अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥
मूल मन्त्र:
ओं ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः ऐं ग्लौं ऐम् ।
(मूलं) वाराही श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) भद्राणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) भद्रा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वार्ताली श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) कोलवक्त्रा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जृम्भिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) स्तम्भिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) विश्वा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जम्भिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ९ ॥
(मूलं) मोहिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) शुभा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रुन्धिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वशिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रोममया श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) स्वरशक्ती श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) खड्गिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) शूलिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ १८ ॥
(मूलं) घोरा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) शङ्खिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) गदिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) चक्रिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वज्रिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) पाशिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) अङ्कुशिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) शिवा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) चापिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ २७ ॥
(मूलं) भवबन्धिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जयदा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जयदायिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) महोदरा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) महाभीमा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) भैरवी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) चारुवासिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) पद्मिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) बाणिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ३६ ॥
(मूलं) चोग्रा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मुसलिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) पराजिता श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जयप्रदा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जया श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) जैत्रिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रिपुहा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) भयवर्जिता श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) अभया श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ४५ ॥
(मूलं) मानिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) पोत्रिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) किरीटिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) दंष्ट्रिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रमा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) अक्षया श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) दामिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वामा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) बगला श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ५४ ॥
(मूलं) वासवी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वसू श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वैदेही श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वीरसूर्बाला श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वरदा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) विष्णुवल्लभा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वन्दिता श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वसुदा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वश्या श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ६३ ॥
(मूलं) व्यात्तास्या श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वञ्चिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) बला श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वसुन्धरा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वीतिहोत्रा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) वीतरागा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) विहायसी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मदोत्कटा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मन्युकरी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ७२ ॥
(मूलं) मनुरूपा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मनोजवा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मेदस्विनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मद्यरता श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मधुपा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मङ्गला श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) अमरा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) माया श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) माता श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ८१ ॥
(मूलं) मृडानी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) महिला श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मृती श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) महादेवी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) मोहहरी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) धरिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) धारिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) धेनुर्धरित्री श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) धावनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ९० ॥
(मूलं) ध्यानपरा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) धनधान्यधराप्रदा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) समृद्धा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) सुभुजा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रौद्री श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) राधा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रागा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रतिप्रिया श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रक्षिणी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ ९९ ॥
(मूलं) रञ्जिनी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) रणपण्डिता श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) सहस्राक्षा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) प्रतर्दना श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) सर्वज्ञा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) शाङ्करी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) सौरभी श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) सर्वसिद्धिप्रदा श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ।
(मूलं) श्रीमहावाराही श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः ॥ १०८ ॥
॥ इति परमहंस परिव्राजक श्रीश्रीश्री ज्ञानानन्देन्द्रसरस्वती विरचित महावाराही अष्टोत्तरशत श्रीपादुकार्चन नामावली सम्पूर्णा ॥
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श्री महावाराही श्रीपादुकार्चना अष्टोत्तरशतनामावली (Sri Maha Varahi Sri Padukarchana) श्रीविद्या और तंत्र साधना का अत्यंत गोपनीय रत्न है। यह परमहंस परिव्राजक श्री ज्ञानानन्देन्द्रसरस्वती द्वारा विरचित है। जहाँ सामान्य 108 नामावली में देवी के विग्रह (स्वरूप) की पूजा होती है, वहीं 'पादुकार्चना' में देवी के चरण-पादुकाओं (Divine Footprints) की आराधना होती है।
तंत्र शास्त्रों के अनुसार, गुरु और इष्ट देवता की शक्ति उनके चरणों में सर्वाधिक होती है। 'पादुकां पूजयामि' = मैं पादुकाओं की पूजा करता/करती हूँ। 'तर्पयामि' = मैं तृप्त करता/करती हूँ। यह पूजा + तर्पण का अद्वितीय संयोग है — एक ही मन्त्र में दोनों क्रियाएँ। ब्रह्मांड पुराण के ललितोपाख्यान में माँ वाराही को 'दंडनाथ' (प्रधान सेनापति) कहा गया — यह नामावली उनकी सेनापति शक्ति के चरणों की अर्चना है।
108 नामों में देवी के उग्र और सौम्य दोनों रूप समाहित हैं। स्तम्भिनी, जम्भिनी, मोहिनी, रुन्धिनी (नाम 1-12) — ये वाराही मूल मन्त्र के पंचाक्षर शक्तियाँ हैं। खड्गिनी, शूलिनी, शङ्खिनी, गदिनी, चक्रिणी, वज्रिणी (18-24) — छह अस्त्र-शस्त्र। जयदा, जयदायिनी, जयप्रदा, जया, जैत्रिणी (29-42) — पाँच विजय नाम। वसुन्धरा, धनधान्यधराप्रदा, समृद्धा (67-93) — भूमि-सम्पत्ति। अंतिम नाम 'श्रीमहावाराही' (108) — सम्पूर्ण शक्ति।
विशेष: प्रत्येक नाम में '(मूलं)' लिखा है — इसका अर्थ है कि यहाँ वाराही का बीज मन्त्र "ओं ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः ऐं ग्लौं ऐम्" बोलना है। बीज मन्त्र सहित प्रयोग हेतु गुरु दीक्षा अनिवार्य। बिना दीक्षा के केवल नामों का (मूलं छोड़कर) जप/अर्चन कर सकते हैं।
पादुकार्चना के 5 विशिष्ट लाभ
1. शत्रुनाश और कोर्ट विजय: 'वार्ताली' (वाणी स्तम्भन), 'रिपुहा' (शत्रु-हन्ता), 'जैत्रिणी' (विजय), 'रणपण्डिता' (युद्ध-विशारद) — कोर्ट केस, भूमि विवाद और शत्रुओं पर निश्चित विजय।
2. तंत्र-बाधा मुक्ति और रक्षा: 'जम्भिनी, मोहिनी, रुन्धिनी, स्तम्भिनी' — चार शक्तियाँ दुष्ट तंत्र प्रयोग, काला जादू, बुरी नज़र को तुरंत काटती हैं। वाराही कवच के समान रक्षा।
3. भूमि-सम्पत्ति और धन: 'वसुन्धरा' (पृथ्वी), 'धनधान्यधराप्रदा' (धन-धान्य), 'समृद्धा' (समृद्धि), 'वसुदा' (धन देने वाली) — भूमि, अचल सम्पत्ति और आर्थिक समृद्धि।
4. कुंडलिनी जागरण: ज्ञानानन्देन्द्रसरस्वती द्वारा रचित — मूलाधार चक्र (वाराही का वास) और आज्ञा चक्र को जागृत करती है। आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-ज्ञान।
5. शीघ्र फल — चरण शरण: पादुकार्चना में समर्पण (Surrender) का भाव अन्य पूजा से अधिक — चरणों में शरण = शीघ्र अनुग्रह। गुरु/देवता का अनुग्रह चरणों से ही शिष्य में प्रवाहित होता है।
क्रमबद्ध अर्चन विधि — 108 पादुका पूजा
समय: रात्रि (मध्यरात्रि/निशीथ काल विशेष)। पंचमी, अष्टमी, अमावस्या।
आसन और दिशा: लाल ऊनी आसन, मुख उत्तर (धन/विजय)। लाल वस्त्र।
सामग्री: कुमकुम, लाल चंदन, अक्षत (लाल रंगे चावल) या 108 लाल पुष्प। वाराही यन्त्र/चित्र या गुरु पादुका।
प्रयोग: प्रत्येक नाम बोलकर पुष्प/कुमकुम अर्पित करें। बीज मन्त्र सहित = "ओं ऐं ग्लौं ऐम् ... [नाम] पादुकां पूजयामि तर्पयामि नमः"।
भोग: गुड़, उरद दाल बड़ा, अनार, कंद-मूल, भैंस का दूध।
संकल्प: सिद्धि हेतु 11, 21 या 41 दिन। कोर्ट केस/संकट में — संकट टलने तक नित्य।
दीक्षा: बीज मन्त्र (ऐं ग्लौं) सहित = गुरु दीक्षा अनिवार्य। बिना दीक्षा के = केवल नाम-जप/अर्चन (मूलं छोड़कर) सम्भव। महिलाएं भी कर सकती हैं (मासिक धर्म में 5-7 दिन विराम)।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. पादुकार्चना क्या है?
देवी के विग्रह नहीं — चरण-पादुकाओं (Divine Footprints) की पूजा। चरणों में सर्वाधिक शक्ति — समर्पण + अनुग्रह का मार्ग।
2. बिना दीक्षा के कर सकते हैं?
बीज मन्त्र (ऐं ग्लौं) सहित = गुरु दीक्षा अनिवार्य। केवल नाम-जप/अर्चन (मूलं छोड़कर) = बिना दीक्षा सम्भव।
3. 'तर्पयामि' का अर्थ?
"मैं तृप्त करता/करती हूँ"। देवी को तृप्त करना = देवी साधक की मनोकामना तृप्त (पूर्ण) करती हैं।
4. सामान्य 108 नामावली से अंतर?
108 नामावली = सीधे नाम ("ॐ ... नमः")। पादुकार्चना = चरण-पादुका पूजा + तर्पण — अधिक गोपनीय, शीघ्र फलदायी।
5. '(मूलं)' का अर्थ?
मूल मन्त्र = "ओं ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः ऐं ग्लौं ऐम्"। प्रत्येक नाम से पहले यह बीज मन्त्र बोलना है (दीक्षित साधक)।
6. पाठ कब करें?
रात्रि (मध्यरात्रि/निशीथ काल)। पंचमी, अष्टमी, अमावस्या। उत्तर दिशा, लाल आसन।
7. कितने दिन करें?
सिद्धि: 11/21/41 दिन संकल्प। कोर्ट केस/संकट = संकट टलने तक नित्य।
8. क्या महिलाएं कर सकती हैं?
हाँ! वाराही शक्ति स्वरूपा — साधिकाओं पर विशेष कृपा। मासिक धर्म में 5-7 दिन विराम।
9. भोग (नैवेद्य)?
गुड़, उरद दाल बड़ा, अनार, कंद-मूल (शकरकंद), भैंस का दूध।
10. रचयिता कौन?
परमहंस परिव्राजक श्रीश्रीश्री ज्ञानानन्देन्द्रसरस्वती — श्रीविद्या परंपरा के महान आचार्य।